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    Home » Mantras » Sidh Kunjika Mantra – दुर्गा सिद्ध कुंजिका स्तोत्र हिंदी में
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    Sidh Kunjika Mantra – दुर्गा सिद्ध कुंजिका स्तोत्र हिंदी में

    RaviBy RaviFebruary 26, 2026
    sidh kunjika mantra

    Sidh Kunjika Mantra माँ दुर्गा की असीम कृपा का द्वार है। जब हृदय भक्ति से भर जाता है और जीवन में शांति की प्यास जागती है, तब यह पवित्र स्तोत्र आत्मा को माँ के चरणों में समर्पित कर देता है। यह कुंजिका उन भक्तों के लिए है जो चंडी पाठ की महिमा को पूर्ण रूप से अनुभव करना चाहते हैं।

    विवरण जानकारी
    मंत्र नाम Sidh Kunjika Mantra
    स्रोत ग्रंथ रुद्रयामल तंत्र (गौरी तंत्र)
    देवता माँ दुर्गा
    मंत्र प्रकार स्तुति एवं कुंजिका स्तोत्र
    उद्देश्य आत्मिक शुद्धि एवं भक्ति वृद्धि
    जप का समय प्रातःकाल या संध्याकाल, पूजा के बाद

    अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख केवल शास्त्रीय जानकारी, भक्ति भाव और आध्यात्मिक मार्गदर्शन के लिए लिखा गया है। sidh kunjika mantra का जप पूर्णतः व्यक्तिगत श्रद्धा और विश्वास पर आधारित है। किसी भी स्वास्थ्य, चिकित्सा, कानूनी या अन्य महत्वपूर्ण निर्णय के लिए योग्य चिकित्सक, वकील या संबंधित विशेषज्ञ से अवश्य परामर्श लें। लेख में दी गई जानकारी का उपयोग अपनी विवेक-बुद्धि और समझदारी से करें।

    Table of Contents

    Toggle
    • Sidh Kunjika Mantra शास्त्रीय पृष्ठभूमि
    • Sidh Kunjika Mantra (Sanskrit)
    • Sidh Kunjika Mantra in English
    • Sidh Kunjika Mantra का महत्व
    • Sidh Kunjika Mantra के लाभ
    • कैसे और कब करें Sidh Kunjika Mantra का जप
    • Sidh Kunjika Mantra: सामान्य भूलें और सुधार
    • निष्कर्ष (Conclusion)
    • ? FAQs About Sidh Kunjika Mantra
      • 1. Sidh kunjika mantra का अर्थ क्या है?
      • 2. Sidh kunjika mantra वेदों से है या तंत्र से?
      • 3. Sidh kunjika mantra को कब और कैसे जपना चाहिए?
      • 4. Sidh kunjika mantra कितनी बार जपना चाहिए?
      • 5. क्या beginners बिना दीक्षा के sidh kunjika mantra जप सकते हैं?
      • 6. Sidh kunjika mantra benefits क्या हैं?
      • 7. क्या Sidh kunjika mantra को Durga saptashati के बिना जप सकते हैं?
      • 8. क्या महिलाओं को मासिक धर्म में Sidh kunjika mantra जपना चाहिए?

    Sidh Kunjika Mantra शास्त्रीय पृष्ठभूमि

    Durga Sidh Kunjika Mantra रुद्रयामल तंत्र के गौरी तंत्र भाग में शिव-पार्वती संवाद के रूप में वर्णित है। भगवान शिव ने स्वयं माँ पार्वती को यह स्तोत्र बताया। यह दुर्गा सप्तशती (देवी महात्म्य) का सार है। घर-घर में और मंदिरों में भक्त इसे चंडी पाठ से पहले जपते हैं। Sidh Kunjika Mantra in Hindi में इसका सरल पाठ उपलब्ध होने से आज भी लाखों साधक नियमित रूप से इसका जप करते हैं।

    Sidh Kunjika Mantra (Sanskrit)

    ॥ सिद्धकुञ्जिकास्तोत्रम् ॥

    शिव उवाच

    शृणु देवि प्रवक्ष्यामि, कुञ्जिकास्तोत्रमुत्तमम्।
    येन मन्त्रप्रभावेण चण्डीजापः शुभो भवेत्॥१॥

    भावार्थ: शिवजी बोले – हे देवि! सुनो, मैं तुम्हें यह उत्तम कुंजिका स्तोत्र बता रहा हूँ। इसके मंत्र के प्रभाव से चंडी (दुर्गा सप्तशती) का जप शुभ और सफल हो जाता है।

    न कवचं नार्गलास्तोत्रं कीलकं न रहस्यकम्।
    न सूक्तं नापि ध्यानं च न न्यासो न च वार्चनम्॥२॥

    भावार्थ: इसमें न कवच की जरूरत है, न अर्गला स्तोत्र की, न कीलक की, न रहस्य की। न सूक्त, न ध्यान, न न्यास और न ही पूजन की आवश्यकता है।

    कुञ्जिकापाठमात्रेण दुर्गापाठफलं लभेत्।
    अति गुह्यतरं देवि देवानामपि दुर्लभम्॥३॥

    भावार्थ: केवल कुंजिका स्तोत्र का पाठ करने मात्र से दुर्गा सप्तशती के पूर्ण पाठ का फल प्राप्त हो जाता है। हे देवि, यह अत्यंत गुप्त है, देवताओं के लिए भी दुर्लभ।

    गोपनीयं प्रयत्नेन स्वयोनिरिव पार्वति।
    मारणं मोहनं वश्यं स्तम्भनोच्चाटनादिकम्।
    पाठमात्रेण संसिद्ध्येत् कुञ्जिकास्तोत्रमुत्तमम्॥४॥

    भावार्थ: हे पार्वती! इसे अपनी योनि (गोपनीय अंग) की तरह बड़े प्रयत्न से गुप्त रखना चाहिए। यह उत्तम कुंजिका स्तोत्र केवल पाठ से ही मारण, मोहन, वश्य, स्तंभन, उच्चाटन आदि सभी सिद्धियाँ प्रदान कर देता है।

    ॥ अथ मन्त्रः ॥

    ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥

    ॐ ग्लौं हुं क्लीं जूं सः ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल
    ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा॥

    भावार्थ (मंत्र): यह नवाक्षरी बीज मंत्र है – ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। अर्थ: चामुण्डा माँ को नमस्कार, जो चंड-मुंड का नाश करती हैं। “विच्चे” अभय मुद्रा है। ज्वालय आदि से मंत्र में ज्वाला (भक्ति की अग्नि) प्रज्वलित करने की प्रार्थना है। फट् से नकारात्मकता का नाश।

    ॥ इति मन्त्रः ॥

    नमस्ते रुद्ररूपिण्यै नमस्ते मधुमर्दिनि।
    नमः कैटभहारिण्यै नमस्ते महिषार्दिनि॥१॥

    भावार्थ: रुद्र रूप वाली माँ को नमस्कार, मधु असुर का मर्दन करने वाली को नमस्कार, कैटभ का हरण करने वाली को, महिषासुर को पीड़ा देने वाली को नमस्कार।

    नमस्ते शुम्भहन्त्र्यै च निशुम्भासुरघातिनि।
    जाग्रतं हि महादेवि जपं सिद्धं कुरुष्व मे॥२॥

    भावार्थ: शुम्भ का संहार करने वाली और निशुम्भ असुर का घात करने वाली को नमस्कार। हे महादेवि! जागो और मेरे इस जप को सिद्ध कर दो।

    ऐंकारी सृष्टिरूपायै ह्रींकारी प्रतिपालिका।
    क्लींकारी कामरूपिण्यै बीजरूपे नमोऽस्तु ते॥३॥

    भावार्थ: ऐंकार सृष्टि रूप हैं, ह्रींकार पालन करने वाली हैं, क्लींकार काम रूपिणी हैं। हे बीज रूप वाली माँ, तुम्हें नमस्कार।

    चामुण्डा चण्डघाती च यैकारी वरदायिनी।
    विच्चे चाभयदा नित्यं नमस्ते मन्त्ररूपिणि॥४॥

    भावार्थ: चामुण्डा चंड का घात करने वाली हैं, यैकार वर देने वाली हैं, विच्चे सदा अभय देने वाली हैं। हे मंत्र स्वरूपिणी माँ, नमस्कार।

    धां धीं धूं धूर्जटेः पत्नी वां वीं वूं वागधीश्वरी।
    क्रां क्रीं क्रूं कालिका देवि शां शीं शूं मे शुभं कुरु॥५॥

    भावार्थ: धां-धीं-धूं शिव पत्नी, वां-वीं-वूं वाणी की अधीश्वरी, क्रां-क्रीं-क्रूं कालिका देवि – मेरे शुभ कार्य सिद्ध करो।

    हुं हुं हुंकाररूपिण्यै जं जं जं जम्भनादिनी।
    भ्रां भ्रीं भ्रूं भैरवी भद्रे भवान्यै ते नमो नमः॥६॥

    भावार्थ: हुंकार रूपिणी, जंभन करने वाली, भैरवी, भद्रा, भवानी को बार-बार नमस्कार।

    अं कं चं टं तं पं यं शं वीं दुं ऐं वीं हं क्षं।
    धिजाग्रं धिजाग्रं त्रोटय त्रोटय दीप्तं कुरु कुरु स्वाहा॥७॥

    भावार्थ: सभी बीज अक्षरों से जागरण – जागो, जागो, तोड़ो-तोड़ो (अज्ञान के बंधन), दीप्त (प्रकाशित) करो, स्वाहा।

    पां पीं पूं पार्वती पूर्णा खां खीं खूं खेचरी तथा।
    सां सीं सूं सप्तशती देव्या मन्त्रसिद्धिं कुरुष्व मे॥८॥

    भावार्थ: पार्वती पूर्ण रूप वाली, खेचरी, सप्तशती देवी – मेरी मंत्र सिद्धि कर दो।

    इदं तु कुञ्जिकास्तोत्रं मन्त्रजागर्तिहेतवे।
    अभक्ते नैव दातव्यं गोपितं रक्ष पार्वति॥

    भावार्थ: यह कुंजिका स्तोत्र मंत्र को जागृत करने के लिए है। अभक्त को कभी न दो, इसे गुप्त रखो हे पार्वती।

    यस्तु कुञ्जिकया देवि हीनां सप्तशतीं पठेत्।
    न तस्य जायते सिद्धिररण्ये रोदनं यथा॥

    भावार्थ: जो कुंजिका के बिना सप्तशती पढ़ता है, उसकी सिद्धि नहीं होती – जैसे जंगल में रोना व्यर्थ है।

    ॥ इति श्रीरुद्रयामले गौरीतन्त्रे शिवपार्वतीसंवादे कुञ्जिकास्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

    Sidh Kunjika Mantra in English

    ॥ Siddhakunjikastotram ॥

    Shiva uvacha

    Shrunu devi pravakshyami, kunjikastotramuttamam
    Yena mantraprabhavena chandijapah shubho bhavet ||1||

    Na kavacham nargalastotram kilakam na rahasyakam
    Na suktam napi dhyanam cha na nyaso na cha varchanam ||2||

    Kunjikapathamatrena durgapathaphalam labhet
    Ati guhyataram devi devanamapi durlabham ||3||

    Gopaniyam prayatnena svayoniriva parvati
    Maranam mohanam vashyam stambhanocchatanadikam
    Pathamatrena samsiddhyet kunjikastotramuttamam ||4||

    ॥ Atha mantrah ॥

    Om aim hrim klim chamundayai vicche ॥

    Om glaum hum klim jum sah jvalaya jvalaya jvala jvala prajvala prajvala
    Aim hrim klim chamundayai vicche jvala ham sam lam ksham phat svaha ॥

    ॥ Iti mantrah ॥

    Namaste rudrarupinyai namaste madhumardini
    Namah kaitabhaharinya namaste mahishardini ||1||

    Namaste shumbahantryai cha nishumbhasuraghatini
    Jagrataṃ hi mahadevi japam siddham kurushva me ||2||

    Aimkari srishtirupayai hrimkari pratipalika
    Klimkari kamarupinyai bijarupe namo’stu te ||3||

    Chamunda chandaghaticha yaikari varadayini
    Vicche chabhayada nityam namaste mantrarupini ||4||

    Dham dhim dhum dhurjateh patni vam vim vum vagadhishvari
    Kram krim krum kalika devi sham shim shum me shubham kuru ||5||

    Hum hum humkararupinyai jam jam jam jambhanadini
    Bhram bhrim bhram bhairavi bhadre bhavanyai te namo namah ||6||

    Am kam cham tam tam pam yam sham vim dum aim vim ham ksham
    Dhijagram dhijagram trotaya trotaya diptam kuru kuru svaha ||7||

    Pam pim pum parvati purna kham khim khum khechari tatha
    Sam sim sum saptashati devya mantrasiddhim kurushva me ||8||

    Idam tu kunjikastotram mantrajagarthetave
    Abhakte naiva datavyam gopitam raksha parvati ||

    Yastu kunjikaya devi hinam saptashatim pathet
    Na tasya jayate siddhiraranye rodanam yatha ||

    ॥ Iti shri rudrayamale gauritantre shivaparvatisamvade kunjikastotram sampurnam ॥

    Sidh Kunjika Mantra का महत्व

    Sidh Kunjika Mantra आत्मा की शुद्धि का सूक्ष्म मार्ग है। यह माँ दुर्गा के सभी रूपों (रुद्र, मधुमर्दिनी, कालिका, भैरवी) को एक साथ स्मरण कराता है। भक्ति में यह मन को स्थिर करता है और कर्म के बंधनों को धीरे-धीरे कमजोर करता है।

    Sidh Kunjika Mantra के लाभ

    • मानसिक शांति मिलती है
    • आत्मिक शुद्धि होती है
    • भावनात्मक संतुलन बना रहता है
    • भक्ति भाव में वृद्धि होती है
    • सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है

    कैसे और कब करें Sidh Kunjika Mantra का जप

    जप की विधि: सुबह ब्रह्म मुहूर्त में या शाम को पूजा के बाद सबसे अच्छा समय है। आसन पर पूर्व या उत्तर दिशा में मुख करके बैठें। 11, 21 या 108 बार जप करें। प्रत्येक शब्द को स्पष्ट उच्चारण के साथ बोलें। सांस पर ध्यान रखें और अर्थ को हृदय में धारण करें। जप से पहले संकल्प अवश्य लें – “माँ दुर्गा की भक्ति और शांति के लिए यह जप कर रहा हूँ।”

    Read Also: Kshama Prarthana Mantra

    Sidh Kunjika Mantra: सामान्य भूलें और सुधार

    केवल यंत्रवत जप करने से आत्मा नहीं जुड़ती – भाव रखें।

    अर्थ समझे बिना जप करने से गहराई नहीं आती – भावार्थ पढ़ें।

    गलत उच्चारण से प्रभाव कम होता है – धीरे-धीरे सही उच्चारण सीखें।

    तुरंत फल की अपेक्षा करने से निराशा होती है – नियमितता और श्रद्धा रखें।

    निष्कर्ष (Conclusion)

    हे भक्तजनों, Sidh Kunjika Mantra केवल शब्दों का समूह नहीं, बल्कि माँ दुर्गा के हृदय तक पहुँचने की एक जीवंत कुंजी है। यह स्तोत्र हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति में न तो बहुत सारे कर्मकांडों की आवश्यकता है, न ही जटिल नियमों की। बस शुद्ध मन, श्रद्धा और नियमित जप से माँ की कृपा स्वयं द्वार खोलकर प्रवेश कर जाती है।

    जब हम इस कुंजिका का जप करते हैं, तो मन के भीतर छिपे अंधकार धीरे-धीरे प्रकाश से भर जाते हैं। अहंकार की जंजीरें टूटती हैं, भय का स्थान शांति लेता है और जीवन का प्रत्येक क्षण माँ के चरणों में समर्पित हो जाता है।

    इसलिए, प्रिय साधक, न तो इसे बहुत कठिन समझें और न ही इसे हल्के में लें। बस प्रेम से, विश्वास से, रोज़ थोड़ा-थोड़ा जप करें। चाहे 11 बार हो, 21 बार हो या 108 बार मात्रा से अधिक महत्वपूर्ण है भाव।

    जय माँ चामुण्डा। जय माँ दुर्गा। जय सिद्ध कुंजिका।

    माँ की कृपा आप सभी पर सदैव बनी रहे। ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे नमः।

    हर हर महादेव। जय माँ भवानी।

    ? FAQs About Sidh Kunjika Mantra

    1. Sidh kunjika mantra का अर्थ क्या है?

    यह “सिद्ध कुंजिका” अर्थात पूर्ण सिद्धि की कुंजी है। यह स्तोत्र माँ दुर्गा की कृपा का द्वार खोलता है और दुर्गा सप्तशती के पूर्ण फल को सरलता से प्रदान करता है।

    2. Sidh kunjika mantra वेदों से है या तंत्र से?

    यह रुद्रयामल तंत्र (गौरी तंत्र) से लिया गया है, जहाँ शिव-पार्वती संवाद में वर्णित है। यह देवी महात्म्य (दुर्गा सप्तशती) का सार माना जाता है, वेदों से सीधे नहीं।

    3. Sidh kunjika mantra को कब और कैसे जपना चाहिए?

    सबसे उत्तम समय प्रातः ब्रह्म मुहूर्त या संध्याकाल में है, पूजा के बाद। स्नानादि कर आसन पर बैठकर, संकल्प लेकर जप करें। दैनिक रूप से नियमितता रखें।

    4. Sidh kunjika mantra कितनी बार जपना चाहिए?

    शुरुआत में 11 या 21 बार से आरंभ करें। भक्तजन अक्सर 108 बार जप करते हैं। मात्रा से अधिक भाव और नियमितता महत्वपूर्ण है।

    5. क्या beginners बिना दीक्षा के sidh kunjika mantra जप सकते हैं?

    हाँ, शुद्ध मन, श्रद्धा और भक्ति से कोई भी जप कर सकता है। स्तोत्र स्वयं कहता है कि यह भक्त के लिए है, अभक्त को न दें। दीक्षा की आवश्यकता नहीं बताई गई, पर सावधानीपूर्वक जप करें।

    6. Sidh kunjika mantra benefits क्या हैं?

    यह मानसिक शांति देता है, आत्मा की शुद्धि करता है, भक्ति बढ़ाता है, नकारात्मकता दूर करता है और दुर्गा सप्तशती के समान फल प्रदान करता है। नियमित जप से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    7. क्या Sidh kunjika mantra को Durga saptashati के बिना जप सकते हैं?

    हाँ, स्तोत्र स्वयं कहता है कि कुंजिका पाठ मात्र से दुर्गा पाठ का फल मिल जाता है। फिर भी, कई भक्त इसे चंडी पाठ से पहले जपते हैं ताकि पूर्ण महिमा प्राप्त हो।

    8. क्या महिलाओं को मासिक धर्म में Sidh kunjika mantra जपना चाहिए?

    शास्त्रों में सावधानी बरतने की सलाह है। ऐसे समय में जप न करें या बहुत शांत मन से केवल नाम जप करें। भक्ति भाव से निर्णय लें और गुरु या विद्वान से परामर्श लें।

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