नवरात्रि हिन्दू धर्म का सबसे पवित्र और शक्तिशाली पर्व है। यह नौ दिनों का उत्सव माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की उपासना को समर्पित है। नवरात्रि के दौरान हवन करना एक अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान माना जाता है।
Navratri havan mantra का पाठ करते हुए हवन कुंड में आहुति देना माँ शक्ति को प्रसन्न करने का सबसे श्रेष्ठ उपाय है। हवन एक वैदिक यज्ञ प्रक्रिया है जिसमें अग्नि को साक्षी मानकर देवी-देवताओं को आहुति अर्पित की जाती है।
इस लेख में हम आपको navratri havan mantra, navratri havan samagri list, navratri havan vidhi और नवरात्रि हवन विधि मंत्र की संपूर्ण और प्रामाणिक जानकारी देंगे।
नवरात्रि हवन सामग्री सूची (Navratri Havan Samagri List)
हवन से पूर्व सभी आवश्यक सामग्रियां एकत्र करना अत्यंत जरूरी है।
मुख्य हवन सामग्री
- हवन कुंड (तांबे या मिट्टी का)
- आम की लकड़ी
- शुद्ध देसी घी (गाय का)
- हवन सामग्री (तिल, जौ, चावल, गुड़)
- कपूर और गुग्गुल
पूजन सामग्री
- लाल वस्त्र और लाल फूल (गुड़हल, गुलाब)
- रोली, मोली, अक्षत (चावल)
- सुपारी, पान के पत्ते
- नारियल, केले और मौसमी फल
- धूप, दीप, अगरबत्ती
विशेष सामग्री
- लौंग और इलायची
- बिल्वपत्र और दूर्वा घास
- पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)
- गंगाजल
- चंदन और केसर
नवरात्रि हवन विधि (Navratri Havan Vidhi)
घर पर हवन कैसे करें? बिना पंडित के नवरात्रि पूजा कैसे करें?
navratri havan vidhi को सही क्रम में करना आवश्यक है। नीचे चरण-दर-चरण विधि दी गई है।
चरण 1 – आसन और शुद्धिकरण
स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। हवन स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें। पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
चरण 2 – अग्नि प्रज्वलन
हवन कुंड में आम की लकड़ियां व्यवस्थित रखें। कपूर से अग्नि प्रज्वलित करें।
चरण 3 – आहुति का नियम
यदि हवन 2 या 2 से अधिक लोग कर रहे हैं तो 1 सदस्य घी की आहुति दे, बाकी सदस्य हवन सामग्री से आहुति दें।
नवरात्रि हवन मंत्र (Navratri Havan Mantra) – संपूर्ण क्रम
चरण 1 – पंच देव आहुति (5 मंत्र – 5 बार शुद्ध देसी घी से आहुति)
इन 5 मंत्रों से 5 बार शुद्ध देसी घी की आहुति दें:
ॐ प्रजापतये स्वाहा।
ॐ इन्द्राय स्वाहा।
ॐ अग्नये स्वाहा।
ॐ सोमाय स्वाहा।
ॐ भूः स्वाहा।
चरण 2 – नवग्रह आहुति मंत्र
नवग्रहों की शांति के लिए इन मंत्रों से आहुति दें:
ऊँ सूर्याय नमः स्वाहा
ऊँ चंद्रयसे स्वाहा
ऊं भौमाय नमः स्वाहा
ऊँ बुधाय नमः स्वाहा
ऊँ गुरवे नमः स्वाहा
ऊँ शुक्राय नमः स्वाहा
ऊँ शनये नमः स्वाहा
ऊँ राहवे नमः स्वाहा
ऊँ केतवे नमः स्वाहा
चरण 3 – गायत्री मंत्र आहुति (21 बार)
अब 21 बार गायत्री मंत्र का जाप करते हुए आहुति दें:
ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं
भर्गो देवस्य धीमहि
धियो यो न: प्रचोदयात्। स्वाहा
(21 बार)
चरण 4 – देवी-देवता आहुति मंत्र
इन मंत्रों से हवन में आहुति दें:
ॐ गणेशाय नम: स्वाहा।
ॐ गौरियाय नम: स्वाहा।
ॐ नवग्रहाय नम: स्वाहा।
ॐ दुर्गाय नम: स्वाहा।
ॐ महाकालिकाय नम: स्वाहा।
ॐ हनुमते नम: स्वाहा।
ॐ भैरवाय नम: स्वाहा।
ॐ कुल देवताय नम: स्वाहा।
ॐ स्थान देवताय नम: स्वाहा।
ॐ ब्रह्माय नम: स्वाहा।
ॐ विष्णुवे नम: स्वाहा।
ॐ शिवाय नम: स्वाहा।
चरण 5 – नवदुर्गा नवरात्रि हवन मंत्र
माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों को आहुति दें:
ॐ दुर्गा देवी नमः स्वाहा
ॐ शैलपुत्री देवी नमः स्वाहा
ॐ ब्रह्मचारिणी देवी नमः स्वाहा
ॐ चंद्र घंटा देवी नमः स्वाहा
ॐ कुष्मांडा देवी नमः स्वाहा
ॐ स्कन्द देवी नमः स्वाहा
ॐ कात्यायनी देवी नमः स्वाहा
ॐ कालरात्रि देवी नमः स्वाहा
ॐ महागौरी देवी नमः स्वाहा
ॐ सिद्धिदात्री देवी नमः स्वाहा
चरण 6 – विशेष आहुति मंत्र
माँ दुर्गा की स्तुति मंत्र:
ॐ जयंती मंगलाकाली भद्रकाली कपालिनी
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा,
स्वधा नमस्तुते स्वाहा।
सर्व ग्रह शांति मंत्र:
ॐ ब्रह्मामुरारी त्रिपुरांतकारी
भानु: शशि: भूमि सुतो बुधश्च:
गुरुश्च शुक्रे शनि राहु केतो
सर्वे ग्रहा शांति कर: भवंतु स्वाहा।
गुरु वंदना मंत्र:
ॐ गुरुर्ब्रह्मा, गुरुर्विष्णु,
गुरुर्देवा महेश्वर:
गुरु साक्षात परब्रह्मा
तस्मै श्री गुरुवे नम: स्वाहा।
चरण 7 – महामृत्युंजय मंत्र आहुति (11 बार)
अब 11 बार महामृत्युंजय मंत्र से आहुति दें:
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिंम् पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।
मृत्युन्जाय नम: स्वाहा।
(11 बार)
चरण 8 – नारायणी स्तुति आहुति (1 बार)
एक बार इस मंत्र से आहुति दें:
ॐ शरणागत दीनार्त परित्राण परायणे,
सर्व स्यार्ति हरे देवि नारायणी नमस्तुते। स्वाहा।
चरण 9 – माता का नर्वाण बीज मंत्र (108 बार)
माता के नर्वाण बीज मंत्र से 108 बार आहुतियां दें:
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै। स्वाहा
(108 बार)
चरण 10 – दुर्गा सप्तशती देवी स्तुति आहुति
दुर्गा सप्तशती के पाँचवें अध्याय में देवताओं द्वारा देवी स्तुति में कहे गए मंत्रों से आहुति दें:
या देवी सर्वभूतेषु विष्णुमायेति शब्दिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
या देवी सर्वभूतेषु चेतनेत्यभिधीयते।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
या देवी सर्वभूतेषु निद्रारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
या देवी सर्वभूतेषु क्षुधारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
या देवी सर्वभूतेषु च्छायारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
या देवी सर्वभूतेषु तृष्णारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
या देवी सर्वभूतेषु क्षान्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
या देवी सर्वभूतेषु जातिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
या देवी सर्वभूतेषु लज्जारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
या देवी सर्वभूतेषु शान्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
या देवी सर्वभूतेषु श्रद्धारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
या देवी सर्वभूतेषु कान्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
या देवी सर्वभूतेषु वृत्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
या देवी सर्वभूतेषु स्मृतिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
या देवी सर्वभूतेषु भ्रान्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
इन्द्रियाणामधिष्ठात्री भुतानाञ्चाखिलेषु या।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
चितिरूपेण या कृत्स्नमेतद् व्याप्य स्थिता जगत्।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
स्तुता सुरैः पूर्वमभीष्टसंश्रया
त्तथा सुरेन्द्रेण दिनेषु सेविता।
करोतु सा नः शुभहेतुरीश्वरी
शुभानि भद्राण्यभिहन्तु चापदः॥ स्वाहा
या साम्प्रतं चोद्धतदैत्यतापितै
रस्माभिरीशा च सुरैर्नमस्यते।
या च स्मृता तत्क्षणमेव हन्ति नः
सर्वापदो भक्तिविनम्रमूर्तिभिः॥ स्वाहा
Navratri Havan Mantra PDF:
मंत्रों का आध्यात्मिक महत्व
Navratri havan mantra का आध्यात्मिक महत्व अत्यंत गहरा है। इन मंत्रों का हर शब्द दिव्य शक्ति से भरा हुआ है। जब हम इन मंत्रों का उच्चारण करते हैं तो उनकी ध्वनि तरंगें वातावरण में फैलती हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं।
हवन की अग्नि में आहुति देना सांसारिक अहंकार और इच्छाओं के त्याग का प्रतीक है। घी, तिल, जौ और जड़ी-बूटियों की आहुति से निकला धुआं वायुमंडल को शुद्ध करता है।
नवरात्रि हवन के लाभ
आध्यात्मिक लाभ
- माँ दुर्गा की विशेष कृपा और आशीर्वाद
- नकारात्मक ऊर्जा और बुरी शक्तियों का नाश
- मन में शांति, स्थिरता और एकाग्रता
- जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता
- ग्रह दोषों का शमन
वैज्ञानिक लाभ
- हवन के धुएं से वायुमंडल शुद्ध होता है
- मंत्र ध्वनि से मानसिक एकाग्रता बढ़ती है
- तनाव और चिंता से मुक्ति
- घर का वातावरण सकारात्मक होता है
Read Also: Aaj Ka Sankalp Mantra
उपसंहार (Conclusion)
नवरात्रि हवन एक दिव्य अनुभव है जो हमें माँ दुर्गा के और करीब ले जाता है। Navratri havan mantra का भावपूर्ण उच्चारण, navratri havan samagri का उचित उपयोग और navratri havan vidhi का सही पालन – ये तीनों मिलकर हवन को संपूर्ण और फलदायी बनाते हैं।
माँ दुर्गा केवल बाहरी पूजा नहीं, बल्कि आंतरिक शुद्धता और सच्ची भक्ति से प्रसन्न होती हैं। इस नवरात्रि, पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ हवन करें।
🔱 जय माँ दुर्गे | जय माँ भवानी | जय माँ शेरावाली 🔱
? अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्र.1 – नवरात्रि हवन में सबसे महत्वपूर्ण मंत्र कौन सा है?
उ. माता का नर्वाण बीज मंत्र “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै स्वाहा” सबसे महत्वपूर्ण है। इसे 108 बार आहुति के साथ जपा जाता है।
प्र.2 – नवरात्रि हवन में कितनी आहुतियां देनी चाहिए?
उ. नर्वाण बीज मंत्र से 108 आहुतियां, गायत्री मंत्र से 21 और महामृत्युंजय मंत्र से 11 आहुतियां देना विहित है।
प्र.3 – क्या हवन घर पर बिना पंडित के किया जा सकता है?
उ. हाँ। शुद्ध मन, स्वच्छ वस्त्र और इस लेख में दी गई navratri havan vidhi का पालन करते हुए आप स्वयं हवन कर सकते हैं।
प्र.4 – हवन करते समय किस दिशा में बैठें?
उ. पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना शुभ माना जाता है।
प्र.5 – नवरात्रि हवन के लिए सबसे अच्छा समय कौन सा है?
उ. प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4 से 6 बजे) या नवमी और अष्टमी के दिन हवन करना सर्वोत्तम है।
प्र.6 – दुर्गा सप्तशती के मंत्र हवन में क्यों पढ़े जाते हैं?
उ. दुर्गा सप्तशती के पाँचवें अध्याय के “या देवी सर्वभूतेषु…” मंत्र माँ के विभिन्न रूपों की स्तुति हैं। इनसे आहुति देने पर माँ की सर्वशक्तियाँ प्रसन्न होती हैं।
