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    Home » Mantras » Aaj Ka Sankalp Mantra – संकल्प मंत्र अर्थ, लाभ और विधि
    Mantras

    Aaj Ka Sankalp Mantra – संकल्प मंत्र अर्थ, लाभ और विधि

    RaviBy RaviMarch 9, 2026
    aaj ka sankalp mantra

    हिंदू धर्म की प्राचीन परंपरा में aaj ka sankalp mantra एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र घोषणा है। यह संकल्प मंत्र किसी भी शुभ कार्य, पूजा, हवन, व्रत या दैनिक कर्मकांड की शुरुआत में पढ़ा जाता है।

    “संकल्प” शब्द संस्कृत के दो मूल शब्दों से बना है सम् (पूर्ण, समग्र) और कल्प (नियम, संकल्प, विधान)। अर्थात् संकल्प का तात्पर्य है एक पूर्ण, शुद्ध और दृढ़ इच्छाशक्ति। यह केवल एक इच्छा नहीं, बल्कि ईश्वर के समक्ष की गई पवित्र प्रतिज्ञा है।

    Table of Contents

    Toggle
    • संकल्प मंत्र – Sankalp Mantra in Sanskrit
      • मूल संस्कृत पाठ
      • सटीक ट्रांसलिटरेशन (Transliteration)
    • शब्द-दर-शब्द अर्थ – Word-by-Word Meaning
    • सरल अर्थ – Sankalp Mantra Meaning in English
    • पंचांग के अनुसार रिक्त स्थान कैसे भरें – How to Fill the Blanks
    • आध्यात्मिक व्याख्या – Spiritual Significance
    • कब पढ़ें – When to Recite Sankalp Mantra
      • सर्वोत्तम समय
      • किन परिस्थितियों में पढ़ें
      • विधि
    • लाभ – Benefits of Sankalp Mantra
      • आध्यात्मिक लाभ
      • मानसिक और भावनात्मक लाभ
      • व्यावहारिक लाभ
    • निष्कर्ष (Conclusion)
    • ? FAQs – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
      • प्रश्न 1: संकल्प मंत्र (Sankalp Mantra) का अर्थ क्या है?
      • प्रश्न 2: Aaj Ka Sankalp Mantra कब पढ़ना चाहिए?
      • प्रश्न 3: संकल्प मंत्र के क्या लाभ हैं?
      • प्रश्न 4: क्या संकल्प मंत्र रोज बदलता है?
      • प्रश्न 5: संकल्प मंत्र कितनी बार पढ़ें?
      • प्रश्न 6: क्या यह मंत्र भगवद्गीता से है?

    लोग Aaj ka sankalp mantra क्यों पढ़ते हैं? क्योंकि यह मन को केंद्रित करता है, पापों का नाश करता है और दिव्य कृपा प्राप्त करने में सहायक होता है। गृह्य सूत्रों और पुराणों के अनुसार, संकल्प से साधारण कार्य भी पुण्य कर्म बन जाता है।

    9 मार्च 2026 (विक्रम संवत 2082, कलयुक्त संवत्सर, चैत्र कृष्ण पक्ष षष्ठी, सोमवार) अजमेर, राजस्थान में यह मंत्र विशेष रूप से प्रभावी है क्योंकि सर्वार्थ सिद्धि योग और अन्य शुभ योग आज सक्रिय हैं।

    आखिरी अपडेट: 9 मार्च 2026

    संकल्प मंत्र – Sankalp Mantra in Sanskrit

    यहाँ दिया गया संकल्प मंत्र संस्कृत वैदिक परंपरा का पूर्ण रूप है, जो दैनिक पंचांग के अनुसार अनुकूलित किया जाता है। नीचे 9 मार्च 2026, अजमेर के विवरण भरे गए हैं।

    मूल संस्कृत पाठ

    ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः॥

    ॐ अद्य ब्रह्मणोऽह्नि द्वितीय परार्धे श्री श्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरे, अष्टाविंशतितमे कलियुगे, कलिप्रथम चरणे जम्बूद्वीपे भरतखण्डे भारतवर्षे पुण्य अजमेर क्षेत्रे बौद्धावतारे वीर विक्रमादित्यनृपतेः 2082 तमेऽब्दे कलयुक्त नाम संवत्सरे उत्तरायणे शिशिर ऋतो महामंगल्यप्रदे मासानां फाल्गुन मासोत्तमे चैत्र मासे कृष्ण पक्षे षष्ठी तिथौ सोम वासरे [गोत्र नाम] गोत्रोत्पन्नोऽहं [अपना नाम] सकलपापक्षयपूर्वकं सर्वारिष्ट शांतिनिमित्तं सर्वमंगलकामनया श्रुतिस्मृत्योक्तफलप्राप्त्यर्थं मनेप्सित कार्य सिद्धयर्थं श्री [देवता नाम] पूजनं च अहं करिष्ये।

    तत्पूर्वागंत्वेन निर्विघ्नतापूर्वक कार्य सिद्धयर्थं यथामिलितोपचारे गणपति पूजनं करिष्ये॥

    नोट: संकल्प मंत्र बोलने के बाद हाथ की सारी सामग्री जल, फूल, अक्षत आदि नीचे छोड़ दें। यह समर्पण का प्रतीक है।

    Sankalp Mantra in Sanskrit

    सटीक ट्रांसलिटरेशन (Transliteration)

    Om Vishnur Vishnur Vishnuh ॥

    Om adya brahmano hni dvitiya paraardhe shri shvetavaraaha kalpe vaivasvata manvantare ashtaavimshatitame kaliyuge kaliprathama charane jambudvipe bharatakhanḍe bharatavarṣe punya Ajamera kshetre bauddhaavataare veera vikramaaditya nripateh 2082 tame bde Kalayukta naama samvatsare uttaraayane shishira ratau mahaamangalyaprade maasaanaam phaalguna maasottame chaitra maase krishna pakshe shashthi tithau soma vaasare [gotra] gotrotpanno ham [your name] sakala paapa kshaya poorvakam sarva arishta shaanti nimittam sarva mangala kaamanayaa shruti smriti ukta phala praaptyartham manepsita kaarya siddhyartham shri [deity name] poojanam cha aham karishye ॥

    Tatpoorva agantvena nirvighnata poorvaka kaarya siddhyartham yathaamilita upachaare ganapati poojanam karishye ॥

    संकल्प मंत्र: संकल्प मंत्र pdf

    शब्द-दर-शब्द अर्थ – Word-by-Word Meaning

    संस्कृत पद अर्थ
    ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः ॐ, विष्णु तीन बार — सृष्टि, पालन और संहार के लिए त्रिमूर्ति का आह्वान
    अद्य ब्रह्मणोऽह्नि द्वितीय परार्धे आज ब्रह्मा के दिन के दूसरे भाग में (एक कल्प ≈ 311 ट्रिलियन वर्ष)
    श्री श्वेतवाराहकल्पे श्वेत वाराह कल्प में — वर्तमान सृष्टि चक्र, जहाँ विष्णु ने वराह अवतार लिया
    वैवस्वतमन्वन्तरे वैवस्वत मनु के मन्वंतर में
    अष्टाविंशतितमे कलियुगे कलियुग के 28वें चक्र में (कलियुग = 4,32,000 वर्ष)
    जम्बूद्वीपे… भारतवर्षे जम्बूद्वीप, भारतखंड, पवित्र भारत में
    पुण्य [स्थान] क्षेत्रे पवित्र अजमेर क्षेत्र में
    कलयुक्त नाम संवत्सरे 60 वर्षीय चक्र में “कलयुक्त” नाम के संवत्सर में
    उत्तरायणे शिशिर ऋतौ उत्तरायण में शिशिर ऋतु (छह ऋतुएँ: वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत, शिशिर)
    चैत्र मासे चैत्र मास में (12 मास: चैत्र से फाल्गुन)
    कृष्ण पक्षे षष्ठी तिथौ कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि पर
    सोम वासरे सोमवार को
    गोत्रोत्पन्नोऽहं [नाम] [गोत्र] गोत्रीय [नाम] — मैं
    सकलपापक्षयपूर्वकं सभी पापों के नाश से पूर्व
    श्री [देवता] पूजनं करिष्ये श्री [देवता] की पूजा करूंगा/करूंगी
    तत्पूर्वागंत्वेन… गणपति पूजनं पहले निर्विघ्न सिद्धि के लिए गणपति पूजन करूंगा

    सरल अर्थ – Sankalp Mantra Meaning in English

    Om Vishnu thrice. Today, in Brahma’s second half, Shweta Varaha Kalpa, Vaivasvata Manvantara, 28th Kali Yuga, first quarter in the holy land of Ajmer, Bharat, in Vikram Samvat 2082 (Kalayukta year), Uttarayana, Shishir season, Chaitra month, Krishna Paksha Shashthi tithi, Monday I, [name] of [gotra] lineage, shall perform worship of Shri [deity] for destruction of all sins, removal of obstacles, auspicious desires, scriptural merits, and fulfilment of my heartfelt goal. Prior to this, I shall perform Ganesha puja for unhindered success.

    पंचांग के अनुसार रिक्त स्थान कैसे भरें – How to Fill the Blanks

    संकल्प मंत्र में कुछ स्थान व्यक्तिगत और दैनिक विवरण के लिए रिक्त रहते हैं। उन्हें इस प्रकार भरें:

    रिक्त स्थान आज का विवरण (9 मार्च 2026)
    स्थान अजमेर (अपना नगर/ग्राम लिखें)
    संवत्सर कलयुक्त (विक्रम संवत 2082)
    अयन उत्तरायण
    ऋतु शिशिर
    मास चैत्र (फाल्गुन के बाद)
    पक्ष कृष्ण पक्ष
    तिथि षष्ठी
    वार सोमवार
    नक्षत्र विशाखा (दोपहर 4:11 तक), तत्पश्चात अनुराधा
    गोत्र अपना गोत्र (जैसे कश्यप, वशिष्ठ आदि)
    नाम अपना पूरा नाम
    देवता जिनकी पूजा करनी हो (शिव, विष्णु, दुर्गा आदि)

    आध्यात्मिक व्याख्या – Spiritual Significance

    Sankalp Mantra का गहरा अर्थ है दृढ़ इच्छाशक्ति का विष्णु की आज्ञा में पूर्ण समर्पण।

    विष्णु का त्रिगुण आह्वान ब्रह्मांड की एकता दर्शाता है। ब्रह्मा के परार्ध से लेकर आज की तिथि तक का वर्णन हमें स्मरण कराता है कि यह जीवन क्षणभंगुर है पर भक्ति से अमरत्व प्राप्त होता है।

    जब हम sankalp mantra in hindi या संस्कृत में पढ़ते हैं, तो हम ब्रह्मांडीय समय की विशाल धारा में स्वयं को स्थापित करते हैं। यह अहंकार को नष्ट करता है और सात्विक कर्म की ओर ले जाता है ठीक वैसे ही जैसा भगवद्गीता में कर्मयोग कहा गया है।

    मुख्य संदेश: शुद्ध संकल्प से कार्य करें, फल ईश्वर पर छोड़ दें।

    “सङ्कल्पमूलः कामः” सभी कामनाओं और उपलब्धियों का मूल संकल्प ही है।

    कब पढ़ें – When to Recite Sankalp Mantra

    सर्वोत्तम समय

    ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4:48 – 5:37 बजे) में संकल्प मंत्र पढ़ना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त (दोपहर 12 बजे के आसपास) भी उत्तम है।

    किन परिस्थितियों में पढ़ें

    • प्रतिदिन की सुबह की पूजा से पहले
    • किसी भी व्रत, हवन, या यज्ञ से पहले
    • विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे संस्कारों में
    • नवरात्रि, दीपावली, एकादशी, पूर्णिमा जैसे त्योहारों पर
    • किसी नए महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत में

    विधि

    दाएं हाथ में जल, फूल और अक्षत लेकर पूर्वाभिमुख (पूर्व दिशा की ओर मुख करके) बैठें और श्रद्धापूर्वक एक बार मंत्र पढ़ें। मंत्र समाप्ति पर सारी सामग्री नीचे छोड़ दें।

    Read Also: Sai Kasht Nivaran Mantra

    लाभ – Benefits of Sankalp Mantra

    आध्यात्मिक लाभ

    • पाप नाश और आत्म शुद्धि — संकल्प से पूर्व के सभी जाने-अनजाने पापों का क्षय होता है
    • विघ्नों का निवारण — आज की षष्ठी तिथि में यह विशेष रूप से प्रभावशाली है
    • भक्ति और श्रद्धा में वृद्धि — कार्य को दिव्य अर्पण बनाने से भक्ति गहरी होती है
    • मोक्ष मार्ग प्रशस्त — सात्विक कर्म और शुद्ध संकल्प मुक्ति की राह खोलते हैं

    मानसिक और भावनात्मक लाभ

    • मन की एकाग्रता, शांति और सकारात्मकता
    • संकल्पशक्ति (Willpower) में दृढ़ता
    • अहंकार का विसर्जन और विनम्रता का विकास
    • दिव्य उद्देश्य से जुड़कर दिन की शुरुआत

    व्यावहारिक लाभ

    • मनोकामना पूर्ति और कार्य सिद्धि
    • दैनिक जीवन में अनुशासन और नियमितता
    • परिवार में सुख, शांति और समृद्धि की कामना पूर्ण होना

    निष्कर्ष (Conclusion)

    आज का संकल्प मंत्र जीवन को दिव्य उद्देश्य से जोड़ता है। इस पवित्र वचन से हम भगवान विष्णु की शरण में आते हैं, पापों को छोड़कर शांति पाते हैं और अपने कार्य को एक यज्ञ बनाते हैं।

    जब हम प्रतिदिन sankalp mantra in hindi या संस्कृत में पढ़ते हैं, तो हम ब्रह्मा के विशाल कालचक्र में अपनी छोटी किंतु महत्वपूर्ण भूमिका को पहचानते हैं। यह विनम्रता का पाठ है, भक्ति की शुरुआत है और कर्म की पवित्रता का द्वार है।

    आज की षष्ठी तिथि और सर्वार्थ सिद्धि योग के शुभ संयोग में आपके संकल्प अवश्य फलीभूत हों। भक्ति भाव से जपें, मनोकामनाएँ पूर्ण हों।

    ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः

    ? FAQs – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

    प्रश्न 1: संकल्प मंत्र (Sankalp Mantra) का अर्थ क्या है?

    यह पूजा की शुरुआत में की जाने वाली पवित्र प्रतिज्ञा है, जिसमें भक्त ब्रह्मांडीय समय में अपनी स्थिति बताकर दृढ़ संकल्प के साथ दिव्य आज्ञा से कार्य सिद्धि की प्रार्थना करता है।

    प्रश्न 2: Aaj Ka Sankalp Mantra कब पढ़ना चाहिए?

    पूजा शुरू करने से ठीक पहले, एक बार दाएं हाथ में जल-फूल-अक्षत लेकर पूर्वाभिमुख होकर पढ़ें। ब्रह्म मुहूर्त में पढ़ना सर्वोत्तम है।

    प्रश्न 3: संकल्प मंत्र के क्या लाभ हैं?

    पाप क्षय, विघ्न नाश, मन की शांति, एकाग्रता, कार्य सिद्धि, भक्ति वृद्धि और मोक्ष मार्ग की प्राप्ति।

    प्रश्न 4: क्या संकल्प मंत्र रोज बदलता है?

    हाँ। तिथि, पक्ष, मास, नक्षत्र और वार प्रतिदिन बदलते हैं, इसलिए aaj ka sankalp mantra में इन्हें दैनिक पंचांग के अनुसार भरा जाता है।

    प्रश्न 5: संकल्प मंत्र कितनी बार पढ़ें?

    एक बार पर्याप्त है। यह दोहराया जाने वाला जप नहीं, बल्कि ईश्वर के समक्ष एकमात्र सचेत और श्रद्धापूर्ण प्रतिज्ञा है।

    प्रश्न 6: क्या यह मंत्र भगवद्गीता से है?

    नहीं। यह वैदिक गृह्य सूत्रों और पुराणों की परंपरा से है। भगवद्गीता में कर्मयोग का सिद्धांत अवश्य इसके भाव से मेल खाता है।

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