हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य, यज्ञ, पूजा या संस्कार की शुरुआत Swasti Vachan Mantra के पाठ से की जाती है। “स्वस्ति” शब्द दो संस्कृत शब्दों से बना है “सु” (अच्छा, शुभ) और “अस्ति” (है, होना) अर्थात् “कल्याण हो, मंगल हो।”
Swasti Vachan Mantra in Hindi में समझें तो यह मंत्र देवताओं, ऋषियों और प्रकृति की समस्त शक्तियों का आह्वान करके एक पवित्र, मांगलिक और दिव्य वातावरण निर्मित करता है। यह मंत्र ऋग्वेद की अमूल्य धरोहर है और हजारों वर्षों से हर शुभ अनुष्ठान का अभिन्न अंग रहा है।
Sampurn Swasti Vachan Mantra में कुल दस वैदिक मंत्र और एक शांति पाठ होता है। प्रत्येक मंत्र एक विशेष देवशक्ति का आह्वान करता है चाहे वह इंद्र हों, पूषा हों, अदिति हों, मरुत हों या सरस्वती। जब ये सभी मंत्र एक साथ पढ़े जाते हैं, तो वे एक अत्यंत शक्तिशाली और मांगलिक ऊर्जा-वलय निर्मित करते हैं।
चाहे विवाह संस्कार हो, गृह प्रवेश हो, नामकरण हो या कोई भी धार्मिक अनुष्ठान Swasti Vachan उस पवित्र नींव की तरह है जिस पर हर शुभ कार्य खड़ा होता है।
ॐ स्वस्तिवाचनम् – Sampurn Swasti Vachan Mantra Sanskrit Mein
नीचे सभी दस मंत्रों का संस्कृत पाठ, transliteration और सरल हिंदी अर्थ दिया गया है।
मंत्र १
ॐ आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतोऽदब्धासो अपरीतास उद्भिदः ।
देवा नो यथा सदमिद् वृधे असन्नप्रायुवो रक्षितारो दिवे-दिवे ॥
Transliteration:
Om Ā No Bhadrāḥ Kratavo Yantu Vishvato’dabdhāso Aparītāsa Udbhidaḥ।
Devā No Yathā Sadamid Vṛdhe Asannaprāyuvo Rakṣitāro Dive-Dive॥
हिंदी अर्थ:
“हे देवों! चारों दिशाओं से हमारे पास शुभ विचार और श्रेष्ठ संकल्प आएं।
वे अटूट, अबाधित और नव-जागरण देने वाले हों। देवता हमारी रक्षा करें और प्रतिदिन हमारी उन्नति करें ऐसे रक्षक जो कभी थकते नहीं।”
यह प्रथम मंत्र संपूर्ण विश्व से शुभ शक्तियों को आमंत्रित करने का आह्वान है।
मंत्र २
ॐ देवानां भद्रा सुमतिरृजूयतां देवानां रातिरभि नो निवर्तताम् ।
देवानां सख्यमुपसेदिमा वयं देवा न आयुः प्रतिरन्तु जीवसे ॥
Transliteration:
Om Devānāṃ Bhadrā Sumatirṛjūyatāṃ Devānāṃ Rātirabhi No Nivartātam।
Devānāṃ Sakhyamupaṣedimā Vayam Devā Na Āyuḥ Pratirāntu Jīvase॥
हिंदी अर्थ:
“देवताओं की श्रेष्ठ बुद्धि और कल्याणकारी विचार हमारी ओर आएं। देवताओं के आशीर्वाद और वरदान हमें प्राप्त हों।
हम देवताओं की मित्रता प्राप्त करें और देवता हमें दीर्घायु दें।”
यह मंत्र दिव्य मित्रता और दीर्घ आयु की प्रार्थना है।
मंत्र ३
ॐ तान् पूर्वयानिविदाहूमहे वयं भगं मित्रमदितिं दक्षमस्रिधम् ।
अर्यमणं वरुणं सोममश्विना सरस्वती नः सुभगा मयस्करत् ॥
Transliteration:
Om Tān Pūrvayānividāhūmahe Vayam Bhagam Mitramadatim Dakṣamasridham।
Aryamaṇam Varuṇam Somamashvinā Sarasvatī Naḥ Subhagā Mayaskat॥
हिंदी अर्थ:
“हम उन पूर्वज देवताओं का आह्वान करते हैं भग, मित्र, अदिति, दक्ष, अर्यमन, वरुण, सोम और अश्विनीकुमारों को।
माँ सरस्वती हमें सौभाग्य और आनंद प्रदान करें।”
इस मंत्र में माँ सरस्वती और नव देवताओं का एक साथ आह्वान किया गया है।
मंत्र ४
ॐ तन्नो वातो मयोभु वातु भेषजं तन्माता पृथिवी तत्पिता द्यौः ।
तद् ग्रावाणः सोमसुतो मयोभुवस्तदश्विना शृणुतं धिष्ण्या युवम् ॥
Transliteration:
Om Tanno Vāto Mayobhu Vātu Bheṣajam Tanmātā Pṛthivī Tatpitā Dyauḥ।
Tad Grāvāṇaḥ Somasuto Mayobhuvastad Ashvinā Śṛṇutaṃ Dhiṣṇyā Yuvam॥
हिंदी अर्थ:
“वायु हमारे लिए सुखकारी और औषधीय वायु बहाए। माता पृथ्वी और पिता आकाश यह कल्याण हमें दें।
सोम रस को धारण करने वाले पत्थर और अश्विनीकुमार हे बुद्धिमान देवों! हमारी यह प्रार्थना सुनें।”
यह मंत्र प्रकृति के पाँच तत्वों वायु, पृथ्वी, आकाश, जल और अग्नि से आशीर्वाद माँगने का वैदिक स्वरूप है।
मंत्र ५
ॐ तमिशानं जगतस्तस्थुषस्पतिं धियं दिविमीमहे वयम् ।
पुषा नो यथा वेदसामिद् वृधे रक्षिता पायुरदब्धः स्वस्तये ॥
Transliteration:
Om Tamiśānam Jagatastaṣṭhuṣaspatim Dhiyam Divimīmahe Vayam।
Puṣā No Yathā Vedasāmid Vṛdhe Rakṣitā Pāyuradabdhaḥ Svastaye॥
हिंदी अर्थ:
“हम उस परमेश्वर का ध्यान करते हैं जो चराचर जगत के स्वामी हैं और आकाश में स्थित हैं।
पूषा देव हमें उसी प्रकार बढ़ाएं जैसे वे ज्ञानियों को बढ़ाते हैं। वे हमारे अटूट रक्षक और हमारे कल्याण के संरक्षक हों।”
इस पंचम मंत्र में पूषा देव से विशेष रूप से स्वस्ति अर्थात् कल्याण की याचना की गई है।
मंत्र ६
ॐ स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः ।
स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु ॥
Transliteration:
Om Svasti Na Indro Vṛddhasravāḥ Svasti Naḥ Pūṣā Vishvavedāḥ।
Svasti Nastārkṣyo Ariṣṭanemiḥ Svasti No Bṛhaspatirdadhātu॥
शब्द-अर्थ:
| संस्कृत शब्द | हिंदी अर्थ |
|---|---|
| स्वस्ति (Svasti) | कल्याण हो, मंगल हो |
| नः (Naḥ) | हमारा, हमें |
| इन्द्रः (Indraḥ) | देवराज इंद्र |
| वृद्धश्रवाः (Vṛddhasravāḥ) | जिनकी महिमा महान है |
| पूषा (Pūṣā) | पोषण और समृद्धि के देव |
| विश्ववेदाः (Vishvavedāḥ) | सर्वज्ञ, सम्पूर्ण ज्ञान के स्वामी |
| तार्क्ष्यः (Tārkṣyaḥ) | गरुड़, विष्णु के वाहन |
| अरिष्टनेमिः (Ariṣṭanemiḥ) | सभी संकटों को दूर करने वाले |
| बृहस्पतिः (Bṛhaspatiḥ) | देवगुरु बृहस्पति |
| दधातु (Dadhātu) | प्रदान करें |
हिंदी अर्थ:
“महान यश वाले देवराज इंद्र हमारा कल्याण करें। सर्वज्ञ पूषा देव हमारा कल्याण करें।
संकटनाशक गरुड़ हमारा कल्याण करें। देवगुरु बृहस्पति हमें कल्याण प्रदान करें।”
यह Swasti Vachan Mantra का सर्वाधिक प्रसिद्ध और व्यापक रूप से पढ़ा जाने वाला मंत्र है। इसमें चार महान दिव्य शक्तियों से एक साथ कल्याण माँगा गया है।
मंत्र ७
ॐ पृषदश्वा मरुतः पृश्निमातरः शुभंयावानो विदथेषु जग्मयः ।
अग्निजिह्वा मनवः सूरचक्षसो विश्वे नो देवा अवसागमन्निह ॥
Transliteration:
Om Pṛṣadashvā Marutaḥ Pṛshnimātaraḥ Shubhaṃyāvāno Vidatheṣu Jagmayaḥ।
Agnijihvā Manavaḥ Sūracakṣaso Vishve No Devā Avasāgamanniha॥
हिंदी अर्थ:
“माता पृश्नि के पुत्र, चित्तकबरे घोड़ों वाले, शुभकारी, यज्ञों में आने वाले, अग्नि को जिह्वा रूप धारण करने वाले और सूर्य जैसी दृष्टि रखने वाले मरुतगण (पवन देव) हमारे पास आएं। समस्त देव हमारी रक्षा के लिए यहाँ पधारें।”
मरुतगण वायु के देवता हैं जो शक्ति, गति और जीवनशक्ति के प्रतीक हैं।
मंत्र ८
ॐ भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवा भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः ।
स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवांसस्तनूभिर्व्यशेमहि देवहितं यदायुः ॥
Transliteration: Om Bhadraṃ Karṇebhiḥ Śṛṇuyāma Devā Bhadram Pashyemākṣabhiryajātrāḥ। Sthirairaṅgaistuṣṭuvāṃsastanūbhirvyashemahi Devahitam Yadāyuḥ॥
हिंदी अर्थ:
“हे देवों! हम कानों से शुभ सुनें। हे पूजनीय देवों! हम आँखों से शुभ देखें।
मजबूत अंगों और स्वस्थ शरीर से आपकी स्तुति करते हुए हम देव-हित के लिए दी गई आयु को पूर्णतः जिएं।”
यह मंत्र स्वस्थ इंद्रियों, दीर्घायु और देव-सेवा में समर्पित जीवन की प्रार्थना है।
मंत्र ९
ॐ शतमिन्नु शरदो अन्ति देवा यत्रा नश्चक्रा जरसं तनूनाम् ।
पुत्रासो यत्र पितरो भवन्ति मा नो मध्या रीरिषतायुरग्नात् ॥
Transliteration:
Om Shataminu Sharado Anti Devā Yatrā Nashcakrā Jarasam Tanūnām।
Putrāso Yatra Pitaro Bhavanti Mā No Madhyā Rīriṣatāyuragnāt॥
हिंदी अर्थ:
“हे देवों! हम सौ शरद ऋतु (वर्ष) तक जिएं। हमारे शरीर वृद्धावस्था तक पहुँचें।
जहाँ पुत्र स्वयं पिता बनते हैं वह अवस्था हम प्राप्त करें। हमारी आयु बीच में ही अग्नि से नष्ट न हो।”
यह मंत्र सौ वर्ष की पूर्ण और स्वस्थ आयु के लिए एक हृदयस्पर्शी प्रार्थना है।
मंत्र १०
ॐ अदितिद्यौरदितिरन्तरिक्षमदितिमाता स पिता स पुत्रः ।
विश्वे देवा अदितिः पञ्च जना अदितिर्जातमदितिरजनित्वम् ॥
Transliteration:
Om Aditirdyauraditarantarikṣamadatimātā Sa Pitā Sa Putraḥ।
Vishve Devā Aditiḥ Pañca Janā Adatirjātamadatirajanitam॥
हिंदी अर्थ:
“अदिति ही आकाश है, अदिति ही अंतरिक्ष है, अदिति ही माता है, वही पिता है और वही पुत्र भी है।
समस्त देव अदिति हैं, पाँचों जन अदिति हैं। जो जन्म ले चुका है वह भी अदिति है और जो जन्म लेने वाला है वह भी अदिति है।”
यह दसवाँ मंत्र Sampurn Swasti Vachan Mantra का सर्वोच्च दार्शनिक मंत्र है। माँ अदिति को सम्पूर्ण सृष्टि का आधार बताया गया है वे ही भूत, वर्तमान और भविष्य हैं।
शांति पाठ समापन (Shanti Path)
Swasti Vachan Mantra का समापन इस महान शांति पाठ से होता है:
ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षं शान्तिः पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः ।
वनस्पतयः शान्तिर्विश्वे देवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः सर्वं शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि ॥
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
Transliteration:
Om Dyauḥ Shāntiarantarikṣam Shāntiḥ Pṛthivī Shāntirāpaḥ Shāntiroṣadhayaḥ Shāntiḥ।
Vanaspatayaḥ Shāntirvishve Devāḥ Shāntirbrahma Shāntiḥ Sarvaṃ Shāntiḥ Shāntireva Shāntiḥ Sā Mā Shāntiredhi॥
Om Shāntiḥ Shāntiḥ Shāntiḥ॥
सरल हिंदी अर्थ:
“आकाश में शांति हो। अंतरिक्ष में शांति हो। पृथ्वी पर शांति हो। जल में शांति हो। औषधियों में शांति हो। वनस्पतियों में शांति हो। समस्त देवों में शांति हो। ब्रह्म में शांति हो। सब कुछ शांतिमय हो। शांति ही शांति हो। वह शांति मुझे प्राप्त हो। ॐ शांति, शांति, शांति।”
यह शांति पाठ समस्त ब्रह्माण्ड में आकाश से लेकर पृथ्वी तक, जड़ से लेकर चेतन तक शांति की कामना करता है। “शान्तिः” का तीन बार उच्चारण तीन प्रकार के तापों आध्यात्मिक, दैविक और भौतिक से मुक्ति की प्रार्थना है।
Sampurn Swasti Vachan Mantra PDF:
आध्यात्मिक व्याख्या (Spiritual Explanation)
Swasti Vachan Mantra केवल शब्दों का समूह नहीं है, यह एक संपूर्ण वैदिक दर्शन है।
इन दस मंत्रों में जीवन के हर आयाम को छुआ गया है:
मंत्र १-२ में शुभ विचारों और दिव्य मित्रता का आह्वान है, यह जीवन की सर्वोत्तम शुरुआत की नींव है।
मंत्र ३ में नव देवताओं और माँ सरस्वती से सौभाग्य माँगा गया है, ज्ञान और भाग्य का संगम।
मंत्र ४ में प्रकृति के तत्वों से आरोग्य और कल्याण की प्रार्थना है, वेद प्रकृति को भी देव मानते हैं।
मंत्र ५-६ में पूषा, इंद्र, गरुड़ और बृहस्पति से स्वस्ति की याचना है, यही इस मंत्र का हृदय है।
मंत्र ७ में मरुतगण और समस्त देवों को आमंत्रित किया गया है, सामूहिक दिव्य ऊर्जा का आह्वान।
मंत्र ८-९ में स्वस्थ इंद्रियाँ, दीर्घायु और पूर्ण जीवन का वरदान माँगा गया है।
मंत्र १० में माँ अदिति की सर्वव्यापकता का उद्घोष है, सम्पूर्ण सृष्टि ही अदिति है।
और अंत में शांति पाठ से सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में शांति का विस्तार किया गया है।
Swasti Vachan Mantra in Hindi में इसका भाव समझें यह मंत्र हमें सिखाता है कि शुभ कार्य की शुरुआत केवल व्यक्तिगत लाभ से नहीं, बल्कि समस्त जीव-जगत के कल्याण की भावना से होनी चाहिए।
कब पढ़ें यह मंत्र (When to Recite)
Swasti Vachan Mantra का पाठ निम्नलिखित अवसरों पर किया जाता है:
- विवाह संस्कार: हर हिंदू विवाह की शुरुआत Swasti Vachan से होती है
- यज्ञ और हवन: किसी भी यज्ञ का प्रारंभ इसी मंत्र से होता है
- गृह प्रवेश: नए घर में प्रवेश के समय वातावरण शुद्ध और मांगलिक बनाने के लिए
- नामकरण संस्कार: शिशु के नामकरण में दिव्य आशीर्वाद के लिए
- मुंडन, उपनयन और अन्य षोडश संस्कारों में
- व्यापार या नई परियोजना का शुभारंभ: मंगल शुरुआत के लिए
- प्रतिदिन प्रातःकाल: दिन को मंगलमय बनाने के लिए
- किसी भी शुभ कार्य से पहले: परीक्षा, यात्रा, नई शुरुआत
पारंपरिक रूप से Swasti Vachan Mantra Sanskrit Mein पंडित या आचार्य के मुख से पढ़ा जाता है और परिवार के सभी सदस्य श्रद्धापूर्वक सुनते हैं।
आध्यात्मिक और भावनात्मक लाभ (Spiritual Benefits)
मन की गहरी शांति
शांति पाठ और दस मंत्रों के उच्चारण से मन की सारी चंचलता शांत होती है। “शान्तिः शान्तिः शान्तिः” का उच्चारण ही अंतर्मन को शीतलता देता है।
सर्वांगीण सुरक्षा
मरुतगण, गरुड़ और समस्त देवों के आह्वान से नकारात्मक ऊर्जाएं दूर होती हैं और व्यक्ति को हर प्रकार के कष्ट और संकट से सुरक्षा मिलती है।
बुद्धि और विवेक
देवगुरु बृहस्पति और माँ सरस्वती के आशीर्वाद से सद्बुद्धि, सही निर्णय लेने की क्षमता और ज्ञान में वृद्धि होती है।
स्वास्थ्य और दीर्घायु
मंत्र ८ और ९ विशेष रूप से स्वस्थ इंद्रियों, मजबूत शरीर और सौ वर्ष की पूर्ण आयु का वरदान देते हैं।
प्रकृति से सामंजस्य
मंत्र ४ में वायु, पृथ्वी और आकाश से प्रार्थना की गई है यह प्रकृति के साथ हमारे संबंध को पवित्र और सामंजस्यपूर्ण बनाता है।
सार्वभौमिक कल्याण की भावना
यह मंत्र केवल अपने लिए नहीं, बल्कि समस्त प्राणियों के कल्याण के लिए माँगा गया आशीर्वाद है यही भाव Swasti Vachan Mantra को महान बनाता है।
शुभ ऊर्जा का निर्माण
जब यह संपूर्ण मंत्र पढ़ा जाता है, तो स्थान विशेष में एक दिव्य और पवित्र ऊर्जा का संचार होता है जो समस्त उपस्थित लोगों को आशीर्वाद देती है।
निष्कर्ष (Conclusion)
Swasti Vachan Mantra हमारी वैदिक परंपरा का सबसे पवित्र और संपूर्ण आशीर्वचन है। इन दस मंत्रों में जीवन के हर पहलू को समेटा गया है, शुभ विचार, दिव्य मित्रता, प्रकृति से सामंजस्य, स्वास्थ्य, दीर्घायु, ज्ञान, शक्ति और सर्वोच्च शांति।
जब हम Swasti Vachan Mantra in Hindi का भाव समझकर इसे पढ़ते हैं, तो हम केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं करते हम एक ऐसे दर्शन को जीते हैं जो कहता है: “सबका मंगल हो, सबका कल्याण हो, सम्पूर्ण सृष्टि में शांति हो।”
Swasti Vachan Mantra Sanskrit Mein का यह संपूर्ण पाठ अपने प्रत्येक शुभ कार्य में करें, श्रद्धा से सुनें और इसके भाव को अपने जीवन में उतारें। देवताओं का आशीर्वाद, माँ अदिति की कृपा और ब्रह्माण्ड की शांति सदा आप पर और आपके परिवार पर बनी रहे।
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः
? FAQs – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1. Swasti Vachan Mantra का क्या अर्थ है?
उत्तर: “स्वस्ति” का अर्थ है कल्याण और मंगल। Swasti Vachan Mantra देवताओं से समस्त प्राणियों के लिए कल्याण, शांति और सुरक्षा की वैदिक प्रार्थना है जिसमें दस मंत्र और एक शांति पाठ शामिल हैं।
Q2. Sampurn Swasti Vachan Mantra कितने मंत्रों से बना है?
उत्तर: Sampurn Swasti Vachan Mantra में कुल दस वैदिक मंत्र हैं और अंत में शांति पाठ है। ये सभी मंत्र ऋग्वेद से लिए गए हैं।
Q3. Swasti Vachan Mantra Sanskrit Mein कहाँ से लिया गया है?
उत्तर: यह मंत्र मुख्यतः ऋग्वेद से लिया गया है। विशेषकर मंत्र ६ ऋग्वेद 1.89.6 से है। यह हजारों वर्षों से भारतीय धार्मिक परंपरा का अंग है।
Q4. इस मंत्र में “शांतिः” तीन बार क्यों कहते हैं?
उत्तर: तीन “शांतिः” का उच्चारण तीन प्रकार के तापों आध्यात्मिक (मन और आत्मा से), दैविक (प्रकृति और भाग्य से) और भौतिक (शरीर और बाहरी संसार से) से मुक्ति की कामना के लिए किया जाता है।
Q5. क्या Swasti Vachan Mantra घर पर स्वयं पढ़ सकते हैं?
उत्तर: हाँ, बिल्कुल। Swasti Vachan Mantra in Hindi या संस्कृत में कोई भी श्रद्धालु पूर्ण भक्ति और स्वच्छ मन के साथ घर पर स्वयं पढ़ सकता है। बड़े धार्मिक अनुष्ठानों में पंडित का मार्गदर्शन उचित रहता है।
Q6. मंत्र १० में माँ अदिति का क्या महत्व है?
उत्तर: माँ अदिति वैदिक परंपरा में सम्पूर्ण सृष्टि की आदि माता हैं। Sampurn Swasti Vachan Mantra के दसवें मंत्र में उन्हें आकाश, अंतरिक्ष, माता, पिता, पुत्र और समस्त देव सब कुछ कहा गया है। वे ब्रह्माण्ड की अनंत और अविभाज्य शक्ति हैं।
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