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    Home » Shlok » Ramraksha Stotra in Hindi | संपूर्ण पाठ, मराठी और हिंदी अर्थ सहित तथा आध्यात्मिक लाभ
    Shlok

    Ramraksha Stotra in Hindi | संपूर्ण पाठ, मराठी और हिंदी अर्थ सहित तथा आध्यात्मिक लाभ

    RaviBy RaviApril 23, 2026
    Ramraksha Stotra In Hindi

    भारतीय सनातन परंपरा में Ramraksha Stotra को सबसे शक्तिशाली और पवित्र स्तोत्रों में से एक माना जाता है। यह स्तोत्र भगवान श्रीराम की महिमा का गुणगान करता है और भक्त को हर प्रकार के भय, संकट और दुःख से मुक्त कराता है।

    Ramraksha Stotra In Hindi पढ़ने की परंपरा सदियों पुरानी है। महाराष्ट्र, उत्तर भारत और गुजरात सहित पूरे देश में श्रद्धालु प्रतिदिन इस स्तोत्र का पाठ करते हैं। यह न केवल एक धार्मिक पाठ है, बल्कि यह एक कवच (सुरक्षा कवच) है जो हमें भगवान राम की कृपा से जोड़ता है।

    इस लेख में आप Shri Ramraksha Stotra का सम्पूर्ण संस्कृत पाठ, उसका सरल हिंदी अर्थ, आध्यात्मिक महत्व और पाठ करने के उचित समय के बारे में विस्तार से जानेंगे।

    Table of Contents

    Toggle
    • श्री राम रक्षा स्तोत्र (Shri Ramraksha Stotra) – उत्पत्ति और ऋषि (Origin)
      • विनियोगः
      • ॥ अथ ध्यानम् ॥
      • ॥ स्तोत्रम् ॥
    • Ramraksha Stotra का आध्यात्मिक महत्व (Spiritual Significance)
    • Ramraksha Stotra Marathi परंपरा
    • पाठ का उचित समय (When to Recite Ramraksha Stotra)
    • Ramraksha Stotra के आध्यात्मिक लाभ (Spiritual Benefits)
    • Ramraksha Stotra PDF
      • Click Here: Ramraksha Stotra PDF
    • निष्कर्ष (Conclusion)
    • ? FAQs – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
      • प्रश्न 1: Ramraksha Stotra क्या है?
      • प्रश्न 2: RAM Raksha Stotra कब पढ़ना चाहिए?
      • प्रश्न 3: Ramraksha Stotra In Hindi कितनी बार पढ़ना चाहिए?
      • प्रश्न 4: Shri Ramraksha Stotra के पाठ से क्या लाभ होते हैं?
      • प्रश्न 5: Ramraksha Stotra Marathi और Hindi में क्या अंतर है?
      • प्रश्न 6: क्या Ramraksha Stotra Lyrics को कण्ठस्थ करना जरूरी है?

    श्री राम रक्षा स्तोत्र (Shri Ramraksha Stotra) – उत्पत्ति और ऋषि (Origin)

    RAM Raksha Stotra की रचना महर्षि बुधकौशिक ने की थी। मान्यता है कि उन्हें स्वप्न में स्वयं भगवान शिव ने यह स्तोत्र सुनाया था, और प्रातःकाल जागने के बाद ऋषि बुधकौशिक ने इसे लिखा।

    श्री राम रक्षा स्तोत्र संपूर्ण पाठ — मराठी और हिंदी अर्थ सहित

    श्रीगणेशाय नमः ।

    विनियोगः

    अस्य श्रीरामरक्षास्तोत्रमन्त्रस्य बुधकौशिक ऋषिः ।
    श्री सीतारामचंद्रो देवता । अनुष्टुप् छंदः ।
    सीता शक्तिः । श्रीमान् हनुमान् कीलकम् ।
    श्री सीतारामचंद्रप्रीत्यर्थे रामरक्षास्तोत्रजपे विनियोगः ॥

    हिंदी अर्थ: इस रामरक्षा स्तोत्र में बुधकौशिक ऋषि हैं, श्री सीतारामचंद्र देवता हैं, अनुष्टुप् छंद है, सीता शक्ति हैं, श्रीमान् हनुमान कीलक हैं और यह जप श्री सीतारामचंद्र की प्रसन्नता के लिए किया जाता है।

    मराठी अर्थ — या रामरक्षा स्तोत्रात बुधकौशिक हे मंत्राचे ऋषी आहेत, सीता आणि रामचंद्र देवता आहेत, अनुष्टुप् छंद आहे, सीता शक्ती आहे, श्री हनुमानजी कीलक आहेत आणि श्री रामचंद्रजींच्या प्रसन्नतेसाठी हा जप केला जातो.

    ॥ अथ ध्यानम् ॥

    ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपद्मासनस्थं ।
    पीतं वासो वसानं नवकमलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम् ॥
    वामाङ्कारूढसीतामुखकमलमिलल्लोचनं नीरदाभं ।
    नानालंकारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डनं रामचंद्रम् ॥

    हिंदी अर्थ: जिन्होंने धनुष-बाण धारण किया है, जो बद्धपद्मासन में विराजमान हैं, जिन्होंने पीले वस्त्र पहने हैं, जिनके प्रसन्न नेत्र नवकमल की पंखुड़ियों से भी बढ़कर सुंदर हैं, जिनकी बाईं गोद में विराजमान सीताजी का मुख कमल के समान है, जो मेघ के समान श्यामवर्ण हैं, जो अनेक आभूषणों से जगमगा रहे हैं और जो विशाल जटाजूट धारण किए हुए हैं — ऐसे श्री रामचंद्र का ध्यान करना चाहिए।

    मराठी अर्थ — ज्यांनी धनुष्यबाण धारण केले आहेत, बद्धपद्मासनात विराजमान आहेत, पितांबर परिधान केले आहे, ज्यांचे प्रसन्न नयन नुकत्याच उमललेल्या कमळाच्या पाकळ्यांशी स्पर्धा करतात, डाव्या मांडीवर विराजलेल्या श्री सीताजींचे मुख कमळाप्रमाणे आहे, जे मेघश्यामल आहेत, नाना अलंकारांनी झळाळलेले आहेत आणि विशाल जटाजूट धारण केलेले आहेत — अशा श्री रामचंद्रांचे ध्यान करावे.

    ॥ इति ध्यानम् ॥

    ॥ स्तोत्रम् ॥

    चरितं रघुनाथस्य शतकोटिप्रविस्तरम् ।
    एकैकमक्षरं पुंसां महापातकनाशनम् ॥ १ ॥

    हिंदी अर्थ: श्री रघुनाथ का चरित्र सौ करोड़ श्लोकों में विस्तृत है। उनके चरित्र का एक-एक अक्षर मनुष्य के महापातकों को नष्ट करने वाला है।

    मराठी अर्थ — श्री रघुनाथजींचे चरित्र शंभर कोटी श्लोकांच्या विस्ताराचे आहे. त्यातील प्रत्येक एक एक अक्षर मनुष्याच्या महापापांचा नाश करणारे आहे.

    ध्यात्वा नीलोत्पलश्यामं रामं राजीवलोचनम् ।
    जानकीलक्ष्मणोपेतं जटामुकुटमण्डितम् ॥ २ ॥

    हिंदी अर्थ: नीलकमल के समान श्यामवर्ण, कमल जैसे नेत्रों वाले, जानकी और लक्ष्मण के साथ विराजमान और जटाओं के मुकुट से सुशोभित श्री राम का ध्यान करना चाहिए।

    मराठी अर्थ — नीलकमळाप्रमाणे श्यामवर्ण असलेले, कमळासारखे नेत्र असलेले, जानकी आणि लक्ष्मणांसह विराजमान असलेले आणि जटांच्या मुकुटाने सुशोभित असलेल्या श्री रामाचे ध्यान करावे.

    सासितूणधनुर्बाणपाणिं नक्तंचरान्तकम् ।
    स्वलीलया जगत्त्रातुमाविर्भूतमजं विभुम् ॥ ३ ॥

    हिंदी अर्थ: जिनके हाथों में खड्ग, तूणीर, धनुष और बाण हैं, जो राक्षसों का नाश करने वाले हैं और जो अपनी लीला से जगत की रक्षा के लिए प्रकट हुए अजन्मे तथा सर्वव्यापी प्रभु हैं — ऐसे श्री राम का ध्यान करना चाहिए।

    मराठी अर्थ — हातांत खड्ग, तूणीर, धनुष्य आणि बाण धारण केलेले, राक्षसांचा नाश करणारे, आणि स्वतःच्या लीलेने जगाच्या रक्षणासाठी अवतरलेले, अजन्मे व सर्वव्यापी प्रभू रामाचे ध्यान करावे.

    रामरक्षां पठेत्प्राज्ञः पापघ्नीं सर्वकामदाम् ।
    शिरो मे राघवः पातु भालं दशरथात्मजः ॥ ४ ॥

    हिंदी अर्थ: पापों का नाश करने वाली और सभी कामनाओं को पूर्ण करने वाली इस रामरक्षा का पाठ बुद्धिमान पुरुष को अवश्य करना चाहिए। राघव मेरे मस्तक की रक्षा करें और दशरथात्मज मेरे भाल की रक्षा करें।

    मराठी अर्थ — पापांचा नाश करणाऱ्या आणि सर्व इच्छा पूर्ण करणाऱ्या या रामरक्षेचे पठण सूज्ञ पुरुषाने करावे. राघव माझ्या मस्तकाचे रक्षण करो आणि दशरथात्मज माझ्या कपाळाचे रक्षण करो.

    कौसल्येयो दृशौ पातु विश्वामित्रप्रियः श्रुती ।
    घ्राणं पातु मखत्राता मुखं सौमित्रिवत्सलः ॥ ५ ॥

    हिंदी अर्थ: कौसल्यानंदन मेरी आँखों की रक्षा करें, विश्वामित्र के प्रिय मेरे कानों की रक्षा करें, यज्ञ की रक्षा करने वाले मेरी नाक की रक्षा करें और लक्ष्मण पर स्नेह रखने वाले मेरे मुख की रक्षा करें।

    मराठी अर्थ — कौसल्यानंदन माझ्या डोळ्यांचे रक्षण करो, विश्वामित्रांचे प्रिय माझ्या कानांचे रक्षण करो, यज्ञाचे रक्षक माझ्या नाकाचे रक्षण करो आणि सौमित्रिवत्सल (लक्ष्मणावर प्रेम करणारे) माझ्या मुखाचे रक्षण करो.

    जिह्वां विद्यानिधिः पातु कण्ठं भरतवन्दितः ।
    स्कन्धौ दिव्यायुधः पातु भुजौ भग्नेशकार्मुकः ॥ ६ ॥

    हिंदी अर्थ: विद्यानिधि मेरी जिह्वा की रक्षा करें, भरत के वंदनीय मेरे कंठ की रक्षा करें, दिव्य अस्त्र-शस्त्र धारण करने वाले मेरे कंधों की रक्षा करें और महादेव का धनुष तोड़ने वाले मेरी भुजाओं की रक्षा करें।

    मराठी अर्थ — विद्यानिधी माझ्या जिभेचे रक्षण करो, भरताने वंदिलेले माझ्या कंठाचे रक्षण करो, दिव्य अस्त्र-शस्त्र धारण करणारे माझ्या खांद्यांचे रक्षण करो आणि महादेवांचे धनुष्य मोडणारे माझ्या भुजांचे रक्षण करो.

    करौ सीतापतिः पातु हृदयं जामदग्न्यजित् ।
    मध्यं पातु खरध्वंसी नाभिं जाम्बवदाश्रयः ॥ ७ ॥

    हिंदी अर्थ: सीतापति मेरे हाथों की रक्षा करें, परशुराम को जीतने वाले मेरे हृदय की रक्षा करें, खर राक्षस का वध करने वाले मेरे मध्यभाग की रक्षा करें और जांबवंत के आश्रय मेरी नाभि की रक्षा करें।

    मराठी अर्थ — सीतापती माझ्या हातांचे रक्षण करो, परशुरामाचा विजेता माझ्या हृदयाचे रक्षण करो, खरासुराचा वध करणारे माझ्या मध्यभागाचे रक्षण करो आणि जांबवंताचा आश्रय असलेले माझ्या नाभीचे रक्षण करो.

    सुग्रीवेशः कटी पातु सक्थिनी हनुमत्प्रभुः ।
    ऊरू रघुत्तमः पातु रक्षःकुलविनाशकृत् ॥ ८ ॥

    हिंदी अर्थ: सुग्रीव के स्वामी मेरी कमर की रक्षा करें, हनुमान के प्रभु मेरी जाँघों की रक्षा करें और राक्षसकुल का विनाश करने वाले रघुश्रेष्ठ मेरी ऊरुओं की रक्षा करें।

    मराठी अर्थ — सुग्रीवाचे स्वामी माझ्या कमरेचे रक्षण करो, हनुमंताचे प्रभू माझ्या सांड्यांचे रक्षण करो आणि राक्षसकुळाचा नाश करणारे रघुश्रेष्ठ माझ्या मांड्यांचे रक्षण करो.

    जानुनी सेतुकृत्पातु जङ्घे दशमुखान्तकः ।
    पादौ बिभीषणश्रीदः पातु रामोऽखिलं वपुः ॥ ९ ॥

    हिंदी अर्थ: सेतु बनाने वाले मेरे घुटनों की रक्षा करें, रावण का अंत करने वाले मेरी पिंडलियों की रक्षा करें, विभीषण को वैभव देने वाले मेरे पैरों की रक्षा करें और श्री राम मेरे संपूर्ण शरीर की रक्षा करें।

    मराठी अर्थ — सेतू बांधणाऱ्याने माझ्या गुडघ्यांचे रक्षण करो, रावणाचा वध करणाऱ्याने माझ्या पोटऱ्यांचे रक्षण करो, विभीषणाला ऐश्वर्य देणाऱ्याने माझ्या पायांचे रक्षण करो आणि श्रीरामाने माझ्या संपूर्ण शरीराचे रक्षण करो.

    एतां रामबलोपेतां रक्षां यः सुकृती पठेत् ।
    स चिरायुः सुखी पुत्री विजयी विनयी भवेत् ॥ १० ॥

    हिंदी अर्थ: राम के बल से संपन्न इस रक्षा स्तोत्र का जो पुण्यात्मा पुरुष पाठ करता है, वह दीर्घायु, सुखी, पुत्रवान, विजयी और विनम्र होता है।

    मराठी अर्थ — रामबलाने संपन्न असलेल्या या रक्षा स्तोत्राचे जो पुण्यवान पुरुष पठण करतो, तो दीर्घायुषी, सुखी, पुत्रवान, विजयी आणि नम्र होतो.

    पातालभूतलव्योमचारिणश्छद्मचारिणः ।
    न द्रष्टुमपि शक्तास्ते रक्षितं रामनामभिः ॥ ११ ॥

    हिंदी अर्थ: पाताल, पृथ्वी और आकाश में विचरण करने वाले तथा छल-कपट से घूमने वाले दुष्ट प्राणी राम के नाम से रक्षित व्यक्ति को देख भी नहीं सकते।

    मराठी अर्थ — पाताळात, पृथ्वीवर आणि आकाशात संचार करणारे, छद्मवेष धारण करून फिरणारे दुष्ट प्राणी — रामनामाने रक्षण झालेल्या व्यक्तीस पाहण्यासही समर्थ नाहीत.

    रामेति रामभद्रेति रामचंद्रेति वा स्मरन् ।
    नरो न लिप्यते पापैर्भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति ॥ १२ ॥

    हिंदी अर्थ: जो मनुष्य ‘राम’, ‘रामभद्र’ अथवा ‘रामचंद्र’ — इन नामों का स्मरण करता है, वह पापों से लिप्त नहीं होता और उसे भोग तथा मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है।

    मराठी अर्थ — ‘राम’, ‘रामभद्र’, किंवा ‘रामचंद्र’ — या नावांचे स्मरण केल्याने मनुष्य पापाने लिप्त होत नाही आणि त्याला भोग तसेच मोक्ष दोन्ही प्राप्त होतात.

    जगज्जेत्रैकमन्त्रेण रामनाम्नाभिरक्षितम् ।
    यः कण्ठे धारयेत्तस्य करस्थाः सर्वसिद्धयः ॥ १३ ॥

    हिंदी अर्थ: जगत को जीतने वाले एकमात्र मंत्र — राम नाम — से रक्षित इस स्तोत्र को जो कंठ में धारण करता है अर्थात् नित्य स्मरण करता है, उसके हाथ में सभी सिद्धियाँ रहती हैं।

    मराठी अर्थ — जग जिंकण्याच्या एकमेव मंत्राने — रामनामाने — रक्षण झालेल्या या स्तोत्राचे जो कंठी धारण करतो अर्थात नित्य स्मरण करतो, त्याच्या हाती सर्व सिद्धी असतात.

    वज्रपञ्जरनामेदं यो रामकवचं स्मरेत् ।
    अव्याहताज्ञः सर्वत्र लभते जयमङ्गलम् ॥ १४ ॥

    हिंदी अर्थ: ‘वज्रपंजर’ नाम से विख्यात इस रामकवच का जो स्मरण करता है, उसकी आज्ञा का कहीं भी उल्लंघन नहीं होता और उसे सर्वत्र जय और मंगल की प्राप्ति होती है।

    मराठी अर्थ — ‘वज्रपंजर’ या नावाने प्रसिद्ध असलेल्या या रामकवचाचे जो स्मरण करतो, त्याच्या आज्ञेचे कुठेही उल्लंघन होत नाही आणि त्याला सर्वत्र जय व मंगल प्राप्त होते.

    आदिष्टवान् यथा स्वप्ने रामरक्षामिमां हरः ।
    तथा लिखितवान् प्रातः प्रबुद्धो बुधकौशिकः ॥ १५ ॥

    हिंदी अर्थ: जैसा भगवान शिव ने स्वप्न में इस रामरक्षा स्तोत्र का आदेश दिया, वैसा ही ऋषि बुधकौशिक ने प्रातःकाल जागकर लिख दिया।

    मराठी अर्थ — ज्याप्रमाणे श्री शंकरांनी रात्री स्वप्नात या रामरक्षेची आज्ञा दिली होती, त्याचप्रमाणे पहाटे जागे होताच बुधकौशिक ऋषींनी ती लिहून काढली.

    आरामः कल्पवृक्षाणां विरामः सकलापदाम् ।
    अभिरामस्त्रिलोकानां रामः श्रीमान् स नः प्रभुः ॥ १६ ॥

    हिंदी अर्थ: जो कल्पवृक्षों के उद्यान के समान हैं, जो सभी आपदाओं का अंत करने वाले हैं और जो तीनों लोकों में सर्वाधिक सुंदर हैं — वे श्रीमान् राम हमारे प्रभु हैं।

    मराठी अर्थ — जे कल्पवृक्षांचे उद्यानस्थळ आहेत, जे सर्व आपत्तींचा अंत करणारे आहेत आणि जे तिन्ही लोकांत सर्वांत सुंदर आहेत — ते श्रीमान् राम आमचे प्रभू आहेत.

    तरुणौ रूपसम्पन्नौ सुकुमारौ महाबलौ ।
    पुण्डरीकविशालाक्षौ चीरकृष्णाजिनाम्बरौ ॥ १७ ॥
    फलमूलाशिनौ दान्तौ तापसौ ब्रह्मचारिणौ ।
    पुत्रौ दशरथस्यैतौ भ्रातरौ रामलक्ष्मणौ ॥ १८ ॥
    शरण्यौ सर्वसत्त्वानां श्रेष्ठौ सर्वधनुष्मताम् ।
    रक्षःकुलनिहन्तारौ त्रायेतां नो रघुत्तमौ ॥ १९ ॥

    हिंदी अर्थ: जो तरुण, रूपवान, कोमल, महाबलशाली, कमल के समान विशाल नेत्रों वाले, वल्कल और कृष्णमृग का चर्म धारण किए हुए, फल-मूल खाने वाले, जितेंद्रिय, तपस्वी, ब्रह्मचारी और सभी प्राणियों को शरण देने वाले हैं — जो सभी धनुर्धरों में श्रेष्ठ हैं, राक्षसकुल का नाश करने वाले हैं, दशरथ के पुत्र और रघुकुल में उत्तम हैं — ऐसे दोनों भाई राम और लक्ष्मण हमारी रक्षा करें।

    मराठी अर्थ — जे तरुण, देखणे, कोमल, महाबलशाली, कमळाप्रमाणे विशाल नयन असलेले, वल्कले व कृष्णमृगाजिन परिधान केलेले, फळे व मुळे खाणारे, जितेंद्रिय, तपस्वी, ब्रह्मचारी आणि सर्व प्राणिमात्रांना आश्रय देणारे आहेत — सर्व धनुर्धाऱ्यांत श्रेष्ठ, राक्षसकुळाचा नाश करणारे, दशरथाचे पुत्र आणि रघुकुळात उत्तम असे हे दोन्ही बंधू राम व लक्ष्मण आमचे रक्षण करोत.

    आत्तसज्जधनुषा विषुस्पृशा वक्षया शुगनिषङ्गसङ्गिनौ ।
    रक्षणाय मम रामलक्ष्मणावग्रतः पथि सदैव गच्छताम् ॥ २० ॥

    हिंदी अर्थ: जिन्होंने धनुष भली-भाँति सज्ज किया हुआ है, जो बाणों को स्पर्श किए हुए हैं और जिनके पास अक्षय बाणों से भरा तूणीर है — ऐसे राम और लक्ष्मण मेरी रक्षा के लिए मार्ग पर सदैव मेरे आगे-आगे चलते रहें।

    मराठी अर्थ — ज्यांनी धनुष्य नीट सज्ज केले आहे, बाणांना स्पर्श केलेले आहे आणि अक्षय बाण असलेले तूणीर धारण केले आहे — असे राम आणि लक्ष्मण माझ्या रक्षणासाठी मार्गात सदैव माझ्यापुढे चालत राहोत.

    सन्नद्धः कवची खड्गी चापबाणधरो युवा ।
    गच्छन् मनोरथोऽस्माकं रामः पातु सलक्ष्मणः ॥ २१ ॥

    हिंदी अर्थ: सदा सज्ज, शरीर पर कवच धारण किए, हाथ में खड्ग लिए, धनुष-बाण थामे, युवा रूप में आगे बढ़ते हुए — लक्ष्मण सहित प्रभु राम हमारे मनोरथों की रक्षा करें।

    मराठी अर्थ — सदैव सज्ज, अंगात कवच घातलेले, हाती खड्ग आणि धनुष्यबाण धारण केलेले, तरुण असे लक्ष्मणासह पुढे कूच करणारे प्रभू राम आमच्या मनोरथांचे रक्षण करोत.

    रामो दाशरथिः शूरो लक्ष्मणानुचरो बली ।
    काकुत्स्थः पुरुषः पूर्णः कौसल्येयो रघुत्तमः ॥ २२ ॥
    वेदान्तवेद्यो यज्ञेशः पुराणपुरुषोत्तमः ।
    जानकीवल्लभः श्रीमानप्रमेयपराक्रमः ॥ २३ ॥
    इत्येतानि जपेन्नित्यं मद्भक्तः श्रद्धयान्वितः ।
    अश्वमेधाधिकं पुण्यं सम्प्राप्नोति न संशयः ॥ २४ ॥

    हिंदी अर्थ: राम, दाशरथि, शूर, लक्ष्मणानुचर, बली, काकुत्स्थ, पुरुष, पूर्ण, कौसल्येय, रघुत्तम, वेदान्तवेद्य, यज्ञेश, पुराणपुरुषोत्तम, जानकीवल्लभ, श्रीमान् और अप्रमेयपराक्रम — इन नामों का जो मेरा श्रद्धावान भक्त नित्य जप करता है, उसे अश्वमेध यज्ञ से भी अधिक पुण्य की प्राप्ति होती है, इसमें कोई संशय नहीं।

    मराठी अर्थ — राम, दाशरथि, शूर, लक्ष्मणानुचर, बली, काकुत्स्थ, पुरुष, पूर्ण, कौसल्येय, रघुत्तम, वेदान्तवेद्य, यज्ञेश, पुराणपुरुषोत्तम, जानकीवल्लभ, श्रीमान आणि अप्रमेयपराक्रम — या नावांचा जो माझा श्रद्धावान भक्त नित्य जप करतो, त्याला अश्वमेध यज्ञापेक्षाही अधिक पुण्य मिळते, यात संशय नाही.

    रामं दूर्वादलश्यामं पद्माक्षं पीतवाससम् ।
    स्तुवन्ति नामभिर्दिव्यैर्न ते संसारिणो नराः ॥ २५ ॥

    हिंदी अर्थ: दूर्वा की पत्तियों के समान श्यामवर्ण, कमलनयन और पीतांबरधारी श्री राम की जो दिव्य नामों से स्तुति करते हैं, वे मनुष्य संसार-चक्र में नहीं पड़ते।

    मराठी अर्थ — दूर्वांप्रमाणे श्यामवर्ण, कमलनयन, पीतांबरधारी श्री रामाची जे दिव्य नावांनी स्तुती करतात, ते संसारचक्रात अडकत नाहीत.

    रामं लक्ष्मणपूर्वजं रघुवरं सीतापतिं सुन्दरम् ।
    काकुत्स्थं करुणार्णवं गुणनिधिं विप्रप्रियं धार्मिकम् ।
    राजेन्द्रं सत्यसन्धं दशरथतनयं श्यामलं शान्तमूर्तिम् ।
    वन्दे लोकाभिरामं रघुकुलतिलकं राघवं रावणारिम् ॥ २६ ॥

    हिंदी अर्थ: लक्ष्मण के बड़े भाई, रघुकुल में श्रेष्ठ, सीता के स्वामी, अत्यंत सुंदर, काकुत्स्थ कुल के आनंद, करुणा के सागर, गुणों के भंडार, ब्राह्मणों के प्रिय, परम धर्मात्मा, राजाओं में शिरोमणि, सत्यवचनी, दशरथ-पुत्र, श्यामल और शांतमूर्ति, सभी लोकों में सुंदर, रघुकुल के तिलक, राघव और रावण के शत्रु — ऐसे प्रभु राम को मैं वंदन करता हूँ।

    मराठी अर्थ — लक्ष्मणाचे थोरले बंधू, रघुकुळातील सर्वश्रेष्ठ, सीतेचे स्वामी, अतिशय सुंदर, काकुत्स्थ कुळातील, करुणेचा सागर, गुणांचा खजिना, ब्राह्मणप्रिय, धर्मनिष्ठ, राजांमध्ये श्रेष्ठ, सत्यवचनी, दशरथपुत्र, श्यामल आणि शांतमूर्ती, सर्व लोकांत सुंदर, रघुकुलाचे भूषण, राघव आणि रावणाचे शत्रू — अशा प्रभू रामाला मी वंदन करतो.

    रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे ।
    रघुनाथाय नाथाय सीतायाः पतये नमः ॥ २७ ॥

    हिंदी अर्थ: राम को, रामभद्र को, रामचंद्र को, विधाता के स्वरूप को, रघुनाथ को, सबके नाथ को और सीता के पति को नमस्कार है।

    मराठी अर्थ — राम, रामभद्र, रामचंद्र, विधात्याचे स्वरूप असलेले, रघुनाथ, सर्वांचे नाथ आणि सीतेचे पती — यांना नमस्कार असो.

    श्रीराम राम रघुनन्दन राम राम ।
    श्रीराम राम भरताग्रज राम राम ।
    श्रीराम राम रणकर्कश राम राम ।
    श्रीराम राम शरणं भव राम राम ॥ २८ ॥

    हिंदी अर्थ: हे रघुनंदन श्री राम! हे भरत के बड़े भाई श्री राम! हे रणभूमि में अजेय श्री राम! हे श्री राम, आप मेरे शरण हो जाइए।

    मराठी अर्थ — हे रघुनंदन श्रीराम! हे भरताचे थोरले बंधू श्रीराम! हे रणांगणावर अजेय श्रीराम! हे श्रीराम, तुम्ही माझे शरण व्हा.

    श्रीरामचन्द्रचरणौ मनसा स्मरामि ।
    श्रीरामचन्द्रचरणौ वचसा गृणामि ।
    श्रीरामचन्द्रचरणौ शिरसा नमामि ।
    श्रीरामचन्द्रचरणौ शरणं प्रपद्ये ॥ २९ ॥

    हिंदी अर्थ: मैं मन से श्री रामचंद्र के चरणों का स्मरण करता हूँ। मैं वाणी से श्री रामचंद्र के चरणों का गुणगान करता हूँ। मैं शिर झुकाकर श्री रामचंद्र के चरणों को नमस्कार करता हूँ। मैं श्री रामचंद्र के चरणों की शरण ग्रहण करता हूँ।

    मराठी अर्थ — मी मनाने श्री रामचंद्रांच्या चरणांचे स्मरण करतो. मी वाणीने श्री रामचंद्रांच्या चरणांचे गुणगान करतो. मी मस्तकाने श्री रामचंद्रांच्या चरणांना नमस्कार करतो. मी श्री रामचंद्रांच्या चरणांचा आश्रय घेतो.

    माता रामो मत्पिता रामचन्द्रः ।
    स्वामी रामो मत्सखा रामचन्द्रः ।
    सर्वस्वं मे रामचन्द्रो दयालुः ।
    नान्यं जाने नैव जाने न जाने ॥ ३० ॥

    हिंदी अर्थ: राम मेरी माता हैं, रामचंद्र मेरे पिता हैं। राम मेरे स्वामी हैं, रामचंद्र मेरे मित्र हैं। दयालु रामचंद्र ही मेरा सर्वस्व हैं। उनके अतिरिक्त मैं किसी को नहीं जानता, सच में किसी को नहीं जानता, बिल्कुल नहीं जानता।

    मराठी अर्थ — राम माझी माता आहे, रामचंद्र माझे पिता आहेत. राम माझे स्वामी आहेत, रामचंद्र माझे मित्र आहेत. दयाळू रामचंद्र हेच माझे सर्वस्व आहेत. त्यांच्याशिवाय मी कोणाला ओळखत नाही, खरोखरच ओळखत नाही.

    दक्षिणे लक्ष्मणो यस्य वामे च जनकात्मजा ।
    पुरतो मारुतिर्यस्य तं वन्दे रघुनन्दनम् ॥ ३१ ॥

    हिंदी अर्थ: जिनके दाईं ओर लक्ष्मण हैं, बाईं ओर जानकीजी हैं और सामने हनुमानजी हैं — ऐसे उन रघुनंदन को मैं वंदन करता हूँ।

    मराठी अर्थ — ज्यांच्या उजव्या बाजूला लक्ष्मण आहेत, डाव्या बाजूला जानकी आहेत आणि समोर हनुमान आहेत — अशा त्या रघुनंदनाला मी वंदन करतो.

    लोकाभिरामं रणरङ्गधीरं राजीवनेत्रं रघुवंशनाथम् ।
    कारुण्यरूपं करुणाकरन्तं श्रीरामचन्द्रं शरणं प्रपद्ये ॥ ३२ ॥

    हिंदी अर्थ: सभी लोकों में शोभायमान, रणभूमि में धीर-वीर, कमलनयन, रघुवंश के नाथ, करुणा के साक्षात स्वरूप और करुणा के अक्षय भंडार — ऐसे श्री रामचंद्र की मैं शरण लेता हूँ।

    मराठी अर्थ — सर्व लोकांत शोभणारे, रणांगणावर धैर्यवान, कमलनयन, रघुवंशाचे नाथ, करुणेचे मूर्तिमंत रूप आणि करुणेचे भांडार असलेल्या श्री रामचंद्रांचा मी आश्रय घेतो.

    मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम् ।
    वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये ॥ ३३ ॥

    हिंदी अर्थ: मन के समान वेगवान, वायु के समान गतिशील, जितेंद्रिय, बुद्धिमानों में सर्वश्रेष्ठ, वायुपुत्र, वानर सेना के प्रमुख और श्री राम के दूत — ऐसे हनुमानजी की मैं शरण लेता हूँ।

    मराठी अर्थ — मनाप्रमाणे वेगवान, वाऱ्यासारख्या गतीने जाणारे, जितेंद्रिय, बुद्धिमानांत श्रेष्ठ, वायुपुत्र, वानरसेनेचे प्रमुख आणि श्री रामाचे दूत असलेल्या हनुमंताचा मी आश्रय घेतो.

    कूजन्तं राम-रामेति मधुरं मधुराक्षरम् ।
    आरुह्य कविताशाखां वन्दे वाल्मीकिकोकिलम् ॥ ३४ ॥

    हिंदी अर्थ: कविता की शाखा पर बैठकर मधुर अक्षरों में ‘राम-राम’ का मधुर स्वर में गुंजन करने वाले वाल्मीकि रूपी कोकिल को मैं वंदन करता हूँ।

    मराठी अर्थ — कवितेच्या शाखेवर बसून मधुर अक्षरांनी ‘राम राम’ असे गुणगान करणाऱ्या वाल्मीकी रूपी कोकिळाला मी वंदन करतो.

    आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसम्पदाम् ।
    लोकाभिरामं श्रीरामं भूयो भूयो नमाम्यहम् ॥ ३५ ॥

    हिंदी अर्थ: आपदाओं को दूर करने वाले, सभी प्रकार की संपदाएं देने वाले और सभी लोकों को आनंद देने वाले श्री राम को मैं बार-बार नमस्कार करता हूँ।

    मराठी अर्थ — आपत्ती दूर करणाऱ्या, सर्व संपत्ती देणाऱ्या आणि सर्व लोकांना आनंद देणाऱ्या श्री रामाला मी वारंवार नमस्कार करतो.

    भर्जनं भवबीजानामर्जनं सुखसम्पदाम् ।
    तर्जनं यमदूतानां रामरामेति गर्जनम् ॥ ३६ ॥

    हिंदी अर्थ: ‘राम-राम’ का उद्घोष करना — यह संसार के बीजों को भूनने वाला, सुख और संपदा को अर्जित कराने वाला और यमदूतों को ललकारने वाला है।

    मराठी अर्थ — ‘राम राम’ असे मोठ्याने म्हणणे — हे संसाराच्या बीजांना भाजून टाकणारे, सुख-संपत्ती मिळवून देणारे आणि यमदूतांना दरडावून लावणारे आहे.

    रामो राजमणिः सदा विजयते रामं रमेशं भजे ।
    रामेणाभिहता निशाचरचमू रामाय तस्मै नमः ।
    रामान्नास्ति परायणं परतरं रामस्य दासोऽस्म्यहम् ।
    रामे चित्तलयः सदा भवतु मे भो राम मामुद्धर ॥ ३७ ॥

    हिंदी अर्थ: राजाओं के मुकुटमणि श्री राम सदा विजयी होते हैं। मैं लक्ष्मीपति राम की भक्ति करता हूँ। जिन्होंने संपूर्ण राक्षस सेना का संहार किया, उन राम को नमस्कार है। राम से बड़ा कोई आश्रय नहीं है। मैं उन राम का दास हूँ। मेरा चित्त सदा राम में लीन रहे। हे राम! आप मेरा उद्धार कीजिए।

    मराठी अर्थ — राजांचे मुकुटमणी श्री राम सदैव विजयी होतात. मी लक्ष्मीपती रामाची भक्ती करतो. ज्यांनी संपूर्ण राक्षससेनेचा नाश केला त्या रामाला नमस्कार असो. रामापेक्षा श्रेष्ठ आश्रय नाही. मी त्या रामाचा दास आहे. माझे चित्त सदैव रामात लीन राहो. हे राम! तुम्ही मला उद्धरा.

    राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे ।
    सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने ॥ ३८ ॥

    हिंदी अर्थ: श्री महादेवजी पार्वतीजी से कहते हैं — हे सुमुखी! मनोरम राम में मैं ‘राम राम राम’ इस नाम से सदा रमण करता हूँ। राम का एक नाम भगवान विष्णु के सहस्रनाम के समतुल्य है।

    मराठी अर्थ — (श्री महादेवजी पार्वतीजींना सांगतात —) हे सुमुखी! मनाला आनंद देणाऱ्या रामाच्या ठिकाणी मी ‘राम राम राम’ अशा नामाने रममाण होतो. रामाचे एक नाव विष्णूच्या सहस्रनामाशी समतुल्य आहे.

    ॥ इति श्रीबुधकौशिकविरचितं श्रीरामरक्षास्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

    यह लेख धार्मिक जानकारी और आध्यात्मिक मार्गदर्शन के उद्देश्य से लिखा गया है। सभी संस्कृत श्लोक मूल स्रोत के अनुसार प्रस्तुत किए गए हैं।

    Ramraksha Stotra का आध्यात्मिक महत्व (Spiritual Significance)

    Shri Ramraksha Stotra केवल एक स्तोत्र नहीं है — यह एक सम्पूर्ण आध्यात्मिक कवच है। इसमें भगवान राम के अनेक नामों का उपयोग करके शरीर के प्रत्येक अंग की रक्षा की प्रार्थना की गई है। यह अवधारणा “अंग न्यास” की परंपरा पर आधारित है जिसमें देवता को शरीर के प्रत्येक भाग का रक्षक माना जाता है।

    इस RAM Raksha Stotra में तीन स्तरों पर रक्षा का वर्णन है:

    शारीरिक रक्षा — सिर से पैर तक प्रत्येक अंग की सुरक्षा।

    मानसिक रक्षा — भय, चिंता और नकारात्मक विचारों से मुक्ति।

    आत्मिक रक्षा — पाप, अधर्म और भवबंधन से मुक्ति।

    Full Ramraksha Stotra में हनुमानजी, सुग्रीव, विभीषण, जानकी, लक्ष्मण — सभी की भूमिकाओं का उल्लेख है, जो दर्शाता है कि राम केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि एक पूरी दिव्य व्यवस्था हैं।

    Ramraksha Stotra Marathi परंपरा

    महाराष्ट्र में Ramraksha Stotra Marathi पाठ की अत्यंत गहरी परंपरा है। महाराष्ट्र के घर-घर में प्रातःकाल RAM Raksha Stotra Marathi का पाठ होता है। संत एकनाथ, संत तुकाराम और संत समर्थ रामदास के प्रभाव से महाराष्ट्र में इस स्तोत्र को विशेष स्थान प्राप्त है।

    मराठी परंपरा में इसे “रामरक्षा” के नाम से जाना जाता है और यहाँ के भक्त इसे विशेष उत्साह के साथ शनिवार और मंगलवार को पढ़ते हैं।

    पाठ का उचित समय (When to Recite Ramraksha Stotra)

    Ramraksha Stotra In Hindi या संस्कृत में पाठ के लिए कुछ विशेष समय और अवसर बताए गए हैं:

    प्रातःकाल (ब्रह्ममुहूर्त) — सूर्योदय से पूर्व या सूर्योदय के समय इस Ramraksha का पाठ सर्वोत्तम माना गया है।

    राम नवमी — भगवान राम के जन्मोत्सव पर इस स्तोत्र का विशेष पाठ होता है।

    शनिवार और मंगलवार — हनुमानजी के प्रिय दिनों पर भी इस RAM Raksha Stotra का पाठ अत्यंत फलदायी है।

    संकट के समय — जब कोई भय, रोग, या कठिनाई हो, तब Shri Ramraksha Stotra का 11 या 21 बार पाठ करने से शीघ्र राहत मिलती है।

    नवरात्र और रामलीला के अवसर पर — इस पवित्र काल में स्तोत्र पाठ का फल कई गुना बढ़ जाता है।

    Ramraksha Stotra के आध्यात्मिक लाभ (Spiritual Benefits)

    Ramraksha Stotra Lyrics के नियमित पाठ से निम्न लाभ प्राप्त होते हैं:

    सुरक्षा और निर्भयता — नकारात्मक शक्तियों, बुरी नजर और भूत-प्रेत से रक्षा होती है। स्तोत्र स्वयं कहता है कि पाताल, भूलोक और आकाश के छद्म प्राणी भी राम नाम से रक्षित व्यक्ति के पास नहीं आ सकते।

    दीर्घायु और स्वास्थ्य — श्लोक 10 में स्पष्ट उल्लेख है कि इसका पाठ करने वाला “चिरायु” (दीर्घजीवी) होता है।

    मानसिक शांति — “रामनाम” का जप मन को शांत करता है और चिंता-भय से मुक्ति दिलाता है।

    पाप नाश — प्रत्येक अक्षर महापातकों को नष्ट करता है। यह स्तोत्र अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य देता है।

    सर्वकाम सिद्धि — सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।

    विजय और मंगल — इसे “वज्रपंजर कवच” भी कहते हैं जो व्यक्ति को सर्वत्र जय और मंगल दिलाता है।

    पुत्र प्राप्ति और परिवार सुख — नियमित पाठ से पुत्रवान, सुखी और विनम्र जीवन की प्राप्ति होती है।

    Ramraksha Stotra PDF

    Ramraksha Stotra PDF डाउनलोड करने के लिए आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

    Click Here: Ramraksha Stotra PDF

    इस पवित्र Full Ramraksha Stotra को PDF रूप में सहेजकर आप अपने परिवार, मित्रों और प्रियजनों को भी इस अमूल्य स्तोत्र का लाभ दिला सकते हैं। इसे सुबह पूजा कक्ष में रखकर प्रतिदिन पाठ करना अत्यंत पुण्यदायक है।

    निष्कर्ष (Conclusion)

    Ramraksha Stotra In Hindi केवल एक धार्मिक पाठ नहीं है — यह जीवन को राम की कृपा से जोड़ने का एक दिव्य माध्यम है। इस Full Ramraksha Stotra में भगवान राम का सम्पूर्ण व्यक्तित्व समाया हुआ है — उनकी करुणा, उनकी शक्ति, उनका धर्म और उनका प्रेम।

    जब हम Shri Ramraksha Stotra का पाठ करते हैं, तो हम केवल शब्द नहीं पढ़ते — हम राम के नाम रूपी अमृत को अपने जीवन में उतारते हैं। यह स्तोत्र हमें याद दिलाता है कि जीवन में चाहे कितना भी संकट आए, राम की शरण में आकर कोई भी भय नहीं रहता।

    “माता रामो मत्पिता रामचन्द्रः। सर्वस्वं मे रामचन्द्रो दयालुः।”

    इस भाव के साथ प्रतिदिन RAM Raksha Stotra का पाठ करें और अपने जीवन को शांति, सुख और भगवान राम की कृपा से भरपूर बनाएं।

    ॥ जय श्री राम ॥

    ? FAQs – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

    प्रश्न 1: Ramraksha Stotra क्या है?

    उत्तर: Ramraksha Stotra महर्षि बुधकौशिक द्वारा रचित एक पवित्र संस्कृत स्तोत्र है जिसमें भगवान श्रीराम के विभिन्न नामों से शरीर के प्रत्येक अंग की रक्षा की प्रार्थना की गई है। इसे भगवान शिव ने स्वप्न में ऋषि को सुनाया था।

    प्रश्न 2: RAM Raksha Stotra कब पढ़ना चाहिए?

    उत्तर: RAM Raksha Stotra को प्रतिदिन प्रातःकाल पढ़ना श्रेष्ठ है। इसके अलावा राम नवमी, मंगलवार, शनिवार और किसी भी संकट या भय के समय इसका पाठ अत्यंत फलदायी है।

    प्रश्न 3: Ramraksha Stotra In Hindi कितनी बार पढ़ना चाहिए?

    उत्तर: सामान्य पाठ के लिए प्रतिदिन एक बार पर्याप्त है। विशेष कामना या संकट में 11 या 21 बार पाठ करने का विधान है। अनुष्ठान के रूप में 40 दिनों तक नियमित पाठ अत्यंत शुभ माना जाता है।

    प्रश्न 4: Shri Ramraksha Stotra के पाठ से क्या लाभ होते हैं?

    उत्तर: Shri Ramraksha Stotra के पाठ से दीर्घायु, पाप नाश, मानसिक शांति, सर्वकाम सिद्धि, बुरी शक्तियों से रक्षा और विजय प्राप्त होती है। यह अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य देता है।

    प्रश्न 5: Ramraksha Stotra Marathi और Hindi में क्या अंतर है?

    उत्तर: मूल स्तोत्र संस्कृत में है। Ramraksha Stotra Marathi और Ramraksha Stotra In Hindi दोनों इसी मूल संस्कृत पाठ के क्षेत्रीय पठन-शैलियाँ हैं। महाराष्ट्र में इसे विशेष स्वर-शैली और परंपरा के साथ पढ़ा जाता है, किंतु पाठ और अर्थ एक ही है।

    प्रश्न 6: क्या Ramraksha Stotra Lyrics को कण्ठस्थ करना जरूरी है?

    उत्तर: कण्ठस्थ करने से अधिक लाभ होता है, किंतु पुस्तक या PDF देखकर भी पाठ करना उतना ही पवित्र और फलदायी है। मन की श्रद्धा और भाव ही सबसे महत्वपूर्ण है।

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