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    Home » Mantras » Kshama Prarthana Mantra: आत्मिक शुद्धि और भक्ति मंत्र
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    Kshama Prarthana Mantra: आत्मिक शुद्धि और भक्ति मंत्र

    RaviBy RaviFebruary 25, 2026
    kshama prarthana mantra

    Kshama Prarthana Mantra से भगवान की क्षमा प्राप्त करें। यह भावपूर्ण प्रार्थना पूजा की कमियों को दूर करती है और आंतरिक शांति प्रदान करती है। देवी की कृपा से जीवन में सकारात्मकता लाएं।

    जीवन की आपाधापी में हम अक्सर अनजाने में गलतियां कर बैठते हैं, जिनसे मन में अपराधबोध उत्पन्न होता है। ऐसे में Kshama Prarthana Mantra का जाप हमें ईश्वर की क्षमा प्राप्त करने का मार्ग दिखाता है। यह मंत्र न केवल पूजा-पाठ में हुई भूलों के लिए प्रार्थना है, बल्कि आत्मिक शुद्धि और भावनात्मक संतुलन का माध्यम भी है। देवी की कृपा से यह प्रार्थना हमें दास भाव से जोड़ती है, जहां हम अपनी कमजोरियों को स्वीकार कर दिव्य अनुग्रह की याचना करते हैं।

    Table of Contents

    Toggle
      • पौराणिक पृष्ठभूमि: Kshama Prarthana Mantra
    • Kshama Prarthana Mantra in Hindi
    • Kshama Prarthana Mantra English
    • Kshama Prarthana Mantra Hindi Meaning
    • Kshama Prarthana Mantra आध्यात्मिक महत्व
    • Kshama Prarthana Mantra जाप के लाभ
    • Kshama Prarthana Mantra जाप की विधि
    • Kshama Prarthana Mantra जाप सामान्य भूलें
    • उपसंहार (Conclusion)
    • ? FAQs About Kshama Prarthana Mantra
      • 1. kshama prarthana mantra का अर्थ क्या है?
      • 2. क्या kshama prarthana mantra वेदों से लिया गया है?
      • 3. kshama prarthana mantra का जाप कब करना चाहिए?
      • 4. kshama prarthana mantra का जाप कितनी बार करना चाहिए?
      • 5. क्या शुरुआती लोग kshama prarthana mantra का जाप कर सकते हैं?
      • 6. kshama prarthana mantra के जाप के क्या लाभ हैं?
    विवरण जानकारी
    मंत्र नाम Kshama Prarthana Mantra
    स्रोत ग्रंथ दुर्गा सप्तशती
    देवता देवी (परमेश्वरी)
    मंत्र प्रकार प्रार्थना स्तोत्र
    उद्देश्य पूजा में हुई भूलों की क्षमा और आत्मिक शुद्धि
    जप का समय पूजा के बाद, सायंकाल या किसी भी भक्ति सत्र के अंत में

    अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख केवल भक्ति एवं आध्यात्मिक जानकारी के लिए है। क्षमा प्रार्थना मंत्र दुर्गा सप्तशती पर आधारित है। यह चिकित्सा, मनोवैज्ञानिक या कानूनी सलाह नहीं है। मंत्र जाप व्यक्तिगत श्रद्धा पर निर्भर है। स्वास्थ्य संबंधी समस्या हो तो योग्य चिकित्सक से परामर्श लें। आध्यात्मिक साधना से पूर्व गुरु या विद्वान से मार्गदर्शन उचित है। लाभ व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित हैं, परिणाम भिन्न हो सकते हैं।

    पौराणिक पृष्ठभूमि: Kshama Prarthana Mantra

    यह Kshama Prarthana दुर्गा सप्तशती से लिया गया है, जो मार्कण्डेय पुराण का हिस्सा है। परंपरागत रूप से इसका उपयोग पूजा या अनुष्ठान के समापन पर किया जाता है, जहां भक्त अपनी अज्ञानता या भूलों के लिए देवी से क्षमा मांगते हैं। मंदिरों में नवरात्रि या दुर्गा पूजा के दौरान इसकी विशेष महत्वता है, जबकि घरेलू परंपराओं में इसे दैनिक आराधना का हिस्सा बनाया जाता है। Kshama Prarthana Mantra in Hindi के रूप में यह देवनागरी में उपलब्ध है, जो भक्तों को आसानी से जाप करने की सुविधा देता है। इसी प्रकार, Kshama Prarthana Mantra in English Transliteration से विदेशी भक्त भी इसका लाभ उठा सकते हैं। यह प्रार्थना वैष्णव और शाक्त परंपराओं में समान रूप से सम्मानित है, जो भक्ति के सार को दर्शाती है।

    Kshama Prarthana Mantra in Hindi

    ॥ क्षमा-प्रार्थना ॥

    अपराधसहस्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया।
    दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वरि॥1॥

    आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्।
    पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वरि॥2॥

    मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वरि।
    यत्पूजितं मया देवि परिपूर्णं तदस्तु मे॥3॥

    अपराधशतं कृत्वा जगदम्बेति चोच्चरेत्।
    यां गतिं समवाप्नोति न तां ब्रह्मादयः सुराः॥4॥

    सापराधोऽस्मि शरणं प्राप्तस्त्वां जगदम्बिके।
    इदानीमनुकम्प्योऽहं यथेच्छसि तथा कुरु॥5॥

    अज्ञानाद्विस्मृतेर्भ्रान्त्या यन्न्यूनमधिकं कृतम्।
    तत्सर्वं क्षम्यतां देवि प्रसीद परमेश्वरि॥6॥

    कामेश्वरि जगन्मातः सच्चिदानन्दविग्रहे।
    गृहाणार्चामिमां प्रीत्या पापं हर जगन्मये॥7॥

    गुह्यातिगुह्यगोप्त्री त्वं गृहाणास्मत्कृतं जपम्।
    सिद्धिर्भवतु मे देवि त्वत्प्रसादात्सुरेश्वरि॥8॥

    ॥ श्रीदुर्गार्पणमस्तु ॥

    क्षमा प्रार्थना मंत्र

    Kshama Prarthana Mantra English

    Aparadhasahasrani kriyante harnisham maya
    Daso yam iti mam matva kshamasva parameshvari ||1||

    Avahanam na janami na janami visarjanam
    Pujam chaiva na janami kshamyatam parameshvari ||2||

    Mantrahinam kriyahinam bhaktihinam sureshvari
    Yat pujitam maya devi paripurnam tad astu me ||3||

    Aparadhashatam kritva jagadambeti chochcharet
    Yam gatim samavapnoti na tam brahmadayah surah ||4||

    Saparadho smi sharanam praptas tvam jagadambike
    Idanim anukampyo ham yathechchhasi tatha kuru ||5||

    Ajnanad vismriter bhrantya yan nyunam adhikam kritam
    Tat sarvam kshamyatam devi prasida parameshvari ||6||

    Kameshvari jaganmata sachchidananda vigrahe
    Grihanarcham imam pritya papam hara jaganmaye ||7||

    Guhyatiguhyagoptri tvam grihanasmatkritam japam
    Siddhir bhavatu me devi tvatprasadat sureshvari ||8||

    ॥ Shri Durgarpanamastu ॥

    Kshama Prarthana Mantra Hindi Meaning

    हे परमेश्वरी, मैं दिन-रात हजारों अपराध करता हूं।

    मुझे अपना दास मानकर क्षमा करो॥1॥

    मैं आवाहन नहीं जानता, विसर्जन नहीं जानता।

    पूजा भी नहीं जानता, हे परमेश्वरी, क्षमा करो॥2॥

    मंत्ररहित, क्रियारहित, भक्तिरहित, हे सुरेश्वरी।

    जो पूजा मैंने की है, हे देवि, वह पूर्ण हो जाए॥3॥

    सौ अपराध करके भी जो जगदंबा कहकर पुकारता है,

    वह गति प्राप्त करता है जो ब्रह्मा आदि देवताओं को भी नहीं मिलती॥4॥

    मैं अपराधी हूं, हे जगदंबिके, तुम्हारी शरण में आया हूं।

    अब मैं दया के योग्य हूं, जैसी इच्छा हो वैसा करो॥5॥

    अज्ञान से, विस्मृति से, भ्रम से जो न्यून या अधिक किया गया है,

    वह सब क्षमा करो, हे देवि, प्रसन्न होओ परमेश्वरी॥6॥

    हे कामेश्वरी, जगन्माता, सच्चिदानंद स्वरूपिणी।

    इस अर्चना को प्रेम से ग्रहण करो, हे जगन्मयी, पाप हर लो॥7॥

    हे गुह्य से भी अति गुह्य (सबसे गुप्त रहस्यों की रक्षक) माँ,

    तू हमारा किया हुआ यह जप ग्रहण कर ले॥8॥

    हे देवि, हे सुरेश्वरि, तेरी कृपा से मेरी सिद्धि हो जाए।

    Kshama Prarthana Mantra आध्यात्मिक महत्व

    क्षमा प्रार्थना मंत्र का आध्यात्मिक महत्व अत्यंत गहन और हृदयस्पर्शी है। यह मंत्र हमें यह स्मरण कराता है कि मनुष्य स्वभाव से अपूर्ण है हम अनजाने में, अज्ञान से, भ्रम से या विस्मृति से अनगिनत अपराध (भूलें) कर बैठते हैं। पूजा-अर्चना के दौरान भी मंत्र उच्चारण में त्रुटि, क्रिया में कमी, भक्ति की कमी या ध्यान की भटकन हो सकती है। इस मंत्र के माध्यम से हम ईश्वरीय दया के समक्ष पूर्ण समर्पण और विनम्रता व्यक्त करते हैं।

    यह प्रार्थना अहंकार का त्याग सिखाती है हम कहते हैं “दासोऽयमिति मां मत्वा” अर्थात् मुझे अपना दास मानकर क्षमा करो। यह दास भाव भक्ति का मूल है, जहां हम अपनी सीमाओं को स्वीकार कर देवी की असीम कृपा पर निर्भर होते हैं। आध्यात्मिक रूप से यह आत्म-परीक्षण का साधन है अपराधों की स्वीकृति से मन की गहराइयों से पाप-भार हल्का होता है, हृदय निर्मल बनता है और दिव्य शक्ति से जुड़ाव बढ़ता है।

    यह मंत्र कर्म बंधन को शिथिल करने में सहायक है, क्योंकि क्षमा प्राप्ति से पूर्वकृत पापों का प्रभाव कम होता है। भक्ति मनोविज्ञान में यह हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति पूर्णता में नहीं, बल्कि विनम्रता और शरणागति में है। देवी की कृपा से अपूर्ण पूजा भी पूर्ण हो जाती है, और साधक को आंतरिक शांति, आत्मविश्वास तथा निरंतर भक्ति का मार्ग मिलता है। यह प्रार्थना न केवल पूजा के अंत का हिस्सा है, बल्कि दैनिक जीवन में अपराधबोध से मुक्ति का शक्तिशाली माध्यम भी है।

    Read Also: Karagre Vasate Lakshmi Mantra

    Kshama Prarthana Mantra जाप के लाभ

    क्षमा प्रार्थना मंत्र का नियमित जाप कई स्तरों पर लाभ प्रदान करता है। ये लाभ भावनात्मक, मानसिक और आध्यात्मिक होते हैं:

    • मानसिक शांति: अपराधबोध, चिंता और तनाव से मुक्ति मिलती है। पूजा में हुई भूलों का डर दूर होता है, मन हल्का और स्थिर बनता है।
    • आत्मिक शुद्धि: अनजाने पापों और दोषों का प्रायश्चित होता है। हृदय की अशुद्धियाँ धुलती हैं, आत्मा पवित्र होती है और दिव्य ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है।
    • भावनात्मक संतुलन: क्रोध, ईर्ष्या या नकारात्मक भावनाओं का प्रभाव कम होता है। क्षमा की भावना से हम स्वयं दूसरों को क्षमा करने योग्य बनते हैं, जिससे रिश्तों में मधुरता आती है।
    • भक्ति में वृद्धि: दास भाव मजबूत होता है, ईश्वर से गहरा जुड़ाव महसूस होता है। भक्ति अधिक निष्ठापूर्ण और प्रेमपूर्ण बनती है।
    • सकारात्मक ऊर्जा: जीवन में दिव्य प्रकाश का संचार होता है। नकारात्मक कर्मों का प्रभाव कम होने से सकारात्मक घटनाएँ बढ़ती हैं, और मन में आशा व विश्वास का संचार होता है।

    नियमित जाप से साधक को यह अनुभव होता है कि देवी स्वयं उनकी रक्षा कर रही हैं, और अपूर्ण प्रयास भी स्वीकार हो रहे हैं।

    Kshama Prarthana Mantra जाप की विधि

    क्षमा प्रार्थना मंत्र का जाप सरल लेकिन भावपूर्ण होना चाहिए। इसे सही विधि से करने पर अधिक फल प्राप्त होता है:

    • सर्वोत्तम समय: पूजा-अर्चना के ठीक अंत में (समापन पर), सायंकाल में, या किसी भी भक्ति सत्र के समापन पर। नवरात्रि, दुर्गा पूजा या दैनिक पूजा के बाद विशेष रूप से प्रभावी।
    • जाप संख्या: शुरुआत में 11 या 21 बार। गहन साधना के लिए 108 बार (एक माला)। अपनी क्षमता अनुसार बढ़ा सकते हैं, लेकिन निरंतरता महत्वपूर्ण है।
    • आसन और मुद्रा: पद्मासन, सुखासन या वज्रासन में पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। रीढ़ सीधी रखें, आँखें बंद या देवी की मूर्ति/चित्र पर केंद्रित।
    • श्वास और ध्यान: गहरी, धीमी श्वास लें। प्रत्येक श्लोक के साथ श्वास को नियंत्रित करें। प्रत्येक शब्द के अर्थ को हृदय से महसूस करें अपराध स्वीकार करें, दास भाव लाएँ और क्षमा की याचना करें।
    • उच्चारण: स्पष्ट और धीमे उच्चारण करें। ‘क्षमस्व’, ‘परमेश्वरि’, ‘क्षम्यतां’ जैसे शब्दों में संस्कृत ध्वनियाँ सही रखें। यदि उच्चारण में संदेह हो तो पहले सुनकर अभ्यास करें।
    • संकल्प: जाप से पहले मन में संकल्प लें: “यह जाप मेरी भूलों की क्षमा और आत्मिक शुद्धि के लिए है।” जाप के बाद कुछ क्षण मौन में बैठकर देवी की कृपा का अनुभव करें।
    • अतिरिक्त: यदि संभव हो तो माला (रुद्राक्ष या स्फटिक) का उपयोग करें। जाप के दौरान मन में कोई अन्य विचार न आने दें।

    Kshama Prarthana Mantra जाप सामान्य भूलें

    जाप करते समय कई भक्त अनजाने में कुछ सामान्य भूलें कर बैठते हैं, जिन्हें सुधारने से जाप अधिक प्रभावी बनता है। इन भूलों को कोमलता से समझें और सुधारें:

    • यांत्रिक जाप: केवल शब्द दोहराना, बिना भाव के। सुधार: प्रत्येक श्लोक के अर्थ पर ध्यान दें, अपराधों को याद कर हृदय से याचना करें।
    • ध्यान का भटकना: जाप के बीच विचार आना। सुधार: धीरे-धीरे जाप करें, श्वास पर फोकस रखें। भटकने पर धीरे से मन वापस लाएँ यह सामान्य है, दबाव न लें।
    • उच्चारण में त्रुटि: शब्द गलत बोलना, जैसे ‘क्षमस्व’ को ‘क्षमा स्व’ कहना। सुधार: मूल संस्कृत सुनकर अभ्यास करें। शुद्ध उच्चारण से कंपन सही होता है।
    • तत्काल फल की अपेक्षा: जाप के तुरंत बाद चमत्कार की उम्मीद करना। सुधार: धैर्य रखें। क्षमा का फल धीरे-धीरे प्रकट होता है—निरंतरता से लाभ मिलता है।
    • भाव की कमी: केवल रस्म निभाना। सुधार: हृदय से दास भाव लाएँ, अपनी भूलों को स्वीकार करें। भाव ही मंत्र को शक्ति देता है।

    इन भूलों से बचकर जाप को सच्ची भक्ति में बदलें, तो देवी की कृपा अवश्य प्राप्त होगी।

    उपसंहार (Conclusion)

    Kshama Prarthana Mantra हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति पूर्णता में नहीं, अपितु विनम्रता, समर्पण और शरणागति में निहित है। जब हम अपनी भूलों को स्वीकार कर देवी के चरणों में क्षमा मांगते हैं, तो हृदय का बोझ हल्का होता है, मन शांत होता है और दिव्य कृपा स्वतः प्रवाहित होने लगती है। यह मंत्र न केवल पूजा के अंत का एक सुंदर समापन है, बल्कि दैनिक जीवन में अपराधबोध से मुक्ति का सरल और शक्तिशाली साधन भी है।

    नियमित भावपूर्ण जाप से आपका आंतरिक प्रकाश बढ़ेगा, भक्ति गहरी होगी और जीवन में शांति व सकारात्मकता का विस्तार होगा। हे माँ परमेश्वरी, हमें अपनी अपूर्णता में भी स्वीकार करने की कृपा प्रदान करें।

    जय माँ दुर्गा। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

    ? FAQs About Kshama Prarthana Mantra

    1. kshama prarthana mantra का अर्थ क्या है?

    यह मंत्र पूजा में हुई भूलों के लिए देवी से क्षमा मांगने की प्रार्थना है, जो अपराधों की स्वीकृति और दैवीय दया की याचना करता है।

    2. क्या kshama prarthana mantra वेदों से लिया गया है?

    नहीं, यह दुर्गा सप्तशती से लिया गया है, जो मार्कण्डेय पुराण का हिस्सा है।

    3. kshama prarthana mantra का जाप कब करना चाहिए?

    पूजा के समापन पर, सायंकाल में या किसी भी भक्ति सत्र के अंत में जब भक्ति भाव प्रबल हो।

    4. kshama prarthana mantra का जाप कितनी बार करना चाहिए?

    11, 21 या 108 बार जाप करें, अपनी क्षमता और समय के अनुसार।

    5. क्या शुरुआती लोग kshama prarthana mantra का जाप कर सकते हैं?

    हां, बिल्कुल। यह सरल है और भाव प्रधान है। शुद्ध उच्चारण के साथ शुरू करें।

    6. kshama prarthana mantra के जाप के क्या लाभ हैं?

    यह मानसिक शांति, आत्मिक शुद्धि, भावनात्मक संतुलन, भक्ति में वृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।

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