भारतीय संस्कृति में भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि के प्रथम शिल्पकार और देवताओं के दिव्य वास्तुकार के रूप में पूजा जाता है। वे शिल्पकला, उद्योग और वास्तुविद्या के अधिपति देव हैं। हर वर्ष कन्या संक्रांति के पावन अवसर पर Vishwakarma Puja का आयोजन किया जाता है, जिसमें कारखानों, औजारों और मशीनों की विशेष पूजा होती है।
इस पूजा का केंद्रबिंदु होता है Vishwakarma Puja Mantra का श्रद्धापूर्वक जप। ये मंत्र न केवल भगवान विश्वकर्मा का आह्वान करते हैं, बल्कि साधक के कार्यक्षेत्र में सफलता, सुरक्षा और समृद्धि का आशीर्वाद भी दिलाते हैं। यदि आप विश्वकर्मा पूजा मंत्र (Vishwakarma Puja Mantra) को पूर्ण श्रद्धा और विधि के साथ जपते हैं, तो भगवान विश्वकर्मा की कृपा अवश्य प्राप्त होती है।
इस लेख में हम आपके लिए Vishwakarma Puja Mantra In English (Transliteration सहित), विश्वकर्मा मंत्र इन संस्कृत, ध्यान मंत्र, गायत्री मंत्र, हवन मंत्र और आवाहन मंत्र का संपूर्ण संग्रह प्रस्तुत कर रहे हैं।
भगवान विश्वकर्मा कौन हैं?
पुराणों के अनुसार, भगवान विश्वकर्मा ब्रह्मा जी के पुत्र धर्म और धर्म के पुत्र वास्तुदेव के वंश से उत्पन्न हुए। वे सृष्टि के उस महान शिल्पी हैं जिन्होंने स्वर्गलोक, सोने की लंका, द्वारका नगरी, हस्तिनापुर और इंद्रप्रस्थ जैसी दिव्य नगरियों का निर्माण किया।
उनके पांच पुत्र हैं:
| पुत्र का नाम | संबंधित धातु / सामग्री |
|---|---|
| मनु | लोहा (Iron) |
| मय | लकड़ी (Wood) |
| त्वष्टा | कांसा और तांबा (Bronze & Copper) |
| शिल्पी | ईंट (Brick) |
| दैवज्ञ | सोना और चांदी (Gold & Silver) |
भगवान विश्वकर्मा एक मुख, चार मुख या पंचमुख रूप में, द्विभुज, चतुर्भुज या दशभुज के साथ विराजमान हैं। उनका स्वरूप अत्यंत तेजस्वी और कल्याणकारी है।
विश्वकर्मा पूजा मंत्र | Vishwakarma Puja Mantra
Vishwakarma Puja Mantra पूजा सत्र के आरंभ में पढ़ा जाता है। यह मंत्र भगवान विश्वकर्मा को समर्पित करते हुए उनकी उपस्थिति का आह्वान करता है।
संस्कृत पाठ
ओम आधार शक्तपे नम:
ओम कूमयि नम:
ओम अनन्तम नम:
पृथिव्यै नम:।
ऊं श्री सृष्टतनया सर्वसिद्धया विश्वकर्माया नमो नमः।
Vishwakarma Puja Mantra In English (Transliteration)
Om Aadhaar Shaktape Namah
Om Koomayai Namah
Om Anantam Namah
Prithivyai Namah।
Om Shri Srishta-tanaya Sarva-siddhaya Vishwakarmaya Namo Namah।
शब्दार्थ (Word Meaning)
| संस्कृत शब्द | हिंदी अर्थ |
|---|---|
| आधार शक्त | सबका आधार और शक्ति के देवता |
| कूमयि | कूर्म (कछुए) के समान धारणकर्ता |
| अनन्तम | अनंत, जिनका कोई अंत नहीं |
| पृथिव्यै | पृथ्वी को |
| सृष्टतनया | सृष्टि के पुत्र |
| सर्वसिद्धया | सभी सिद्धियों के दाता |
| विश्वकर्माया | विश्वकर्मा जी को |
| नमो नमः | बारंबार नमस्कार |
सरल अर्थ
“हे भगवान विश्वकर्मा! आप सृष्टि के आधार हैं, अनंत हैं, और सभी सिद्धियों के दाता हैं। आपको बारंबार नमस्कार है।”
विश्वकर्मा ध्यान मंत्र | Vishwakarma Dhyan Mantra
विश्वकर्मा ध्यान मंत्र (Vishwakarma Dhyan Mantra) पूजा से पहले मन को एकाग्र करने और भगवान का ध्यान करने के लिए पढ़ा जाता है। यह मंत्र साधक को भगवान विश्वकर्मा के दिव्य स्वरूप में मन लगाने में सहायता करता है।
संस्कृत पाठ
नारायणाब्ज-जनितस्य विधेः सुतस्य,
धर्मात्मजस्य गृहवास्तुसुतं वरेण्यम्।
स्वर्गादिलोकरचनाकुशलं तमद्य,
श्रीविश्वकर्मविश्रुतं सततं स्मराम॥
दंशपाल महावीर! सुचित्रकर्मकारक।
विश्वकृत् विश्वधृक् त्वं च वसनामानदण्डधृक्॥
देवशिल्पिन् महाभाग देवानां कार्यसाधकः।
विश्वकर्मन्! नमस्तुभ्यं सर्वाभीष्टप्रदायक!॥
नमामि विश्वकर्माणं द्विभुजं विश्ववन्दिनम्।
गृहवास्तु-विधातारं महाबलपराक्रमम्॥
प्रसीद विश्वकर्मस्त्वं शिल्पविद्याविशारद।
दण्डपाणे! नमस्तुभ्यं तेजोमूर्त्तधर प्रभो!॥
Vishwakarma Dhyan Mantra In English (Transliteration)
Narayanabja-janitasya vidheh sutasya,
Dharmatmajasya grihavastusu tam varenyam।
Svargadilokarachanakushalam tamadya,
Shri Vishwakarma-vishrutam satatam smarami॥
Danshapala Mahaveera! Suchitrakarmakaaraka।
Vishwakrit Vishwadhruk tvam cha vasanamaanadandadhrik॥
Devashilpin Mahabhaga Devanam Karyasadhakah।
Vishwakarman! Namastubhyam Sarvabhishthapradayaka!॥
Namami Vishwakarmanam Dvibhujam Vishwavandanam।
Grihavastuvidhataram Mahabala-Parakramam॥
Praseeda Vishwakarmastavam Shilpavidyavisharada।
Dandapane! Namastubhyam Tejomurttadhara Prabho!॥
सरल अर्थ
“हे श्री विश्वकर्मा! आप नारायण के नाभि-कमल से उत्पन्न ब्रह्मा के पुत्र और धर्म के वंशज हैं। आपने स्वर्ग आदि समस्त लोकों का निर्माण किया। हे देवताओं के शिल्पी! आप विश्व के निर्माणकर्ता, पालनकर्ता और सर्वशक्तिमान हैं। हे द्विभुज विश्ववंदित देव! आपको मेरा बारंबार प्रणाम है।”
विश्वकर्मा मंत्र इन संस्कृत | Vishwakarma Mantra In Sanskrit (वैदिक श्लोक)
यह विश्वकर्मा मंत्र ऋग्वेद की परंपरा से आया हुआ वैदिक मंत्र है। इसे Vishwakarma Mantra In Sanskrit के रूप में पूजा में विशेष स्थान प्राप्त है।
संस्कृत पाठ
ॐ विश्व कर्मन् हविषा वावृधान,
स्वयं यजस्व पृथिवीमुतद्याम्।
मह्यान्त्वन्येऽभित गुं सपत्ना
इहाऽस्माकं मघवा सूरिरस्तु॥
Transliteration In English
Om Vishwa Karman Havisha Vavridhana,
Svayam Yajasva Prithivimutadyam।
Mahyantvanyebhita gum Sapatna
Ihasmakam Maghava Soorir-astu॥
शब्दार्थ (Word Meaning)
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| विश्व कर्मन् | सृष्टि के निर्माणकर्ता |
| हविषा | हवि (यज्ञ-सामग्री) द्वारा |
| वावृधान | जो बढ़ते हैं, जो समृद्ध होते हैं |
| स्वयं यजस्व | स्वयं यज्ञ करें |
| पृथिवीमुतद्याम् | पृथ्वी और आकाश को |
| सपत्ना | शत्रुओं को |
| मघवा | ऐश्वर्यशाली देवता |
| सूरिरस्तु | हमारे रक्षक बनें |
सरल अर्थ
“हे विश्वकर्मा! यज्ञ की हवि से आप स्वयं तृप्त हों। पृथ्वी और स्वर्ग पर आप स्वयं विराजमान हों। हमारे शत्रुओं को दूर करें और हमारे रक्षक व पोषक बनें।”
विश्वकर्मा आवाहन मंत्र | Avahan Mantra
पूजा में सर्वप्रथम देवता का आह्वान किया जाता है। विश्वकर्मा आवाहन मंत्र द्वारा भगवान विश्वकर्मा को पूजास्थल पर आमंत्रित किया जाता है।
संस्कृत पाठ
आवाहयामि देवेशं विश्वकर्माणमीश्वरम्।
मूर्त्ताऽमूर्त्तकरं देवं सर्वकर्त्तारमद्भुतम्॥
त्रैलोक्य-सूत्रकर्त्तारं द्विभुजं विश्वदर्शितम्।
आगच्छ विश्वकर्मस्त्वं यज्ञेऽस्मिन् सन्निधो भव॥
Transliteration In English
Aavahayami Devesha Vishwakarmanam Ishwaram।
Moortaamoorttakaram Devam Sarvakartaramadbhutam॥
Trailokya-Sutrakarttaram Dvibhujam Vishwadarshitam।
Aagaccha Vishwakarmastvam Yagneasmin Sannidhau Bhava॥
सरल अर्थ
“हे देवाधिपति विश्वकर्मा! आप मूर्त और अमूर्त दोनों रूपों के निर्माता हैं, सबके कर्ता और अद्भुत देव हैं। तीनों लोकों के सूत्रधार और द्विभुज रूप में विश्व को दर्शन देने वाले हैं। हे विश्वकर्मा! कृपया इस यज्ञ में पधारें और यहां विराजमान हों।”
विश्वकर्मा प्रार्थना मंत्र | Prarthana Mantra
संस्कृत पाठ
नमामि विश्वकर्माणं द्विभुजं विश्ववन्दिनम्।
गृहवास्तु-विधातारं महाबलपराक्रमम्॥
प्रसीद विश्वकर्मस्त्वं शिल्पविद्याविशारद।
दण्डपाणे! नमस्तुभ्यं तेजोमूर्त्तधर प्रभो!॥
सरल अर्थ
“हे विश्वकर्मा! मैं आपको नमस्कार करता हूं। आप द्विभुज, विश्ववंदित और गृहवास्तु के विधाता हैं। आप महाबली और पराक्रमी हैं। हे शिल्पविद्या में निपुण प्रभु! आप हम पर प्रसन्न हों। हे तेजस्वी दंडपाणि! आपको मेरा नमस्कार है।”
विश्वकर्मा गायत्री मंत्र | Vishwakarma Gayatri Mantra
Vishwakarma Gayatri Mantra अत्यंत शक्तिशाली मंत्र है जो साधक की बुद्धि, कौशल और कार्यसिद्धि के लिए जपा जाता है। यह पांच प्रकार से उपलब्ध है:
संस्कृत पाठ
ॐ चतुर्भुजाय विदमहे, हंसवाहनाय धीमहि।
तन्नो विश्वकर्मा प्रचोदयात्॥ 1
ॐ अनन्ताय विदमहे, विश्वरूपाय धीमहि।
तन्नो विश्वकर्मा प्रचोदयात्॥ 2
ॐ प्रजापतये विदमहे, पुरुषाय धीमहि।
तन्नो विश्वकर्मा प्रचोदयात्॥ 3
ॐ सर्वेश्वराय विदमहे, विश्वरक्षकाय धीमहि।
तन्नो विश्वकर्मा प्रचोदयात्॥ 4
ॐ सर्वरूपाय विदमहे, विश्वकर्मणे धीमहि।
तन्नो विश्वकर्मा प्रचोदयात्॥ 5
Vishwakarma Gayatri Mantra In English (Transliteration)
Om Chaturbhujaya Vidmahe, Hamsavahanaya Dhimahi।
Tanno Vishwakarma Prachodayat॥ 1
Om Anantaya Vidmahe, Vishwarupaya Dhimahi।
Tanno Vishwakarma Prachodayat॥ 2
Om Prajapataye Vidmahe, Purushaya Dhimahi।
Tanno Vishwakarma Prachodayat॥ 3
Om Sarveshwaraya Vidmahe, Vishwarakshakaya Dhimahi।
Tanno Vishwakarma Prachodayat॥ 4
Om Sarvarupaya Vidmahe, Vishwakarmane Dhimahi।
Tanno Vishwakarma Prachodayat॥ 5
शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| विदमहे | हम जानते हैं, हम ध्यान करते हैं |
| धीमहि | हम मन में धारण करते हैं |
| प्रचोदयात् | वे हमें प्रेरित करें |
| चतुर्भुजाय | चार भुजाओं वाले |
| हंसवाहनाय | हंस पर विराजमान |
| अनन्ताय | अनंत रूप वाले |
| प्रजापतये | प्रजा के पालक |
| विश्वरक्षकाय | विश्व के रक्षक |
सरल अर्थ
“हम चतुर्भुज, हंसवाहन भगवान विश्वकर्मा को जानते हैं और उनका ध्यान करते हैं। वे हमारी बुद्धि और कर्म को सही दिशा में प्रेरित करें। हम अनंत, विश्वरूप, सर्वेश्वर और विश्वरक्षक भगवान विश्वकर्मा का ध्यान करते हैं। वे हम सबको शुभ मार्ग पर चलने की प्रेरणा दें।”
विश्वकर्मा हवन मंत्र | Havan Mantra
विश्वकर्मा हवन मंत्र यज्ञ और हवन के समय प्रयुक्त होता है। इसे मूल मंत्र भी कहा जाता है।
संस्कृत पाठ
ॐ विश्वकर्मणे नमः स्वाहा।
Transliteration In English
Om Vishwakarmane Namah Swaha।
जप विधि
इस मंत्र का हवन कुंड में अग्नि के सामने 108 बार जप किया जाता है। प्रत्येक जप के साथ घी और लकड़ी की आहुति दी जाती है। यह मंत्र अत्यंत सिद्धदायक है और भगवान विश्वकर्मा की विशेष कृपा प्राप्त कराता है।
विश्वकर्मा स्तुति मंत्र | Vishwakarma Stuti Mantra
यह स्तुति मंत्र भगवान विश्वकर्मा की महिमा का गुणगान करता है और भक्त के मन में उनके प्रति गहरी श्रद्धा उत्पन्न करता है:
विश्वकर्मा प्रभु नित्य नमनकर सुखदायकम्
ब्रह्मांड अमित जगत सुखकर सर्व सुर वर नायकम्
त्रिनेत्र आनन जलज लोचन पद्मासित कर कोमलं
कंचन मुकुट सिर तिलक चंदन चारु कर्ण सुकुण्डलम्
पुखराज हाटक हरित मणिहिय हार दिव्य मनोहरम्
कटिपित अम्बर ललित सुंदर शुभ बपु शोभाकरम्
भजु पंचमुख अविनव अलौकिक विश्वरूप विरोचनम्
अनुपम चिरंतन अमल छवि मुनि संतजन मनरंजनम्
जय भक्त वत्सल भय विनाशक करुणामय अखिलेश्वरं
मम काम क्रोध मद् लोभ हर मन मुदितकर शिल्पेश्वरं।
सरल अर्थ
“हे विश्वकर्मा प्रभु! आप ब्रह्मांड के सुखदाता, देवताओं के नायक हैं। आपका मुख कमल के समान है, नेत्र कमल-सदृश हैं, और आपके मस्तक पर स्वर्ण मुकुट तथा चंदन का तिलक शोभायमान है। आपका स्वरूप पंचमुखी और अलौकिक है। हे शिल्पेश्वर! मेरे काम, क्रोध, मद और लोभ को दूर कर मेरे मन को आनंदमय बनाएं।”
देव-आशीर्वाद | Devotional Blessing Prayer
हे भगवान विश्वकर्मा! आप जगत के शिल्पी हैं, सृष्टि के निर्माणकर्ता हैं। आपके चरणों में हमारा सादर प्रणाम है। कृपया हमारे हाथों को कुशलता प्रदान करें, हमारे मन को सृजनशील बनाएं और हमारे कार्य में सफलता दें। जिस प्रकार आपने स्वर्गलोक और द्वारका की रचना की, उसी प्रकार हमारे जीवन को भी सुंदर और समृद्ध बनाएं।
ॐ विश्वकर्मणे नमः।
नमामि विश्वकर्माणं द्विभुजं विश्ववन्दिनम्।
Vishwakarma Puja Mantra Vidhi | विश्वकर्मा पूजा विधि
Vishwakarma Puja Mantra Vidhi को सही क्रम से करने पर पूजा का पूर्ण फल मिलता है। सही विधि इस प्रकार है:
- स्नान और शुद्धि : प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थल की सफाई : कारखाने, दुकान या कार्यस्थल को स्वच्छ करें।
- औजारों की सफाई : मशीनें, औजार और उपकरणों को साफ करके पूजा स्थल पर सजाएं।
- दीप प्रज्वलन : घी का दीपक जलाएं।
- आवाहन मंत्र : विश्वकर्मा आवाहन मंत्र से भगवान का आह्वान करें।
- ध्यान मंत्र : विश्वकर्मा ध्यान मंत्र का पाठ करें।
- पूजा मंत्र : विश्वकर्मा पूजा मंत्र से षोडशोपचार पूजन करें।
- गायत्री मंत्र : Vishwakarma Gayatri Mantra का 108 बार जप करें।
- हवन : हवन मंत्र से आहुतियां दें।
- आरती और प्रसाद वितरण।
विश्वकर्मा ध्यान मंत्र का आध्यात्मिक महत्व | Spiritual Importance
विश्वकर्मा ध्यान मंत्र केवल एक पूजा-मंत्र नहीं है, यह एक गहन आध्यात्मिक साधना है। इस मंत्र के माध्यम से साधक यह अनुभव करता है कि सृष्टि का हर निर्माण, हर शिल्प, हर उद्यम ईश्वर की ही रचना है।
भगवान विश्वकर्मा का ध्यान करने से यह बोध होता है कि मनुष्य का हर कार्य, चाहे वह लोहार हो, बढ़ई हो, इंजीनियर हो या वास्तुकार, वह सब परमात्मा की सेवा का ही एक रूप है। जब हम Vishwakarma Mantra का जप करते हैं, तो हमारे भीतर कर्म के प्रति श्रद्धा और समर्पण का भाव जागृत होता है।
मंत्र जपने का उचित समय | When To Recite
Vishwakarma Puja Mantra जपने के लिए कुछ विशेष समय और अवसर अत्यंत शुभ माने गए हैं:
नित्य जप के लिए : प्रतिदिन प्रातःकाल कार्य आरंभ करने से पहले।
विशेष अवसरों पर :
- विश्वकर्मा पूजा (कन्या संक्रांति) के दिन
- नई मशीन, उपकरण या औजार खरीदने पर
- कोई नया व्यवसाय आरंभ करते समय
- कारखाने या दुकान का उद्घाटन करते समय
- किसी नए भवन या कार्यालय में प्रवेश करते समय
शुभ मुहूर्त : प्रातःकाल ब्राह्ममुहूर्त में अथवा उगते सूर्य के सामने बैठकर विश्वकर्मा मंत्र का जप करना विशेष फलदायी होता है।
Vishwakarma Puja Mantra के आध्यात्मिक लाभ | Spiritual Benefits
Vishwakarma Puja Mantra के नियमित पाठ और जप से निम्नलिखित आध्यात्मिक एवं व्यावहारिक लाभ प्राप्त होते हैं:
कार्यसिद्धि और सफलता : कार्यस्थल पर सफलता मिलती है और उद्योग में उन्नति होती है।
सुरक्षा और संरक्षण : मशीनों, औजारों और कर्मचारियों की सुरक्षा होती है।
रचनात्मकता का विकास : शिल्पकला और रचनात्मक कार्यों में नई ऊर्जा और प्रेरणा आती है।
मन की शांति : मन में स्थिरता और शांति का अनुभव होता है।
सकारात्मक ऊर्जा : कार्यस्थल पर सकारात्मक वातावरण बनता है।
ऋद्धि-सिद्धि की प्राप्ति : जो भक्त विश्वकर्मा मंत्र इन संस्कृत का श्रद्धापूर्वक पाठ करते हैं, उन्हें ऋद्धि-सिद्धि की प्राप्ति होती है।
निष्कर्ष | Devotional Conclusion
भगवान विश्वकर्मा की भक्ति केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, यह कर्म के प्रति समर्पण का उत्सव है। Vishwakarma Puja Mantra हमें यह सिखाता है कि हमारा हर कार्य परमात्मा की उपासना का ही एक रूप है। जब हम विश्वकर्मा ध्यान मंत्र का जप करते हैं, तो हमारे भीतर श्रेष्ठ कर्म करने की शक्ति जागृत होती है।
Vishwakarma Mantra In Sanskrit के माध्यम से हम उस दिव्य चेतना से जुड़ते हैं जिसने इस विश्व की रचना की। विश्वकर्मा मंत्र का श्रद्धापूर्वक पाठ करें, अपने औजारों और कार्यस्थल को पवित्र मानें, और भगवान विश्वकर्मा की कृपा से अपने जीवन को सफल, समृद्ध और आनंदमय बनाएं।
हे विश्वकर्मा प्रभु! हम सबके कर्म को सफल करें, हमारे हाथों को कुशल बनाएं और हमारे जीवन में सुख-समृद्धि का वास करें।
ॐ विश्वकर्मणे नमः।
? FAQs – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. Vishwakarma Puja Mantra क्या है और इसका क्या महत्व है?
Vishwakarma Puja Mantra वह पवित्र मंत्र है जिसके द्वारा भगवान विश्वकर्मा का आह्वान और पूजन किया जाता है। ये मंत्र शिल्पकला, उद्योग और कार्यस्थल की सुरक्षा एवं सफलता के लिए जपे जाते हैं। इनके नियमित पाठ से कार्यसिद्धि और ईश्वरीय कृपा प्राप्त होती है।
2. Vishwakarma Dhyan Mantra कब और कैसे जपना चाहिए?
विश्वकर्मा ध्यान मंत्र (Vishwakarma Dhyan Mantra) प्रतिदिन प्रातःकाल कार्य आरंभ करने से पहले जपना चाहिए। विशेष रूप से विश्वकर्मा पूजा के दिन, नई मशीन या औजार खरीदने पर तथा किसी नए व्यवसाय के आरंभ में इस मंत्र का पाठ अत्यंत लाभकारी होता है।
3. Vishwakarma Mantra In Sanskrit कितनी बार जपना चाहिए?
विश्वकर्मा मंत्र इन संस्कृत को सामान्यतः 108 बार जपना सर्वोत्तम माना जाता है। हवन के समय भी ॐ विश्वकर्मणे नमः स्वाहा मंत्र का 108 बार जप करते हुए आहुतियां दी जाती हैं।
4. Vishwakarma Puja Mantra Vidhi में कौन-कौन से मंत्र शामिल हैं?
Vishwakarma Puja Mantra Vidhi में पांच प्रकार के मंत्र शामिल हैं: आवाहन मंत्र, ध्यान मंत्र, पूजा मंत्र, गायत्री मंत्र और हवन मंत्र (मूल मंत्र)। इन सभी मंत्रों को सही क्रम में जपने पर पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
5. Vishwakarma Puja Mantra In English में क्या अर्थ होता है?
Vishwakarma Puja Mantra In English अनुवाद में भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि के आधार, अनंत शक्ति के स्वामी, सभी सिद्धियों के दाता और शिल्पकला के देवता के रूप में संबोधित किया गया है। ये मंत्र उनकी महिमा का गुणगान करते हैं।
6. क्या विश्वकर्मा पूजा केवल कारखानों और मशीनों के लिए है?
नहीं। विश्वकर्मा पूजा मंत्र का लाभ हर उस व्यक्ति को मिलता है जो किसी भी प्रकार का रचनात्मक कार्य करता है। लोहार, बढ़ई, इंजीनियर, वास्तुकार, कलाकार, सोनार, किसान सभी इस पूजा में शामिल होते हैं। यह पूजा कर्म की पवित्रता का उत्सव है।
🙏 इन मंत्रों और श्लोकों को भी पढ़ना न भूलें:
- Pushpanjali Mantra
- Navgrah Mantra
- Ghorkashtodharan Stotra
- Dhanvantari Mantra
- Shiv Dhyan Mantra
- Dakshinamurthy Stotram In Telugu
- Karthaveeryarjuna Mantra and Stotram
- Vritrasura Stuti
- Annapurna Stotram
- Kanakadhara Stotram
- Om Vasudhare Svaha Mantra
- Om Yakshaya Kuberaya Mantra
- Maa Katyayani Mantra
- Kushmanda Devi Mantra
- Argala Stotram
- Sarva Badha Vinirmukto Mantra
