नीम करोली बाबा (Neem Karoli Baba) भारत के महान सिद्ध संत थे जिन्हें करोड़ों भक्त प्रेम से “महाराज जी” कहते हैं। वे हनुमान जी के परम उपासक थे और उनकी करुणा, प्रेम और दिव्य शक्ति के कारण देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु उनके द्वार आते थे।
उनका मुख्य आश्रम उत्तराखंड के कैंची धाम में है, जो आज भी लाखों भक्तों की आस्था का केंद्र है।
नीम करोली बाबा मंत्र (Neem Karoli Baba Mantra) और नीम करोली बाबा चौपाई (Neem Karoli Baba Chaupai) उनके भक्तों द्वारा अत्यंत श्रद्धा के साथ पढ़ी जाती है। यह पाठ मन को शांति देता है, जीवन के कष्टों को दूर करता है और बाबा जी की दिव्य कृपा का द्वार खोलता है।
बाबा जी का सबसे सरल और गहरा उपदेश था
“सब कुछ छोड़ दो, बस राम नाम लो।”
नीम करोली बाबा का मंत्र – विनय पद (Neem Karoli Baba Mantra – Vinay Pad)
यह विनय पद भक्त बाबा जी के चरणों में समर्पण भाव से पढ़ते हैं। इसमें अपनी दीनता स्वीकार करते हुए गुरुदेव से कृपा की प्रार्थना की गई है
मैं हूँ बुद्धि मलीन अति, श्रद्धा भक्ति विहीन
करू विनय कछु आपकी, होउ सब ही विधि दीनश्रद्धा के यह पुष्प कछु, चरणन धरि सम्हार
कृपासिंधु गुरुदेव प्रभु, करि लीजे स्वीकार
विनय पद का अर्थ (Meaning)
| पंक्ति | सरल अर्थ |
|---|---|
| मैं हूँ बुद्धि मलीन अति | मेरी बुद्धि अत्यंत मलिन और अशुद्ध है |
| श्रद्धा भक्ति विहीन | मुझमें श्रद्धा और भक्ति का अभाव है |
| करू विनय कछु आपकी | फिर भी आपसे विनम्र प्रार्थना करता हूँ |
| होउ सब ही विधि दीन | हर प्रकार से आपकी शरण में आया हूँ |
| श्रद्धा के यह पुष्प कछु | श्रद्धा के ये थोड़े से पुष्प लेकर |
| चरणन धरि सम्हार | आपके चरणों में सावधानी से रखता हूँ |
| कृपासिंधु गुरुदेव प्रभु | हे कृपा के सागर, गुरुदेव, प्रभु! |
| करि लीजे स्वीकार | इसे कृपया स्वीकार कर लीजिए |
भावार्थ: इस विनय पद में भक्त पूर्ण दीनता और समर्पण के साथ बाबा जी के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित करता है। भक्त अपनी बुद्धि, भक्ति और योग्यता की कमी स्वीकार करते हुए केवल गुरु की कृपा पर निर्भर होता है यही सच्ची भक्ति की पहचान है।
नीम करोली बाबा चौपाई – पूर्ण पाठ (Neem Karoli Baba Chaupai – Full Text)
यह चौपाई नीम करोली बाबा मंत्र जाप (Neem Karoli Baba Mantra Jaap) का सबसे प्रमुख और पवित्र पाठ है। इसे भक्त नित्य श्रद्धा और प्रेम से पढ़ते हैं
जय जय नीम करोली बाबा, कृपा करहु आवे सदभावा।।
कैसे मैं तव स्तुति बखानू। नाम ग्राम कछु मैं नही जानू।।जापे कृपा दृष्टि तुम करहु। रोग शोक दुख दारिद हरहु।।
तुम्हरे रुप लोग नही जाने। जापे कृपा करहु सोई भाने।।करि दे अरपन सब तन मन धन। पावे सुख आलौकिक सोई जन।।
दरस परस प्रभु जो तव करई। सुख संपत्ति तिनके घर भरई।।जै जै संत भक्त सुखदायक। रिद्धि सिद्धि सब संपत्ति दायक।।
तुम ही विष्णु राम श्रीकृष्ण। विचरत पूर्ण कारन हित तृष्णा।।जै जै जै जै श्री भगवंता। तुम हो साक्षात भगवंता।।
कही विभीषण ने जो वानी। परम सत्य करि अब मैं मानी।।बिनु हरि कृपा मिलहिं नही संता। सो करि कृपा करहिं दुःख अंता।।
सोई भरोस मेरे उर आयो। जा दिन प्रभु दर्शन मैं पायो।।जो सुमिरै तुमको उर माही। ताकी विपत्ति नष्ट ह्वे जाई।।
जय जय जय गुरुदेव हमारे। सबहि भाँति हम भये तिहारे।।हम पर कृपा शीघ्र अब करहु। परम शांति दे दुख सब हरहु।।
रोक शोक दुःख सब मिट जावे। जपे राम रामहि को ध्यावे।।जा विधि होइ परम कल्याना। सोई विधि आपु देहु वारदाना।।
सबहि भाँति हरि ही को पूजे। राग द्वेष द्वन्दन सो जूझे।।करें सदा संतन कि सेवा। तुम सब विधी सब लायक देवा।।
सब कुछ दे हमको निस्तारो। भवसागर से पार उतारो।।मैं प्रभु शरण तिहारी आयो। सब पुण्यन को फल है पायो।।
जय जय जय गुरु देव तुम्हारी। बार बार जाऊ बलिहारी।।सर्वत्र सदा घर घर की जानो। रखो सुखों ही नित खानों।।
भेष वस्त्र हैं, सदा ऐसे। जाने नहीं कोई साधु जैसे।।ऐसी है प्रभु रहनी तुम्हारी। वाणी कहो रहस्यमय भारी।।
नास्तिक हूँ आस्तिक ह्वे जाए। जब स्वामी चेटक दिखलावे।।सब ही धरमन के अनुनायी। तुम्हे मनावे शीश झुकाई।।
नही कोउ स्वारथ नही कोई इच्छा। वितरण कर देउ भक्तन भिक्षा।।केही विधि प्रभु मैं तुम्हे मनाऊ। जासो कृपा प्रसाद तव पाऊं।।
साधु सुजन के तुम रखवारे। भक्तन के हो सदा सहारे।।दुष्टऊ शरण आनी जब परई। पूरण इच्छा उनकी करई।।
यह संतन करि सहज सुभाउ। सुनि आश्चर्य करई जनि काउ।।ऐसी करहु आप दया। निर्मल हो जाए मन और काया।।
धर्म कर्म में रुचि हो जावे। जो जन नित तव स्तुति गावे।।आवे सदगुन तापे भारी। सुख संपत्ति सोई पावे सारी।।
होइ तासु सब पूरण कामा। अंत समय पावे विश्रामा।।चारी पदारथ है, जग माही। तव कृपा प्रसाद कछु दुर्लभ नाही।।
त्राहि त्राहि मैं शरण तिहारी। हरहु सकल मम विपदा भारी।।धन्य धन्य बढ़ भाग्य हमारो। पावे दरस परस तव न्यारो।।
कर्महीन अरु बुद्धि विहीना। तव प्रसाद कछु वर्णन कीन्हा।।
चौपाई की प्रमुख पंक्तियों का अर्थ (Meaning of Key Lines)
पहली चौपाई
“जय जय नीम करोली बाबा, कृपा करहु आवे सदभावा।”
अर्थ: हे नीम करोली बाबा! आपकी जय हो, जय हो। कृपया अपनी कृपा बरसाएं जिससे मन में सदभाव और पवित्रता का उदय हो।
रोग, शोक और दारिद्र्य नाश
“जापे कृपा दृष्टि तुम करहु। रोग शोक दुख दारिद हरहु।।”
अर्थ: जिस पर आप अपनी कृपादृष्टि करते हैं, उसके रोग, शोक, दुख और दरिद्रता सब दूर हो जाते हैं।
तन मन धन का समर्पण
“करि दे अरपन सब तन मन धन। पावे सुख आलौकिक सोई जन।।”
अर्थ: जो व्यक्ति अपना तन, मन और धन सब कुछ बाबा जी के चरणों में समर्पित कर देता है, उसे अलौकिक और दिव्य सुख की प्राप्ति होती है।
विभीषण की वाणी — परम सत्य
“कही विभीषण ने जो वानी। परम सत्य करि अब मैं मानी।।
बिनु हरि कृपा मिलहिं नही संता। सो करि कृपा करहिं दुःख अंता।।”
अर्थ: जो बात विभीषण ने कही थी कि बिना हरि की कृपा के संत नहीं मिलते वह मैंने अब परम सत्य मान लिया है। जिस पर संत कृपा करते हैं, उसके दुखों का अंत हो जाता है।
भव सागर से उद्धार
“सब कुछ दे हमको निस्तारो। भवसागर से पार उतारो।।”
अर्थ: हे बाबा जी! हमें सब कुछ देकर इस संसार-सागर से पार लगाइए। यह भक्त की अंतिम और सबसे बड़ी अभिलाषा है।
नास्तिक भी आस्तिक बन जाए
“नास्तिक हूँ आस्तिक ह्वे जाए। जब स्वामी चेटक दिखलावे।।”
अर्थ: बाबा जी की शक्ति इतनी अद्भुत है कि जब वे अपनी लीला दिखाते हैं, तो नास्तिक भी आस्तिक हो जाता है। यह उनकी दिव्य करिश्माई शक्ति का प्रमाण है।
आध्यात्मिक महत्व – Spiritual Significance of Neem Karoli Baba Mantra
नीम करोली बाबा मंत्र इन हिंदी (Neem Karoli Baba Mantra in Hindi) केवल शब्दों का संकलन नहीं है यह एक जीवित शक्ति है।
इस चौपाई की कुछ विशेष आध्यात्मिक विशेषताएं हैं
- सर्वधर्म समभाव: चौपाई में बाबा जी को विष्णु, राम और श्रीकृष्ण का स्वरूप बताया गया है। वे सब धर्मों के अनुयायी थे यह उनकी सार्वभौमिक आध्यात्मिक दृष्टि का प्रमाण है।
- समर्पण की भक्ति: इस पाठ में भक्त बारंबार अपनी दीनता और अयोग्यता स्वीकार करता है यही सच्ची भक्ति का मार्ग है।
- सेवा का संदेश: “करें सदा संतन कि सेवा” बाबा जी का संदेश था कि सेवा ही सबसे बड़ी पूजा है।
- राम नाम की महिमा: “जपे राम रामहि को ध्यावे” इस पंक्ति में राम नाम के जाप को सर्वोच्च साधना बताया गया है।
Read Also: Ugram Veeram Maha Vishnum Mantra
नीम करोली बाबा मंत्र जाप – कब और कैसे करें? (Neem Karoli Baba Mantra Jaap)
सर्वश्रेष्ठ समय (Best Time to Chant)
| समय | महत्व |
|---|---|
| ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः 4–6 बजे) | सर्वश्रेष्ठ, मन शांत और ग्रहणशील होता है |
| प्रातः स्नान के बाद | पवित्रता के साथ पूजा स्थल पर |
| संध्या काल | संध्या आरती के समय |
| संकट के क्षण | किसी भी कठिनाई में बाबा जी का स्मरण तत्काल शांति देता है |
जाप विधि (How to Do Neem Karoli Baba Mantra Jaap)
- स्वच्छ आसन पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
- बाबा जी या हनुमान जी की फोटो सामने रखें।
- मन को शांत करें और तीन गहरी साँसें लें।
- पहले विनय पद पढ़ें, फिर पूरी चौपाई का पाठ करें।
- पाठ के बाद कुछ क्षण मौन में बैठें और बाबा जी का आशीर्वाद ग्रहण करें।
कितनी बार करें?
- नित्य जाप: कम से कम एक बार पूरी चौपाई का पाठ
- मनोकामना के लिए: 21 या 40 दिन का नियमित पाठ
- विशेष अवसर: कैंची धाम महोत्सव (15 जून) पर विशेष पाठ का महत्व
नीम करोली बाबा मंत्र के आध्यात्मिक लाभ – Spiritual Benefits
“चारी पदारथ है, जग माही। तव कृपा प्रसाद कछु दुर्लभ नाही।।”
इस चौपाई की पंक्ति स्वयं कहती है बाबा जी की कृपा से संसार के चारों पुरुषार्थ (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष) प्राप्त हो सकते हैं। कुछ भी दुर्लभ नहीं।
मानसिक शांति (Peace of Mind)
नियमित पाठ से मन की अशांति, चिंता और नकारात्मक विचार दूर होते हैं। “परम शांति दे दुख सब हरहु” इसी का अनुभव भक्तों को होता है।
रोग और शोक से मुक्ति (Relief from Illness and Grief)
“रोग शोक दुख दारिद हरहु” बाबा जी की कृपादृष्टि से शारीरिक और मानसिक कष्ट दूर होते हैं।
विपत्तियों का नाश (Destruction of Troubles)
“जो सुमिरै तुमको उर माही। ताकी विपत्ति नष्ट ह्वे जाई।।” जो हृदय से बाबा जी का स्मरण करता है, उसकी सभी विपत्तियाँ नष्ट हो जाती हैं।
सुख और समृद्धि (Happiness and Prosperity)
“दरस परस प्रभु जो तव करई। सुख संपत्ति तिनके घर भरई।।” बाबा जी के दर्शन और स्मरण से घर में सुख-समृद्धि आती है।
रिद्धि-सिद्धि की प्राप्ति (Riddhi-Siddhi)
“रिद्धि सिद्धि सब संपत्ति दायक” बाबा जी अपने भक्तों को रिद्धि-सिद्धि और सम्पूर्ण सम्पत्ति प्रदान करने वाले हैं।
अलौकिक सुख (Divine Bliss)
“पावे सुख आलौकिक सोई जन” जो तन, मन, धन समर्पित करता है उसे दिव्य और अलौकिक आनंद मिलता है।
अंतिम मुक्ति (Moksha)
“भवसागर से पार उतारो” इस चौपाई का अंतिम लक्ष्य भक्त को इस संसार-सागर से पार लगाना है।
निष्कर्ष – Conclusion
नीम करोली बाबा मंत्र (Neem Karoli Baba Mantra) और यह चौपाई केवल धार्मिक पाठ नहीं है यह एक आत्मिक यात्रा है जो भक्त को अपने अंतर्मन से जोड़ती है और परमात्मा के निकट ले जाती है।
इस चौपाई की अंतिम पंक्ति में भक्त विनम्रता से कहता है
“कर्महीन अरु बुद्धि विहीना। तव प्रसाद कछु वर्णन कीन्हा।।”
अर्थात मैं कर्महीन और बुद्धिहीन हूँ, फिर भी आपकी कृपा के प्रसाद से यह स्तुति कर सका।
यही भक्ति का सार है अहंकार का त्याग और गुरु के प्रति पूर्ण समर्पण।
बाबा जी का संदेश आज भी उतना ही जीवित है
“प्रेम करो, सेवा करो, राम नाम जपो।”
चाहे जीवन में कोई भी संकट हो — बाबा जी का स्मरण करें। उनकी करुणा अनंत है और उनका द्वार सदा खुला है।
🙏 जय नीम करोली बाबा! जय बजरंगबली! 🙏
? FAQs – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Neem Karoli Baba Mantra)
प्रश्न 1: नीम करोली बाबा चौपाई किसने लिखी है?
यह चौपाई बाबा जी के भक्तों द्वारा उनकी महिमा में रची गई एक भक्तिपूर्ण स्तुति है। यह हनुमान चालीसा की शैली में लिखी गई है क्योंकि बाबा जी हनुमान जी के परम उपासक थे।
प्रश्न 2: नीम करोली बाबा मंत्र जाप (Neem Karoli Baba Mantra Jaap) कितने दिन करना चाहिए?
किसी विशेष मनोकामना के लिए 21 या 40 दिन का नियमित पाठ अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। सामान्य भक्ति के लिए नित्य पाठ ही पर्याप्त है।
प्रश्न 3: क्या नीम करोली बाबा मंत्र कोई भी जप सकता है?
हाँ। बाबा जी के द्वार सभी के लिए खुले थे किसी भी आयु, जाति, धर्म या लिंग का व्यक्ति यह पाठ कर सकता है। बाबा जी भेद-भाव में विश्वास नहीं करते थे।
प्रश्न 4: नीम करोली बाबा मंत्र इन हिंदी (Neem Karoli Baba Mantra in Hindi) पढ़ने का सबसे अच्छा समय कब है?
ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः 4–6 बजे) सर्वश्रेष्ठ है। इसके अलावा संध्या काल और किसी भी संकट के समय बाबा जी का स्मरण तत्काल शांति देता है।
प्रश्न 5: नीम करोली बाबा का सबसे प्रिय मंत्र कौन सा था?
बाबा जी को “राम नाम” सर्वाधिक प्रिय था। वे कहते थे “राम नाम सत्य है।” इसके साथ “ॐ हनुमते नमः” और “ॐ श्री राम जय राम जय जय राम” भी उनके प्रिय मंत्र थे।
प्रश्न 6: कैंची धाम में नीम करोली बाबा चौपाई का क्या महत्व है?
कैंची धाम (नैनीताल, उत्तराखंड) में प्रतिवर्ष 15 जून को विशाल भंडारे और कीर्तन का आयोजन होता है। इस दिन चौपाई और मंत्र जाप का विशेष महत्व होता है। लाखों भक्त यहाँ आकर बाबा जी की कृपा ग्रहण करते हैं।
