Ekatmata Stotra भारत की राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक अखंडता का उद्बोधक स्तोत्र है। यह संस्कृत भाषा में रचित एक अत्यंत प्रेरणादायक एवं पवित्र स्तोत्र है जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की शाखाओं में प्रतिदिन गाया जाता है।
एकात्मता स्तोत्र में भारत के आदिकाल से लेकर आधुनिक युग तक के महान ऋषियों, वीरों, संतों, विद्वानों, वैज्ञानिकों, माताओं और देवियों के नामों का पाठ किया जाता है। इसमें पवित्र नदियों, पर्वतों, तीर्थस्थलों और धार्मिक ग्रंथों की वंदना भी की गई है।
यह स्तोत्र केवल एक भजन नहीं है, बल्कि यह भारतीय सभ्यता, सनातन धर्म और राष्ट्रीय एकता की जीवंत अभिव्यक्ति है। Ekatmata Stotra in Hindi और संस्कृत में पढ़ने से मन में देशभक्ति, आध्यात्मिकता और राष्ट्रगौरव का संचार होता है।
एकात्मता स्तोत्र के रचयिता कौन हैं?
एकात्मता स्तोत्र के रचयिता श्री लक्ष्मणराव भिड़े (Laxmanrao Bhide) माने जाते हैं, जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े विद्वान थे। इस स्तोत्र को संघ के संस्थापक परंपरा के अनुरूप तैयार किया गया ताकि भारत के प्रत्येक स्वयंसेवक के हृदय में राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक एकता की भावना जागृत हो सके।
यह स्तोत्र संघ की प्रार्थना के रूप में प्रचलित हुआ और आज लाखों भारतीय इसे श्रद्धापूर्वक गाते हैं।
Ekatmata Stotra – सम्पूर्ण संस्कृत पाठ (Complete Sanskrit Text)
नीचे एकात्मता स्तोत्र का सम्पूर्ण संस्कृत पाठ दिया गया है। इसे बिना किसी श्लोक को छोड़े पूर्ण रूप से प्रस्तुत किया गया है:
ॐ सच्चिदानन्दरूपाय नमोऽस्तु परमात्मने।
ज्योतिर्मयस्वरूपाय विश्वमाङ्गल्यमूर्तये ॥ १ ॥
प्रकृतिः पञ्चभूतानि ग्रहा लोकाः स्वरास्तथा।
दिशः कालश्च सर्वेषां सदा कुर्वन्तु मङ्गलम् ॥ २ ॥
रत्नाकराधौतपदां हिमालयकिरीटिनीम्।
ब्रह्मराजर्षिरत्नाढ्यां वन्दे भारतमातरम् ॥ ३ ॥
महेन्द्रो मलयः सह्यो देवतात्मा हिमालयः।
ध्येयो रैवतको विन्ध्यो गिरिश्चारावलिस्तथा ॥ ४ ॥
गङ्गा सरस्वती सिन्धुर्ब्रह्मपुत्रश्च गण्डकी।
कावेरी यमुना रेवा कृष्णा गोदा महानदी ॥ ५ ॥
अयोध्या मथुरा माया काशीकाञ्ची अवन्तिका।
वैशाली द्वारिका ध्येया पुरी तक्षशिला गया ॥ ६ ॥
प्रयागः पाटलीपुत्रं विजयानगरं महत्।
इन्द्रप्रस्थं सोमनाथः तथा अमृतसरः प्रियम् ॥ ७ ॥
चतुर्वेदाः पुराणानि सर्वोपनिषदस्तथा।
रामायणं भारतं च गीता सद्दर्शनानि च ॥ ८ ॥
जैनागमास्त्रिपिटकाः गुरुग्रन्थः सतां गिरः।
एषः ज्ञाननिधिः श्रेष्ठः श्रद्धेयो हृदि सर्वदा ॥ ९ ॥
अरुन्धत्यनसूया च सावित्री जानकी सती।
द्रौपदी कण्णगी गार्गी मीरा दुर्गावती तथा ॥ १० ॥
लक्ष्मीरहल्या चन्नम्मा रुद्रमाम्बा सुविक्रमा।
निवेदिता सारदा च प्रणम्या मातृदेवताः ॥ ११ ॥
श्रीरामो भरतः कृष्णो भीष्मो धर्मस्तथार्जुनः।
मार्कण्डेयो हरिश्चन्द्रः प्रह्लादो नारदो ध्रुवः ॥ १२ ॥
हनुमान् जनको व्यासो वसिष्ठश्च शुको बलिः।
दधीचिविश्वकर्माणौ पृथुवाल्मीकिभार्गवाः ॥ १३ ॥
भगीरथश्चैकलव्यो मनुर्धन्वन्तरिस्तथा।
शिविश्च रन्तिदेवश्च पुराणोद्गीतकीर्तयः ॥ १४ ॥
बुद्धा जिनेन्द्रा गोरक्षः पाणिनिश्च पतञ्जलिः।
शङ्करो मध्वनिंबार्कौ श्रीरामानुजवल्लभौ ॥ १५ ॥
झूलेलालोऽथ चैतन्यः तिरुवल्लुवरस्तथा।
नायन्मारालवाराश्च कंबश्च बसवेश्वरः ॥ १६ ॥
देवलो रविदासश्च कबीरो गुरुनानकः।
नरसिस्तुलसीदासो दशमेशो दृढव्रतः ॥ १७ ॥
श्रीमत् शङ्करदेवश्च बन्धू सायणमाधवौ।
ज्ञानेश्वरस्तुकारामो रामदासः पुरन्दरः ॥ १८ ॥
बिरसा सहजानन्दो रामानन्दस्तथा महान्।
वितरन्तु सदैवैते दैवीं सद्गुणसंपदम् ॥ १९ ॥
भरतर्षिः कालिदासः श्रीभोजो जकणस्तथा।
सूरदासस्त्यागराजो रसखानश्च सत्कविः ॥ २० ॥
रविवर्मा भातखण्डे भाग्यचन्द्रः स भूपतिः।
कलावंतश्च विख्याताः स्मरणीया निरन्तरम् ॥ २१ ॥
अगस्त्यः कंबुकौण्डिन्यौ राजेन्द्रश्चोलवंशजः।
अशोकः पुश्यमित्रश्च खारवेलः सुनीतिमान् ॥ २२ ॥
चाणक्यचन्द्रगुप्तौ च विक्रमः शालिवाहनः।
समुद्रगुप्तः श्रीहर्षः शैलेन्द्रो बप्परावलः ॥ २३ ॥
लाचिद्भास्करवर्मा च यशोधर्मा च हूणजित्।
श्रीकृष्णदेवरायश्च ललितादित्य उद्बलः ॥ २४ ॥
मुसुनूरिनायकौ तौ प्रतापः शिवभूपतिः।
रणजित्सिंह इत्येते वीरा विख्यातविक्रमाः ॥ २५ ॥
वैज्ञानिकाश्च कपिलः कणादः सुश्रुतस्तथा।
चरको भास्कराचार्यो वराहमिहिरः सुधीः ॥ २६ ॥
नागार्जुनो भरद्वाजः आर्यभट्टो वसुर्बुधः।
ध्येयो वेंकटरामश्च विज्ञा रामानुजादयः ॥ २७ ॥
रामकृष्णो दयानन्दो रवीन्द्रो राममोहनः।
रामतीर्थोऽरविंदश्च विवेकानन्द उद्यशाः ॥ २८ ॥
दादाभाई गोपबन्धुः तिलको गान्धिरादृताः।
रमणो मालवीयश्च श्रीसुब्रह्मण्यभारती ॥ २९ ॥
सुभाषः प्रणवानन्दः क्रान्तिवीरो विनायकः।
ठक्करो भीमरावश्च फुले नारायणो गुरुः ॥ ३० ॥
संघशक्तिप्रणेतारौ केशवो माधवस्तथा।
स्मरणीयाः सदैवैते नवचैतन्यदायकाः ॥ ३१ ॥
अनुक्ता ये भक्ताः प्रभुचरणसंसक्तहृदयाः।
अनिर्दष्टा वीराः अधिसमरमुद्ध्वस्तरिपवः।
समाजोद्धर्तारः सुहितकरविज्ञाननिपुणाः।
नमस्तेभ्यो भूयात् सकलसुजनेभ्यः प्रतिदिनम् ॥ ३२ ॥
इदमेकात्मतास्तोत्रं श्रद्धया यः सदा पठेत्।
स राष्ट्रधर्मनिष्ठावान् अखण्डं भारतं स्मरेत् ॥ ३३ ॥
॥ भारत माता की जय ॥
Ekatmata Stotra Transliteration
Ekatmata Stotra in English transliteration नीचे दी गई है ताकि जो देवनागरी लिपि नहीं पढ़ सकते, वे भी इसका शुद्ध उच्चारण कर सकें:
Om Saccidanandarupaya namo’stu Paramatmane
Jyotirmayasvarupaya Vishvamangalyamurtaye || 1 ||
Prakritih Pancabhutani graha lokah svarastatha
Dishah kalashca sarvesham sada kurvantu mangalam || 2 ||
Ratnakaradhautapadam Himalayakiritanim
Brahmarajarsiratnaadhyam vande Bharatamataram || 3 ||
Mahendro Malayah Sahyo devatamna Himalayah
Dhyeyo Raivatako Vindhyo girishcaravalistatha || 4 ||
Ganga Sarasvati Sindhurbrahmaputrashca Gandaki
Kaveri Yamuna Reva Krishna Goda Mahanadi || 5 ||
Ayodhya Mathura Maya Kashikanci Avantika
Vaishali Dvarika dhyeya Puri Takshashila Gaya || 6 ||
Prayagah Pataliputram Vijayanagarim mahat
Indraprastham Somanathah tatha Amrtasarah priyam || 7 ||
Caturvedah Puranani sarvopanisadastatha
Ramayanam Bharatam ca Gita saddarshananin ca || 8 ||
Jainagamastripirakah Gurugranthan satam girah
Eshah jnananidhih shreshtah shraddheyo hridi sarvada || 9 ||
Arundhaty Anasuya ca Savitri Janaki Sati
Draupadi Kannagi Gargi Mira Durgavati tatha || 10 ||
Lakshmirahlarya Channamma Rudramamba suvikrama
Nivedita Sarada ca pranamya matridevataah || 11 ||
Shriramo Bharatah Krishno Bhishmo DharmastathArjunah
Markandeyo Hariscandrah Prahlado Narado Dhruvah || 12 ||
Hanuman Janako Vyaso Vasishthashca Shuko Balih
Dadhicivishvakarmanau Prithuvalmikinbhargavah || 13 ||
Bhagirathashcaikalavyo Manurdhanvantaristatha
Shivishca Rantidepashca Puraanodgitakirtayah || 14 ||
Buddha Jinendra Gorakhsah Paninishca Patanjalih
Shankaro Madhvanimbarkau Shriramanujavallabhau || 15 ||
Jhulelalo’tha Chaitanyah Tiruvalluvarastatha
Nayanmaralavaarashca Kambbashca Basaveshvarah || 16 ||
Devalo Ravidaasashca Kabiro Gurunanakah
Narasistulasidaso Dashamesho Dridhavratah || 17 ||
Shrimat Shankaradevashca Bandhu Sayanamaadhavau
Jnaneshvarastukaaraamo Ramadasah Purandarah || 18 ||
Birasa Sahajananado Ramanandastatha mahan
Vitarantu sadaivaithe daivim sadgunasanpadam || 19 ||
Bharatarshih Kalidasah Shribhojo Jakanastatha
Suradasastyagarajo Raskhanashca satkavith || 20 ||
Ravivarma Bhatakhande Bhagyacandrah sa bhupatih
Kalavantashca viknyatah smaraniya nirantaram || 21 ||
Agastyah Kambukaundinyau Rajendrashcaulavamshajah
Ashokah Pushyamitrashe Kharavelah Suneetiman || 22 ||
Canakyacandraguptau ca Vikramah Shaalivahanah
Samudraguptah Shriharshah Shailendro Bapparavalah || 23 ||
Lacidbhaskaravarma ca Yashodharma ca Hunajit
Shrikrishnadeva Rayashca Lalitaditya Udbalah || 24 ||
Musunurinayakau tau Pratapah Shibabhupati
Ranjit Singh ityete vira vikhyataviikramah || 25 ||
Vairijanikashca Kapilah Kaanadah Sushrutastatha
Carako Bhaskaaracharyo Varahamihirah Sudhih || 26 ||
Nagarjuno Bharadwajah Aryabhatto Vasurbudhah
Dhyeyo Venkataramashca vigyan Ramanujadayah || 27 ||
Ramakrishno Dayananado Ravindro Ramoamahanah
Ramatirtho’Aravindashca Vivekananda udyashah || 28 ||
Dadabhai Gopabhandhuh Tilako Gandhiradritah
Ramano Malaviyashca Shrisubrahmaniyabharati || 29 ||
Subhashaha Pranavananada Krantiviro Vinayakah
Thakkaro Bhimaravashca Phule Narayano Guruh || 30 ||
Sanghashaktipraneetarau Keshavo Madhavastatha
Smaraniyah sadaivaithe Navacaitanyadayakah || 31 ||
Anuktah ye Bhaktah Prabhuchaaranasamsaktahridayah
Anirdishtha Virah Adhisamaramudhvastharipavah
Samajoddhartarah Suhitakaravijnaananipunah
Namastebhyo bhuyat sakalasujanebyah pratidinaam || 32 ||
Idamekatmatastoram shradddhaya yah sada pathet
Sa Rashtradharmanishtavan Akhandam Bharatam smaret || 33 ||
|| Bharat Mata Ki Jai ||
एकात्मता स्तोत्र का शब्द-अर्थ (Word-by-Word Meaning)
| संस्कृत शब्द | अर्थ |
|---|---|
| सच्चिदानन्दरूपाय | सत्, चित् और आनंद स्वरूप परमात्मा को |
| परमात्मने | परम आत्मा को |
| ज्योतिर्मयस्वरूपाय | प्रकाशमय स्वरूप वाले को |
| विश्वमाङ्गल्यमूर्तये | जगत के मंगल की मूर्ति को |
| रत्नाकराधौतपदां | समुद्र से पद-प्रक्षालित |
| हिमालयकिरीटिनीम् | हिमालय को मुकुट धारण करने वाली |
| वन्दे भारतमातरम् | भारत माता को वंदन करता हूँ |
| इदमेकात्मतास्तोत्रं | यह एकात्मता स्तोत्र |
| श्रद्धया यः सदा पठेत् | जो श्रद्धा से सदा पाठ करे |
| अखण्डं भारतं स्मरेत् | अखंड भारत का स्मरण करे |
एकात्मता स्तोत्र अर्थ सहित – हिंदी में सरल व्याख्या
Ekatmata Stotra in Hindi अर्थ सहित पढ़ने से इसका भाव और गहरा हो जाता है। इस स्तोत्र के प्रमुख भागों का अर्थ इस प्रकार है:
प्रथम श्लोक में परमात्मा की वंदना की गई है जो सच्चिदानंद स्वरूप और विश्व का मंगल करने वाले हैं।
द्वितीय श्लोक में प्रकृति, पंचतत्व, ग्रह, लोक, स्वर और दिशाओं से सबके मंगल की कामना की गई है।
तृतीय श्लोक भारत माता की वंदना है जिनके चरण समुद्र ने धोए हैं, जिनका मुकुट हिमालय है और जो ऋषि, राजर्षि तथा रत्नों से समृद्ध हैं।
चौथे और पाँचवें श्लोक में पवित्र पर्वतों (महेंद्र, मलय, सह्य, हिमालय, रैवतक, विंध्य, अरावली) और पवित्र नदियों (गंगा, यमुना, सरस्वती, सिंधु, ब्रह्मपुत्र, कावेरी, गोदावरी, कृष्णा आदि) का स्मरण किया गया है।
छठे और सातवें श्लोक में पवित्र तीर्थनगरियों अयोध्या, मथुरा, काशी, कांची, द्वारका, प्रयाग, पाटलीपुत्र, अमृतसर, सोमनाथ आदि का स्मरण है।
आठवें और नौवें श्लोक में चारों वेद, पुराण, उपनिषद, रामायण, महाभारत, गीता, जैनागम, त्रिपिटक और गुरुग्रंथ साहिब को ज्ञान के अक्षय निधि के रूप में वंदना की गई है।
दसवें और ग्यारहवें श्लोक में भारत की महान माताओं और देवियों का स्मरण है जैसे अरुंधती, अनसूया, सावित्री, सीता, द्रौपदी, मीरा, दुर्गावती, अहल्या, रानी चेन्नम्मा, सारदा देवी और निवेदिता।
बाकी श्लोकों में भारत के महान वीरों, संतों, दार्शनिकों, वैज्ञानिकों, कवियों और स्वतंत्रता सेनानियों की एक अखंड परंपरा का स्मरण है जिसमें राम, कृष्ण, हनुमान, व्यास, वाल्मीकि, आदि शंकराचार्य, कबीर, तुलसीदास, गुरुनानक, विवेकानंद, महात्मा गांधी, सुभाषचंद्र बोस, डॉ. भीमराव अंबेडकर और अनेक महापुरुष सम्मिलित हैं।
अंतिम श्लोक में कहा गया है कि जो व्यक्ति इस एकात्मता स्तोत्र का श्रद्धापूर्वक नित्य पाठ करेगा, वह राष्ट्रधर्म में निष्ठावान होगा और अखंड भारत का स्मरण करेगा।
Ekatmata Stotra का आध्यात्मिक महत्व (Spiritual Significance)
Ekatmata Stotra का सबसे बड़ा आध्यात्मिक संदेश यह है कि भारत एक है। यहाँ की नदियाँ, पर्वत, तीर्थस्थल, ग्रंथ, संत और वीर – सब एक ही राष्ट्रीय चेतना के अंग हैं।
यह स्तोत्र हमें याद दिलाता है कि सनातन धर्म किसी एक जाति, एक क्षेत्र या एक भाषा तक सीमित नहीं है। यह संपूर्ण भारत की साझी विरासत है। भगवान बुद्ध और जैन तीर्थंकर भी इस स्तोत्र में उतने ही श्रद्धेय हैं जितने शंकराचार्य या रामानुज।
एकात्मता स्तोत्र पाठ से मन में राष्ट्र के प्रति कृतज्ञता, संतों के प्रति श्रद्धा और धरती माता के प्रति प्रेम का भाव जागता है। यह एक जीवित प्रार्थना है जो भारत की आत्मा को स्पर्श करती है।
पाठ का उचित समय और परंपरा (When to Recite)
Ekatmata Stotra परंपरागत रूप से निम्न अवसरों पर गाया जाता है:
- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रतिदिन की शाखा में सुबह या शाम पाठ किया जाता है।
- राष्ट्रीय पर्वों जैसे स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस पर विशेष रूप से गाया जाता है।
- सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रमों में भारत की एकता और अखंडता के भाव को जागृत करने के लिए।
- विद्यालयों और संस्थाओं में राष्ट्रभक्ति जागृत करने के उद्देश्य से।
- व्यक्तिगत स्तर पर कोई भी भक्त प्रातःकाल ध्यान और प्रार्थना के बाद इसका पाठ कर सकता है।
Ekatmata Stotra के लाभ (Benefits)
एकात्मता स्तोत्र के नियमित पाठ से अनेक आध्यात्मिक और मानसिक लाभ होते हैं:
राष्ट्रीय एकता की भावना – इस स्तोत्र के पाठ से भारत के विभिन्न क्षेत्रों, भाषाओं और परंपराओं को एकता के सूत्र में देखने की दृष्टि विकसित होती है।
श्रद्धा और कृतज्ञता – देश के महान ऋषियों, वीरों और माताओं का स्मरण करने से मन में गहरी श्रद्धा और कृतज्ञता का भाव जागता है।
मानसिक शांति और स्थिरता – नित्य पाठ से मन शांत और एकाग्र होता है। परमात्मा की वंदना से आंतरिक शांति प्राप्त होती है।
राष्ट्रधर्म के प्रति निष्ठा – स्तोत्र का अंतिम श्लोक स्वयं कहता है कि इसका पाठ करने वाला व्यक्ति राष्ट्रधर्म में निष्ठावान बनता है।
सांस्कृतिक जागृति – इस स्तोत्र के माध्यम से भारत की हजारों वर्षों की ज्ञान परंपरा से जुड़ाव होता है।
सकारात्मकता और प्रेरणा – देश के महान विभूतियों के नाम सुनकर मन में सकारात्मक ऊर्जा और जीवन में कुछ करने की प्रेरणा मिलती है।
Ekatmata Stotra PDF के बारे में जानकारी
एकात्मता स्तोत्र PDF कई धार्मिक और राष्ट्रीय संस्थाओं की वेबसाइटों पर निःशुल्क उपलब्ध है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की आधिकारिक वेबसाइट और विभिन्न हिंदी धर्म पोर्टल पर Ekatmata Stotra PDF डाउनलोड की जा सकती है। इस लेख में संपूर्ण पाठ दिया गया है जिसे आप सहेज कर उपयोग कर सकते हैं या नीचे दिए गए लिंक से डाउनलोड कर सकते हैं:
निष्कर्ष (Conclusion)
Ekatmata Stotra भारत की उस अमर आत्मा का गान है जो हिमालय से कन्याकुमारी तक, सिंधु से ब्रह्मपुत्र तक एक सूत्र में बंधी है। यह स्तोत्र हमें बताता है कि भारत केवल एक भूखंड नहीं, बल्कि एक जीवंत सांस्कृतिक चेतना है।
एकात्मता स्तोत्र का पाठ करते समय हम उन सभी महान विभूतियों से जुड़ जाते हैं जिन्होंने इस धरती को कर्म, ज्ञान और तपस्या से सींचा। यह स्तोत्र हमारे हृदय में राष्ट्रप्रेम, आध्यात्मिकता और एकता का दीप जलाता है।
इस एकात्मता स्तोत्र अर्थ सहित पाठ को अपने जीवन में नियमित रूप से सम्मिलित करें और भारत माता के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करें।
॥ भारत माता की जय ॥
? FAQs – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: एकात्मता स्तोत्र क्या है?
उत्तर: Ekatmata Stotra भारत की राष्ट्रीय एकता का उद्बोधक संस्कृत स्तोत्र है जिसमें भारत के महान ऋषियों, वीरों, संतों, पवित्र नदियों और तीर्थों का स्मरण किया गया है।
प्रश्न 2: एकात्मता स्तोत्र के रचयिता कौन हैं?
उत्तर: इस स्तोत्र के रचयिता श्री लक्ष्मणराव भिड़े माने जाते हैं जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े विद्वान थे।
प्रश्न 3: Ekatmata Stotra कब और कहाँ गाया जाता है?
उत्तर: यह संघ की प्रतिदिन की शाखाओं में, राष्ट्रीय पर्वों पर और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में गाया जाता है।
प्रश्न 4: Ekatmata Stotra में कितने श्लोक हैं?
उत्तर: इस स्तोत्र में कुल 33 श्लोक हैं जो भारत की संपूर्ण सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को समेटते हैं।
प्रश्न 5: क्या Ekatmata Stotra केवल हिंदू धर्म से संबंधित है?
उत्तर: नहीं। इस स्तोत्र में भगवान बुद्ध, जैन तीर्थंकर, गुरुनानक देव जी और कबीर सहित सभी परंपराओं के महापुरुषों का सम्मानपूर्वक उल्लेख है। यह भारत की समग्र आध्यात्मिक विरासत का स्तोत्र है।
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