शिर्डी के साईं बाबा, जो सभी धर्मों के परम दयालु सद्गुरु हैं, उनके भक्तों के हृदय में हमेशा बसते हैं। साईं कष्ट निवारण मंत्र (Sai Kasht Nivaran Mantra) एक ऐसा ही हृदयस्पर्शी प्रार्थना है, जो जीवन के काले बादलों को दूर कर शांति और आशीर्वाद लाता है।
यह मंत्र तब जपा जाता है जब जीवन में गहरे दुख, आर्थिक तंगी, स्वास्थ्य समस्याएं, पारिवारिक क्लेश या कोई भी भारी संकट आ जाए। श्रद्धा से साईं कष्ट निवारण मंत्र का जाप करने वाले भक्त साईं बाबा की असीम कृपा से चमत्कारिक राहत पाते हैं। लाखों लोग भारत और विश्व भर में इसे रोजाना पढ़ते हैं और अपने जीवन में प्रकाश, शांति एवं सुरक्षा अनुभव करते हैं।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| मंत्र नाम | साईं कष्ट निवारण मंत्र (Sai Kasht Nivaran Mantra) |
| स्रोत / ग्रंथ | भक्तजन द्वारा रचित आधुनिक devotional प्रार्थना (शिर्डी साईं बाबा के प्रति समर्पित; कोई प्राचीन शास्त्र जैसे वेद, गीता या पुराण से नहीं जुड़ा) |
| देवता | शिर्डी साईं बाबा (सद्गुरु साईं नाथ महाराज; सभी धर्मों के एक रूप में पूजनीय) |
| मंत्र प्रकार | भावपूर्ण प्रार्थना / कष्ट निवारण स्तोत्र / devotional hymn |
| उद्देश्य | जीवन के सभी कष्ट, संकट, दुख, रोग, ग्रह दोष, पाप और नकारात्मकता दूर करना; साईं बाबा की कृपा से शांति, सुरक्षा, समृद्धि और मुक्ति प्राप्त करना |
| जप का समय | किसी भी समय (सर्वोत्तम: सुबह स्नान के बाद या शाम को); विशेष रूप से गुरुवार को; संकट काल में रोजाना; कई भक्त गुरुवार से 11 या 21 दिनों का अनुष्ठान करते हैं (1-3 बार पूर्ण पाठ) |
Sai Kasht Nivaran Mantra in Hindi (साईं कष्ट निवारण मंत्र)
शिर्डी साईं बाबा कष्ट निवारण मंत्र
सदगुरू साईं नाथ महाराज की जय
कष्टों की काली छाया दुखदायी है, जीवन में घोर उदासी लायी है।
संकट को तालो साईं दुहाई है, तेरे सिवा न कोई सहाई है।
मेरे मन तेरी मूरत समाई है, हर पल हर शन महिमा गायी है।
घर मेरे कष्टों की आंधी आई है, आपने क्यूँ मेरी सुध भुलाई है।
तुम भोले नाथ हो दया निधान हो, तुम हनुमान हो तुम बलवान हो।
तुम्ही राम और श्याम हो, सारे जगत में तुम सबसे महान हो।
तुम्ही महाकाली तुम्ही माँ शारदे, करता हूँ प्रार्थना भव से तार दे।
तुम्ही मोहमद हो गरीब नवाज़ हो, नानक की बानी में ईसा के साथ हो।
तुम्ही दिगम्बर तुम्ही कबीर हो, हो बुध तुम्ही और महावीर हो।
सारे जगत का तुम्ही आधार हो, निराकार भी और साकार हो।
करता हूँ वंदना प्रेम विश्वास से, सुनो साईं अल्लाह के वास्ते।
अधरों पे मेरे नहीं मुस्कान है, घर मेरा बनने लगा शमशान है।
रहम नज़र करो उजड़े वीरान पे, जिंदगी संवरेगी एक वरदान से।
पापों की धूप से तन लगा हारने, आपका यह दास लगा पुकारने।
आपने सदा ही लाज बचाई है, देर न हो जाये मन शंकाई है।
धीरे-धीरे धीरज ही खोता है, मन में बसा विश्वास ही रोता है।
मेरी कल्पना साकार कर दो, सूनी जिंदगी में रंग भर दो।
ढोते-ढोते पापों का भार जिंदगी से, मैं गया हार जिंदगी से।
नाथ अवगुण अब तो बिसारो, कष्टों की लहर से आके उबारो।
करता हूँ पाप मैं पापों की खान हूँ, ज्ञानी तुम ज्ञानेश्वर मैं अज्ञान हूँ।
करता हूँ पग-पग पर पापों की भूल मैं, तार दो जीवन ये चरणों की धूल से।
तुमने ऊजड़ा हुआ घर बसाया, पानी से दीपक भी तुमने जलाया।
तुमने ही शिरडी को धाम बनाया, छोटे से गाँव में स्वर्ग सजाया।
कष्ट पाप श्राप उतारो, प्रेम दया दृष्टि से निहारो।
आपका दास हूँ ऐसे न टालिए, गिरने लगा हूँ साईं संभालिये।
साईजी बालक मैं अनाथ हूँ, तेरे भरोसे रहता दिन रात हूँ।
जैसा भी हूँ, हूँ तो आपका, कीजे निवारण मेरे संताप का।
तू है सवेरा और मैं रात हूँ, मेल नहीं कोई फिर भी साथ हूँ।
साईं मुझसे मुख न मोड़ो, बीच मझधार अकेला न छोड़ो।
आपके चरणों में बसे प्राण है, तेरे वचन मेरे गुरु समान है।
आपकी राहों पे चलता दास है, खुशी नहीं कोई जीवन उदास है।
आंसू की धारा में डूबता किनारा, जिंदगी में दर्द, नहीं गुज़ारा।
लगाया चमन तो फूल खिलायो, फूल खिले है तो खुशबू भी लायो।
कर दो इशारा तो बात बन जाये, जो किस्मत में नहीं वो मिल जाये।
बीता ज़माना यह गाके फ़साना, सरहदे ज़िन्दगी मौत तराना।
देर तो हो गयी है अंधेर ना हो, फ़िक्र मिले लकिन फरेब ना हो।
देके टालो या दामन बचा लो, हिलने लगी रहनुमाई संभालो।
तेरे दम पे अल्लाह की शान है, सूफी संतो का ये बयान है।
गरीबों की झोली में भर दो खजाना, ज़माने के वली करो ना बहाना।
दर के भिखारी है मोहताज है हम, शंहंशाये आलम करो कुछ करम।
तेरे खजाने में अल्लाह की रहमत, तुम सदगुरू साईं हो समरथ।
आये हो धरती पे देने सहारा, करने लगे क्यूँ हमसे किनारा।
जब तक ये ब्रह्मांड रहेगा, साईं तेरा नाम रहेगा।
चाँद सितारे तुम्हे पुकारेंगे, जन्मोजनम हम रास्ता निहारेंगे।
आत्मा बदलेगी चोले हज़ार, हम मिलते रहेंगे बारम्बार।
आपके कदमो में बैठे रहेंगे, दुखड़े दिल के कहते रहेंगे।
आपकी मर्जी है दो या ना दो, हम तो कहेंगे दामन ही भर दो।
तुम हो दाता हम है भिखारी, सुनते नहीं क्यूँ अर्ज़ हमारी।
अच्छा चलो एक बात बता दो, क्या नहीं तुम्हारे पास बता दो।
जो नहीं देना है इनकार कर दो, ख़तम ये आपस की तकरार कर दो।
लौट के खाली चला जायूँगा, फिर भी गुण तेरे गायूँगा।
जब तक काया है तब तक माया है, इसी में दुखो का मूल समाया है।
सबकुछ जान के अनजान हूँ मैं, अल्लाह की तू शान तेरी शान हूँ मैं।
तेरा करम सदा सब पे रहेगा, ये चक्र युग-युग चलता रहेगा।
जो प्राणी गायेगा साईं तेरा नाम, उसको मुक्ति मिले पहुंचे परम धाम।
ये मंत्र जो प्राणी नित दिन गायेंगे, राहू, केतु, शनि निकट ना आयेंगे।
टाल जायेंगे संकट सारे, घर में वास करें सुख सारे।
जो श्रद्धा से करेगा पठन, उस पर देव सभी हो प्रसन्न।
रोग समूल नष्ट हो जायेंगे, कष्ट निवारण मंत्र जो गायेंगे।
चिंता हरेगा निवारण जाप, पल में दूर हो सब पाप।
जो ये पुस्तक नित दिन बांचे, श्री लक्ष्मीजी घर उसके सदा विराजे।
ज्ञान, बुद्धि प्राणी वो पायेगा, कष्ट निवारण मंत्र जो ध्यायेगा।
ये मंत्र भक्तों कमाल करेगा, आई जो अनहोनी तो टाल देगा।
भूत-प्रेत भी रहेंगे दूर, इस मंत्र में साईं शक्ति भरपूर।
जपते रहे जो मंत्र अगर, जादू-टोना भी हो बेअसर।
इस मंत्र में सब गुण समाये, ना हो भरोसा तो आजमाए।
ये मंत्र साईं वचन ही जानो, स्वयं अमल कर सत्य पहचानो।
संशय ना लाना विश्वास जगाना, ये मंत्र सुखों का है खज़ाना।
इस पुस्तक में साईं का वास, जय साईं श्री साईं जय जय साईं।
Sai Kasht Nivaran Mantra PDF: साईं कष्ट निवारण मंत्र
Sai Kasht Nivaran Mantra in English
Shirdi Sai Baba Kasht Nivaran Mantra
Sadguru Sai Nath Maharaj ki Jai
Kashton ki kali chaya dukhdayi hai, jeevan mein ghor udasi layi hai.
Sankat ko talo Sai duhai hai, tere siwa na koi sahayi hai.
Mere man teri murat samayi hai, har pal har shan mahima gayi hai.
Ghar mere kashton ki aandhi aayi hai, aapne kyun meri sudh bhulayi hai.
Tum bhole nath ho daya nidhan ho, tum Hanuman ho tum balwan ho.
Tumhi Ram aur Shyam ho, saare jagat mein tum sabse mahan ho.
Tumhi Mahakali tumhi Maa Sharade, karta hoon prarthana bhav se taar de.
Tumhi Mohammad ho gareeb nawaz ho, Nanak ki bani mein Eesa ke saath ho.
Tumhi Digambar tumhi Kabir ho, ho Budh tumhi aur Mahavir ho.
Saare jagat ka tumhi aadhar ho, nirakar bhi aur saakar ho.
Karta hoon vandana prem vishwas se, suno Sai Allah ke vaaste.
Adharon pe mere nahi muskan hai, ghar mera banne laga shamshan hai.
Reham nazar karo ujde veeran pe, zindagi sanwaregi ek vardan se.
Paapon ki dhoop se tan laga haarne, aapka yeh daas laga pukaarne.
Aapne sada hi laaj bachayi hai, der na ho jaaye man shankayi hai.
Dheere-dheere dheeraj hi khota hai, man mein basa vishwas hi rota hai.
Meri kalpana saakar kar do, sooni zindagi mein rang bhar do.
Dhote-dhote paapon ka bhaar zindagi se, main gaya haar zindagi se.
Naath avagun ab to bisaro, kashton ki lehar se aake ubaaro.
Karta hoon paap main paapon ki khan hoon, gyani tum gyaneshwar main agyan hoon.
Karta hoon pag-pag par paapon ki bhool main, taar do jeevan yeh charanon ki dhool se.
Tumne ujda hua ghar basaya, paani se deepak bhi tumne jalaya.
Tumne hi Shirdi ko dhaam banaya, chhote se gaon mein swarg sajaya.
Kasht paap shraap utaaro, prem daya drishti se nihaaro.
Aapka daas hoon aise na taaliye, girne laga hoon Sai sambhaaliye.
Saiji balak main anaath hoon, tere bharose rehta din raat hoon.
Jaisa bhi hoon, hoon to aapka, keeje nivaran mere santaap ka.
Tu hai savera aur main raat hoon, mel nahi koi phir bhi saath hoon.
Sai mujhse mukh na modo, beech majhdhaar akela na chhodo.
Aapke charanon mein base praan hai, tere vachan mere guru samaan hai.
Aapki raahon pe chalta daas hai, khushi nahi koi jeevan udaas hai.
Aansoo ki dhaara mein doobta kinaara, zindagi mein dard, nahi guzaara.
Lagaya chaman to phool khilaayo, phool khile hai to khushboo bhi laayo.
Kar do ishaara to baat ban jaaye, jo kismat mein nahi wo mil jaaye.
Beeta zamaana yeh gaake fasaana, sarhade zindagi maut taraana.
Der to ho gayi hai andher na ho, fikr mile lekin fareb na ho.
Deke taalo ya daaman bacha lo, hilne lagi rehnumaai sambhaalo.
Tere dam pe Allah ki shaan hai, Sufi santo ka yeh bayaan hai.
Gareebon ki jholi mein bhar do khazaana, zamaane ke wali karo na bahaana.
Dar ke bhikhari hai mohtaaj hai hum, shehenshaah-e-aalam karo kuch karam.
Tere khazaane mein Allah ki rehmat, tum Sadguru Sai ho samarth.
Aaye ho dharti pe dene sahaara, karne lage kyun humse kinaara.
Jab tak yeh brahmand rahega, Sai tera naam rahega.
Chaand sitaare tumhe pukaarenge, janmojanam hum raasta nihaarenge.
Aatma badlegi chole hazaar, hum milte rahenge baarambaar.
Aapke kadmon mein baithe rahenge, dukhde dil ke kahte rahenge.
Aapki marzi hai do ya na do, hum to kahenge daaman hi bhar do.
Tum ho daata hum hai bhikhari, sunte nahi kyun arz hamari.
Achha chalo ek baat bata do, kya nahi tumhaare paas bata do.
Jo nahi dena hai inkaar kar do, khatam yeh aapas ki takraar kar do.
Laut ke khaali chala jaayunga, phir bhi gun tere gaayunga.
Jab tak kaaya hai tab tak maaya hai, isi mein dukho ka mool samaya hai.
Sab kuch jaan ke anjaan hoon main, Allah ki tu shaan teri shaan hoon main.
Tera karam sada sab pe rahega, yeh chakra yug-yug chalta rahega.
Jo praani gaayega Sai tera naam, usko mukti mile pahunche param dhaam.
Yeh mantra jo praani nit din gaayenge, Raahu, Ketu, Shani nikat na aayenge.
Tal jaayenge sankat saare, ghar mein vaas karen sukh saare.
Jo shraddha se karega pathan, us par dev sabhi ho prasann.
Rog samool nasht ho jaayenge, kasht nivaran mantra jo gaayenge.
Chinta harega nivaran jaap, pal mein door ho sab paap.
Jo yeh pustak nit din baanche, Shri Lakshmiji ghar uske sada viraaje.
Gyaan, buddhi praani wo paayega, kasht nivaran mantra jo dhyaayega.
Yeh mantra bhakton kamaal karega, aayi jo anahoni to taal dega.
Bhoot-pret bhi rahenge door, is mantra mein Sai shakti bharpur.
Japate rahe jo mantra agar, jaadu-tona bhi ho be-asar.
Is mantra mein sab gun samaaye, na ho bharosa to aazmaaye.
Yeh mantra Sai vachan hi jaano, swayam amal kar satya pehchaano.
Sanshay na laana vishwas jagaana, yeh mantra sukho ka hai khazaana.
Is pustak mein Sai ka vaas, Jai Sai Shri Sai Jai Jai Sai.
Sai Kasht Nivaran Mantra सरल हिंदी अर्थ
यह मंत्र भक्त की सच्ची पुकार है। यह कहता है: “हे साईं, जीवन में कष्टों की काली छाया छा गई है, उदासी भर गई है। संकटों को दूर करो, तुम्हारे सिवा कोई सहारा नहीं। मैंने पाप किए हैं, मैं निर्बल हूँ, कृपा करो और मुझे बचा लो।”
यह साईं को सभी रूपों में याद करता है राम, हनुमान, काली, मोहम्मद, नानक, कबीर आदि दर्शाता है कि साईं एक ही परमात्मा हैं। अंत में वादा है कि जो श्रद्धा से साईं कष्ट निवारण मंत्र रोज पढ़ेगा, उसके सभी कष्ट, ग्रह दोष, रोग और पाप दूर हो जाएंगे, घर में सुख-समृद्धि आएगी।
Sai Kasht Nivaran Mantra आध्यात्मिक व्याख्या
साईं कष्ट निवारण मंत्र का गहरा संदेश पूर्ण समर्पण (शरणागति) है। यह सिखाता है कि जीवन कितना भी अंधकारमय क्यों न हो, साईं बाबा का प्रकाश हमेशा पास है। सभी धर्मों के नामों से पुकार कर यह बताता है कि ईश्वर एक है प्रेम और दया का सागर।
यह मंत्र अहंकार को घोलता है, पिछले कर्मों को शुद्ध करता है और अटूट विश्वास जगाता है। इसका मूल संदेश सरल है: “साईं ही मेरा एकमात्र आश्रय हैं; उनकी कृपा से सभी कष्ट पिघल जाते हैं।”
Sai Kasht Nivaran Mantra जाप का समय एवं विधि
साईं कष्ट निवारण मंत्र किसी भी समय जपा जा सकता है, लेकिन कुछ समय विशेष फलदायी हैं:
• सर्वोत्तम समय: सुबह स्नान के बाद या शाम को दीपक जलाकर।
• विशेष दिन: हर गुरुवार (साईं बाबा का पवित्र दिन)। कई भक्त गुरुवार से 11 या 21 दिनों का अनुष्ठान शुरू करते हैं।
• परिस्थितियां: आर्थिक संकट, बीमारी, पारिवारिक क्लेश, अदालती मामले या गहरी चिंता में।
• परंपरागत विधि: पूर्ण मंत्र को एक या दो बार पढ़ें। मुख्य पंक्तियों को माला से 108 बार जपें। साईं बाबा की फोटो के सामने अगरबत्ती, फूल चढ़ाकर, आंसुओं से भरे हृदय से पढ़ें साईं हृदय की भाषा सुनते हैं।
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साईं कष्ट निवारण मंत्र के लाभ (Sai Kasht Nivaran Mantra benefits)
साईं कष्ट निवारण मंत्र श्रद्धापूर्वक जाप करने वाले भक्तों को ये दिव्य लाभ मिलते हैं:
• मन की गहरी शांति, चिंता-उदासी से मुक्ति।
• राहु, केतु, शनि जैसे ग्रह दोषों से सुरक्षा।
• रोगों का समूल नाश, स्वास्थ्य लाभ।
• धन-समृद्धि, लक्ष्मी जी का घर में वास।
• करियर, व्यापार, विवाह आदि में बाधाओं का निवारण।
• काला जादू, भूत-प्रेत, नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा।
• पापों की क्षमा, कर्म शुद्धि एवं आध्यात्मिक उन्नति।
• असंभव स्थितियों में भी चमत्कारिक परिवर्तन।
असंख्य भक्तों के अनुभव बताते हैं कि साईं कष्ट निवारण मंत्र असली संकटों को भी आशीर्वाद में बदल देता है।
उपसंहार (Conclusion)
साईं कष्ट निवारण मंत्र (Sai Kasht Nivaran Mantra) केवल शब्द नहीं, बल्कि थके हुए आत्मा और उसके अनंत पिता साईं बाबा के बीच का प्रेमपूर्ण संवाद है। हर पंक्ति में समर्पण, स्वीकारोक्ति, स्तुति और आशा है यह याद दिलाता है कि साईं कभी अपने बच्चे को नहीं छोड़ते।
जब जीवन तूफान जैसा लगे, तो इन पवित्र पंक्तियों को हृदय से निकालें। श्रद्धा से साईं की कृपा हर लहर को शांत कर देगी, हर घाव को भर देगी और हर राह को रोशन कर देगी।
सद्गुरु साईं नाथ आपके सभी कष्ट हमेशा के लिए दूर करें और आपको अनंत शांति, प्रेम एवं आशीर्वाद प्रदान करें।
जय साईं राम! श्री साईं बाबा की जय! ॐ साईं राम!
? सामान्य प्रश्न (FAQs): Sai Kasht Nivaran Mantra
साईं कष्ट निवारण मंत्र का अर्थ क्या है?
यह भक्त की पुकार है कि हे साईं, मेरे सभी कष्ट दूर करो तुम्हारे सिवा कोई सहारा नहीं।
साईं कष्ट निवारण मंत्र कब पढ़ना चाहिए?
रोजाना, सुबह-शाम या गुरुवार को। संकट के समय विशेष रूप से।
साईं कष्ट निवारण मंत्र के लाभ क्या हैं?
शांति, स्वास्थ्य, धन, ग्रह सुरक्षा, संकट निवारण, पाप मुक्ति एवं मोक्ष की प्राप्ति।
इस मंत्र को कितनी बार जपना चाहिए?
पूर्ण पाठ एक-दो बार रोज। मुख्य पंक्तियां 108 बार। श्रद्धा सबसे महत्वपूर्ण है।
क्या कोई भी इस मंत्र का जाप कर सकता है?
हां, सभी धर्म, जाति, उम्र के लोग। साईं बाबा सबके हैं।
क्या साईं कष्ट निवारण मंत्र वाकई कष्ट दूर करता है?
श्रद्धा और विश्वास से जपने पर लाखों भक्तों ने चमत्कार देखे हैं।
