हिन्दू धर्म में माँ लक्ष्मी को सुख, समृद्धि और वैभव की अधिष्ठात्री देवी माना गया है। वे भगवान विष्णु की शक्ति हैं और उनकी कृपा से ही जीवन में धन, स्वास्थ्य, संतान और विजय की प्राप्ति होती है। माँ लक्ष्मी के आठ विशेष रूप होते हैं जिन्हें अष्टलक्ष्मी कहा जाता है। इन्हीं आठों स्वरूपों की एक साथ स्तुति करने वाला दिव्य स्तोत्र Ashtalakshmi Stotram है।
Sri Ashtalakshmi Stotra एक अत्यन्त प्राचीन और प्रामाणिक स्तोत्र है जिसमें माँ लक्ष्मी के आठ स्वरूपों – आदिलक्ष्मी, धान्यलक्ष्मी, धैर्यलक्ष्मी, गजलक्ष्मी, सन्तानलक्ष्मी, विजयलक्ष्मी, विद्यालक्ष्मी और धनलक्ष्मी – की विधिवत स्तुति की गई है। यह स्तोत्र दक्षिण भारत में विशेष रूप से प्रचलित है और Ashtalakshmi Stotram In Telugu तथा संस्कृत में इसका पाठ मन्दिरों में नित्य होता है।
जो साधक नियमित रूप से अष्टलक्ष्मी स्तोत्र पाठ करते हैं, उन्हें जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में माँ की कृपा प्राप्त होती है। आइए इस दिव्य स्तोत्र को विस्तार से समझते हैं।
अष्टलक्ष्मी (Ashtalakshmi) – आठ स्वरूपों का परिचय
अष्टलक्ष्मी अर्थात माँ लक्ष्मी के वे आठ दिव्य रूप जो मानव जीवन की आठ प्रमुख आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं। ये आठ रूप इस प्रकार हैं:
- आदिलक्ष्मी – मूल लक्ष्मी, जो मोक्ष और आध्यात्मिक कृपा प्रदान करती हैं।
- धान्यलक्ष्मी – अन्न और कृषि की देवी, जो भूख और अभाव दूर करती हैं।
- धैर्यलक्ष्मी – साहस और वीरता की देवी, जो जीवन में शक्ति देती हैं।
- गजलक्ष्मी – ऐश्वर्य और सम्मान की देवी, जो राजसी वैभव देती हैं।
- सन्तानलक्ष्मी – संतान सुख और पारिवारिक समृद्धि की देवी।
- विजयलक्ष्मी – विजय और सफलता की देवी, जो सभी बाधाएं दूर करती हैं।
- विद्यालक्ष्मी – ज्ञान और विद्या की देवी, जो बुद्धि और विवेक देती हैं।
- धनलक्ष्मी – धन और वित्तीय समृद्धि की देवी।
Ashtalakshmi Stotram In Hindi – सम्पूर्ण पाठ
नीचे अष्टलक्ष्मी स्तोत्र का सम्पूर्ण संस्कृत पाठ देवनागरी लिपि में दिया गया है, जिसके साथ transliteration और सरल हिन्दी अर्थ भी प्रस्तुत हैं।
1. आदिलक्ष्मी
संस्कृत पाठ:
सुमनस वन्दित सुन्दरि माधवि, चन्द्र सहोदरि हेममये।
मुनिगण वन्दित मोक्षप्रदायनि, मञ्जुल भाषिणि वेदनुते।
पङ्कजवासिनि देव सुपूजित, सद्गुण वर्षिणि शान्तियुते।
जय जयहे मधुसूदन कामिनि, आदिलक्ष्मि परिपालय माम् ॥ 1 ॥
Transliteration:
Sumanas vandita sundari madhavi, chandra sahodari hemamaye.
Munigana vandita mokshapradayani, manjula bhashini vedanute.
Pankaja vasini deva supujita, sadguna varshini shantiyte.
Jaya jayahe madhusudana kamini, adilakshmi paripalaay maam.
अर्थ: हे सुन्दरी! देवताओं और मुनियों द्वारा वन्दित, चन्द्रमा की सहोदरी, सुवर्णमयी माँ! आप मोक्ष देने वाली, मधुर वाणी बोलने वाली और वेदों में स्तुता हैं। कमल पर विराजमान, सद्गुणों की वर्षा करने वाली, शान्तिस्वरूपिणी माँ! हे मधुसूदन की प्रिया आदिलक्ष्मी, आप मेरी रक्षा करें।
2. धान्यलक्ष्मी
संस्कृत पाठ:
अयिकलि कल्मष नाशिनि कामिनि, वैदिक रूपिणि वेदमये।
क्षीर समुद्भव मङ्गल रूपिणि, मन्त्रनिवासिनि मन्त्रनुते।
मङ्गलदायिनि अम्बुजवासिनि, देवगणाश्रित पादयुते।
जय जयहे मधुसूदन कामिनि, धान्यलक्ष्मि सदापालय माम् ॥ 2 ॥
Transliteration:
Ayikali kalmasha nashini kamini, vaidika rupini vedamaye.
Kshira samudbhava mangala rupini, mantranivashini mantranute.
Mangaladayini ambujavasini, devaganaasrita padayute.
Jaya jayahe madhusudana kamini, dhanyalakshmi sadapalaay maam.
अर्थ: हे कलियुग के पापों का नाश करने वाली! वैदिक स्वरूपा, क्षीरसागर से उत्पन्न मङ्गलमयी माँ! मन्त्रों में निवास करने वाली, देवताओं के चरणों की आश्रय देने वाली माँ धान्यलक्ष्मी, सदा मेरी रक्षा करें।
3. धैर्यलक्ष्मी
संस्कृत पाठ:
जयवरवर्षिणि वैष्णवि भार्गवि, मन्त्र स्वरूपिणि मन्त्रमये।
सुरगण पूजित शीघ्र फलप्रद, ज्ञान विकासिनि शास्त्रनुते।
भवभयहारिणि पापविमोचनि, साधु जनाश्रित पादयुते।
जय जयहे मधु सूदन कामिनि, धैर्यलक्ष्मी परिपालय माम् ॥ 3 ॥
Transliteration:
Jaya vara varshini vaishhnavi bhargavi, mantra svarupini mantramaye.
Suragana pujita sheeghraphala prada, jnana vikashini shaasthranute.
Bhavabhayaharini papavimochani, sadhu janaasrita padayute.
Jaya jayahe madhu sudana kamini, dhairyalakshmi paripalaay maam.
अर्थ: हे विजय और वरदान देने वाली! वैष्णवी, भार्गवी, मन्त्रस्वरूपिणी माँ! देवताओं द्वारा पूजित, शीघ्र फल देने वाली, ज्ञान विकसित करने वाली माँ! संसार के भय और पापों से मुक्त करने वाली धैर्यलक्ष्मी, मेरी रक्षा करें।
4. गजलक्ष्मी
संस्कृत पाठ:
जय जय दुर्गति नाशिनि कामिनि, सर्वफलप्रद शास्त्रमये।
रधगज तुरगपदाति समावृत, परिजन मण्डित लोकनुते।
हरिहर ब्रह्म सुपूजित सेवित, ताप निवारिणि पादयुते।
जय जयहे मधुसूदन कामिनि, गजलक्ष्मी रूपेण पालय माम् ॥ 4 ॥
Transliteration:
Jaya jaya durgati nashini kamini, sarvaphala prada shaastramaye.
Rathagaja turagapadati samaavruta, parijana mandita lokanute.
Harihar brahma supujita sevita, tapa nivarini padayute.
Jaya jayahe madhusudana kamini, gajalakshmi rupena palaay maam.
अर्थ: हे दुर्गति नाशिनी! सभी फल देने वाली, रथ-गज-अश्व-पैदल सेना से घिरी, परिवार से सुशोभित माँ! विष्णु, शिव और ब्रह्मा द्वारा पूजित, ताप दूर करने वाली गजलक्ष्मी, अपने रूप से मेरी रक्षा करें।
5. सन्तानलक्ष्मी
संस्कृत पाठ:
अयिखग वाहिनि मोहिनि चक्रिणि, रागविवर्धिनि ज्ञानमये।
गुणगणवारधि लोकहितैषिणि, स्वरसप्त भूषित गाननुते।
सकल सुरासुर देव मुनीश्वर, मानव वन्दित पादयुते।
जय जयहे मधुसूदन कामिनि, सन्तानलक्ष्मी त्वं पालय माम् ॥ 5 ॥
Transliteration:
Ayikhaga vahini mohini chakrini, ragavivardhinii jnanamaye.
Gunagana varadhi lokahitaishini, svarasapta bhushita gananute.
Sakala surasura deva munishvara, maanava vandita padayute.
Jaya jayahe madhusudana kamini, santanalakshmi tvam palaay maam.
अर्थ: हे पक्षीवाहिनी! मोहिनी, चक्रधारिणी, प्रेम को बढ़ाने वाली, ज्ञानमयी माँ! गुणों के सागर, लोकहित चाहने वाली, सात सुरों से स्तुता माँ! देव, असुर, मुनि और मानव सभी जिनके चरणों की वन्दना करते हैं – हे सन्तानलक्ष्मी, मेरी रक्षा करें।
6. विजयलक्ष्मी
संस्कृत पाठ:
जय कमलासिनि सद्गति दायिनि, ज्ञानविकासिनि गानमये।
अनुदिन मर्चित कुङ्कुम धूसर, भूषित वासित वाद्यनुते।
कनकधरास्तुति वैभव वन्दित, शङ्करदेशिक मान्यपदे।
जय जयहे मधुसूदन कामिनि, विजयलक्ष्मी सदा पालय माम् ॥ 6 ॥
Transliteration:
Jaya kamalasini sadgati dayini, jnanavikashini ganamaye.
Anudina marchita kunkuma dhusara, bhushita vasita vadyanute.
Kanakadhara stuti vaibhava vandita, shankaradeshika manyapade.
Jaya jayahe madhusudana kamini, vijayalakshmi sada palaay maam.
अर्थ: हे कमलासिनी! सद्गति देने वाली, ज्ञान विकसित करने वाली, गानमयी माँ! प्रतिदिन कुंकुम और पुष्पों से पूजित, कनकधारा स्तोत्र से वन्दित, शंकराचार्य द्वारा सम्मानित माँ! हे विजयलक्ष्मी, सदा मेरी रक्षा करें।
7. विद्यालक्ष्मी
संस्कृत पाठ:
प्रणत सुरेश्वरि भारति भार्गवि, शोकविनाशिनि रत्नमये।
मणिमय भूषित कर्णविभूषण, शान्ति समावृत हास्यमुखे।
नवनिधि दायिनि कलिमलहारिणि, कामित फलप्रद हस्तयुते।
जय जयहे मधुसूदन कामिनि, विद्यालक्ष्मी सदा पालय माम् ॥ 7 ॥
Transliteration:
Pranata sureshvari bharati bhargavi, shokavikashini ratnamaye.
Manimaya bhushita karnavibhushana, shanti samavruta hasya mukhe.
Nava nidhi dayini kalimalharani, kamita phala prada hastayute.
Jaya jayahe madhusudana kamini, vidyalakshmi sada palaay maam.
अर्थ: हे देवेश्वरी! भारती, भार्गवी, शोकनाशिनी, रत्नमयी माँ! मणियों से सुशोभित कर्णभूषण धारण करने वाली, शान्त हास्यमुखी माँ! नव निधियाँ देने वाली, कलियुग के पापों को हरने वाली, इच्छित फल देने वाली माँ विद्यालक्ष्मी, सदा मेरी रक्षा करें।
8. धनलक्ष्मी
संस्कृत पाठ:
धिमिधिमि धिन्धिमि धिन्धिमि-दिन्धिमि, दुन्धुभि नाद सुपूर्णमये।
घुमघुम घुङ्घुम घुङ्घुम घुङ्घुम, शङ्ख निनाद सुवाद्यनुते।
वेद पूराणेतिहास सुपूजित, वैदिक मार्ग प्रदर्शयुते।
जय जयहे मधुसूदन कामिनि, धनलक्ष्मि रूपेणा पालय माम् ॥ 8 ॥
Transliteration:
Dhimidimi dhindimi dhindimi-dindimi, dundubhi nada supurnamaye.
Ghumaghumaa ghunghumaa ghunghumaa ghunghumaa, shankha ninada suvaadyanute.
Veda puranaetihasa supujita, vaidika marga pradarshayute.
Jaya jayahe madhusudana kamini, dhanalakshmi rupena palaay maam.
अर्थ: दुन्दुभि नाद और शंखध्वनि से गुंजित, सम्पूर्ण वातावरण को मंगलमय बनाने वाली माँ! वेद, पुराण और इतिहास में सुपूजित, वैदिक मार्ग दिखाने वाली माँ! हे धनलक्ष्मी, अपने रूप से मेरी रक्षा करें।
फलश्रुति (Phala Shruti)
संस्कृत पाठ:
अष्टलक्ष्मी नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि।
विष्णुवक्षः स्थला रूढे भक्त मोक्ष प्रदायिनि ॥
शङ्ख चक्रगदाहस्ते विश्वरूपिणिते जयः।
जगन्मात्रे च मोहिन्यै मङ्गलं शुभ मङ्गलम् ॥
Transliteration:
Ashtalakshmi namastubhyam varade kamarupini.
Vishnuvaksha sthala rudhe bhakta moksha pradayini.
Shankha chakra gadahaste vishvarupini te jayah.
Jaganmatre cha mohinyai mangalam shubha mangalam.
अर्थ: हे अष्टलक्ष्मी! आपको नमस्कार है। आप वरदायिनी, कामरूपिणी, विष्णु के हृदय पर आसीन और भक्तों को मोक्ष देने वाली हैं। शंख, चक्र और गदा धारण करने वाली, विश्वरूपिणी माँ की जय हो। हे जगन्माता, मोहिनी देवी, सदा मंगल हो।
Ashtalakshmi Stotram In Telugu – సంపూర్ణ పాఠం
దక్షిణ భారతదేశంలో Ashtalakshmi Stotram In Telugu చాలా ప్రాచీనకాలం నుండి పఠించబడుతోంది. ఆంధ్రప్రదేశ్ మరియు తెలంగాణ రాష్ట్రాల మందిరాలలో ఈ స్తోత్రం నిత్యం పఠించబడుతుంది. తెలుగు భక్తులకు సంపూర్ణ అష్టలక్ష్మీ స్తోత్రం తెలుగు లిపిలో ఇక్కడ అందించబడుతోంది।
ఆదిలక్ష్మి
సుమనస వందిత సుందరి మాధవి, చంద్ర సహొదరి హేమమయే
మునిగణ వందిత మోక్షప్రదాయని, మంజుల భాషిణి వేదనుతే ।
పంకజవాసిని దేవ సుపూజిత, సద్గుణ వర్షిణి శాంతియుతే
జయ జయహే మధుసూదన కామిని, ఆదిలక్ష్మి పరిపాలయ మామ్ ॥ 1 ॥
ధాన్యలక్ష్మి
అయికలి కల్మష నాశిని కామిని, వైదిక రూపిణి వేదమయే
క్షీర సముద్భవ మంగళ రూపిణి, మంత్రనివాసిని మంత్రనుతే ।
మంగళదాయిని అంబుజవాసిని, దేవగణాశ్రిత పాదయుతే
జయ జయహే మధుసూదన కామిని, ధాన్యలక్ష్మి సదాపాలయ మాం ॥ 2 ॥
ధైర్యలక్ష్మి
జయవరవర్షిణి వైష్ణవి భార్గవి, మంత్ర స్వరూపిణి మంత్రమయే
సురగణ పూజిత శీఘ్ర ఫలప్రద, జ్ఞాన వికాసిని శాస్త్రనుతే ।
భవభయహారిణి పాపవిమోచని, సాధు జనాశ్రిత పాదయుతే
జయ జయహే మధు సూధన కామిని, ధైర్యలక్ష్మీ పరిపాలయ మామ్ ॥ 3 ॥
గజలక్ష్మి
జయ జయ దుర్గతి నాశిని కామిని, సర్వఫలప్రద శాస్త్రమయే
రధగజ తురగపదాతి సమావృత, పరిజన మండిత లోకనుతే ।
హరిహర బ్రహ్మ సుపూజిత సేవిత, తాప నివారిణి పాదయుతే
జయ జయహే మధుసూదన కామిని, గజలక్ష్మీ రూపేణ పాలయ మామ్ ॥ 4 ॥
సంతానలక్ష్మి
అయిఖగ వాహిని మోహిని చక్రిణి, రాగవివర్ధిని జ్ఞానమయే
గుణగణవారధి లోకహితైషిణి, స్వరసప్త భూషిత గాననుతే ।
సకల సురాసుర దేవ మునీశ్వర, మానవ వందిత పాదయుతే
జయ జయహే మధుసూదన కామిని, సంతానలక్ష్మీ త్వం పాలయ మాం ॥ 5 ॥
విజయలక్ష్మి
జయ కమలాసిని సద్గతి దాయిని, జ్ఞానవికాసిని గానమయే
అనుదిన మర్చిత కుంకుమ ధూసర, భూషిత వాసిత వాద్యనుతే ।
కనకధరాస్తుతి వైభవ వందిత, శంకరదేశిక మాన్యపదే
జయ జయహే మధుసూదన కామిని, విజయలక్ష్మీ సదా పాలయ మాం ॥ 6 ॥
విద్యాలక్ష్మి
ప్రణత సురేశ్వరి భారతి భార్గవి, శోకవినాశిని రత్నమయే
మణిమయ భూషిత కర్ణవిభూషణ, శాంతి సమావృత హాస్యముఖే ।
నవనిధి దాయిని కలిమలహారిణి, కామిత ఫలప్రద హస్తయుతే
జయ జయహే మధుసూదన కామిని, విద్యాలక్ష్మీ సదా పాలయ మామ్ ॥ 7 ॥
ధనలక్ష్మి
ధిమిధిమి ధింధిమి ధింధిమి-దింధిమి, దుంధుభి నాద సుపూర్ణమయే
ఘుమఘుమ ఘుంఘుమ ఘుంఘుమ ఘుంఘుమ, శంఖ నినాద సువాద్యనుతే ।
వేద పూరాణేతిహాస సుపూజిత, వైదిక మార్గ ప్రదర్శయుతే
జయ జయహే మధుసూదన కామిని, ధనలక్ష్మి రూపేణా పాలయ మామ్ ॥ 8 ॥
ఫలశ్రుతి
శ్లో॥ అష్టలక్ష్మీ నమస్తుభ్యం వరదే కామరూపిణి ।
విష్ణువక్షః స్థలా రూఢే భక్త మోక్ష ప్రదాయిని ॥
శ్లో॥ శంఖ చక్రగదాహస్తే విశ్వరూపిణితే జయః ।
జగన్మాత్రే చ మోహిన్యై మంగళం శుభ మంగళమ్ ॥
अष्टलक्ष्मी स्तोत्र का आध्यात्मिक महत्व
अष्टलक्ष्मी स्तोत्र केवल धन-धान्य की प्राप्ति का साधन नहीं है। यह एक समग्र स्तोत्र है जो जीवन के हर पहलू को समेटता है। इसमें जीवन की आठ आवश्यकताओं – आदि (मूल शक्ति), अन्न, साहस, ऐश्वर्य, सन्तान, विजय, विद्या और धन – की एक साथ प्राप्ति का मार्ग बताया गया है।
प्रत्येक श्लोक के अन्त में आती है यह पंक्ति – “जय जयहे मधुसूदन कामिनि” – यह पंक्ति यह स्मरण कराती है कि माँ लक्ष्मी भगवान विष्णु (मधुसूदन) की प्रिया हैं। उनकी भक्ति करने से विष्णुजी की कृपा भी स्वतः प्राप्त होती है।
यह Ashtalakshmi Stotra सिखाता है कि सच्ची समृद्धि केवल भौतिक नहीं होती – उसमें विद्या, साहस, संतान, विजय और अन्ततः मोक्ष भी सम्मिलित होता है।
Ashtalakshmi Stotram In Telugu और अन्य भाषाओं में महत्व
Ashtalakshmi Stotram In Telugu तिरुपति, तिरुनल्वेली और अन्य दक्षिण भारतीय मन्दिरों में विशेष रूप से गाया जाता है। आन्ध्र प्रदेश और तेलंगाना में अष्टलक्ष्मी के आठों रूपों के अलग-अलग मन्दिर हैं जहाँ यह स्तोत्र प्रतिदिन पाठ होता है।
उत्तर भारत में Ashtalakshmi Stotram In Hindi के माध्यम से इस स्तोत्र की पहुँच और अधिक सुलभ हो गई है। Ashta Laxmi Stotram का पाठ शुक्रवार के दिन, दीपावली पर और नवरात्रि के अवसर पर विशेष फलदायी माना जाता है।
अष्टलक्ष्मी स्तोत्र पाठ का सही समय और विधि
कब करें पाठ:
नियमित रूप से प्रातःकाल स्नान के बाद अष्टलक्ष्मी स्तोत्र पाठ करना सर्वोत्तम माना जाता है। शुक्रवार का दिन माँ लक्ष्मी को अत्यन्त प्रिय है, इसलिए इस दिन विशेष रूप से इस स्तोत्र का पाठ करें।
दीपावली की रात, नवरात्रि, कोजागरी पूर्णिमा, और वरलक्ष्मी व्रत के अवसर पर भी Sri Ashtalakshmi Stotra का पाठ विशेष फलदायी होता है।
पाठ विधि:
सबसे पहले पूजा स्थल को स्वच्छ करें। माँ लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएं। कमल का फूल, केसर मिश्रित जल और मिठाई अर्पित करें। इसके पश्चात मन में श्रद्धा और एकाग्रता रखते हुए अष्टलक्ष्मी स्तोत्र का पाठ आरंभ करें।
कितनी बार करें:
परम्परागत रूप से एक बार सम्पूर्ण स्तोत्र का पाठ किया जाता है। विशेष अवसरों पर इसे तीन बार पढ़ने का विधान है।
अष्टलक्ष्मी स्तोत्र के लाभ
श्री अष्टलक्ष्मी स्तोत्र के नियमित पाठ से निम्नलिखित आध्यात्मिक और व्यावहारिक लाभ प्राप्त होते हैं:
धन और समृद्धि: धनलक्ष्मी की कृपा से आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होती है और घर में लक्ष्मी का वास होता है।
ज्ञान और विद्या: विद्यालक्ष्मी की आराधना से बुद्धि तीव्र होती है, विद्यार्थियों को पढ़ाई में सफलता मिलती है।
साहस और आत्मविश्वास: धैर्यलक्ष्मी की भक्ति से संकट में भी हिम्मत नहीं टूटती और जीवन की चुनौतियों का सामना करने की शक्ति मिलती है।
संतान सुख: सन्तानलक्ष्मी की कृपा से पारिवारिक जीवन में सुख और संतान की प्राप्ति होती है।
विजय और सफलता: विजयलक्ष्मी की आराधना से कार्य में सफलता, प्रतियोगिताओं में जय और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है।
अन्न और स्वास्थ्य: धान्यलक्ष्मी की कृपा से घर में अन्न की कमी नहीं होती और स्वास्थ्य बना रहता है।
मोक्ष की दिशा: आदिलक्ष्मी की भक्ति से आत्मा को मोक्ष की दिशा मिलती है और जीवन आध्यात्मिक उन्नति की ओर बढ़ता है।
मन की शान्ति: इस Ashtalakshmi Stotra के पाठ से मन में गहरी शान्ति और सकारात्मकता का संचार होता है।
अष्टलक्ष्मी स्तोत्र अर्थ सहित – शब्द व्याख्या
अष्टलक्ष्मी स्तोत्र अर्थ सहित समझने के लिए कुछ प्रमुख शब्दों की व्याख्या:
- अष्ट = आठ
- लक्ष्मी = समृद्धि और सौभाग्य की देवी
- स्तोत्र = स्तुति, प्रशंसा का गीत
- मधुसूदन = भगवान विष्णु का नाम (मधु राक्षस का वध करने वाले)
- कामिनि = प्रिया, विष्णु की शक्ति
- पालय माम् = मेरी रक्षा करो, मेरा पालन करो
- मोक्षप्रदायिनि = मोक्ष देने वाली
निष्कर्ष
Ashtalakshmi Stotram माँ लक्ष्मी की उपासना का सबसे पूर्ण और व्यापक स्तोत्र है। यह केवल धन माँगने की प्रार्थना नहीं है, बल्कि यह जीवन की सम्पूर्ण समृद्धि – अन्न, साहस, ऐश्वर्य, संतान, विजय, विद्या, धन और मोक्ष – की एक साथ आराधना है।
अष्टलक्ष्मी स्तोत्र यह याद दिलाता है कि माँ लक्ष्मी की कृपा से जीवन के किसी भी क्षेत्र में अभाव नहीं रहता। जब हम शुद्ध मन और श्रद्धापूर्ण भाव से श्री अष्टलक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करते हैं, तो माँ अपनी आठों शक्तियों से हमें आशीर्वाद देती हैं।
“जय जयहे मधुसूदन कामिनि” – यह उद्घोष हमें निरन्तर याद दिलाता है कि माँ लक्ष्मी और भगवान विष्णु की युगल भक्ति ही परम कल्याणकारी है।
माँ अष्टलक्ष्मी की कृपा सभी भक्तों पर सदा बनी रहे।
जय माँ लक्ष्मी! जय अष्टलक्ष्मी!
? अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs): अष्टलक्ष्मी स्तोत्र
प्रश्न 1: Ashtalakshmi Stotram कौन से देवता को समर्पित है?
यह स्तोत्र माँ लक्ष्मी के आठ दिव्य स्वरूपों (अष्टलक्ष्मी) को समर्पित है। इनमें आदिलक्ष्मी, धान्यलक्ष्मी, धैर्यलक्ष्मी, गजलक्ष्मी, सन्तानलक्ष्मी, विजयलक्ष्मी, विद्यालक्ष्मी और धनलक्ष्मी सम्मिलित हैं।
प्रश्न 2: अष्टलक्ष्मी स्तोत्र पाठ किस दिन और समय करना चाहिए?
शुक्रवार को प्रातःकाल स्नान के बाद यह पाठ सर्वोत्तम होता है। दीपावली, नवरात्रि और वरलक्ष्मी व्रत के दिन इसका विशेष महत्व है।
प्रश्न 3: अष्टलक्ष्मी स्तोत्र के लाभ क्या हैं?
धन, विद्या, साहस, संतान, विजय, अन्न, ऐश्वर्य और मोक्ष – जीवन की सभी आठ समृद्धियों की प्राप्ति इस स्तोत्र के नियमित पाठ से होती है।
प्रश्न 4: क्या Ashtalakshmi Stotram In Telugu में भी उपलब्ध है?
हाँ, यह स्तोत्र तेलुगु, कन्नड़, तमिल, मलयालम, बंगाली सहित सभी प्रमुख भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है। दक्षिण भारतीय मन्दिरों में Ashtalakshmi Stotram In Telugu का पाठ विशेष रूप से होता है।
प्रश्न 5: इस स्तोत्र में “मधुसूदन कामिनि” का क्या अर्थ है?
“मधुसूदन” भगवान विष्णु का नाम है और “कामिनि” अर्थात प्रिया। इसका अर्थ है भगवान विष्णु की शक्ति-स्वरूपिणी माँ लक्ष्मी। यह पंक्ति हर श्लोक में आती है और माँ लक्ष्मी की विष्णुजी से अभिन्नता को प्रकट करती है।
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