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    Home » Mantras » Purnahuti Mantra – हवन की पूर्णाहुति का पवित्र मंत्र, अर्थ, महत्व और लाभ
    Mantras

    Purnahuti Mantra – हवन की पूर्णाहुति का पवित्र मंत्र, अर्थ, महत्व और लाभ

    RaviBy RaviMay 14, 2026
    Purnahuti Mantra

    हिंदू धर्म में हवन और यज्ञ को सर्वोच्च आध्यात्मिक कर्म माना जाता है। जब कोई भी यज्ञ, हवन या अनुष्ठान संपन्न होता है, तो उसके समापन पर Purnahuti Mantra का पाठ किया जाता है। यह मंत्र यज्ञ की पूर्णता का प्रतीक है अर्थात् इसके उच्चारण के साथ यह घोषणा की जाती है कि यह पवित्र अग्निकार्य अब संपूर्ण हो गया है।

    Havan Purnahuti Mantra केवल एक औपचारिक समापन नहीं है, बल्कि यह ईश्वर को संपूर्ण समर्पण का भाव व्यक्त करता है। इस मंत्र के माध्यम से साधक भगवान से यह निवेदन करता है कि जो भी कर्म, ध्यान, मंत्र और आहुति अर्पित की गई हैं, वे सभी पूर्ण, सफल और फलदायी हों।

    जब घर में, मंदिर में या किसी शुभ अवसर पर हवन किया जाता है, तो Purnahuti Mantra in Hindi और संस्कृत में पढ़ा जाता है। यह मंत्र यज्ञ की आत्मा है इसके बिना हवन अधूरा माना जाता है।

    Table of Contents

    Toggle
    • Purnahuti Mantra in Sanskrit (पूर्णाहुति मंत्र संस्कृत में)
      • भाग १ – Purnahuti Mantra (YajurVeda)
      • भाग २ – Purnahuti Shloka
    • Purnahuti Mantra in Hindi – शब्द-शब्द अर्थ
      • भाग १ – Purnahuti Mantra (YajurVeda) का अर्थ:
      • भाग २ – Purnahuti Shloka का अर्थ:
    • Purnahuti Mantra का आध्यात्मिक महत्व
    • Havan Purnahuti Mantra – कब और कैसे पढ़ें?
      • किन अवसरों पर पढ़ा जाता है?
    • Purnahuti Mantra Telugu (తెలుగులో పూర్ణాహుతి మంత్రం)
    • Purnahuti Mantra In Kannada (ಕನ್ನಡದಲ್ಲಿ ಪೂರ್ಣಾಹುತಿ ಮಂತ್ರ)
    • Purnahuti Mantra In Tamil (தமிழில் பூர்ணாஹுதி மந்திரம்)
    • Purnahuti Mantra के आध्यात्मिक लाभ (Spiritual Benefits)
    • निष्कर्ष (Conclusion)
    • ? FAQs – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
      • Q1. Purnahuti Mantra क्या होता है?
      • Q2. Havan Purnahuti Mantra कब पढ़ा जाता है?
      • Q3. क्या Purnahuti Mantra वेदों से है?
      • Q4. Purnahuti Mantra कितनी बार पढ़ना चाहिए?
      • Q5. क्या महिलाएं Purnahuti Mantra पढ़ सकती हैं?
      • Q6. Purnahuti Mantra in Sanskrit और Hindi में क्या अंतर है?

    Purnahuti Mantra in Sanskrit (पूर्णाहुति मंत्र संस्कृत में)

    Purnahuti Mantra का मूल स्रोत यजुर्वेद (YajurVeda) है। इस पवित्र परंपरा में दो भाग होते हैं पहला Purnahuti Mantra और दूसरा Purnahuti Shloka। दोनों को क्रमशः पढ़ा जाता है।

    भाग १ – Purnahuti Mantra (YajurVeda)

    ॐ सप्ता ते अग्ने समिधः सप्ता जिह्वाः सप्त ऋषयः।
    सप्त धामप्रियाः सप्त होत्राः सप्तधा त्वा यजन्ति।
    सप्त योनीरा पृणस्व घृतेन स्वाहा।।

    English Transliteration:

    Om Sapta Te Agne Samidhah Sapta Jihvah Sapta Rishayah |
    Sapta Dhamapriyah Sapta Hotrah Saptadha Tva Yajanti |
    Sapta Yonira Prinasva Ghrtena Svaha ||

    भाग २ – Purnahuti Shloka

    ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते।
    पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते।।
    ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः।।

    English Transliteration:

    Om Purnamadah Purnamidam Purnat Purnamudachyate |
    Purnasya Purnamadaya Purnamevavashishyate ||
    Om Shantih Shantih Shantih ||

    Purnahuti Mantra in Hindi – शब्द-शब्द अर्थ

    भाग १ – Purnahuti Mantra (YajurVeda) का अर्थ:

    संस्कृत अर्थ
    सप्त ते अग्ने समिधः हे अग्नि! तुम्हारी सात समिधाएँ (ईंधन की लकड़ियाँ) हैं
    सप्त जिह्वाः तुम्हारी सात जिह्वाएँ (लपटें) हैं
    सप्त ऋषयः सात ऋषि (तुम्हारे साक्षी) हैं
    सप्त धामप्रियाः सात धाम (लोक) तुम्हें प्रिय हैं
    सप्त होत्राः सात होता (यज्ञकर्ता) हैं
    सप्तधा त्वा यजन्ति सात प्रकार से तुम्हारी पूजा की जाती है
    सप्त योनीरा पृणस्व सात योनियों को तुम घृत से परिपूर्ण करो
    घृतेन स्वाहा घी की आहुति के साथ स्वाहा!

    सरल हिंदी अर्थ: हे अग्नि देव! आपकी सात समिधाएँ, सात ज्वालाएँ, सात ऋषि, सात प्रिय लोक, सात होता और सात प्रकार की पूजा है। आप इन सभी सात योनियों को घृत से परिपूर्ण करें यह आहुति आपको समर्पित है।

    भाग २ – Purnahuti Shloka का अर्थ:

    संस्कृत अर्थ
    पूर्णम् अदः वह (परमात्मा) पूर्ण है
    पूर्णम् इदम् यह (जगत) भी पूर्ण है
    पूर्णात् पूर्णम् उदच्यते पूर्ण में से पूर्ण उत्पन्न होता है
    पूर्णस्य पूर्णम् आदाय पूर्ण में से पूर्ण निकालने पर
    पूर्णम् एव अवशिष्यते फिर भी पूर्ण ही शेष रहता है
    शान्तिः शान्तिः शान्तिः शांति हो, शांति हो, शांति हो

    सरल हिंदी अर्थ: ईश्वर पूर्ण है, यह संसार भी पूर्ण है। पूर्णता में से पूर्णता ही प्रकट होती है। जब पूर्ण में से पूर्ण ले लिया जाए, तो भी पूर्ण ही बचता है। ॐ शांति, शांति, शांति।

    Purnahuti Mantra का आध्यात्मिक महत्व

    Purnahuti Mantra केवल शब्दों का समूह नहीं है, यह एक गहन आध्यात्मिक अनुभव है। यजुर्वेद से उद्धृत यह मंत्र अग्नि देव के सप्त स्वरूपों का आह्वान करता है और उन्हें पूर्ण आहुति समर्पित करता है।

    “पूर्णाहुति” शब्द दो भागों से बना है “पूर्ण” अर्थात् संपूर्ण, और “आहुति” अर्थात् हवन में अर्पित की जाने वाली सामग्री। इस प्रकार पूर्णाहुति का अर्थ है संपूर्ण समर्पण की अंतिम आहुति।

    Hawan Purnahuti Mantra में “सप्त” (सात) की आवृत्ति अत्यंत महत्वपूर्ण है सात समिधाएँ, सात ज्वालाएँ, सात ऋषि, सात लोक। यह सात की संख्या सृष्टि की संपूर्णता का प्रतीक है। अग्नि देव के इन सात रूपों की आराधना से यज्ञ पूर्ण फलदायी होता है।

    इसके साथ आने वाला Purnahuti Shloka “ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं…” ईशावास्योपनिषद् से लिया गया है और यह ब्रह्म की अनंत पूर्णता का उद्घोष करता है। यह हमें सिखाता है कि ईश्वर अनंत है जब हम उसे कुछ अर्पित करते हैं, तो वह और अधिक देता है।

    Havan Purnahuti Mantra – कब और कैसे पढ़ें?

    Havan Purnahuti Mantra हवन के अंतिम चरण में पढ़ा जाता है। इसे पढ़ने की परंपरागत विधि इस प्रकार है:

    • जब हवन की सभी आहुतियाँ पूर्ण हो जाती हैं, तब अंत में पूर्णाहुति दी जाती है।
    • इस समय एक विशेष बड़ी आहुति जिसमें नारियल, पान, सुपारी, घी, जौ और पुष्प होते हैं अग्नि में समर्पित की जाती है।
    • उसी समय Purnahuti Mantra का पाठ किया जाता है।
    • यह क्षण अत्यंत पवित्र और भावपूर्ण होता है परिवार के सभी सदस्य एक साथ हाथ जोड़कर यह मंत्र दोहराते हैं।

    किन अवसरों पर पढ़ा जाता है?

    • गृह प्रवेश हवन
    • नवग्रह शांति यज्ञ
    • सत्यनारायण पूजा
    • विवाह के समय हवन
    • मुंडन, जनेऊ संस्कार
    • नामकरण संस्कार
    • किसी भी धार्मिक यज्ञ या अनुष्ठान का समापन

    Purnahuti Mantra Telugu (తెలుగులో పూర్ణాహుతి మంత్రం)

    తెలుగు భాషలో పూర్ణాహుతి మంత్రం మరియు పూర్ణాహుతి శ్లోకం ఈ విధంగా పఠిస్తారు:

    భాగం ౧ – Purnahuti Mantra (యజుర్వేదం):

    ఓం సప్తా తే అగ్నే సమిధః సప్తా జిహ్వాః సప్త ఋషయః।
    సప్త ధామప్రియాః సప్త హోత్రాః సప్తధా త్వా యజంతి।
    సప్త యోనీరా పృణస్వ ఘృతేన స్వాహా॥

    భాగం ౨ – Purnahuti Shloka:

    ఓం పూర్ణమదః పూర్ణమిదం పూర్ణాత్ పూర్ణముదచ్యతే।
    పూర్ణస్య పూర్ణమాదాయ పూర్ణమేవావశిష్యతే॥
    ఓం శాంతిః శాంతిః శాంతిః॥

    తెలుగు అర్థం: హే అగ్నిదేవా! మీ సప్త స్వరూపాలకు ఈ ఘృత ఆహుతి సమర్పిస్తున్నాము స్వాహా! ఆ పరమాత్మ పరిపూర్ణుడు, ఈ జగత్తు కూడా పరిపూర్ణమైనది. పరిపూర్ణం నుండి పరిపూర్ణం జనిస్తుంది. సమస్త శాంతి మాకు లభించుగాక।

    Purnahuti Mantra In Kannada (ಕನ್ನಡದಲ್ಲಿ ಪೂರ್ಣಾಹುತಿ ಮಂತ್ರ)

    ಕನ್ನಡ ಭಾಷೆಯಲ್ಲಿ ಪೂರ್ಣಾಹುತಿ ಮಂತ್ರ ಮತ್ತು ಪೂರ್ಣಾಹುತಿ ಶ್ಲೋಕವನ್ನು ಈ ರೀತಿ ಪಠಿಸಲಾಗುತ್ತದೆ:

    ಭಾಗ ೧ – Purnahuti Mantra (ಯಜುರ್ವೇದ):

    ಓಂ ಸಪ್ತಾ ತೇ ಅಗ್ನೇ ಸಮಿಧಃ ಸಪ್ತಾ ಜಿಹ್ವಾಃ ಸಪ್ತ ಋಷಯಃ।
    ಸಪ್ತ ಧಾಮಪ್ರಿಯಾಃ ಸಪ್ತ ಹೋತ್ರಾಃ ಸಪ್ತಧಾ ತ್ವಾ ಯಜಂತಿ।
    ಸಪ್ತ ಯೋನೀರಾ ಪೃಣಸ್ವ ಘೃತೇನ ಸ್ವಾಹಾ॥

    ಭಾಗ ೨ – Purnahuti Shloka:

    ಓಂ ಪೂರ್ಣಮದಃ ಪೂರ್ಣಮಿದಂ ಪೂರ್ಣಾತ್ ಪೂರ್ಣಮುದಚ್ಯತೇ।
    ಪೂರ್ಣಸ್ಯ ಪೂರ್ಣಮಾದಾಯ ಪೂರ್ಣಮೇವಾವಶಿಷ್ಯತೇ॥
    ಓಂ ಶಾಂತಿಃ ಶಾಂತಿಃ ಶಾಂತಿಃ॥

    ಕನ್ನಡ ಅರ್ಥ: ಹೇ ಅಗ್ನಿದೇವಾ! ನಿಮ್ಮ ಸಪ್ತ ರೂಪಗಳಿಗೆ ಈ ಘೃತ ಆಹುತಿಯನ್ನು ಸಮರ್ಪಿಸುತ್ತೇವೆ ಸ್ವಾಹಾ! ಆ ಪರಮಾತ್ಮನು ಪರಿಪೂರ್ಣನು, ಈ ಜಗತ್ತು ಸಹ ಪರಿಪೂರ್ಣವಾಗಿದೆ. ಪರಿಪೂರ್ಣದಿಂದ ಪರಿಪೂರ್ಣ ಹೊರಹೊಮ್ಮುತ್ತದೆ. ಸಕಲ ಶಾಂತಿಯು ನಮಗೆ ದೊರಕಲಿ।

    Purnahuti Mantra In Tamil (தமிழில் பூர்ணாஹுதி மந்திரம்)

    தமிழ் மொழியில் பூர்ணாஹுதி மந்திரம் மற்றும் பூர்ணாஹுதி ஶ்லோகம் இவ்வாறு பாராயணம் செய்யப்படுகிறது:

    பகுதி ௧ – Purnahuti Mantra (யஜுர்வேதம்):

    ஓம் ஸப்தா தே அக்னே ஸமிதஃ ஸப்தா ஜிஹ்வாஃ ஸப்த ருஷயஃ।
    ஸப்த தாமப்ரியாஃ ஸப்த ஹோத்ராஃ ஸப்ததா த்வா யஜந்தி।
    ஸப்த யோனீரா ப்ருணஸ்வ க்ருதேன ஸ்வாஹா॥

    பகுதி ௨ – Purnahuti Shloka:

    ஓம் பூர்ணமதஃ பூர்ணமிதம் பூர்ணாத் பூர்ணமுதச்யதே।
    பூர்ணஸ்ய பூர்ணமாதாய பூர்ணமேவாவஶிஷ்யதே॥
    ஓம் ஶாந்திஃ ஶாந்திஃ ஶாந்திஃ॥

    தமிழ் பொருள்: ஹே அக்னி தேவா! உங்கள் ஏழு வடிவங்களுக்கு இந்த நெய் ஆஹுதியை சமர்ப்பிக்கிறோம் ஸ்வாஹா! அந்த பரமாத்மா முழுமையானவர், இந்த உலகமும் முழுமையானது. முழுமையிலிருந்து முழுமை தோன்றுகிறது. சகல சாந்தியும் நமக்கு கிட்டட்டும்।

    Purnahuti Mantra के आध्यात्मिक लाभ (Spiritual Benefits)

    Hawan Purnahuti Mantra का नियमित और श्रद्धापूर्वक पाठ करने से निम्नलिखित आध्यात्मिक और मानसिक लाभ प्राप्त होते हैं:

    १. मन की शांति यह मंत्र मस्तिष्क को शांत करता है। “शांतिः शांतिः शांतिः” का त्रिकालिक उच्चारण मन के तीनों तापों आधिभौतिक, आधिदैविक और आध्यात्मिक को शांत करता है।

    २. यज्ञ की पूर्णता बिना Purnahuti Mantra के हवन अधूरा माना जाता है। इस मंत्र के साथ यज्ञ संपूर्ण फल देता है।

    ३. घर में सकारात्मकता जब हवन के अंत में यह मंत्र पढ़ा जाता है, तो वातावरण शुद्ध होता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है।

    ४. ईश्वर से जुड़ाव पूर्णाहुति का क्षण साधक के लिए परमात्मा से सबसे गहरे संवाद का क्षण होता है। यह मंत्र आत्मा और परमात्मा के बीच के संबंध को और दृढ़ करता है।

    ५. कर्म की शुद्धि यह मंत्र यह भाव जगाता है कि हमारा कोई भी कर्म हमारा नहीं, सब ईश्वर का है “इदं न मम” (यह मेरा नहीं है)। यह भावना अहंकार को गलाती है।

    ६. समृद्धि और कल्याण कुबेर देवता का आह्वान करने वाले भाग से घर में धन-धान्य और समृद्धि की कामना की जाती है।

    निष्कर्ष (Conclusion)

    Purnahuti Mantra हिंदू धर्म की उस महान परंपरा का हिस्सा है जो मानती है कि हर शुभ कार्य ईश्वर की कृपा से पूर्ण होता है। जब हम यज्ञ की अंतिम आहुति के साथ यह मंत्र पढ़ते हैं, तो हम यह स्वीकार करते हैं कि हम केवल निमित्त हैं सब कुछ परमात्मा का है।

    “ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदम्…” यह कुछ शब्द नहीं, यह ब्रह्म का सत्य है, ईश्वर की महिमा है और साधक का समर्पण है।

    चाहे आप Purnahuti Mantra in Hindi में पढ़ें, Purnahuti Mantra in Sanskrit में उच्चारण करें, Purnahuti Mantra Telugu में पाठ करें, Purnahuti Mantra in Kannada में बोलें, या Purnahuti Mantra in Tamil में दोहराएं इस मंत्र की शक्ति और पवित्रता सभी में समान है।

    यह मंत्र हमें याद दिलाता है ईश्वर पूर्ण है, सृष्टि पूर्ण है, और जब हम उसे पूर्ण समर्पण से पुकारते हैं, तो हम भी पूर्णता को प्राप्त होते हैं।

    🪔 ॐ शांतिः शांतिः शांतिः॥

    ? FAQs – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

    Q1. Purnahuti Mantra क्या होता है?

    पूर्णाहुति मंत्र वह पवित्र मंत्र है जिसे हवन या यज्ञ के अंतिम चरण में पढ़ा जाता है। यह यज्ञ की संपूर्णता और ईश्वर को अंतिम समर्पण का प्रतीक है। इसके बिना हवन अधूरा माना जाता है।

    Q2. Havan Purnahuti Mantra कब पढ़ा जाता है?

    यह मंत्र हवन की सभी आहुतियाँ देने के बाद, अंत में पूर्णाहुति देते समय पढ़ा जाता है। यह हवन के समापन का संकेत है।

    Q3. क्या Purnahuti Mantra वेदों से है?

    हाँ। इस मंत्र का मुख्य भाग “ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदम्…” ईशावास्योपनिषद् (शुक्ल यजुर्वेद) से लिया गया है। यह वैदिक परंपरा का अत्यंत महत्वपूर्ण मंत्र है।

    Q4. Purnahuti Mantra कितनी बार पढ़ना चाहिए?

    पूर्णाहुति मंत्र हवन में केवल एक बार अंत में पढ़ा जाता है। लेकिन “ॐ पूर्णमदः…” का पाठ आप दैनिक ध्यान या प्रातःकाल भी कर सकते हैं।

    Q5. क्या महिलाएं Purnahuti Mantra पढ़ सकती हैं?

    हाँ, बिल्कुल। हिंदू धर्म में स्त्री और पुरुष दोनों वैदिक मंत्रों का पाठ कर सकते हैं। परिवार के सभी सदस्य मिलकर इस मंत्र का उच्चारण कर सकते हैं।

    Q6. Purnahuti Mantra in Sanskrit और Hindi में क्या अंतर है?

    मंत्र मूलतः संस्कृत में है। हिंदी में इसका उच्चारण और अर्थ समझाया जाता है। दोनों भाषाओं में मंत्र की पवित्रता और शक्ति समान रहती है।

    🙏 इन मंत्रों और श्लोकों को भी पढ़ना न भूलें:

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