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    Shlok

    Damodar Ashtakam – संपूर्ण पाठ, हिंदी अर्थ और आध्यात्मिक महत्व (दामोदर अष्टकम)

    RaviBy RaviJuly 3, 2026
    Damodar Ashtakam

    Damodar Ashtakam भगवान श्रीकृष्ण के दामोदर स्वरूप की स्तुति में रचित एक अत्यंत पवित्र और भावपूर्ण स्तोत्र है। इसे महर्षि सत्यव्रत मुनि ने नारद मुनि और शौनक ऋषि के साथ हुई एक दिव्य वार्तालाप में कहा था, और श्रील व्यासदेव ने इसे पद्म पुराण में संकलित किया।

    दामोदर नाम का अर्थ है “जिनके उदर (पेट) को दाम (रस्सी) से बाँधा गया हो।” माँ यशोदा ने बाल-कृष्ण को दही-मटकी फोड़ने पर रस्सी से ऊखल में बाँधा था। वह प्रेम-भरी लीला ही इस स्तोत्र का आधार है।

    श्री हरि भक्ति विलास में कहा गया है कि कार्तिक मास में प्रतिदिन Damodar Ashtakam का पाठ करने से भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह स्तोत्र केवल एक प्रार्थना नहीं, बल्कि भक्त और भगवान के बीच के निश्छल प्रेम का अमर दस्तावेज़ है।

    Table of Contents

    Toggle
    • Damodar Ashtakam – संपूर्ण संस्कृत पाठ (दामोदर अष्टकम)
      • श्लोक १
      • श्लोक २
      • श्लोक ३
      • श्लोक ४
      • श्लोक ५
      • श्लोक ६
      • श्लोक ७
      • श्लोक ८
    • Damodar Ashtakam का आध्यात्मिक महत्व
    • Damodar Ashtakam कब पढ़ें – पाठ का उचित समय
    • Damodar Ashtakam Benefits – आध्यात्मिक लाभ
    • Damodar Ashtakam Lyrics In Hindi Translation – गहरा भाव
    • निष्कर्ष (Conclusion)
    • ? FAQs – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
      • प्रश्न १: Damodar Ashtakam किसने लिखा?
      • प्रश्न २: Damodar Ashtakam कब पढ़ना चाहिए?
      • प्रश्न ३: Damodar Ashtakam In English कहाँ मिलेगा?
      • प्रश्न ४: क्या इस स्तोत्र में मोक्ष की प्रार्थना की गई है?
      • प्रश्न ५: दामोदर का अर्थ क्या है?

    Damodar Ashtakam – संपूर्ण संस्कृत पाठ (दामोदर अष्टकम)

    श्लोक १

    नमामीश्वरं सच्चिदानंदरूपं
    लसत्कुण्डलं गोकुले भ्राजमानम्।
    यशोदाभियोलूखलाद्धावमानं
    परामृष्टमत्यन्ततो द्रुत्य गोप्या॥

    Transliteration:

    Rudantam muhur netra-yugmam mrjantam
    Karambhoja-yugmena satanka-netram
    Muhuh svasa-kampa-trirekhanka-kantha-
    Sthita graivam damodaram bhakti-baddham

    हिंदी अर्थ: जिनका सर्वेश्वर सच्चिदानंद स्वरूप है, जिनके कपोलों पर मकराकृत कुंडल हिलडुल रहे हैं, जो दिव्य गोकुल धाम में परम शोभायमान हैं जो दही-मटकी फोड़ने के कारण माँ यशोदा के भय से ऊखल से दूर दौड़ रहे हैं, किन्तु जिन्हें माँ यशोदा ने वेगपूर्वक दौड़कर पकड़ लिया ऐसे भगवान दामोदर को मेरा विनम्र प्रणाम है।

    श्लोक २

    रुदन्तं मुहुर्नेत्रयुग्मं मृजन्तं
    कराम्भोज-युग्मेन सातङ्कनेत्रम्।
    मुहुःश्वास कम्प-त्रिरेखाङ्ककण्ठ-
    स्थित ग्रैव-दामोदरं भक्तिबद्धम्॥

    Transliteration:

    Rudantam muhur netra-yugmam mrjantam
    Karambhoja-yugmena satanka-netram
    Muhuh svasa-kampa-trirekhanka-kantha-
    Sthita graivam damodaram bhakti-baddham

    हिंदी अर्थ: माँ के हाथ में लठिया देखकर वे बारंबार रोते हुए अपनी दोनों आँखों को हस्तकमलों से मल रहे हैं। उनके नेत्र भय से विह्वल हैं, सिसकियाँ लेने के कारण त्रिरेखायुक्त कंठ में मोतियों की माला कंपित हो रही है। उन दामोदर भगवान को जिनका उदर रस्सियों से नहीं, बल्कि माँ के वात्सल्य-प्रेम से बँधा है मैं प्रणाम करता हूँ।

    श्लोक ३

    इतीद्दक्‌स्वलीलाभिरानंद कुण्डे
    स्वघोषं निमज्जन्तमाख्यापयन्तम्।
    तदीयेशितज्ञेषु भक्तैर्जितत्वं
    पुनः प्रेमतस्तं शतावृत्ति वन्दे॥

    Transliteration:

    Itidrk sva-lilabhir ananda-kunde
    Sva-ghosham nimajjantam akhyapayantam
    Tadiyeshita-jneshu bhaktair jitatvam
    Punah prematas tam satavritti vande

    हिंदी अर्थ: जो ऐसी बाल्यलीलाओं से गोकुलवासियों को आनंद-सरोवर में डुबोते हैं, और अपने ऐश्वर्य में मग्न भक्तों को यह तथ्य प्रकाशित करते हैं कि उन्हें भय-आदर से मुक्त, निश्छल प्रेमी भक्त ही जीत सकते हैं उन भगवान दामोदर को मैं कोटि-कोटि प्रणाम करता हूँ।

    श्लोक ४

    वरं देव! मोक्षं न मोक्षावधिं वा
    न चान्यं वृणेऽहं वरेशादपीह।
    इदं ते वपुर्नाथ गोपाल बालं
    सदा मे मनस्याविरस्तां किमन्यैः?॥

    Transliteration:

    Varam deva moksham na mokshavadhim va
    Na canyam vrne ‘ham vareshad apiha
    Idam te vapur natha gopala-balam
    Sada me manasy avirastam kim anyaih

    हिंदी अर्थ: हे प्रभु! आप सर्वोच्च वर देने में समर्थ हैं, परन्तु मैं न मोक्ष माँगता हूँ, न वैकुंठ, न कोई अन्य वरदान। बस यही प्रार्थना है कि आपका बालगोपाल रूप सदा मेरे हृदय में विराजित रहे। इसके अतिरिक्त मुझे और किस वस्तु की आवश्यकता है?

    श्लोक ५

    इदं ते मुखाम्भोजमत्यन्तनीलै-
    र्वृतं कुन्तलैः स्निग्ध-रक्तैश्च गोप्या।
    मुहुश्चुम्बितं बिम्बरक्ताधरं मे
    मनस्याविरस्तामलं लक्षलाभैः॥

    Transliteration:

    Idam te mukhambhojam atyanta-nilair
    Vritam kuntalaih snigdha-raktais ca gopya
    Muhus cumbitam bimba-raktadharam me
    Manasy avirastam alam laksha-labhaih

    हिंदी अर्थ: हे प्रभु! लालिमायुक्त कोमल श्यामवर्ण के घुँघराले बालों से घिरा आपका मुखकमल, जिसे माँ यशोदा बारंबार चुम्बित कर रही हैं और जिनके होंठ बिम्बफल की भाँति लाल हैं आपके मुखमंडल का वह सुन्दर दृश्य मेरे हृदय में सदा बना रहे। मुझे लाखों अन्य लाभों की कोई अभिलाषा नहीं।

    श्लोक ६

    नमो देव दामोदरानन्त विष्णो!
    प्रसीद प्रभो! दुःखजालाब्धिमग्नम्।
    कृपाद्दष्टि-वृष्टयातिदीनं बतानु-
    गृहाणेश मामज्ञमेध्यक्षिदृश्यः॥

    Transliteration:

    Namo deva damodarananta vishno
    Prasida prabho duhkha-jalabdhi-magnam
    Kripa-drishti-vrishtyati-dinam batanu
    Grihanesha mam ajnam edhy akshi-drisyah

    हिंदी अर्थ: हे दामोदर! हे अनंत! हे विष्णु! हे नाथ! मैं आपको प्रणाम करता हूँ। मैं दुःखों के सागर में डूबा जा रहा हूँ। आप मुझ दीन-हीन पर अपनी कृपादृष्टि की वर्षा कीजिए, मेरा उद्धार कीजिए और मेरे नेत्रों के समक्ष प्रकट हो जाइए।

    श्लोक ७

    कुबेरात्मजौ बद्धमूर्त्यैव यद्वत्
    त्वया मोचितौ भक्तिभाजौ कृतौ च।
    तथा प्रेमभक्तिं स्वकां मे प्रयच्छ
    न मोक्षे गृहो मेऽस्ति दामोदरेह॥

    Transliteration:

    Kuveratmajau baddha-murtyaiva yadvat
    Tvaya mocitau bhakti-bhajau krtau ca
    Tatha prema-bhaktim svakam me prayaccha
    Na mokshe graho me ‘sti damodareha

    हिंदी अर्थ: हे दामोदर! जिस प्रकार आपने ऊखल से बँधे रूप में नलकूबर और मणिग्रीव कुबेर के दोनों पुत्रों को नारद जी के शाप से मुक्त कर अपना महान भक्त बनाया उसी प्रकार मुझे भी अपनी प्रेम-भक्ति प्रदान कीजिए। मुझे किसी प्रकार के मोक्ष की इच्छा नहीं, केवल आपकी भक्ति ही मेरी अभिलाषा है।

    श्लोक ८

    नमस्तेऽस्तु दाम्ने स्फुरद्दीप्तिधाम्ने
    त्वदीयोदरायाथ विश्वस्य धाम्ने।
    नमो राधिकायै त्वदीय-प्रियायै
    नमोऽनन्त लीलाय देवाय तुभ्यम्॥

    Transliteration:

    Namas te ‘stu damne sphurad-dipti-dhamne
    Tvadiyodarayatha visvasya dhamne
    Namo radhikayai tvadiya-priyayai
    Namo ‘nanta-lilaya devaya tubhyam

    हिंदी अर्थ: हे प्रभु! मैं सर्वप्रथम आपके उदर को बाँधने वाली दीप्तिमान रस्सी को प्रणाम करता हूँ, जो समस्त विश्व का आधार है। आपकी प्रियतमा श्रीमती राधारानी के चरणों में मेरा सादर प्रणाम है। और अनंत लीलाएँ करने वाले आप परमेश्वर को मेरा प्रणाम है।

    Damodar Ashtakam PDF (दामोदर अष्टकम)

    Damodar Ashtakam का आध्यात्मिक महत्व

    Damodar Ashtakam केवल एक स्तोत्र नहीं, यह भक्ति की सर्वोच्च अनुभूति का प्रकाश है। इस स्तोत्र में भक्त न मोक्ष माँगता है, न धन, न स्वर्ग। वह केवल यह प्रार्थना करता है कि भगवान का बालरूप उसके हृदय में सदा विराजित रहे। यह “प्रेम-भक्ति” की सर्वश्रेष्ठ अभिव्यक्ति है।

    यह स्तोत्र हमें यह भी सिखाता है कि भगवान को भय, औपचारिकता या ऐश्वर्य-भाव से नहीं, बल्कि निश्छल, माधुर्यपूर्ण प्रेम से जीता जा सकता है ठीक वैसे जैसे माँ यशोदा ने अपने ममतामय प्रेम से परमेश्वर को उखल से बाँध लिया।

    दामोदर नाम की लीला यह बताती है कि भगवान असीमित और सर्वशक्तिमान होते हुए भी अपने शुद्ध भक्तों के प्रेम के अधीन हो जाते हैं।

    Damodar Ashtakam कब पढ़ें – पाठ का उचित समय

    Damodar Ashtakam पाठ के लिए सबसे उत्तम समय और परंपरा:

    कार्तिक मास (अक्टूबर-नवंबर): यह स्तोत्र विशेषतः कार्तिक मास में प्रतिदिन संध्या के समय पाठ किया जाता है। वैष्णव परंपरा में इस मास को “दामोदर मास” कहते हैं। ISKCON मंदिरों और वैष्णव घरों में प्रतिदिन सायंकाल दीप-दान करते हुए इसका सामूहिक गायन होता है।

    प्रातःकाल: भगवान के सामने बैठकर, स्नान के पश्चात, शांत मन से पाठ करना अत्यंत फलदायी है।

    जन्माष्टमी एवं कृष्ण-जयंती: इन पवित्र पर्वों पर इस स्तोत्र का पाठ विशेष महत्व रखता है।

    दैनिक भक्ति-साधना: जो भक्त नित्य कृष्ण-भक्ति करते हैं, वे प्रतिदिन Damodar Ashtakam In Hindi या संस्कृत में पाठ कर सकते हैं।

    Damodar Ashtakam Benefits – आध्यात्मिक लाभ

    Damodar Ashtakam के नियमित पाठ से अनेक आध्यात्मिक और भावनात्मक लाभ प्राप्त होते हैं:

    प्रेम-भक्ति की प्राप्ति: यह स्तोत्र साधक के हृदय में भगवान के प्रति निश्छल प्रेम जागृत करता है। जिस भक्त को मोक्ष की नहीं, केवल प्रभु के चरणों की अभिलाषा हो उसके लिए यह स्तोत्र अमृत के समान है।

    मन की शांति: भगवान दामोदर की बाल-लीला का स्मरण मन को असीम शांति और आनंद प्रदान करता है। जीवन की विपत्तियों में यह स्तोत्र आधार बनता है।

    भगवान की विशेष कृपा: पद्म पुराण के अनुसार कार्तिक मास में इस स्तोत्र का पाठ करने से भगवान दामोदर की अपार कृपा प्राप्त होती है।

    दुःखों से मुक्ति: छठे श्लोक में भक्त स्वयं कहते हैं कि वे दुःखों के सागर में डूबे हैं। इस स्तोत्र का पाठ भगवान की करुणादृष्टि को आकर्षित करता है।

    मोक्ष से परे प्रेम: यह स्तोत्र भक्त को उस उच्चतम अवस्था में ले जाता है जहाँ मोक्ष से भी बड़ी वस्तु भगवान की प्रेम-भक्ति की अभिलाषा जागती है।

    पापों से शुद्धि: नलकूवर और मणिग्रीव की कथा हमें यह भरोसा देती है कि भगवान दामोदर परम करुणामय हैं और अपने भक्तों को अवश्य मुक्त करते हैं।

    Damodar Ashtakam Lyrics In Hindi Translation – गहरा भाव

    Damodar Ashtakam Lyrics In Hindi Translation पढ़ने पर यह स्पष्ट होता है कि सत्यव्रत मुनि इस स्तोत्र में भगवान के सौंदर्य, करुणा और लीला तीनों का अद्भुत चित्र खींचते हैं।

    पहले दो श्लोकों में भगवान का वह चित्र है जब वे माँ यशोदा से डरकर भागते हैं और फिर पकड़े जाते हैं। तीसरे श्लोक में यह संदेश है कि प्रेम ही भगवान तक पहुँचने का मार्ग है। चौथे और पाँचवें श्लोक में भक्त की एकमात्र अभिलाषा व्यक्त होती है भगवान का बालस्वरूप सदा हृदय में रहे। छठे श्लोक में करुणा की प्रार्थना है। सातवें श्लोक में नलकूबर-मणिग्रीव प्रसंग से भक्तिप्रेम की कामना है। आठवें श्लोक में रस्सी, उदर, श्री राधिका और अनंत लीला सभी को एक साथ प्रणाम किया गया है।

    यही इस स्तोत्र की महानता है यह दामोदर अष्टकम भक्त के समस्त भावों को एक साथ भगवान के चरणों में समर्पित कर देता है।

    निष्कर्ष (Conclusion)

    Damodar Ashtakam वैष्णव भक्ति-परंपरा का एक अमूल्य रत्न है। दामोदर अष्टकम हमें यह सिखाता है कि ईश्वर को माया, तर्क या कर्मकाण्ड से नहीं, बल्कि निश्छल प्रेम से पाया जा सकता है ठीक वैसे जैसे माँ यशोदा ने प्रेम की रस्सी से जगत के स्वामी को बाँध लिया।

    जो भी साधक इस स्तोत्र को श्रद्धापूर्वक पढ़ता है, वह भगवान दामोदर की कृपादृष्टि का पात्र बनता है। जीवन में चाहे कितने भी दुःख हों, यह स्तोत्र मन को शांत करता है और हृदय में भक्ति का दीप जलाता है।

    हरे कृष्ण। श्री दामोदराय नमः।

    ? FAQs – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

    प्रश्न १: Damodar Ashtakam किसने लिखा?

    सत्यव्रत मुनि ने इसे कहा और श्रील व्यासदेव ने इसे पद्म पुराण में संकलित किया।

    प्रश्न २: Damodar Ashtakam कब पढ़ना चाहिए?

    कार्तिक मास में प्रतिदिन संध्या के समय दीप-दान करते हुए इसका पाठ करना सर्वश्रेष्ठ है। इसे वर्षभर प्रातःकाल भी पढ़ा जा सकता है।

    प्रश्न ३: Damodar Ashtakam In English कहाँ मिलेगा?

    Bblessing Read जैसी प्रामाणिक वैष्णव वेबसाइटों पर Damodar Ashtakam In English अर्थ सहित उपलब्ध है।

    प्रश्न ४: क्या इस स्तोत्र में मोक्ष की प्रार्थना की गई है?

    नहीं। यह इस स्तोत्र की विशेषता है। भक्त स्पष्ट कहता है कि उसे मोक्ष नहीं, केवल भगवान के बाल-स्वरूप का स्मरण और उनकी प्रेम-भक्ति चाहिए।

    प्रश्न ५: दामोदर का अर्थ क्या है?

    “दामोदर” का अर्थ है “जिनके उदर को दाम (रस्सी) से बाँधा गया।” माँ यशोदा ने बाल-कृष्ण को ऊखल से रस्सी द्वारा बाँधा था, इसीलिए उनका यह नाम पड़ा।

    🙏 इन मंत्रों और श्लोकों को भी पढ़ना न भूलें:

    • Tripura Sundari Mantra
    • Vashikaran Mantra
    • RAM Rameti Rameti Mantra
    • Kalavati Aai Balopasana
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