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    16 Somvar Vrat Katha in Hindi – पूजा विधि, कथा, फायदे और उद्यापन विधि (2026)

    RaviBy RaviApril 30, 2026
    16 Somvar Vrat Katha

    भगवान शिव की असीम कृपा प्राप्त करने के लिए हिंदू धर्म में अनेक व्रत और उपवास किए जाते हैं। उन्हीं में से एक अत्यंत पवित्र और फलदायी व्रत है 16 Somvar Vrat। यह व्रत सोलह सोमवार तक लगातार किया जाता है और भगवान शंकर को समर्पित है।

    Somvar Vrat Katha सुनना और सुनाना इस व्रत का अनिवार्य हिस्सा है। शास्त्रों में बताया गया है कि जो भी भक्त सच्चे मन से यह व्रत करता है और 16 Somvar Vrat Katha श्रद्धापूर्वक सुनता है, उसकी समस्त मनोकामनाएं भगवान भोलेनाथ अवश्य पूरी करते हैं।

    यह व्रत केवल विवाह के लिए ही नहीं, बल्कि पुत्र प्राप्ति, रोग निवारण, समृद्धि, मानसिक शांति और गृहस्थ सुख जैसी किसी भी शुभ इच्छा की पूर्ति के लिए किया जा सकता है। इस लेख में आप जानेंगे 16 Somvar Vrat Vidhi, सम्पूर्ण Somvar Vrat Katha In Hindi, 16 Somvar Vrat Dates 2026, उद्यापन विधि और इस व्रत के आध्यात्मिक फायदे।

    Table of Contents

    Toggle
    • 16 Somvar Vrat का आध्यात्मिक महत्व
    • 16 Somvar Vrat Dates 2026
    • 16 Somvar Vrat Vidhi – पूजा की सम्पूर्ण विधि
      • पूजन सामग्री
      • संकल्प मंत्र
      • आवाहन मंत्र
      • पूजा विधि – चरण दर चरण
    • 16 Somvar Vrat Katha – सम्पूर्ण कथा (Somvar Vrat Katha In Hindi)
      • 🔱 प्रथम प्रसंग – पुजारी और अप्सरा की कथा
      • 🔱 द्वितीय प्रसंग – माता पार्वती और कार्तिकेय की कथा
      • 🔱 तृतीय प्रसंग – कार्तिकेय और उनके ब्राह्मण मित्र की कथा
      • 🔱 चतुर्थ प्रसंग – ब्राह्मण मित्र और राजकुमारी की कथा
      • 🔱 पञ्चम प्रसंग – राजकुमारी, पुत्र और राजपाट की कथा
      • 🔱 षष्ठ प्रसंग – राजकुमारी का निष्कासन और पुनर्मिलन
    • 16 सोमवार के व्रत का उद्यापन कैसे करें
      • उद्यापन विधि:
    • 16 सोमवार के व्रत के फायदे (Spiritual Benefits)
    • 16 Somvar Vrat Katha PDF के बारे में जानकारी
    • पूजा का शुभ समय और नियम
    • निष्कर्ष – भोलेनाथ की शरण में
    • FAQs – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
      • प्रश्न 1: 16 Somvar Vrat कब से शुरू करना चाहिए?
      • प्रश्न 2: क्या 16 Somvar Vrat केवल लड़कियाँ ही कर सकती हैं?
      • प्रश्न 3: 16 सोमवार के व्रत का उद्यापन कैसे करें?
      • प्रश्न 4: 16 सोमवार के व्रत के फायदे क्या हैं?
      • प्रश्न 5: Somvar Vrat Katha In Hindi कब पढ़ें?

    16 Somvar Vrat का आध्यात्मिक महत्व

    16 सोमवार व्रत का उल्लेख शिव पुराण में मिलता है। सोमवार का दिन भगवान शिव को प्रिय है। “सोम” का अर्थ है चंद्रमा, और भगवान शिव ने चंद्रमा को अपने मस्तक पर धारण किया हुआ है। इसलिए सोमवार के दिन शिव पूजन का विशेष महत्व है।

    सोलह की संख्या षोडश कलाओं की प्रतीक है जो पूर्णता का प्रतीक है। इस व्रत को करने से साधक के जीवन में पूर्णता, शांति और दिव्य कृपा का प्रवाह होता है।

    माता पार्वती ने भी शिवजी को पाने के लिए यही व्रत किया था। अतः यह व्रत भक्ति, त्याग और समर्पण का प्रतीक है।

    16 Somvar Vrat Dates 2026

    यदि आप 16 Somvar Vrat प्रारंभ करना चाहते हैं, तो श्रावण मास के प्रथम सोमवार से शुरू करना सर्वोत्तम माना गया है। वर्ष 2026 में श्रावण मास के सोमवार निम्नलिखित हैं:

    क्रमांक 16 Somvar Vrat Dates 2026
    1 20 जुलाई 2026
    2 27 जुलाई 2026
    3 03 अगस्त 2026
    4 10 अगस्त 2026

    नोट: श्रावण के बाद भी किसी भी सोमवार से व्रत प्रारंभ किया जा सकता है। एक बार शुरू करने के बाद 16 सोमवार तक नियमित रूप से व्रत करें और 17वें सोमवार को उद्यापन करें।

    16 Somvar Vrat Vidhi – पूजा की सम्पूर्ण विधि

    पूजन सामग्री

    • शिवलिंग या भगवान शिव की मूर्ति
    • बेलपत्र, धतूरा, भांग
    • सफेद पुष्प, सफेद वस्त्र, जनेऊ
    • गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद, चीनी (पंचामृत हेतु)
    • सफेद चंदन, अष्टगंध, रोली, इत्र
    • धूप, दीप, कपूर
    • फल, नारियल
    • नैवेद्य: गेहूं के आटे, घी और गुड़ से बनी पंजीरी

    संकल्प मंत्र

    व्रत के दिन स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें। हाथ में जल, अक्षत, सुपारी और दक्षिणा लेकर निम्न संकल्प मंत्र बोलें:

    ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः।
    श्रीमद्भगवतो महापुरुषस्य विष्णोराज्ञया प्रवर्तमानस्याद्य ब्रह्मणः द्वितीयपरार्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरे कलीयुगे प्रथमचरणे जम्बूद्वीपे भारतवर्षे भरतखण्डे आर्यावर्तान्तर्गत पुण्यप्रदेशे अमुकगोत्रोत्पन्नः अमुकनाम अहं शिवप्रसादसिद्ध्यर्थं सोलह सोमवार व्रतं अहम करिष्ये।

    (यहाँ “अमुक” के स्थान पर अपना नाम और गोत्र बोलें।)

    आवाहन मंत्र

    हाथ में अक्षत और पुष्प लेकर भगवान शिव का आवाहन करें:

    ॐ शिवशङ्करमीशानं त्रिनेत्रं पंचवक्त्रकम् ।
    उमासहितं देवं शिवं आवाहयाम्यहम् ॥

    पूजा विधि – चरण दर चरण

    1. पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठें।
    2. शिवलिंग पर गंगाजल और पंचामृत से अभिषेक करें।
    3. शुद्ध जल से स्नान कराएं और सफेद वस्त्र अर्पित करें।
    4. चंदन से तिलक करें, फिर अक्षत, पुष्प, बेलपत्र, धतूरा और भांग चढ़ाएं।
    5. धूप और दीप जलाएं, नैवेद्य (पंजीरी) अर्पित करें।
    6. शिव चालीसा, महामृत्युंजय मंत्र या ॐ नमः शिवाय का जप करें।
    7. आरती करें दीप और कपूर से।
    8. प्रदोष काल (सूर्यास्त से पहले का समय) में पूजन करना विशेष शुभ माना गया है।
    9. पंजीरी को तीन भागों में बाँटें एक भाग शिवजी को अर्पित करें, शेष प्रसाद के रूप में वितरित करें और स्वयं भी ग्रहण करें।

    16 Somvar Vrat Katha – सम्पूर्ण कथा (Somvar Vrat Katha In Hindi)

    🔱 प्रथम प्रसंग – पुजारी और अप्सरा की कथा

    एक बार की बात है भगवान शिव और माता पार्वती मृत्युलोक में भ्रमण कर रहे थे। घूमते-घूमते वे विदर्भ देश के अमरावती नगर पहुँचे। वहाँ एक भव्य और सुंदर शिव मंदिर था। भगवान शिव को वह स्थान अत्यंत प्रिय लगा और वे माता पार्वती के साथ वहीं निवास करने लगे।

    एक दिन माता पार्वती के मन में चौसर खेलने की इच्छा हुई। उन्होंने शिवजी से खेल खेलने का आग्रह किया। भगवान शिव मान गए और दोनों चौसर खेलने बैठ गए।

    उसी समय मंदिर का पुजारी दैनिक आरती के लिए आया। माता पार्वती ने पुजारी से पूछा “बताओ, हम दोनों में से खेल कौन जीतेगा?”

    पुजारी भगवान शिव का परम भक्त था। उसके मुख से तुरंत निकला “महादेव जी जीतेंगे।”

    परंतु जब खेल समाप्त हुआ तो पार्वतीजी जीत गईं और शिवजी हार गए। यह देखकर माता पार्वती क्रोधित हो गईं और उन्होंने पुजारी को कोढ़ी होने का श्राप दे दिया। शिवजी ने पार्वती को रोकने का प्रयास किया और कहा कि यह तो भाग्य का खेल है, उसकी कोई गलती नहीं। किंतु श्राप दिया जा चुका था। देखते ही देखते पुजारी को कोढ़ रोग हो गया।

    वह पुजारी अत्यंत दुखी होकर भी भगवान शिव की सेवा में लगा रहा।

    कुछ समय बाद स्वर्ग की एक अप्सरा उस मंदिर में भगवान शिव की आराधना के लिए आई। उसने पुजारी की दयनीय अवस्था देखी और कोढ़ का कारण पूछा। पुजारी ने सारी घटना विस्तार से सुनाई।

    अप्सरा ने दयापूर्वक कहा “हे पुजारी! तुम्हें इस कोढ़ से मुक्ति मिल सकती है। इसके लिए तुम्हें 16 Somvar Vrat करना चाहिए।”

    पुजारी ने विधि पूछी। अप्सरा ने बताया:

    “सोमवार के दिन प्रातः स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण करना। आधा किलो गेहूं के आटे में घी और गुड़ मिलाकर पंजीरी बनाना। उस पंजीरी के तीन भाग करना। प्रदोषकाल में भगवान शिव की आराधना करना। पंजीरी का एक भाग शिवजी को अर्पित करना और शेष दो भाग आरती में आने वाले भक्तों में प्रसाद रूप में बाँट देना। इस तरह सोलह सोमवार तक यही विधि अपनाना। सत्रहवें सोमवार को गेहूं के आटे का चूरमा बनाकर शिवजी को अर्पित करना और लोगों में प्रसाद बाँटना। इससे तुम्हारा कोढ़ अवश्य दूर हो जाएगा।”

    पुजारी ने श्रद्धापूर्वक यह 16 Somvar Vrat किया। सोलह सोमवार पूरे होते-होते उसका कोढ़ पूरी तरह ठीक हो गया और वह स्वस्थ व प्रसन्न जीवन जीने लगा।

    🔱 द्वितीय प्रसंग – माता पार्वती और कार्तिकेय की कथा

    कुछ समय बाद भगवान शिव और माता पार्वती पुनः उस मंदिर में लौटे। पुजारी को पूर्णतः स्वस्थ देखकर माता पार्वती आश्चर्यचकित हो गईं और उन्होंने पूछा “तुम्हारा कोढ़ कैसे ठीक हुआ?” पुजारी ने सारी बात बताई और 16 Somvar Vrat Katha सुनाई।

    माता पार्वती यह सुनकर अत्यंत प्रसन्न हुईं। उन्होंने स्वयं भी यह व्रत किया क्योंकि उनके पुत्र कार्तिकेय घर छोड़कर चले गए थे और वे उनके वापस लौटने की इच्छा रखती थीं।

    सोलह सोमवार व्रत पूर्ण होते ही कार्तिकेय का मन बदला और वे स्वयं माता के पास लौट आए। उन्होंने माता से पूछा “माँ, आपमें ऐसा क्या परिवर्तन हुआ जो मेरा मन खिंचकर यहाँ आ गया?” माता पार्वती ने उन्हें 16 Somvar Vrat की महिमा बताई।

    🔱 तृतीय प्रसंग – कार्तिकेय और उनके ब्राह्मण मित्र की कथा

    कार्तिकेय यह सुनकर बहुत प्रसन्न हुए। उनका एक ब्राह्मण मित्र विदेश गया हुआ था और वे उससे मिलना चाहते थे। कार्तिकेय ने उस मित्र से मिलने की इच्छा से 16 Somvar Vrat रखा। सोलह सोमवार पूर्ण होते ही वह ब्राह्मण मित्र विदेश से वापस लौट आया और कार्तिकेय से मिला।

    मित्र ने आश्चर्य से पूछा “ऐसा क्या हुआ जो मेरा मन अचानक लौटने को हुआ?” कार्तिकेय ने सोलह सोमवार व्रत की पूरी महिमा सुनाई।

    🔱 चतुर्थ प्रसंग – ब्राह्मण मित्र और राजकुमारी की कथा

    वह ब्राह्मण मित्र विवाह की इच्छा रखता था। कार्तिकेय से व्रत की महिमा सुनकर उसने भी 16 Somvar Vrat रखने का निश्चय किया।

    उन्हीं दिनों एक राजा अपनी पुत्री के विवाह की तैयारी कर रहा था। अनेक राजकुमार आए थे, किंतु राजा ने एक अनोखी शर्त रखी जिस भी व्यक्ति के गले में राज-हथिनी वरमाला डालेगी, उसी से राजकुमारी का विवाह होगा।

    वह ब्राह्मण भी वहाँ उपस्थित था। भाग्य और शिवकृपा से उस हथिनी ने अन्य सभी राजकुमारों को छोड़कर उस ब्राह्मण के गले में वरमाला डाल दी। शर्त के अनुसार राजा ने अपनी पुत्री का विवाह उस ब्राह्मण से करा दिया।

    विवाह के बाद एक दिन राजकुमारी ने पूछा “आपने ऐसा कौन सा पुण्य किया जो हथिनी ने सारे राजकुमारों को छोड़कर आपके गले में वरमाला डाली?” ब्राह्मण ने कहा “प्रिये, मैंने अपने मित्र कार्तिकेय के कहने पर सोलह सोमवार व्रत किए थे, उसी के पुण्य से तुम जैसी लक्ष्मी स्वरूपा पत्नी मुझे मिली।”

    🔱 पञ्चम प्रसंग – राजकुमारी, पुत्र और राजपाट की कथा

    राजकुमारी यह सुनकर बहुत प्रभावित हुई और उसने पुत्र प्राप्ति की इच्छा से सोलह सोमवार व्रत किया। भगवान शिव की कृपा से उसे एक सुंदर और तेजस्वी पुत्र की प्राप्ति हुई।

    जब वह पुत्र बड़ा हुआ तो उसने माता से पूछा “माँ, आपने ऐसा क्या पुण्य किया जो आपको मेरे जैसा पुत्र मिला?” माता ने उसे 16 Somvar Vrat की महिमा बताई।

    पुत्र ने राजपाट प्राप्ति की इच्छा से यह व्रत किया। उसी समय एक राजा अपनी पुत्री के लिए योग्य वर ढूंढ रहा था। लोगों ने उस बालक की प्रशंसा की और राजा ने अपनी पुत्री का विवाह उसी से कर दिया। कुछ वर्षों बाद जब राजा की मृत्यु हुई क्योंकि उनका कोई पुत्र नहीं था तो वह बालक ही राजा बना।

    🔱 षष्ठ प्रसंग – राजकुमारी का निष्कासन और पुनर्मिलन

    राजपाट मिलने के बाद भी वह ब्राह्मण पुत्र नियमित रूप से सोमवार व्रत करता रहा। एक दिन सत्रहवें सोमवार की पूजा पर उसने अपनी पत्नी (राजकुमारी) को भी मंदिर चलने को कहा, किंतु उसने स्वयं न जाकर दासी को भेज दिया।

    पूजा के बाद आकाशवाणी हुई “राजन! अपनी इस पत्नी को महल से दूर रखो, अन्यथा तुम्हारा विनाश हो जाएगा।”

    राजा यह सुनकर चिंतित हुआ। दरबारियों ने समझाया कि जिस पत्नी के कारण राजपाट मिला उसे कैसे निकाला जाए किंतु राजा ने आकाशवाणी की आज्ञा मानकर राजकुमारी को महल से बाहर निकाल दिया।

    वह राजकुमारी भूखी-प्यासी एक अनजान नगर में पहुँची। वहाँ एक बूढ़ी स्त्री धागा बेचने बाजार जा रही थी। उसने राजकुमारी को देखा और उसे साथ चलने को कहा। राजकुमारी ने टोकरी सिर पर उठाई। कुछ दूर चलने के बाद तूफान आया और टोकरी उड़ गई। बूढ़ी स्त्री ने राजकुमारी को मनहूस मानकर चले जाने को कहा।

    इसके बाद वह एक तेली के घर गई वहाँ पहुँचते ही सारे तेल के घड़े फूट गए। तेली ने भी उसे भगा दिया।

    वह एक सुंदर तालाब के पास पहुँची। जैसे ही उसने पानी पीना चाहा, पानी में कीड़े चलने लगे और पानी गंदा हो गया। वह गंदा पानी पीकर एक पेड़ के नीचे सो गई और उस पेड़ की सारी पत्तियाँ झड़ गईं। जिस भी पेड़ के पास वह जाती, उसकी पत्तियाँ गिर पड़तीं।

    यह देखकर नगरवासी मंदिर के पुजारी के पास गए। पुजारी ने राजकुमारी का दुःख समझा और बोला “बेटी, तुम मेरे परिवार के साथ रहो, मैं तुम्हें अपनी पुत्री की तरह रखूँगा।”

    आश्रम में रहने के बाद भी जो भी खाना बनाती या पानी लाती, उसमें कीड़े पड़ जाते। पुजारी ने शिवजी से प्रार्थना की और राजकुमारी को 16 Somvar Vrat करने को कहा।

    राजकुमारी ने पूर्ण श्रद्धा से सोलह सोमवार व्रत किया।

    सत्रहवें सोमवार पर उस ब्राह्मण पुत्र (राजा) का मन अचानक अपनी पत्नी की ओर मुड़ा। उसने अपने सेवकों को उसे ढूँढने भेजा। सेवक ढूँढते-ढूँढते उस पुजारी के आश्रम पहुँचे। पुजारी ने कहा “अपने राजा को स्वयं आकर इसे ले जाने को कहो।”

    राजा स्वयं वहाँ आया और राजकुमारी को सम्मान के साथ महल लेकर गया। दोनों सुखपूर्वक जीवन बिताने लगे।

    🙏 इस प्रकार जो भी भक्त पूर्ण श्रद्धा और विधिपूर्वक 16 Somvar Vrat Katha सुनता और सुनाता है, भगवान भोलेनाथ की कृपा से उसकी समस्त मनोकामनाएँ अवश्य पूरी होती हैं।

    16 सोमवार के व्रत का उद्यापन कैसे करें

    16 सोमवार के व्रत का उद्यापन 17वें सोमवार को किया जाता है। यह व्रत की पूर्णाहुति है।

    उद्यापन विधि:

    1. 17वें सोमवार को प्रातःकाल स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण करें।
    2. गेहूं के आटे से चूरमा (मीठा, घी और गुड़ मिलाकर) बनाएं।
    3. विधिपूर्वक शिवजी की पूजा करें अभिषेक, बेलपत्र, पंचामृत अर्पण करें।
    4. बनाया हुआ चूरमा भगवान शिव को अर्पित करें।
    5. ब्राह्मणों को भोजन और दक्षिणा दें।
    6. सभी उपस्थित भक्तों में प्रसाद वितरित करें।
    7. परिवार के साथ मिलकर आरती और मंत्र जप करें।

    उद्यापन के बाद व्रत पूर्ण माना जाता है और भगवान शिव की कृपा से साधक को इच्छित फल की प्राप्ति होती है।

    16 सोमवार के व्रत के फायदे (Spiritual Benefits)

    16 सोमवार के व्रत के फायदे अनेक और अद्भुत हैं। शास्त्रों के अनुसार इस व्रत से साधक को निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:

    • 🕉️ मनोकामना पूर्ति — मन में जो शुभ इच्छा हो, वह भगवान शिव की कृपा से पूर्ण होती है।
    • 🌿 रोग निवारण — शारीरिक कष्टों और बीमारियों से मुक्ति मिलती है।
    • 👨‍👩‍👦 विवाह और संतान सुख — योग्य जीवनसाथी और संतान प्राप्ति में सहायक।
    • ☮️ मानसिक शांति — मन की उथल-पुथल शांत होती है और चित्त स्थिर होता है।
    • 💰 समृद्धि और सफलता — जीवन में धन, यश और सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है।
    • 🏠 गृहस्थ सुख — परिवार में प्रेम, शांति और सुख की वृद्धि होती है।
    • 🛡️ कष्टों से रक्षा — नकारात्मक शक्तियों और बाधाओं से भगवान शिव रक्षा करते हैं।
    • 🙏 आत्मिक उन्नति — भक्ति, आस्था और साधना में वृद्धि होती है।

    16 Somvar Vrat Katha PDF के बारे में जानकारी

    कई श्रद्धालु 16 सोमवार व्रत कथा (PDF) अपने पास रखना चाहते हैं, ताकि व्रत के दौरान वे इसे आसानी से पढ़ सकें। इस व्रत में कथा का श्रवण और पाठ करना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। आप यह PDF हमारे प्लेटफ़ॉर्म से प्राप्त कर सकते हैं, जिसका लिंक नीचे दिया गया है। ध्यान रखें कि कथा का पाठ सदैव शुद्धता, श्रद्धा और पूर्ण विश्वास के साथ किया जाना चाहिए, तभी व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।


    16 Somvar Vrat Katha PDF डाउनलोड करें

    पूजा का शुभ समय और नियम

    • प्रदोष काल (सूर्यास्त से 45 मिनट पहले और बाद) में शिव पूजन सर्वोत्तम है।
    • निराहार या फलाहार रहकर व्रत करें।
    • ब्रह्मचर्य और पवित्रता का पालन करें।
    • क्रोध, असत्य और मिथ्याचार से दूर रहें।
    • व्रत के दिन नमक का सेवन न करें (परंपरा के अनुसार)।
    • शाम को पूजा के बाद पंजीरी ग्रहण करें।

    निष्कर्ष – भोलेनाथ की शरण में

    16 Somvar Vrat Katha केवल एक कहानी नहीं है यह आस्था, भक्ति और भगवान शिव की असीम करुणा का प्रमाण है। इस कथा से हमें यह शिक्षा मिलती है कि जो साधक सच्चे हृदय और पूर्ण श्रद्धा से भगवान शिव की आराधना करता है, उसे जीवन के हर कष्ट से मुक्ति मिलती है।

    चाहे दुःख हो, रोग हो, आर्थिक संकट हो या मन की कोई इच्छा 16 Somvar Vrat भोलेनाथ तक पहुँचने का एक पवित्र और प्रभावशाली मार्ग है। जब भी आप यह व्रत करें, मन में केवल श्रद्धा रखें, विधि का पालन करें और कथा श्रवण अवश्य करें।

    ॐ नमः शिवाय। हर हर महादेव। 🙏

    FAQs – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

    प्रश्न 1: 16 Somvar Vrat कब से शुरू करना चाहिए?

    उत्तर: यह व्रत श्रावण मास के किसी भी सोमवार से शुरू करना सबसे शुभ माना जाता है। यदि श्रावण न मिले तो किसी भी सोमवार से प्रारंभ किया जा सकता है।

    प्रश्न 2: क्या 16 Somvar Vrat केवल लड़कियाँ ही कर सकती हैं?

    उत्तर: नहीं। यह व्रत स्त्री, पुरुष, विवाहित और अविवाहित सभी के लिए समान रूप से फलदायी है।

    प्रश्न 3: 16 सोमवार के व्रत का उद्यापन कैसे करें?

    उत्तर: 17वें सोमवार को चूरमा बनाकर शिवजी को अर्पित करें, ब्राह्मण भोज कराएं और प्रसाद वितरित करें। इससे व्रत की पूर्णाहुति होती है।

    प्रश्न 4: 16 सोमवार के व्रत के फायदे क्या हैं?

    उत्तर: मनोकामना पूर्ति, रोग निवारण, विवाह, संतान सुख, मानसिक शांति, समृद्धि और आत्मिक उन्नति ये सब इस व्रत के प्रमुख फायदे हैं।

    प्रश्न 5: Somvar Vrat Katha In Hindi कब पढ़ें?

    उत्तर: पूजा के बाद और आरती से पहले, प्रदोष काल में Somvar Vrat Katha पढ़ना या सुनना सबसे उत्तम है।

    🙏 इन मंत्रों और श्लोकों को भी पढ़ना न भूलें:

    • Maa Mahagauri Mantra
    • Om Gan Ganpataye Namo Namah Ganesh Mantra
    • Swasti Vachan Mantra
    • Budh Beej Mantra
    • Trikal Sandhya Shlok
    • Yada Yada Hi Dharmasya Sloka
    • Santan Gopal Stotra and Mantra
    • Maa Baglamukhi Chalisa
    • Kshama Yachna Mantra
    • Gajendra Moksha Stotra In Hindi
    • Ganesh Atharvashirsha Path In Hindi
    • Yagyopavit Mantra (Janeu Mantra)
    • Batuk Bhairav Stotra and Mantra
    • Ramraksha Stotra in Hindi
    • Surya Namaskar Mantra In Hindi
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