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    Home » Shlok » Ghorkashtodharan Stotra – संपूर्ण अर्थ, Transliteration और आध्यात्मिक लाभ
    Shlok

    Ghorkashtodharan Stotra – संपूर्ण अर्थ, Transliteration और आध्यात्मिक लाभ

    RaviBy RaviMay 8, 2026
    Ghorkashtodharan Stotra

    जीवन में जब संकटों का पहाड़ टूट पड़े, जब चारों ओर से परेशानियाँ घेर लें, जब मन भय और चिंता से भर जाए तब एक ऐसे दिव्य आश्रय की आवश्यकता होती है जो हर कष्ट को हर ले। भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में Ghorkashtodharan Stotra – यानी घोरकष्टोद्धरण स्तोत्र – ऐसा ही एक परम शक्तिशाली स्तोत्र है।

    यह स्तोत्र श्री वासुदेवानंद सरस्वती स्वामी (टेंबे स्वामी) द्वारा रचित है, जो दत्त संप्रदाय के एक महान संत थे। यह स्तोत्र भगवान श्री दत्तात्रेय को समर्पित है और इसमें पाँच श्लोक हैं। प्रत्येक श्लोक की अंतिम पंक्ति है –

    “घोरात्कष्टादुद्धरास्मान्नमस्ते”

    अर्थात – “हे प्रभु, हमें इस घोर कष्ट से उद्धार करो, आपको नमस्कार है।”

    Ghorkashtodharan Stotra in Marathi परंपरा में यह स्तोत्र महाराष्ट्र, गोवा और कर्नाटक के दत्त भक्तों में अत्यंत लोकप्रिय है। घोरकष्टोद्धरण स्तोत्र मराठी में भी इसे उतनी ही श्रद्धा से पढ़ा जाता है जितना संस्कृत में।

    Table of Contents

    Toggle
    • घोरकष्टोद्धरण स्तोत्र – Ghorkashtodharan Stotra in Marathi संपूर्ण पाठ, Transliteration व हिंदी अर्थ
      • 🔱 श्लोक १
      • 🔱 श्लोक २
      • 🔱 श्लोक ३
      • 🔱 श्लोक ४
      • 🔱 श्लोक ५
      • 🔱 फलश्रुति (Phalashruti)
    • Ghorkashtodharan Stotra Meaning – नाम का अर्थ
    • आध्यात्मिक व्याख्या (Spiritual Explanation)
    • पाठ का समय और विधि (When To Recite)
    • घोरकष्टोद्धरण स्तोत्र फायदे (Benefits)
    • Ghorkashtodharan Stotra PDF
    • निष्कर्ष (Conclusion)
    • ? FAQs – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
      • १. Ghorkashtodharan Stotra किसने लिखा?
      • २. Ghorkashtodharan Stotra Meaning क्या है?
      • ३. घोरकष्टोद्धरण स्तोत्र मराठी में कहाँ मिलेगा?
      • ४. घोरकष्टोद्धरण स्तोत्र फायदे क्या हैं?
      • ५. इस स्तोत्र को कितनी बार पढ़ना चाहिए?

    घोरकष्टोद्धरण स्तोत्र – Ghorkashtodharan Stotra in Marathi संपूर्ण पाठ, Transliteration व हिंदी अर्थ

    🔱 श्लोक १

    मूल संस्कृत:

    श्रीपाद श्रीवल्लभ त्वं सदैव ।
    श्रीदत्तास्मान्पाहि देवाधि देव ।
    भावग्राह्य क्लेशहारिन्सुकीर्ते ।
    घोरात्कष्टादुद्धरास्मान्नमस्ते ॥१॥

    Transliteration:

    hripad Shrivallabha tvam sadaiva |
    Shridattasmanpahi devadhi deva |
    Bhavagrihya kleshaharin sukirte |
    Ghorat kashtaduddhrasman namaste ||1||

    हिंदी अर्थ:

    हे श्रीपाद श्रीवल्लभ! हे श्री दत्त! आप सदा हमारे रक्षक हैं। हे देवों के भी देव! हमारी रक्षा कीजिए। आप भक्त के भाव को ग्रहण करने वाले, कष्टों को हरने वाले और सुंदर कीर्तिवाले हैं। हे प्रभु! हमें इस घोर कष्ट से उद्धार करें – आपको हमारा नमस्कार है।

    Meaning In Marathi:

    हे श्रीपाद श्रीवल्लभ! हे श्री दत्त! तुम्ही सदैव आमचे रक्षक आहात. हे देवाधिदेव! आमचे रक्षण करा. तुम्ही भक्ताच्या भावाने प्रसन्न होणारे, क्लेश हरण करणारे व सुकीर्तीवंत आहात. आमचे या घोर कष्टातून उद्धार करा – आपणास नमस्कार असो.

    🔱 श्लोक २

    मूल संस्कृत:

    त्वं नो माता त्वं पिताप्तोऽधिपस्त्वं ।
    त्राता योगक्षेमकृत्सदगुरूस्त्वं ।
    त्वं सर्वस्वं ना प्रभो विश्वमूर्ते ।
    घोरात्कष्टादुद्धरास्मान्नमस्ते ॥२॥

    Transliteration:

    Tvam no mata tvam pitapto’dhipas tvam |
    Trata yogakshemakrit sadgurus tvam |
    Tvam sarvasvam na prabho vishvamurte |
    Ghorat kashtaduddhrasman namaste ||2||

    हिंदी अर्थ:

    हे प्रभु! आप ही हमारी माँ हैं, आप ही पिता हैं, आप ही हमारे प्रियजन और स्वामी हैं। आप ही हमारे रक्षक हैं, हमारा योगक्षेम (कल्याण) करने वाले हैं और सच्चे सद्गुरु भी आप ही हैं। हे विश्वरूप प्रभु! आप ही हमारा सर्वस्व हैं। हमें इस घोर कष्ट से उद्धार करें – आपको नमस्कार है।

    Meaning In Marathi:

    हे प्रभो! तुम्हीच आमची माता आहात, तुम्हीच पिता आहात, तुम्हीच आमचे आप्त व स्वामी आहात. तुम्हीच आमचे रक्षक आहात, योगक्षेम करणारे व सद्गुरू आहात. हे विश्वमूर्ते! तुम्हीच आमचे सर्वस्व आहात. आमचे या घोर कष्टातून उद्धार करा – आपणास नमस्कार असो.

    🔱 श्लोक ३

    मूल संस्कृत:

    पापं तापं व्याधिंमाधिं च दैन्यं ।
    भीतिं क्लेशं त्वं हराऽशुत्व दैन्यम् ।
    त्रातारं नो वीक्ष ईशास्त जूर्ते ।
    घोरात्कष्टादुद्धरास्मान्नमस्ते ॥३॥

    Transliteration:

    Papam tapam vyadhim adhim cha dainyam |
    Bhitim klesham tvam harasu tva dainyam |
    Trataram no viksha ishaasta jurte |
    Ghorat kashtaduddhrasman namaste ||3||

    हिंदी अर्थ:

    हे प्रभु! हमारे पाप, ताप, शारीरिक रोग, मानसिक व्याधि, दीनता, भय और क्लेश – इन सबको आप शीघ्र दूर कीजिए। हे ईश्वर! हमें कोई और रक्षक नहीं दिखता – हम केवल आपकी ओर देखते हैं। हमें इस घोर कष्ट से उद्धार करें – आपको नमस्कार है।

    Meaning In Marathi:

    हे प्रभो! आमचे पाप, ताप, शारीरिक व्याधी, मानसिक वेदना, दारिद्र्य, भय आणि क्लेश – हे सर्व तुम्ही लवकर दूर करा. हे ईशा! आम्हाला कोणी रक्षक दिसत नाही – आम्ही फक्त तुमच्याकडे पाहतो. आमचे या घोर कष्टातून उद्धार करा – आपणास नमस्कार असो.

    🔱 श्लोक ४

    मूल संस्कृत:

    नान्यस्त्राता नापि दाता न भर्ता ।
    त्वतो देव त्वं शरण्योऽकहर्ता ॥
    कुर्वात्रेयानुग्रहं पुर्णराते ।
    घोरात्कष्टादुद्धरास्मान्नमस्ते ॥४॥

    Transliteration:

    Nanyas trata napi data na bharta |
    Tvato deva tvam sharanyo’ka harta |
    Kurvatreya anugraham purnarate |
    Ghorat kashtaduddhrasman namaste ||4||

    हिंदी अर्थ:

    हे देव! आपके अतिरिक्त न कोई हमारा रक्षक है, न दाता है और न भरण-पोषण करने वाला। आप ही शरण देने योग्य हैं और कष्टों को हरने वाले हैं। हे अत्रिनंदन दत्त! हम पर अपनी पूर्ण कृपा करें। हमें इस घोर कष्ट से उद्धार करें – आपको नमस्कार है।

    Meaning In Marathi:

    हे देवा! तुमच्याशिवाय आमचा कोणी रक्षक नाही, दाता नाही, भरणपोषण करणाराही नाही. तुम्हीच शरण्य आहात आणि संकट हरण करणारे आहात. हे अत्रिपुत्र दत्त! आमच्यावर पूर्ण अनुग्रह करा. आमचे या घोर कष्टातून उद्धार करा – आपणास नमस्कार असो.

    🔱 श्लोक ५

    मूल संस्कृत:

    धर्मेप्रीतिं सन्मतिं देवभक्तिम् ।
    सत्संगप्राप्तिं देहि भुक्तिं च मुक्तिम् ।
    भावासक्तिर्चाखिलानंदमूर्ते ।
    घोरात्कष्टादुद्धरास्मान्नमस्ते ॥५॥

    Transliteration:

    Dharme pritim sanmatim devabhaktim |
    Satsanga pratim dehi bhuktim cha muktim |
    Bhavasaktish chakhilananda murte |
    Ghorat kashtaduddhrasman namaste ||5||

    हिंदी अर्थ:

    हे सर्वानंद के मूर्त स्वरूप! हमें धर्म में प्रीति दीजिए, सन्मति (अच्छी बुद्धि) दीजिए, ईश्वर में भक्ति दीजिए, सत्संग की प्राप्ति दीजिए, लौकिक सुख (भुक्ति) और मोक्ष (मुक्ति) दीजिए, तथा आपके चरणों में सच्ची भावासक्ति (प्रेम और लगाव) दीजिए। हमें इस घोर कष्ट से उद्धार करें – आपको नमस्कार है।

    Meaning In Marathi:

    हे अखिलानंदमूर्ते! आम्हाला धर्माची आवड द्या, सन्मती द्या, देवभक्ती द्या, सत्संगाची प्राप्ती द्या, भुक्ती व मुक्ती द्या आणि आपल्या चरणी खरी भावासक्ती द्या. आमचे या घोर कष्टातून उद्धार करा – आपणास नमस्कार असो.

    🔱 फलश्रुति (Phalashruti)

    मूल संस्कृत:

    ॥ श्लोकपंचकमेतद्यो लोकमंगलवर्धनम् ॥
    ॥ प्रपठेन्नियतो भक्त्या स श्रीदत्तप्रियोभवेत् ॥

    Transliteration:

    Shloka panchakam etad yo loka mangala vardhanam |
    Prapathen niyato bhaktya sa Shri Datta priyo bhavet ||

    हिंदी अर्थ:

    जो व्यक्ति इन पाँच श्लोकों को जो लोक का मंगल बढ़ाने वाले हैं नियमित रूप से और भक्तिपूर्वक पाठ करेगा, वह श्री दत्त भगवान का प्रिय बन जाएगा।

    Meaning In Marathi:

    हे पाच श्लोक जे लोकमंगल वाढविणारे आहेत, त्यांचे जो नियमितपणे व भक्तीने पठण करेल, तो श्री दत्तांचा प्रिय होईल.

    रचयिता:

    श्रीवासुदेवानंदसरस्वती स्वामीविरचितं घोरकष्टोद्धरण स्तोत्रम्
    ।। श्रीपाद राजं शरणं प्रपद्ये ।।

    यह Ghorkashtodharan Stotra, श्री वासुदेवानंद सरस्वती (टेंबे स्वामी) द्वारा रचित है। वे दत्त संप्रदाय के परम सिद्ध संत थे, जिनके बारे में कहा जाता है कि श्री दत्त भगवान स्वयं उनसे प्रसन्न थे।

    Ghorkashtodharan Stotra Meaning – नाम का अर्थ

    शब्द अर्थ
    घोर अत्यंत भयंकर, गहरा
    कष्ट पीड़ा, संकट, दुःख
    उद्धरण उद्धार करना, मुक्त करना
    स्तोत्र स्तुति, प्रशस्ति, प्रार्थना

    Ghorkashtodharan Stotra Meaning — घोर कष्टों से उद्धार करने वाला दिव्य स्तोत्र।

    आध्यात्मिक व्याख्या (Spiritual Explanation)

    Ghorkashtodharan Stotra केवल एक प्रार्थना नहीं यह भक्त की पूर्ण आत्मसमर्पण की भावना है। जब भक्त कहता है “त्वं नो माता त्वं पिताप्तोऽधिपस्त्वम्” तो वह परमात्मा को अपना सर्वस्व स्वीकार करता है।

    इस स्तोत्र की विशेषता यह है कि हर श्लोक में भक्त एक-एक कष्ट का उल्लेख करता है पाप, ताप, रोग, व्याधि, भय, दैन्य  और प्रभु से इन सबसे मुक्ति माँगता है। पाँचवें श्लोक में भक्त भौतिक सुख के साथ-साथ मोक्ष, भक्ति और सत्संग की माँग करता है। यह इस स्तोत्र की गहराई और पूर्णता को दर्शाता है।

    भगवान दत्तात्रेय ब्रह्मा, विष्णु और महेश के त्रिगुणात्मक स्वरूप हैं। वे सृष्टि, पालन और संहार तीनों के स्वामी हैं। ऐसे परम शक्तिशाली देव के सामने जब भक्त पूर्ण समर्पण के साथ खड़ा होता है, तो घोर से घोर कष्ट भी दूर हो जाते हैं।

    पाठ का समय और विधि (When To Recite)

    • प्रतिदिन प्रातःकाल – स्नान के बाद, शुद्ध मन से पाठ करें।
    • गुरुवार को – भगवान दत्त का विशेष दिन है। इस दिन पाठ अत्यंत फलदायी होता है।
    • दत्त जयंती (मार्गशीर्ष पूर्णिमा) को – इस विशेष अवसर पर पाठ का महत्व और बढ़ जाता है।
    • गंभीर संकट के समय – रोग, आर्थिक कठिनाई, या मानसिक अशांति में इसका पाठ तत्काल राहत देता है।
    • पितृदोष शांति के लिए – अमावस्या को भी यह पाठ करना लाभकारी है।

    पाठ विधि: स्वच्छ आसन पर बैठकर, दत्त भगवान का स्मरण करके, श्रद्धा और एकाग्रता से पाँचों श्लोकों का पाठ करें। यदि संभव हो तो 11 या 21 बार पाठ करें।

    घोरकष्टोद्धरण स्तोत्र फायदे (Benefits)

    घोरकष्टोद्धरण स्तोत्र फायदे आध्यात्मिक और व्यावहारिक दोनों स्तरों पर महसूस होते हैं:

    १. घोर संकट से तत्काल राहत – नियमित पाठ से जीवन की गंभीर बाधाएँ धीरे-धीरे हटने लगती हैं।

    २. भय और चिंता का नाश – मन का भय, अज्ञात आशंकाएँ, और चिंताएँ कम होती हैं।

    ३. पाप, ताप और रोग से मुक्ति – तीसरे श्लोक में इसकी स्पष्ट प्रार्थना है।

    ४. पितृदोष और ग्रहदोष शांति – दत्त भगवान पितृदेवों के प्रतिनिधि माने जाते हैं। इस स्तोत्र के पाठ से पितृदोष में राहत मिलती है।

    ५. मानसिक शांति और स्थिरता – स्तोत्र के शब्दों की लय मन को एकाग्र और शांत बनाती है।

    ६. भक्ति, सत्संग और मोक्ष की प्राप्ति – पाँचवाँ श्लोक भुक्ति और मुक्ति दोनों की प्रार्थना करता है।

    ७. परिवार में सुख और शांति – घर में नियमित पाठ से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    Ghorkashtodharan Stotra PDF

    यदि आप Ghorkashtodharan Stotra PDF डाउनलोड करना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए डाउनलोड लिंक के माध्यम से इसे आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। इस स्तोत्र का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से जीवन के घोर कष्टों और बाधाओं से राहत मिलने की मान्यता है। साथ ही, सही विधि और उच्चारण के लिए किसी विद्वान गुरु या पंडित से मार्गदर्शन लेना भी लाभकारी माना जाता है।

    📄 Ghorkashtodharan Stotra PDF डाउनलोड करे

    निष्कर्ष (Conclusion)

    Ghorkashtodharan Stotra यानी घोरकष्टोद्धरण स्तोत्र श्री वासुदेवानंद सरस्वती स्वामी की एक अमूल्य देन है। इस स्तोत्र के केवल पाँच श्लोकों में जीवन की सम्पूर्ण पीड़ा, पाप, ताप, रोग, भय, दैन्य का उल्लेख है और दत्त भगवान से उससे मुक्ति की हृदयस्पर्शी प्रार्थना है।

    जब भी जीवन में घोर संकट आए, तब इन पाँच श्लोकों को भक्ति से पढ़ें। घोरकष्टोद्धरण स्तोत्र फायदे अनुभव करें मन की शांति, कष्टों से मुक्ति और प्रभु की अनंत कृपा।

    दिगंबरा दिगंबरा श्रीपाद वल्लभ दिगंबरा । जय श्री गुरुदेव दत्त ।।
    ।। श्रीपाद राजं शरणं प्रपद्ये ।।

    ? FAQs – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

    १. Ghorkashtodharan Stotra किसने लिखा?

    यह स्तोत्र श्री वासुदेवानंद सरस्वती (टेंबे स्वामी) द्वारा रचित है। वे दत्त संप्रदाय के महान संत थे।

    २. Ghorkashtodharan Stotra Meaning क्या है?

    इसका अर्थ है “घोर कष्टों से उद्धार करने वाला स्तोत्र।” यह भगवान दत्तात्रेय की स्तुति है जिसमें जीवन के हर प्रकार के संकट से मुक्ति की प्रार्थना है।

    ३. घोरकष्टोद्धरण स्तोत्र मराठी में कहाँ मिलेगा?

    घोरकष्टोद्धरण स्तोत्र मराठी अर्थसहित dattamaharaj.com पर उपलब्ध है। महाराष्ट्र के अधिकांश दत्त मंदिरों में भी यह उपलब्ध है।

    ४. घोरकष्टोद्धरण स्तोत्र फायदे क्या हैं?

    पाप, ताप, रोग, भय, पितृदोष से मुक्ति, मानसिक शांति, भक्ति में वृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति ये मुख्य घोरकष्टोद्धरण स्तोत्र फायदे हैं।

    ५. इस स्तोत्र को कितनी बार पढ़ना चाहिए?

    दैनिक एक बार पाठ उत्तम है। विशेष संकट में 11 या 21 बार पाठ का विधान है।

    🙏 इन मंत्रों और श्लोकों को भी पढ़ना न भूलें:

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