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    Home » Shlok » Nasadiya Sukta: ऋग्वेद का सृष्टि-रहस्य सूक्त | अर्थ, श्लोक और महत्त्व
    Shlok

    Nasadiya Sukta: ऋग्वेद का सृष्टि-रहस्य सूक्त | अर्थ, श्लोक और महत्त्व

    RaviBy RaviJuly 9, 2026
    nasadiya sukta

    Nasadiya Sukta वैदिक साहित्य का सबसे गूढ़, दार्शनिक और विचारोत्तेजक सूक्त है। यह ऋग्वेद के दसवें मण्डल का 129वाँ सूक्त है, जिसे Rig Veda 10.129 Nasadiya Sukta के नाम से जाना जाता है। संस्कृत में “नासदीय” शब्द “न असत्” से बना है, जिसका अर्थ है “न असत्” अर्थात् “जो न तो अस्तित्व में था, न ही अनस्तित्व में।”

    इस सूक्त को अंग्रेज़ी में Hymn of Creation कहते हैं। इसमें सृष्टि के उद्गम, उसके रहस्य और परम सत्य के विषय में ऐसे प्रश्न उठाए गए हैं जिनके उत्तर आज भी विद्वान खोज रहे हैं। यह सूक्त न केवल भारतीय दर्शन का, बल्कि विश्व के सम्पूर्ण आध्यात्मिक साहित्य का अनमोल रत्न है।

    प्रसिद्ध खगोलशास्त्री कार्ल सेगन ने भी इस सूक्त को उद्धृत करते हुए कहा था कि यह भारत की “संदेह पूर्ण जिज्ञासा और ब्रह्माण्डीय रहस्यों के प्रति विनम्रता की परंपरा” को दर्शाता है।

    Table of Contents

    Toggle
    • नासदीय सूक्त क्या है | What Is Nasadiya Sukta
    • Nasadiya Sukta Sanskrit Text: सम्पूर्ण संस्कृत पाठ
    • Nasadiya Sukta In English: Transliteration (Roman Script)
    • Nasadiya Sukta Meaning in Hindi: श्लोक-दर-श्लोक हिन्दी अर्थ
      • नासदीय सूक्त हिन्दी व्याख्या सहित
    • Nasadiya Sukta का आध्यात्मिक महत्त्व | Spiritual Significance
    • Rig Veda Nasadiya Sukta: वैदिक और दार्शनिक दृष्टिकोण
    • नासदीय सूक्त का पाठ कब और कैसे करें
    • Nasadiya Sukta के आध्यात्मिक लाभ | Spiritual Benefits
    • Nasadiya Sukta Book और Manuscript के विषय में
    • निष्कर्ष | Conclusion
    • ? FAQs: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
      • Q1. नासदीय सूक्त क्या है?
      • Q2. Nasadiya Sukta किस वेद में है?
      • Q3. नासदीय सूक्त में कितने श्लोक हैं?
      • Q4. Nasadiya Sukta का मुख्य संदेश क्या है?
      • Q5. नासदीय सूक्त का पाठ कब करना चाहिए?

    नासदीय सूक्त क्या है | What Is Nasadiya Sukta

    नासदीय सूक्त ऋग्वेद के सातों श्लोकों में सृष्टि के आरम्भ का वर्णन करता है। इसमें ऋषि यह जानने का प्रयास करते हैं कि इस विश्व की उत्पत्ति कैसे हुई, किसने की और क्यों की। यह सूक्त किसी एक उत्तर पर नहीं रुकता, बल्कि प्रश्नों की एक ऐसी श्रृंखला प्रस्तुत करता है जो श्रोता के मन को गहन चिन्तन के लिए प्रेरित करती है।

    नासदीय सूक्त की विशेषताएं इस प्रकार हैं:

    • यह सृष्टि का न तो पूर्ण कारण बताता है, न ही उसे नकारता है।
    • यह आध्यात्मिक जिज्ञासा और बौद्धिक विनम्रता का प्रतीक है।
    • इसमें परम सत्ता को किसी एक नाम या रूप में नहीं बाँधा गया।
    • यह वेदान्त दर्शन के मूल विचारों का पूर्वाभास देता है।
    • इसमें सात श्लोक हैं, प्रत्येक त्रिष्टुप् छन्द में रचित है।

    Nasadiya Sukta Sanskrit Text: सम्पूर्ण संस्कृत पाठ

    नीचे नासदीय सूक्त ऋग्वेद के सभी सात श्लोक उनकी मूल संस्कृत भाषा में दिए गए हैं:

    ॥ नासदीय सूक्तम् ॥

    ऋग्वेद मण्डल १०, सूक्त १२९

    श्लोक १

    नासदासीन्नो सदासीत्तदानीं नासीद्रजो नो व्योमा परो यत् ।
    किमावरीवः कुह कस्य शर्मन्नम्भः किमासीद्गहनं गभीरम् ॥ १॥

    श्लोक २

    न मृत्युरासीदमृतं न तर्हि न रात्र्या अह्न आसीत्प्रकेतः ।
    आनीदवातं स्वधया तदेकं तस्माद्धान्यन्न परः किञ्चनास ॥ २॥

    श्लोक ३

    तम आसीत्तमसा गूहळमग्रे प्रकेतं सलिलं सर्वाऽइदम् ।
    तुच्छ्येनाभ्वपिहितं यदासीत् तपसस्तन्महिनाजायतैकम् ॥ ३॥

    श्लोक ४

    कामस्तदग्रे समवर्तताधि मनसो रेतः प्रथमं यदासीत् ।
    सतो बन्धुमसति निरविन्दन् हृदि प्रतीष्या कवयो मनीषा ॥ ४॥

    श्लोक ५

    तिरश्चीनो विततो रश्मिरेषामधः स्विदासीदुपरि स्विदासीत् ।
    रेतोधा आसन्महिमान आसन् स्वधा अवस्तात्प्रयतिः परस्तात् ॥ ५॥

    श्लोक ६

    को अद्धा वेद क इह प्र वोचत् कुत आजाता कुत इयं विसृष्टिः ।
    अर्वाग्देवा अस्य विसर्जनेनाथा को वेद यत आबभूव ॥ ६॥

    श्लोक ७

    इयं विसृष्टिर्यत आबभूव यदि वा दधे यदि वा न ।
    यो अस्याध्यक्षः परमे व्योमन् त्सो अङ्ग वेद यदि वा न वेद ॥ ७॥

    Nasadiya Sukta In English: Transliteration (Roman Script)

    Rig Veda Nasadiya Sukta का सम्पूर्ण रोमन लिप्यन्तरण:

    Verse 1

    nasad asin no sad asit tadanim
    nasid rajo no vyoma paro yat
    kim avarivah kuha kasya sarmann
    ambhah kim asid gahanam gabhiram

    Verse 2

    na mrtyur asid amrtam na tarhi
    na ratrya ahna asit praketah
    anid avatam svadhaiya tad ekam
    tasmad dha anyam na parah kim canasa

    Verse 3

    tama asit tamasa guhalham agre
    apraketam salilam sarvam a idam
    tuchyenabhu apihitam yad asit
    tapasas tan mahina ajayata ekam

    Verse 4

    kamas tad agre sam avartatadhi
    manaso retah prathamam yad asit
    sato bandhum asati nir avindan
    hrdi pratisya kavayo manisa

    Verse 5

    tirasino vitato rasmir esam
    adhah svid asid upari svid asit
    retodha asan mahimana asan
    svadha avasthat prayatih parastat

    Verse 6

    ko addha veda ka iha pra vocat
    kuta ajata kuta iyam visrstih
    arvag deva asya visarjanena
    atha ko veda yata ababhuva

    Verse 7

    iyam visrstir yata ababhuva
    yadi va dadhe yadi va na
    yo asyadhyaksah parame vyoman
    so anga veda yadi va na veda

    Nasadiya Sukta Meaning in Hindi: श्लोक-दर-श्लोक हिन्दी अर्थ

    नासदीय सूक्त हिन्दी व्याख्या सहित

    श्लोक १ का अर्थ:

    उस समय न असत् था, न सत् था। न आकाश था, न उससे परे का कोई लोक। तब क्या किसे ढक रहा था? कहाँ था? किसके आश्रय में था? क्या कोई गहरा, अथाह जल था?

    भावार्थ: सृष्टि के पूर्व की अवस्था में न अस्तित्व था, न अनस्तित्व था। न स्थान था, न आकाश। सब कुछ एक अपरिभाषित रहस्य में डूबा था।

    श्लोक २ का अर्थ:

    उस समय न मृत्यु थी, न अमरत्व था। रात्रि और दिन का कोई भेद नहीं था। वह एक तत्त्व, बिना वायु के, अपनी ही शक्ति से श्वास ले रहा था। उसके अतिरिक्त और कुछ भी नहीं था।

    भावार्थ: मृत्यु और अमरत्व से परे, काल और दिशा से परे, एकमात्र परम तत्त्व अपने आप में स्थित था।

    श्लोक ३ का अर्थ:

    आरम्भ में अन्धकार ही था, जो अन्धकार से ढका हुआ था। यह सब एक अलक्षित, अव्यक्त जल-राशि के समान था। जो शून्य से आवृत था, वह एक तत्त्व तप (ऊष्मा / ज्ञान-शक्ति) की महिमा से प्रकट हुआ।

    भावार्थ: सृष्टि से पूर्व केवल तम (अन्धकार) था। ब्रह्म की तप-शक्ति से उस एक तत्त्व का आविर्भाव हुआ।

    श्लोक ४ का अर्थ:

    उसके पश्चात् सबसे पहले काम (इच्छा / संकल्प) प्रकट हुआ जो मन का प्रथम बीज था। ज्ञानी कवियों ने अपने हृदय की मनीषा से असत् में सत् का बन्धन खोज निकाला।

    भावार्थ: सृष्टि का प्रथम बीज “काम” अर्थात् सृजन की इच्छा थी। ऋषियों ने अपनी अन्तर्दृष्टि से सत्-असत् के रहस्य को समझा।

    श्लोक ५ का अर्थ:

    उनकी ज्योति (रश्मि) तिरछी फैली हुई थी। क्या वह नीचे थी या ऊपर? वहाँ रेतोधा (बीज-धारण करने वाली शक्तियाँ) और महान् शक्तियाँ थीं। नीचे स्वधा (ऊर्जा) थी, ऊपर प्रयति (प्रयत्न/गति) थी।

    भावार्थ: सृष्टि की प्रक्रिया में दो शक्तियाँ कार्यरत थीं। एक नीचे से ऊपर उठती ऊर्जा, दूसरी ऊपर से नीचे आती चेतना।

    श्लोक ६ का अर्थ:

    कौन वास्तव में जानता है? कौन यहाँ बता सकता है कि यह सृष्टि कहाँ से आई और कैसे उत्पन्न हुई? देवता भी इस सृष्टि के बाद आए। तो फिर कौन जानता है कि यह सब कहाँ से आया?

    भावार्थ: यह प्रश्न स्वयं देवताओं को भी नहीं पता, क्योंकि वे भी सृष्टि के बाद अस्तित्व में आए।

    श्लोक ७ का अर्थ:

    यह सृष्टि जहाँ से उत्पन्न हुई, चाहे उसने इसे बनाया हो या न बनाया हो। जो परम आकाश में इस सृष्टि का साक्षी है, वही जानता है, या शायद वह भी नहीं जानता।

    भावार्थ: ऋषि यहाँ अत्यन्त विनम्रता से कहते हैं कि परम सत्ता स्वयं भी इस सृष्टि के रहस्य को जानती है या नहीं, यह भी निश्चित नहीं।

    Nasadiya Sukta का आध्यात्मिक महत्त्व | Spiritual Significance

    Nasadiya Sukta वैदिक विचारधारा में एक अनूठा स्थान रखता है। यह सूक्त अन्य वैदिक देव-स्तुतियों से भिन्न है। इसमें किसी देवता की महिमा नहीं गाई गई, बल्कि उस परम रहस्य की ओर संकेत किया गया है जो समस्त अस्तित्व के मूल में है।

    नासदीय सूक्त की विशेषताएं आध्यात्मिक दृष्टि से इस प्रकार हैं:

    1. नेति-नेति का भाव: यह सूक्त उपनिषदों के “नेति-नेति” (न यह, न यह) के दर्शन का पूर्वरूप है। परम सत्य को शब्दों में बाँधने से इनकार करना ही इसकी विशेषता है।

    2. जिज्ञासा को प्रोत्साहन: यह सूक्त बताता है कि आध्यात्मिक पथ पर प्रश्न करना कमज़ोरी नहीं, बल्कि बुद्धिमत्ता का चिह्न है।

    3. एकत्व का संदेश: सृष्टि से पूर्व केवल “एक” था। यह एकत्व का बोध ही वेदान्त का मूल है।

    4. तप की शक्ति: श्लोक तीन में कहा गया है कि “तप” की महिमा से उस एक का आविर्भाव हुआ। यह तप केवल शारीरिक नहीं, बल्कि ज्ञान की तीव्र अभिलाषा है।

    5. काम का महत्त्व: चौथे श्लोक में काम को सृष्टि का प्रथम बीज कहा गया है। यह काम विकारी इच्छा नहीं, बल्कि परमात्मा का सृजन-संकल्प है।

    Rig Veda Nasadiya Sukta: वैदिक और दार्शनिक दृष्टिकोण

    Rig Veda 10.129 Nasadiya Sukta को वेदान्त, सांख्य और न्याय दर्शन सभी ने अपने-अपने दृष्टिकोण से देखा है।

    वेदान्त दर्शन इसे अद्वैत का आधार मानता है। सृष्टि से पूर्व केवल ब्रह्म था, यही इस सूक्त का मर्म है। सांख्य दर्शन इसमें प्रकृति और पुरुष के विभाजन से पूर्व की एकता देखता है।

    पश्चिमी विद्वानों ने Nasadiya Sukta को मानव इतिहास के प्रारम्भिक तर्कसंगत और अज्ञेयवादी चिन्तन के प्रमाण के रूप में देखा है। प्रसिद्ध इन्डोलॉजिस्ट वेंडी डोनिगर ने इसे “भाषा में सरल, किन्तु विचार में अत्यन्त उद्वेगकारी” कहा है।

    नासदीय सूक्त का पाठ कब और कैसे करें

    Nasadiya Sukta का पाठ निम्न अवसरों पर विशेष रूप से किया जाता है:

    ब्रह्ममुहूर्त में: प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व इस सूक्त का पाठ मन को गहन चिन्तन और ध्यान के लिए तैयार करता है।

    वेद-अध्ययन के समय: विद्यार्थी और ऋषि परम्परा में इस सूक्त को ऋग्वेद के अध्ययन के अन्तर्गत पढ़ा जाता है।

    ध्यान और योग के समय: जब साधक परम तत्त्व के विषय में चिन्तन करता है, तब इस सूक्त का पाठ उसकी अन्तर्दृष्टि को गहरा करता है।

    यज्ञ और हवन में: वैदिक अनुष्ठानों में ऋग्वेद के सूक्तों का पाठ किया जाता है, जिनमें यह सूक्त भी सम्मिलित है।

    दर्शन और चिन्तन के अवसर पर: जब कोई जीवन के मूल प्रश्नों से जूझ रहा हो, तब यह सूक्त उसे विनम्रता और शान्ति प्रदान करता है।

    Nasadiya Sukta के आध्यात्मिक लाभ | Spiritual Benefits

    नासदीय सूक्त का नियमित पठन और मनन निम्नलिखित लाभ प्रदान करता है:

    मन की शान्ति: यह सूक्त मन को अनावश्यक प्रश्नों की दौड़ से मुक्त कर परम विश्राम की अवस्था में ले जाता है। जब हम जान लेते हैं कि सब प्रश्नों के उत्तर नहीं होते, तो मन हल्का हो जाता है।

    विनम्रता का विकास: यह सूक्त बताता है कि स्वयं देवता भी सृष्टि के रहस्य को पूर्णतः नहीं जानते। इससे अहंकार का विसर्जन होता है।

    जिज्ञासा और बुद्धि का विकास: इस सूक्त का चिन्तन बौद्धिक क्षमता और आध्यात्मिक जिज्ञासा को तीव्र करता है।

    परम तत्त्व से जुड़ाव: इस सूक्त के ध्यान से साधक उस “एक” तत्त्व के निकट जाने का अनुभव करता है जो सृष्टि का मूल है।

    आत्म-साक्षात्कार की ओर कदम: वेदान्त की दृष्टि से यह सूक्त आत्म-साक्षात्कार के मार्ग का द्वार खोलता है।

    Nasadiya Sukta Book और Manuscript के विषय में

    Nasadiya Sukta Manuscript का सबसे प्राचीन लिखित रूप ऋग्वेद संहिता में मिलता है। ऋग्वेद दसवें मण्डल का यह 129वाँ सूक्त हज़ारों वर्षों से गुरु-शिष्य परम्परा में मौखिक रूप से प्रवाहित होता रहा और बाद में पाण्डुलिपियों में लिपिबद्ध किया गया।

    Nasadiya Sukta PDF और मुद्रित Nasadiya Sukta Book आज अनेक प्रकाशनों में उपलब्ध हैं। प्रमुख प्रकाशकों में:

    • Parimal Publications ने ऋग्वेद संहिता के चतुर्थ खण्ड में इसे प्रकाशित किया है।
    • Max Muller का अनुवाद (1859) इस सूक्त का सबसे प्रसिद्ध पाश्चात्य अनुवाद है।
    • विभिन्न Nasadiya Sukta PDF डाउनलोड के स्रोत BlessingRead.com पर उपलब्ध हैं।

    Download Nasadiya Sukta PDF – नासदीय सूक्त

    Nasadiya Sukta Illustration की दृष्टि से यह सूक्त कला में भी अभिव्यक्त हुआ है। चित्रकारों और मूर्तिकारों ने सृष्टि की उत्पत्ति के इस रहस्य को अपनी-अपनी शैली में चित्रित करने का प्रयास किया है।

    निष्कर्ष | Conclusion

    Nasadiya Sukta मानव की उस चिरन्तन जिज्ञासा का प्रतीक है जो सृष्टि के आदि रहस्य को समझने के लिए प्रयासरत रहती है। यह सूक्त हमें यह भी सिखाता है कि ज्ञान की सच्ची यात्रा में विनम्रता और खुलापन अनिवार्य है।

    नासदीय सूक्त ऋग्वेद का यह अद्भुत रत्न हजारों वर्षों से भारतीय चिन्तन को प्रेरित करता आया है और आधुनिक विज्ञान के प्रश्नों से भी उसका सम्वाद होता रहा है। बिग बैंग से लेकर क्वाण्टम भौतिकी तक, वैज्ञानिकों ने इस सूक्त में अपने प्रश्नों की झलक देखी है।

    इस Rig Veda 10.129 Nasadiya Sukta का मनन करें, इसके शब्दों को हृदय में उतारें और उस परम रहस्य के साथ एकात्म होने का प्रयास करें। जो अज्ञेय है, उसके प्रति श्रद्धा रखना ही सच्ची आध्यात्मिकता है।

    “यो अस्याध्यक्षः परमे व्योमन् सो अङ्ग वेद यदि वा न वेद।”
    (वह परम आकाश में जो साक्षी है, वही जानता है, या शायद वह भी नहीं जानता।)

    ? FAQs: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

    Q1. नासदीय सूक्त क्या है?

    यह ऋग्वेद (10.129) का सृष्टि-विषयक सूक्त है जो सात श्लोकों में सृष्टि के उद्गम के रहस्य पर प्रश्न उठाता है।

    Q2. Nasadiya Sukta किस वेद में है?

    यह ऋग्वेद के दसवें मण्डल, 129वें सूक्त में है।

    Q3. नासदीय सूक्त में कितने श्लोक हैं?

    इसमें सात श्लोक हैं, सभी त्रिष्टुप् छन्द में रचित हैं।

    Q4. Nasadiya Sukta का मुख्य संदेश क्या है?

    सृष्टि का रहस्य अज्ञेय है। स्वयं देवता भी इसे पूर्णतः नहीं जानते। परम विनम्रता और जिज्ञासा ही इसका संदेश है।

    Q5. नासदीय सूक्त का पाठ कब करना चाहिए?

    ब्रह्ममुहूर्त में, ध्यान के समय या वेद-अध्ययन के अवसर पर इसका पाठ और मनन करना श्रेयस्कर है।

    🙏 इन मंत्रों और श्लोकों को भी पढ़ना न भूलें:

    • Tripura Sundari Mantra
    • Vashikaran Mantra
    • RAM Rameti Rameti Mantra
    • Kalavati Aai Balopasana
    • Swayamvara Parvathi Mantra
    • Akhand Vishnu Karyam Characharam Mantra
    • Varahi Moola Mantra
    • Durant Dev Mantra
    • Daridra Dahan Shiv Stotra
    • Sanskrit Shlok On Karma
    • Ucchista Ganapati Mantra
    • Pitra Gayatri Mantra
    • Shri Radha Kripa Kataksh Stotra
    • Narsingh Kavach
    • Damodar Ashtakam
    • Ekatmata Stotra

    📖 अगर आपको मराठी *उखाणे* पसंद हैं, तो इनका पूरा संग्रह यहाँ देखें : Simple Marathi Ukhane

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