Maruti Stotra In Marathi हिंदू धर्म के सबसे शक्तिशाली और प्रभावशाली स्तोत्रों में से एक है। यह स्तोत्र भगवान श्री राम के परम भक्त, पवनपुत्र हनुमान जी को समर्पित है। भगवान हनुमान को महाराष्ट्र में “मारुति” के नाम से जाना जाता है, इसीलिए इस स्तोत्र का नाम Maruti Stotra पड़ा।
इस मारुति स्तोत्र की रचना 17वीं शताब्दी में महान संत समर्थ गुरु रामदास जी ने की थी। वे छत्रपति शिवाजी महाराज के आध्यात्मिक गुरु थे और स्वयं हनुमान जी के अनन्य उपासक थे। उनका जन्म महाराष्ट्र में हुआ था, इसलिए उन्होंने यह स्तोत्र मराठी भाषा में रचा। यही कारण है कि Maruti Stotra Marathi के रूप में संपूर्ण महाराष्ट्र और देशभर में इसे विशेष सम्मान और श्रद्धा के साथ पढ़ा जाता है।
गोस्वामी तुलसीदास जी ने हनुमान चालीसा में लिखा है: “नासै रोग, हरै सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलवीरा।” अर्थात जो व्यक्ति सच्चे हृदय से हनुमान जी का स्मरण करता है, उसके सभी रोग और पीड़ाएं नष्ट हो जाती हैं। Shree Maruti Stotra का पाठ इसी भक्तिभाव को और गहरा कर देता है।
Maruti Stotra In Marathi – संपूर्ण पाठ
नीचे समर्थ गुरु रामदास जी रचित मारुति स्तोत्र का संपूर्ण मराठी पाठ दिया गया है। इसे ध्यानपूर्वक और श्रद्धाभाव से पढ़ें।
भीमरूपी महारुद्रा, वज्र हनुमान मारुती।
वनारी अंजनीसूता, रामदूता प्रभंजना ।।1।।
महाबळी प्राणदाता, सकळां उठवीं बळें।
सौख्यकारी शोकहर्ता, धूर्त वैष्णव गायका ।।2।।
दिनानाथा हरीरूपा, सुंदरा जगदंतरा।
पाताळ देवता हंता, भव्य सिंदूर लेपना ।।3।।
लोकनाथा जगन्नाथा, प्राणनाथा पुरातना।
पुण्यवंता पुण्यशीला, पावना परतोषका ।।4।।
ध्वजांगे उचली बाहू, आवेशें लोटिला पुढें।
काळाग्नी काळरुद्राग्नी, देखतां कांपती भयें ।।5।।
ब्रह्मांड माईला नेणों, आवळें दंतपंगती।
नेत्राग्नी चालिल्या ज्वाळा, भृकुटी त्राहिटिल्या बळें ।।6।।
पुच्छ तें मुरडिलें माथां, किरीटी कुंडलें बरीं।
सुवर्णकटीकासोटी, घंटा किंकिणी नागरा ।।7।।
ठकारे पर्वताऐसा, नेटका सडपातळू।
चपळांग पाहतां मोठें, महाविद्युल्लतेपरी ।।8।।
कोटिच्या कोटि उड्डाणें, झेपावे उत्तरेकडे।
मंद्राद्रीसारिखा द्रोणू, क्रोधे उत्पाटिला बळें ।।9।।
आणिता मागुता नेला, गेला आला मनोगती।
मनासी टाकिलें मागें, गतीस तूळणा नसे ।।10।।
अणूपासोनि ब्रह्मांडा, येवढा होत जातसे।
तयासी तुळणा कोठें, मेरुमंदार धाकुटें ।।11।।
ब्रह्मांडाभोंवते वेढे, वज्रपुच्छ घालूं शके।
तयासि तूळणा कैचीं, ब्रह्मांडीं पाहतां नसे ।।12।।
आरक्त देखिलें डोळां, गिळीलें सूर्यमंडळा।
वाढतां वाढतां वाढे, भेदिलें शून्यमंडळा ।।13।।
धनधान्यपशुवृद्धी, पुत्रपौत्र समग्रही।
पावती रूपविद्यादी, स्तोत्र पाठें करूनियां ।।14।।
भूतप्रेतसमंधादी, रोगव्याधी समस्तही।
नासती तूटती चिंता, आनंदें भीमदर्शनें ।।15।।
हे धरा पंधराश्लोकी, लाभली शोभली बरी।
दृढदेहो निसंदेहो, संख्या चंद्रकळागुणें ।।16।।
रामदासी अग्रगण्यू, कपिकुळासी मंडण।
रामरूपी अंतरात्मा, दर्शनें दोष नासती ।।17।।
Maruti Stotra का रोमन लिप्यंतरण (Transliteration)
Bhimarupi Maharudra, Vajra Hanuman Maruti.
Vanari Anjanisuta, Ramduta Prabhanjana. ||1||
Mahabali Pranadaata, Sakalan Uthavi Bale.
Saukhyakari Shokhaharta, Dhurta Vaishnav Gaayaka. ||2||
Dinanatha Hariruupa, Sundara Jagadantara.
Patal Devata Hanta, Bhavya Sindura Lepana. ||3||
Lokanatha Jagannatha, Prananatha Puratana.
Punyavanta Punyashila, Pavana Paratoshaka. ||4||
Dhwajange Uchali Bahu, Aveshe Lotila Pudhe.
Kalagni Kalarudraki, Dekhata Kampati Bhaye. ||5||
Brahmanda Maila Neno, Avale Dantapangati.
Netragni Chalilya Jwala, Bhrikuti Trahitilya Bale. ||6||
Puchchha Te Murdile Matha, Kiriti Kundule Bari.
Suvarnkatikasoti, Ghanta Kinkini Nagara. ||7||
Thakare Parvataisaa, Netaka Sadapatalu.
Chapalanga Pahata Mothe, Mahavidyullatepari. ||8||
Kotichya Koti Uddane, Jhepave Uttarekade.
Mandradrisarikha Dronu, Krodhe Utpatila Bale. ||9||
Anita Maguta Nela, Gela Ala Manogati.
Manasi Takile Mage, Gatisa Tulana Nase. ||10||
Anupasoni Brahmanda, Yevadha Hot Jatase.
Tayasi Tulana Kothe, Merumandara Dhakute. ||11||
Brahmandabhowte Vedhe, Vajrapuchchha Ghalu Shake.
Tayasi Tulana Kaichi, Brahmandi Pahata Nase. ||12||
Arakta Dekhile Dola, Gilile Suryamandala.
Vadhata Vadhata Vadhe, Bhedile Shunyamandala. ||13||
Dhana Dhanya Pashuvruddhi, Putraputra Samagrahi.
Pavati Rupavidyadi, Stotra Pathe Karuniya. ||14||
Bhutapreta Samandadi, Rogavyadhi Samastahi.
Nasati Tutati Chinta, Anande Bhimadarshane. ||15||
He Dhara Pandhrashloki, Labhali Shobhali Bari.
Dridhadecho Nisandeho, Sankhya Chandrakalaguṇe. ||16||
Ramdasi Agraganu, Kapikulasi Mandana.
Ramrupi Antaratma, Darshane Dosh Nasati. ||17||
श्लोकों का हिंदी अर्थ (Meaning in Hindi)
Maruti Stotra In Marathi के प्रत्येक श्लोक में हनुमान जी के अलग-अलग दिव्य स्वरूप और गुणों का वर्णन किया गया है। नीचे प्रत्येक श्लोक का सरल हिंदी में अर्थ दिया गया है।
श्लोक 1: हे भीमरूपी महारुद्र! हे वज्र के समान बलशाली हनुमान मारुती! हे वनवासी, अंजनी के पुत्र, राम के दूत और प्रचंड वायुपुत्र, आपको नमस्कार है।
श्लोक 2: हे महाबली प्राणदाता! आप सभी को बल देते हैं। आप सुख देने वाले और शोक हरने वाले हैं। आप वैष्णव भक्तों के हृदय में गाए जाते हैं।
श्लोक 3: हे दीनों के नाथ! हे हरि के स्वरूप! हे जगत के सुंदर रक्षक! आप पाताल के दुष्ट देवताओं का नाश करने वाले और दिव्य सिंदूर से सुशोभित हैं।
श्लोक 4: हे लोकों के नाथ! हे जगन्नाथ! हे प्राणों के स्वामी! आप सनातन हैं, पुण्यवान हैं, पवित्र हैं और अपने भक्तों को संतुष्ट करने वाले हैं।
श्लोक 5: आप ध्वज की तरह भुजाएं उठाकर वेग से आगे बढ़ते हैं। आपको देखकर काल की अग्नि और रुद्र की ज्वाला भी भय से कांप उठती है।
श्लोक 6: आपके दांत जबड़े को आपस में भींचते हैं, नेत्रों से अग्नि की ज्वालाएं निकलती हैं और आपकी भृकुटी बड़े वेग से तनी होती है।
श्लोक 7: आपकी पूंछ सिर पर मुकुट की तरह कुंडलित है। कानों में कुंडल हैं, कमर में सोने की कटिबंध है, गले में घंटियां और किंकिणी की झनकार है।
श्लोक 8: आपका शरीर पर्वत के समान विशाल और सुगठित है। आपके तीव्र अंग बिजली की चमक जैसे दिखते हैं।
श्लोक 9: आप करोड़ों उड़ानें भरते हुए उत्तर दिशा की ओर झपट्टा मारते हैं। क्रोध में आकर आपने मंदाराचल जैसे बड़े पर्वत को उखाड़ दिया।
श्लोक 10: आप संजीवनी लेकर वापस आए, मन की गति से चले और मन को भी पीछे छोड़ दिया। आपकी गति की तुलना किसी से नहीं की जा सकती।
श्लोक 11: आप अणु से लेकर ब्रह्मांड तक किसी भी आकार में बदल सकते हैं। आपकी तुलना कहां? मेरु और मंदार पर्वत भी आपके सामने छोटे हैं।
श्लोक 12: आप अपनी वज्र जैसी पूंछ से पूरे ब्रह्मांड को लपेट सकते हैं। ब्रह्मांड में आपकी तुलना करने वाला कोई नहीं है।
श्लोक 13: आपने लाल नेत्रों से सूर्य को निगल लिया था। आप बढ़ते-बढ़ते शून्य मंडल को भी भेद देते हैं।
श्लोक 14: जो भक्त इस मारुति स्तोत्र का पाठ करते हैं, उन्हें धन, धान्य, पशु, पुत्र-पौत्र, सौंदर्य और विद्या की प्राप्ति होती है।
श्लोक 15: भूत-प्रेत, समंध, रोग-व्याधि, चिंता सभी नष्ट होती हैं। भीम स्वरूप हनुमान जी के दर्शन से आनंद की प्राप्ति होती है।
श्लोक 16: ये पंद्रह श्लोक अत्यंत लाभकारी और शोभायमान हैं। जो इन्हें दृढ़ भाव से पढ़ता है, उसे संदेह नहीं रहता।
श्लोक 17: रामदास जी के शिष्यों में अग्रगण्य, वानर कुल के आभूषण, राम स्वरूप अंतरात्मा के दर्शन मात्र से सभी दोष नष्ट हो जाते हैं।
श्री मारुति स्तोत्रम् (संस्कृत पाठ)
समर्थ गुरु रामदास जी ने एक अन्य अत्यंत प्रभावशाली Maruti Stotra भी रचा है जो संस्कृत में है। इसे Maruti Stotram के नाम से जाना जाता है। यह स्तोत्र भी Hanuman Stotra की परंपरा में एक विशेष स्थान रखता है।
ॐ नमो भगवते विचित्रवीरहनुमते प्रलयकालानलप्रभाप्रज्वलनाय।
प्रतापवज्रदेहाय। अंजनीगर्भसंभूताय।
प्रकटविक्रमवीरदैत्यदानवयक्षरक्षोगणग्रहबंधनाय।
भूतग्रहबंधनाय। प्रेतग्रहबंधनाय। पिशाचग्रहबंधनाय।
शाकिनीडाकिनीग्रहबंधनाय। काकिनीकामिनीग्रहबंधनाय।
ब्रह्मग्रहबंधनाय। ब्रह्मराक्षसग्रहबंधनाय। चोरग्रहबंधनाय।
मारीग्रहबंधनाय। एहि एहि। आगच्छ आगच्छ। आवेशय आवेशय।
मम हृदये प्रवेशय प्रवेशय। स्फुर स्फुर। प्रस्फुर प्रस्फुर। सत्यं कथय।
व्याघ्रमुखबंधन सर्पमुखबंधन राजमुखबंधन नारीमुखबंधन सभामुखबंधन
शत्रुमुखबंधन सर्वमुखबंधन लंकाप्रासादभंजन। अमुकं मे वशमानय।
क्लीं क्लीं क्लीं ह्रीं श्रीं श्रीं राजानं वशमानय।
श्रीं ह्रीं क्लीं स्त्रिय आकर्षय आकर्षय शत्रुन्मर्दय मर्दय मारय मारय
चूर्णय चूर्णय खे खे
श्रीरामचंद्राज्ञया मम कार्यसिद्धिं कुरु कुरु
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रैं ह्रौं ह्रः फट् स्वाहा
विचित्रवीर हनुमत् मम सर्वशत्रून् भस्मीकुरु कुरु।
हन हन हुं फट् स्वाहा।।
इस संस्कृत Maruti Stotra का 1100 बार जप करने से सभी शत्रु वश में होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं, ऐसा शास्त्रों में वर्णित है।
Maruti Stotra का आध्यात्मिक महत्व
Maruti Stotra Marathi केवल एक स्तोत्र नहीं है, यह एक संपूर्ण आध्यात्मिक अनुभव है। समर्थ गुरु रामदास जी ने इसमें हनुमान जी के तीन मुख्य स्वरूपों का वर्णन किया है।
भीमरूपी स्वरूप में वे महाशक्तिशाली, रुद्र के अवतार और वज्र के समान अजेय हैं। यह स्वरूप यह संदेश देता है कि ईश्वर की शरण में जाने वाले भक्त को कोई भी शत्रु या संकट नहीं हरा सकता।
भक्त स्वरूप में वे राम के परम दूत हैं, जो अपने प्रभु की भक्ति में सदा तत्पर रहते हैं। यह हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति ही जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य है।
कल्याणकारी स्वरूप में वे दीनों के नाथ, रोगों के हर्ता और भक्तों के सभी कष्ट दूर करने वाले हैं। इस Hanuman Stotra का पाठ करने से मन में यह विश्वास दृढ़ होता है कि हनुमान जी सदा रक्षा करेंगे।
मारुति स्तोत्र की विशेषता यह भी है कि इसमें वैदिक ज्योतिष की दृष्टि से भी इसका महत्व है। मंगल, शनि, राहु और केतु ये चारों क्रूर ग्रह माने जाते हैं। जिन जातकों की कुंडली में ये ग्रह पीड़ित होते हैं, उनके जीवन में कठिनाइयां आती रहती हैं। नियमित रूप से Shree Maruti Stotra का पाठ इन ग्रह दोषों को शांत करने में अत्यंत सहायक माना गया है।
Maruti Stotra कब और कैसे पढ़ें
Maruti Stotra In Marathi का पाठ करने की एक सुनिश्चित विधि है। इसका पालन करने से पाठ का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
पाठ का उचित समय: प्रातःकाल सूर्योदय के बाद या संध्या वंदन के समय मारुति स्तोत्र का पाठ सर्वोत्तम माना जाता है। मंगलवार और शनिवार को इसका पाठ विशेष रूप से फलदायी होता है।
पाठ की विधि: पहले स्वयं को शुद्ध करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र के सामने आसन बिछाकर बैठें। विधिवत पूजा-अर्चना करें, दीपक और अगरबत्ती जलाएं। इसके बाद श्रद्धापूर्वक पाठ प्रारंभ करें। पाठ करते समय मन में हनुमान जी का ध्यान करते रहें। आवाज लयबद्ध और मध्यम रखें, अत्यधिक ऊंची आवाज में पाठ न करें।
जप संख्या: फल प्राप्ति के लिए इस Maruti Stotra का पाठ 1100 बार करने का विधान बताया गया है। दैनिक पाठ के लिए प्रतिदिन एक बार भी पर्याप्त है।
परहेज: पाठ करने वाले भक्त को मांसाहार, मदिरा और अन्य तामसिक पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।
Maruti Stotra के आध्यात्मिक लाभ (Spiritual Benefits)
Maruti Stotra In Marathi के नियमित पाठ से निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:
शारीरिक और मानसिक शक्ति: इस Hanuman Stotra के पाठ से साधक की शारीरिक और मानसिक शक्ति में वृद्धि होती है। मन में साहस और आत्मविश्वास का संचार होता है।
भय का नाश: नियमित पाठ से हृदय से सभी प्रकार के भय और आशंकाएं दूर हो जाती हैं।
नकारात्मक शक्तियों से रक्षा: मारुति स्तोत्र के पाठ से साधक के चारों ओर एक सकारात्मक आवरण बन जाता है। भूत-प्रेत और नकारात्मक ऊर्जाएं पास नहीं आतीं।
रोग और व्याधि से मुक्ति: हनुमान जी की कृपा से शरीर में रोग नहीं टिकते और साधक निरोगी रहता है।
धन-धान्य की वृद्धि: Shree Maruti Stotra के पाठ से घर में सुख-समृद्धि और धन-धान्य की वृद्धि होती है।
संकटों से मुक्ति: जीवन में आने वाले सभी संकट और कठिनाइयां हनुमान जी की कृपा से दूर हो जाती हैं।
मन की शांति: पाठ करने के बाद मन में असीम शांति और प्रसन्नता का अनुभव होता है।
ग्रह दोषों से राहत: वैदिक ज्योतिष के अनुसार Maruti Stotra का नियमित पाठ मंगल, शनि, राहु और केतु के दोषों को शांत करता है।
भक्ति और प्रार्थना
हे बजरंगबली! हे पवनपुत्र! आपकी अपार करुणा और शक्ति का कोई पार नहीं। जैसे आपने माता सीता की खोज में समुद्र लांघा, लंका में आग लगाई और संजीवनी लाकर लक्ष्मण जी के प्राण बचाए, उसी प्रकार हमारे जीवन के सभी संकट और कठिनाइयां दूर कीजिए।
हे मारुति! हे महाबली! हमें शक्ति दीजिए, हमें साहस दीजिए और हमारे मन में राम नाम की भक्ति सदा बनाए रखिए। आपके चरणों में हमारा शत-शत प्रणाम।
जय श्री राम! जय हनुमान!
Maruti Stotra PDF के बारे में
बहुत से भक्त Maruti Stotra PDF डाउनलोड करने की इच्छा रखते हैं ताकि वे इसे कहीं भी और कभी भी आसानी से पढ़ सकें। नीचे दिए गए डाउनलोड लिंक के माध्यम से आप इसका PDF प्राप्त कर सकते हैं। Maruti Stotra In Hindi और मराठी दोनों भाषाओं में यह स्तोत्र उपलब्ध है, जिससे विभिन्न भाषा के श्रद्धालु भी इसका लाभ उठा सकते हैं। इसका नियमित पाठ करें और अपने परिवार व मित्रों के साथ भी साझा करें, ताकि हनुमान जी की कृपा सभी पर बनी रहे।
निष्कर्ष
Maruti Stotra In Marathi एक अमूल्य आध्यात्मिक रत्न है जो समर्थ गुरु रामदास जी की गहरी भक्ति और साधना का परिणाम है। यह मारुति स्तोत्र न केवल मराठी भाषियों के लिए, बल्कि संपूर्ण भारत और विश्वभर के हनुमान भक्तों के लिए एक अमोघ स्तोत्र है।
इस Hanuman Stotra के माध्यम से हम बजरंगबली की असीम शक्ति, उनकी अटूट भक्ति और उनके करुणामय स्वभाव को नमन करते हैं। Shree Maruti Stotra का नियमित पाठ जीवन में शक्ति, शांति, समृद्धि और सुरक्षा का द्वार खोलता है।
हनुमान जी का आशीर्वाद उन सभी भक्तों पर सदा बना रहे जो श्रद्धापूर्वक इस मारुति स्तोत्र का पाठ करते हैं। जो एक बार सच्चे मन से उनकी शरण में आता है, उसे वे कभी निराश नहीं करते।
।। जय बजरंगबली! जय श्री राम! ।।
? अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: Maruti Stotra In Marathi किसने लिखा है?
उत्तर: मारुति स्तोत्र की रचना 17वीं शताब्दी में संत समर्थ गुरु रामदास जी ने की है। वे छत्रपति शिवाजी महाराज के गुरु और हनुमान जी के परम भक्त थे। उन्होंने यह स्तोत्र मुख्यतः मराठी भाषा में रचा इसलिए इसे Maruti Stotra Marathi कहा जाता है।
प्रश्न 2: मारुति स्तोत्र का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
उत्तर: शास्त्रों के अनुसार Maruti Stotra का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए 1100 बार पाठ का विधान है। दैनिक जीवन में प्रतिदिन एक बार पाठ करना भी अत्यंत लाभदायक है। संकट की स्थिति में प्रतिदिन अधिक बार पाठ किया जा सकता है।
प्रश्न 3: Maruti Stotra और Hanuman Stotra में क्या अंतर है?
उत्तर: दोनों एक ही देवता भगवान हनुमान जी को समर्पित हैं। “मारुति” हनुमान जी का एक नाम है जो महाराष्ट्र में विशेष रूप से प्रचलित है। Maruti Stotra की रचना समर्थ गुरु रामदास जी ने मराठी में की है, जबकि Hanuman Stotra एक व्यापक शब्द है जिसमें हनुमान जी से संबंधित सभी स्तोत्र आते हैं।
प्रश्न 4: Maruti Stotra PDF कहां से प्राप्त करें?
उत्तर: Maruti Stotra PDF को आप दिए गए डाउनलोड लिंक से आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। इसे मोबाइल या कंप्यूटर में सुरक्षित रखकर कभी भी पाठ किया जा सकता है।
प्रश्न 5: क्या Maruti Stotra In Hindi में भी पढ़ा जा सकता है?
उत्तर: हां, Maruti Stotra In Hindi में भी पढ़ा जा सकता है। भक्ति में भाषा से अधिक भाव का महत्व होता है। यदि मराठी नहीं आती तो हिंदी में पाठ करने से भी समान फल प्राप्त होता है।
प्रश्न 6: Maruti Stotra का पाठ कौन से दिन करना सबसे उत्तम है?
उत्तर: हनुमान जी की उपासना के लिए मंगलवार और शनिवार का दिन सर्वोत्तम माना जाता है। Shree Maruti Stotra का पाठ इन दोनों दिनों पर विशेष रूप से करना चाहिए। प्रातःकाल या संध्याकाल में पाठ करना सबसे शुभ है।
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