माँ दुर्गा की स्तुति में जितने भी दिव्य स्तोत्र रचे गए हैं, उनमें Mahishasura Mardini Stotram का स्थान सर्वोच्च है। यह स्तोत्र “अयि गिरिनन्दिनि” नाम से भी प्रसिद्ध है। इस स्तोत्र में माँ दुर्गा के उस शक्तिशाली स्वरूप का वर्णन है जिन्होंने महिषासुर नामक महाशक्तिशाली असुर का वध करके संसार को भय-मुक्त किया।
Full Mahishasura Mardini Stotram में 21 श्लोक हैं, जिनमें प्रत्येक श्लोक के अंत में “जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते” की ध्रुवपंक्ति आती है। यह स्तोत्र संस्कृत साहित्य की एक अनुपम रचना है, जो भक्तों को अद्भुत ऊर्जा और दैवीय शक्ति प्रदान करती है।
Mahishasura Mardini Stotram In English (transliteration) के रूप में भी यह स्तोत्र विश्वभर में प्रसिद्ध है। दक्षिण भारत में Mahishasura Mardini Stotram Telugu पाठ का भी व्यापक प्रचलन है। इस लेख में हम आपको इस स्तोत्र का संपूर्ण संस्कृत पाठ, English transliteration, हिंदी अर्थ और आध्यात्मिक रहस्य प्रदान करेंगे।
महिषासुरमर्दिनि स्तोत्रम् – पृष्ठभूमि
यह स्तोत्र आदिशंकराचार्य की रचना माना जाता है। इसका रचनाकाल अत्यंत प्राचीन है। इस स्तोत्र में माँ दुर्गा को “शैलसुते” (पर्वत की पुत्री) और “रम्यकपर्दिनि” (सुंदर जटाओं वाली) कहा गया है। माँ दुर्गा के महिषासुर-वध की पूरी कथा इस स्तोत्र में काव्यात्मक रूप से प्रकट होती है।
Mahishasura Mardini Stotram PDF के रूप में यह स्तोत्र आज लाखों भक्तों के घरों में सुलभ है। इसे नवरात्रि, दुर्गा पूजा और प्रतिदिन के आध्यात्मिक अनुष्ठान में पढ़ा जाता है।
संपूर्ण महिषासुरमर्दिनि स्तोत्रम् (Full Mahishasura Mardini Stotram)
श्लोक १
संस्कृत पाठ:
अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुते गिरिवरविन्ध्यशिरोऽधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते ।
भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि भूरिकुटुम्बिनि भूरिकृते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १ ॥
English Transliteration:
Ayi Girinandini Nanditamedini Vishvavinodini Nandinute Girivara Vindhyashiro’dhinivasini Vishnuvilaasini Jishnu Nute |
Bhagavati He Shitikanthakutumbini Bhurikutumbini Bhurikrite Jaya Jaya He Mahishasura Mardini Ramyakapardini Shailasute || 1 ||
शब्द अर्थ:
- अयि = हे (संबोधन)
- गिरिनन्दिनि = पर्वत की पुत्री
- नन्दितमेदिनि = पृथ्वी को आनंदित करने वाली
- विश्वविनोदिनि = सम्पूर्ण विश्व को हर्षित करने वाली
- शितिकण्ठकुटुम्बिनि = नीलकंठ शिव की पत्नी
- महिषासुरमर्दिनि = महिषासुर का वध करने वाली
- शैलसुते = पर्वत की पुत्री
हिंदी अर्थ: हे पर्वतपुत्री! जो इस पृथ्वी को आनंदित करती हैं, सम्पूर्ण विश्व को हर्ष प्रदान करती हैं, विन्ध्याचल पर निवास करने वाली, भगवान विष्णु द्वारा पूजित, नीलकंठ शिव की पत्नी — हे देवी! महिषासुर का मर्दन करने वाली, सुंदर जटाधारी, पर्वत-पुत्री — आपकी जय हो।
श्लोक २
संस्कृत पाठ:
सुरवरवर्षिणि दुर्धरधर्षिणि दुर्मुखमर्षिणि हर्षरते त्रिभुवनपोषिणि शङ्करतोषिणि किल्बिषमोषिणि घोषरते ।
दनुजनिरोषिणि दितिसुतरोषिणि दुर्मदशोषिणि सिन्धुसुते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ २ ॥
English Transliteration:
Suravara Varshini Durdhara Dharshini Durmukha Marshini Harsha Rate Tribhuvana Poshini Shankara Toshini Kilbisha Moshini Ghosha Rate |
Danuja Niroshini Diti Suta Roshini Durmada Shoshini Sindhu Sute Jaya Jaya He Mahishasura Mardini Ramyakapardini Shailasute || 2 ||
हिंदी अर्थ: हे देवी! जो देवताओं पर कृपा-वर्षा करने वाली, दुर्जन का दमन करने वाली, दुर्मुखों का संहार करने वाली हैं। तीनों लोकों का पोषण करने वाली, शंकर को प्रसन्न करने वाली, पापों का नाश करने वाली — समुद्र-पुत्री, महिषासुरमर्दिनि, आपकी जय हो।
श्लोक ३
संस्कृत पाठ:
अयि जगदम्ब मदम्ब कदम्ब वनप्रियवासिनि हासरते शिखरि शिरोमणि तुङ्गहिमलय शृङ्गनिजालय मध्यगते ।
मधुमधुरे मधुकैटभगञ्जिनि कैटभभञ्जिनि रासरते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ३ ॥
English Transliteration:
Ayi Jagadamba Madamba Kadamba Vanapriya Vasini Haasa Rate Shikhari Shiromani Tunga Himalaya Shringa Nijalaya Madhyagate |
Madhumadhure Madhukaitabha Ganjini Kaitabha Bhanjini Raasa Rate Jaya Jaya He Mahishasura Mardini Ramyakapardini Shailasute || 3 ||
हिंदी अर्थ: हे जगतमाता! कदंब वन में वास करने वाली, हिमालय के उच्च शिखर पर स्थित अपने आलय में निवास करने वाली, मधु और कैटभ असुरों का नाश करने वाली — आपकी जय हो।
श्लोक ४
संस्कृत पाठ:
अयि शतखण्ड विखण्डितरुण्ड वितुण्डितशुण्ड गजाधिपते रिपुगजगण्ड विदारणचण्ड पराक्रमशुण्ड मृगाधिपते ।
निजभुजदण्ड निपातितखण्ड विपातितमुण्ड भटाधिपते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ४ ॥
English Transliteration:
Ayi Shata Khanda Vikhandita Runda Vitundita Shunda Gajadhipate Ripu Gaja Ganda Vidarana Chanda Parakrama Shunda Mrigadhipate |
Nija Bhuja Danda Nipatita Khanda Vipatita Munda Bhatadhipate Jaya Jaya He Mahishasura Mardini Ramyakapardini Shailasute || 4 ||
हिंदी अर्थ: हे देवी! जिन्होंने शत्रुओं को सैकड़ों टुकड़ों में विभाजित किया, शत्रु के हाथियों का मस्तक विदारण किया और अपने भुजदंड से शत्रु योद्धाओं को धराशायी किया — आपकी जय हो।
श्लोक ५
संस्कृत पाठ:
अयि रणदुर्मद शत्रुवधोदित दुर्धरनिर्जर शक्तिभृते चतुरविचार धुरीणमहाशिव दूतकृत प्रमथाधिपते ।
दुरितदुरीह दुराशयदुर्मति दानवदुत कृतान्तमते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ५ ॥
English Transliteration:
Ayi Rana Durmada Shatruvadhod ita Durdhara Nirjara Shaktibhrite Chatura Vichara Dhurina Mahashiva Dutakrita Pramathadhipate |
Durita Duriha Durashaya Durmati Danava Duta Kritanta Mate Jaya Jaya He Mahishasura Mardini Ramyakapardini Shailasute || 5 ||
हिंदी अर्थ: हे देवी! युद्ध में अजेय शक्ति धारण करने वाली, महाशिव के प्रमथगणों की अधिपति, दुष्टों के दुराशय का नाश करने वाली, दानवों के दूत को काल का ग्रास बनाने वाली — आपकी जय हो।
श्लोक ६
संस्कृत पाठ:
अयि शरणागत वैरिवधुवर वीरवराभय दायकरे त्रिभुवनमस्तक शुलविरोधि शिरोऽधिकृतामल शुलकरे ।
दुमिदुमितामर धुन्दुभिनादमहोमुखरीकृत दिङ्मकरे जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ६ ॥
English Transliteration:
Ayi Sharanagata Vairi Vadhuvara Vira Varabhaya Dayakare Tribhuvana Mastaka Shula Virodhi Shiro’dhikritamala Shulakare |
Dumidumitamara Dhundubhi Nada Maho Mukharikrita Dingmakare Jaya Jaya He Mahishasura Mardini Ramyakapardini Shailasute || 6 ||
हिंदी अर्थ: हे देवी! शरणागत भक्तों को अभय देने वाली, त्रिभुवन के समस्त विरोधियों को शूल से भेदने वाली, दिग्मण्डल को दुन्दुभिनाद से गुंजायमान करने वाली — आपकी जय हो।
श्लोक ७
संस्कृत पाठ:
अयि निजहुङ्कृति मात्रनिराकृत धूम्रविलोचन धूम्रशते समरविशोषित शोणितबीज समुद्भवशोणित बीजलते ।
शिवशिवशुम्भ निशुम्भमहाहव तर्पितभूत पिशाचरते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ७ ॥
English Transliteration:
Ayi Nija Hunkruti Matra Nirakrita Dhumra Vilochana Dhumra Shate Samara Vishoshita Shonita Bija Samudbhava Shonita Bija Late |
Shiva Shiva Shumbha Nishumbha Mahahava Tarpita Bhoota Pishacha Rate Jaya Jaya He Mahishasura Mardini Ramyakapardini Shailasute || 7 ||
हिंदी अर्थ: हे देवी! अपनी हुंकारमात्र से धूम्रविलोचन असुर का नाश करने वाली, रक्तबीज के रक्त से उत्पन्न असुरों का भी संहार करने वाली, शुम्भ-निशुम्भ के युद्ध में विजयिनी — आपकी जय हो।
श्लोक ८
संस्कृत पाठ:
धनुरनुषङ्ग रणक्षणसङ्ग परिस्फुरदङ्ग नटत्कटके कनकपिशङ्ग पृषत्कनिषङ्ग रसद्भटशृङ्ग हताबटुके ।
कृतचतुरङ्ग बलक्षितिरङ्ग घटद्बहुरङ्ग रटद्बटुके जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ८ ॥
English Transliteration:
Dhanuranu Shanga Rana Kshana Sanga Parisphurad Anga Natat Katake Kanaka Pishanga Prishatka Nishanga Rasad Bhata Shrunga Hata Batuke |
Krita Chaturanga Bala Kshiti Ranga Ghadad Bahuranga Ratad Batuke Jaya Jaya He Mahishasura Mardini Ramyakapardini Shailasute || 8 ||
हिंदी अर्थ: हे देवी! युद्धभूमि में धनुष धारण करते हुए, स्वर्ण-पीत तीरों से सुसज्जित, चतुरंगिणी सेना को दिशाएँ गुंजायमान करते हुए युद्ध करने वाली — आपकी जय हो।
श्लोक ९
संस्कृत पाठ:
सुरललना ततथेयि तथेयि कृताभिनयोदर नृत्यरते कृत कुकुथः कुकुथो गडदादिकताल कुतूहल गानरते ।
धुधुकुट धुक्कुट धिंधिमित ध्वनि धीर मृदंग निनादरते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ९ ॥
English Transliteration:
Sura Lalana Tatatheyi Tatatheyi Kritabhinayodara Nritya Rate Krita Kukuthah Kukutho Gadadika Tala Kutuhala Gana Rate |
Dhudhukuta Dhukkuta Dhimdhimita Dhvani Dhira Mridanga Ninada Rate Jaya Jaya He Mahishasura Mardini Ramyakapardini Shailasute || 9 ||
हिंदी अर्थ: हे देवी! देवांगनाओं के नृत्य और मृदंग की ध्वनि से युक्त, ताल और गान में प्रसन्न, विजय के पश्चात उल्लास में रत — आपकी जय हो।
श्लोक १०
संस्कृत पाठ:
जय जय जप्य जयेजयशब्द परस्तुति तत्परविश्वनुते झणझणझिञ्झिमि झिङ्कृत नूपुरशिञ्जितमोहित भूतपते ।
नटित नटार्ध नटी नट नायक नाटितनाट्य सुगानरते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १० ॥
English Transliteration:
Jaya Jaya Japya Jayejaya Shabda Parastuti Tatpara Vishvanute Jhana Jhana Jhinjhimi Jhinkrita Nupura Shinjita Mohita Bhutapate |
Natita Natardha Nati Nata Nayaka Natita Natya Sugana Rate Jaya Jaya He Mahishasura Mardini Ramyakapardini Shailasute || 10 ||
हिंदी अर्थ: हे देवी! जिनकी “जय-जय” की ध्वनि से समस्त विश्व गुंजायमान है, जिनके नूपुरों की झनकार से भूतपति मोहित हो जाते हैं, नृत्य और नाट्य में प्रसन्न — आपकी जय हो।
श्लोक ११
संस्कृत पाठ:
अयि सुमनःसुमनःसुमनः सुमनःसुमनोहरकान्तियुते श्रितरजनी रजनीरजनी रजनीरजनी करवक्त्रवृते ।
सुनयनविभ्रमर भ्रमरभ्रमर भ्रमरभ्रमराधिपते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ११ ॥
English Transliteration:
Ayi Sumanah Sumanah Sumanah Sumanah Sumanoharakantiyute Shrita Rajani Rajani Rajani Rajani Rajani Karavaktra Vrite |
Sunayana Vibhramara Bhramara Bhramara Bhramara Bhramaradhipate Jaya Jaya He Mahishasura Mardini Ramyakapardini Shailasute || 11 ||
हिंदी अर्थ: हे देवी! पुष्पों की कान्ति से युक्त, चन्द्रमा-सम मुख वाली, नेत्रों की शोभा से भ्रमरों को भी मोहित कर देने वाली — आपकी जय हो।
श्लोक १२
संस्कृत पाठ:
सहितमहाहव मल्लमतल्लिक मल्लितरल्लक मल्लरते विरचितवल्लिक पल्लिकमल्लिक झिल्लिकभिल्लिक वर्गवृते ।
शितकृतफुल्ल समुल्लसितारुण तल्लजपल्लव सल्ललिते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १२ ॥
English Transliteration:
Sahita Mahahava Malla Matallika Mallita Rallaka Malla Rate Virachita Vallika Pallika Mallika Jhillika Bhillika Varga Vrite |
Shita Krita Phulla Samullasitaruna Tallaja Pallava Sallalite Jaya Jaya He Mahishasura Mardini Ramyakapardini Shailasute || 12 ||
हिंदी अर्थ: हे देवी! महायुद्ध में पराक्रमी योद्धाओं को पराजित करने वाली, वनिका-वल्लरियों और पुष्पित पल्लवों से सुशोभित, सौंदर्य और शक्ति का अनुपम संगम — आपकी जय हो।
श्लोक १३
संस्कृत पाठ:
अविरलगण्ड गलन्मदमेदुर मत्तमतङ्ग जराजपते त्रिभुवनभुषण भूतकलानिधि रूपपयोनिधि राजसुते ।
अयि सुदतीजन लालसमानस मोहन मन्मथराजसुते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १३ ॥
English Transliteration:
Avirala Ganda Galanmada Medura Matta Matanga Jaraja Pate Tribhuvana Bhushana Bhoota Kalanidhi Rupa Payonidhi Raja Sute |
Ayi Sudati Jana Lalasa Manasa Mohana Manmatha Raja Sute Jaya Jaya He Mahishasura Mardini Ramyakapardini Shailasute || 13 ||
हिंदी अर्थ: हे देवी! मदमत्त हाथियों की पंक्तियों से घिरी, तीनों लोकों की शोभा, सौंदर्य के सागर, मन्मथ को भी मोहित करने में समर्थ — आपकी जय हो।
श्लोक १४
संस्कृत पाठ:
कमलदलामल कोमलकान्ति कलाकलितामल भाललते सकलविलास कलानिलयक्रम केलिचलत्कल हंसकुले ।
अलिकुलसङ्कुल कुवलयमण्डल मौलिमिलद्बकुलालिकुले जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १४ ॥
English Transliteration:
Kamala Dalamala Komala Kanti Kala Kalitamala Bhala Late Sakala Vilasa Kalanilaya Krama Keli Chalat Kala Hamsa Kule |
Ali Kula Sankula Kuvalaya Mandala Mauli Milad Bakulali Kule Jaya Jaya He Mahishasura Mardini Ramyakapardini Shailasute || 14 ||
हिंदी अर्थ: हे देवी! कमल-पंखुड़ी-सी कोमल कान्ति से युक्त, विशाल ललाट वाली, हंसों के समूह के साथ विहार करने वाली, नीलकमलों से सुशोभित — आपकी जय हो।
श्लोक १५
संस्कृत पाठ:
करमुरलीरव वीजितकूजित लज्जितकोकिल मञ्जुमते मिलितपुलिन्द मनोहरगुञ्जित रञ्जितशैल निकुञ्जगते ।
निजगणभूत महाशबरीगण सद्गुणसम्भृत केलितले जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १५ ॥
English Transliteration:
Kara Murali Rava Vijita Kujita Lajjita Kokila Manjumate Milita Pulinda Manohara Gunjita Ranjita Shaila Nikunjagete |
Nija Gana Bhoota Maha Shabari Gana Sadguna Sambhrita Kelitale Jaya Jaya He Mahishasura Mardini Ramyakapardini Shailasute || 15 ||
हिंदी अर्थ: हे देवी! हाथों की मुरली-ध्वनि से कोकिल को भी लज्जित करने वाली, पर्वतीय निकुंज में विहार करने वाली, शबरी-गण से परिवृत — आपकी जय हो।
श्लोक १६
संस्कृत पाठ:
कटितटपीत दुकूलविचित्र मयुखतिरस्कृत चन्द्ररुचे प्रणतसुरासुर मौलिमणिस्फुर दंशुलसन्नख चन्द्ररुचे ।
जितकनकाचल मौलिमदोर्जित निर्भरकुञ्जर कुम्भकुचे जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १६ ॥
English Transliteration:
Kati Tata Pita Dukula Vichitra Mayukha Tiraskrita Chandra Ruche Pranata Surasura Mauli Mani Sphura Damshula Sannakha Chandra Ruche |
Jita Kanakachala Mauli Madorjita Nirbhara Kunjara Kumbha Kuche Jaya Jaya He Mahishasura Mardini Ramyakapardini Shailasute || 16 ||
हिंदी अर्थ: हे देवी! पीताम्बर से सुशोभित, चन्द्रमा की कान्ति को मात देने वाले नखों से दीप्त, सुर और असुर दोनों द्वारा मणि-चरणों में नमस्कृत — आपकी जय हो।
श्लोक १७
संस्कृत पाठ:
विजितसहस्रकरैक सहस्रकरैक सहस्रकरैकनुते कृतसुरतारक सङ्गरतारक सङ्गरतारक सूनुसुते ।
सुरथसमाधि समानसमाधि समाधिसमाधि सुजातरते । जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १७ ॥
English Transliteration:
Vijita Sahasra Karaika Sahasra Karaika Sahasra Karaika Nute Krita Sura Taraka Sangara Taraka Sangara Taraka Sunu Sute |
Suratha Samadhi Samana Samadhi Samadhi Samadhi Sujata Rate Jaya Jaya He Mahishasura Mardini Ramyakapardini Shailasute || 17 ||
हिंदी अर्थ: हे देवी! सहस्र भुजाओं वाले देवताओं द्वारा पूजित, तारकासुर के नाश में संलग्न, समाधिस्थ योद्धाओं की रक्षा करने वाली — आपकी जय हो।
श्लोक १८
संस्कृत पाठ:
पदकमलं करुणानिलये वरिवस्यति योऽनुदिनं सुशिवे अयि कमले कमलानिलये कमलानिलयः स कथं न भवेत् ।
तव पदमेव परम्पदमित्यनुशीलयतो मम किं न शिवे जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १८ ॥
English Transliteration:
Pada Kamalam Karuna Nilaye Varivasyati Yo’nudinam Sushive Ayi Kamale Kamala Nilaye Kamala Nilayah Sa Katham Na Bhavet |
Tava Padameva Parampadamityanushilayato Mama Kim Na Shive Jaya Jaya He Mahishasura Mardini Ramyakapardini Shailasute || 18 ||
हिंदी अर्थ: हे करुणामयी देवी! जो भक्त प्रतिदिन आपके चरण-कमल की सेवा करता है, वह निश्चित ही लक्ष्मी-कृपा का पात्र बनता है। आपके चरण ही परम पद हैं — आपकी जय हो।
श्लोक १९
संस्कृत पाठ:
कनकलसत्कलसिन्धुजलैरनुषिञ्चति तेगुणरङ्गभुवम् भजति स किं न शचीकुचकुम्भतटीपरिरम्भसुखानुभवम् ।
तव चरणं शरणं करवाणि नतामरवाणि निवासि शिवम् जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १९ ॥
English Transliteration:
Kanaka Lasat Kala Sindhu Jalaira Nushincati Te Guna Ranga Bhuvam Bhajati Sa Kim Na Shachi Kucha Kumbha Tati Parirambha Sukha Anubhavam |
Tava Charanam Sharanam Karavani Natamara Vani Nivasi Shivam Jaya Jaya He Mahishasura Mardini Ramyakapardini Shailasute || 19 ||
हिंदी अर्थ: हे देवी! जो आपके गुणों का गान करता है, उसे इंद्राणी के समान सुख की प्राप्ति होती है। मैं आपके चरणों की शरण लेता हूँ — आपकी जय हो।
श्लोक २०
संस्कृत पाठ:
तव विमलेन्दुकुलं वदनेन्दुमलं सकलं ननु कूलयते किमु पुरुहूतपुरीन्दु मुखी सुमुखीभिरसौ विमुखीक्रियते ।
मम तु मतं शिवनामधने भवती कृपया किमुत क्रियते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ २० ॥
English Transliteration:
Tava Vimala Indu Kulam Vadana Indu Malam Sakalam Nanu Kulayate Kimu Puruhuta Puri Indu Mukhi Sumukhir Asau Vimukhikriyate |
Mama Tu Matam Shiva Namadhane Bhavati Kripaya Kimuta Kriyate Jaya Jaya He Mahishasura Mardini Ramyakapardini Shailasute || 20 ||
हिंदी अर्थ: हे देवी! आपका चन्द्रमा-सम मुख सम्पूर्ण संसार को शीतलता प्रदान करता है। इंद्रपुरी की अप्सराएँ भी आपकी तुलना नहीं कर सकतीं। आपकी कृपा से ही सब कुछ संभव है — आपकी जय हो।
श्लोक २१ (अंतिम श्लोक)
संस्कृत पाठ:
अयि मयि दीन दयालुतया कृपयैव त्वया भवितव्यमुमे अयि जगतो जननी कृपयासि यथासि तथानुमितासिरते ।
यदुचितमत्र भवत्युररीकुरुतादुरुतापमपाकुरुते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ २१ ॥
English Transliteration:
Ayi Mayi Dina Dayalutaya Kripayaiva Tvaya Bhavitavyam Ume Ayi Jagato Janani Kripayasi Yathasi Tathanumita Asi Rate |
Yad Uchitam Atra Bhavatyura Rikurutadu Rutapam Apakurute Jaya Jaya He Mahishasura Mardini Ramyakapardini Shailasute || 21 ||
हिंदी अर्थ: हे उमा! मैं दीन-हीन हूँ, आपको मुझ पर दया करनी ही होगी। हे जगत-जननी! आप करुणा की मूर्ति हैं। जो उचित हो, वही करें और मेरे कष्टों का निवारण करें — आपकी जय हो।
Mahishasura Mardini Stotram Telugu – తెలుగు పాఠము
दक्षिण भारत में — विशेषकर आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में — Mahishasura Mardini Stotram Telugu अत्यंत लोकप्रिय है। यहाँ इसे “ఐగిరి నందిని” (Aigiri Nandini) नाम से जाना जाता है और नवरात्रि उत्सव के दौरान घर-घर में इसका पाठ होता है।
नीचे Mahishasura Mardini Stotram Telugu लिपि में संपूर्ण पाठ प्रस्तुत है:
శ్లోకము ౧
అయి గిరినందిని నందితమేదిని విశ్వవినోదిని నందినుతే గిరివరవింధ్యశిరోధినివాసిని విష్ణువిలాసిని జిష్ణునుతే ।
భగవతి హే శితికంఠకుటుంబిని భూరికుటుంబిని భూరికృతే జయ జయ హే మహిషాసురమర్దిని రమ్యకపర్దిని శైలసుతే ॥ ౧ ॥
శ్లోకము ౨
సురవరవర్షిణి దుర్ధరధర్షిణి దుర్ముఖమర్షిణి హర్షరతే త్రిభువనపోషిణి శంకరతోషిణి కిల్బిషమోషిణి ఘోషరతే ।
దనుజనిరోషిణి దితిసుతరోషిణి దుర్మదశోషిణి సింధుసుతే జయ జయ హే మహిషాసురమర్దిని రమ్యకపర్దిని శైలసుతే ॥ ౨ ॥
శ్లోకము ౩
అయి జగదంబ మదంబ కదంబ వనప్రియవాసిని హాసరతే శిఖరి శిరోమణి తుంగహిమాలయ శృంగనిజాలయ మధ్యగతే ।
మధుమధురే మధుకైటభగంజిని కైటభభంజిని రాసరతే జయ జయ హే మహిషాసురమర్దిని రమ్యకపర్దిని శైలసుతే ॥ ౩ ॥
శ్లోకము ౪
అయి శతఖండ విఖండితరుండ వితుండితశుండ గజాధిపతే రిపుగజగండ విదారణచండ పరాక్రమశుండ మృగాధిపతే ।
నిజభుజదండ నిపాతితఖండ విపాతితముండ భటాధిపతే జయ జయ హే మహిషాసురమర్దిని రమ్యకపర్దిని శైలసుతే ॥ ౪ ॥
శ్లోకము ౫
అయి రణదుర్మద శత్రువధోదిత దుర్ధరనిర్జర శక్తిభృతే చతురవిచార ధురీణమహాశివ దూతకృత ప్రమథాధిపతే ।
దురితదురీహ దురాశయదుర్మతి దానవదుత కృతాంతమతే జయ జయ హే మహిషాసురమర్దిని రమ్యకపర్దిని శైలసుతే ॥ ౫ ॥
శ్లోకము ౬
అయి శరణాగత వైరివధూవర వీరవరాభయ దాయకరే త్రిభువనమస్తక శూలవిరోధి శిరోధికృతామల శూలకరే ।
దుమిదుమితామర ధుందుభినాదమహోముఖరీకృత దింమకరే జయ జయ హే మహిషాసురమర్దిని రమ్యకపర్దిని శైలసుతే ॥ ౬ ॥
శ్లోకము ౭
అయి నిజహుంకృతి మాత్రనిరాకృత ధూమ్రవిలోచన ధూమ్రశతే సమరవిశోషిత శోణితబీజ సముద్భవశోణిత బీజలతే ।
శివశివశుంభ నిశుంభమహాహవ తర్పితభూత పిశాచరతే జయ జయ హే మహిషాసురమర్దిని రమ్యకపర్దిని శైలసుతే ॥ ౭ ॥
శ్లోకము ౮
ధనురనుషంగ రణక్షణసంగ పరిస్ఫురదంగ నటత్కటకే కనకపిశంగ పృషత్కనిషంగ రసద్భటశృంగ హతాబటుకే ।
కృతచతురంగ బలక్షితిరంగ ఘటద్బహురంగ రటద్బటుకే జయ జయ హే మహిషాసురమర్దిని రమ్యకపర్దిని శైలసుతే ॥ ౮ ॥
శ్లోకము ౯
సురలలనా తతతేయి తథేయి కృతాభినయోదర నృత్యరతే కృత కుకుథః కుకుతో గడదాదికతాల కుతూహల గానరతే ।
ధుధుకుట ధుక్కుట ధింధిమిత ధ్వని ధీర మృదంగ నినాదరతే జయ జయ హే మహిషాసురమర్దిని రమ్యకపర్దిని శైలసుతే ॥ ౯ ॥
శ్లోకము ౧౦
జయ జయ జప్య జయేజయశబ్ద పరస్తుతి తత్పరవిశ్వనుతే ఝణఝణఝిఞ్ఝిమి ఝింకృత నూపురశిఞ్జితమోహిత భూతపతే ।
నటిత నటార్థ నటీ నట నాయక నాటితనాట్య సుగానరతే జయ జయ హే మహిషాసురమర్దిని రమ్యకపర్దిని శైలసుతే ॥ ౧౦ ॥
శ్లోకము ౧౧
అయి సుమనః సుమనః సుమనః సుమనః సుమనోహరకాంతియుతే శ్రితరజనీ రజనీరజనీ రజనీరజనీ కరవక్త్రవృతే ।
సునయనవిభ్రమర భ్రమరభ్రమర భ్రమరభ్రమరాధిపతే జయ జయ హే మహిషాసురమర్దిని రమ్యకపర్దిని శైలసుతే ॥ ౧౧ ॥
శ్లోకము ౧౨
సహితమహాహవ మల్లమతల్లిక మల్లితరల్లక మల్లరతే విరచితవల్లిక పల్లికమల్లిక ఝిల్లికభిల్లిక వర్గవృతే ।
శితకృతఫుల్ల సముల్లసితారుణ తల్లజపల్లవ సల్లలితే జయ జయ హే మహిషాసురమర్దిని రమ్యకపర్దిని శైలసుతే ॥ ౧౨ ॥
శ్లోకము ౧౩
అవిరలగండ గలన్మదమేదుర మత్తమతంగ జరాజపతే త్రిభువనభూషణ భూతకలానిధి రూపపయోనిధి రాజసుతే ।
అయి సుదతీజన లాలసమానస మోహన మన్మథరాజసుతే జయ జయ హే మహిషాసురమర్దిని రమ్యకపర్దిని శైలసుతే ॥ ౧౩ ॥
శ్లోకము ౧౪
కమలదలామల కోమలకాంతి కలాకలితామల భాలలతే సకలవిలాస కలానిలయక్రమ కేలిచలత్కల హంసకులే ।
అలికులసంకుల కువలయమండల మౌళిమిలద్బకులాళికులే జయ జయ హే మహిషాసురమర్దిని రమ్యకపర్దిని శైలసుతే ॥ ౧౪ ॥
శ్లోకము ౧౫
కరముళీరవ వీజితకూజిత లజ్జితకోకిల మంజుమతే మిళితపులింద మనోహరగుంజిత రంజితశైల నికుంజగతే ।
నిజగణభూత మహాశబరీగణ సద్గుణసంభృత కేళితలే జయ జయ హే మహిషాసురమర్దిని రమ్యకపర్దిని శైలసుతే ॥ ౧౫ ॥
శ్లోకము ౧౬
కటితటపీత దుకూలవిచిత్ర మయూఖతిరస్కృత చంద్రరుచే ప్రణతసురాసుర మౌళిమణిస్ఫుర దంశులసన్నఖ చంద్రరుచే ।
జితకనకాచల మౌళిమదోర్జిత నిర్భరకుంజర కుంభకుచే జయ జయ హే మహిషాసురమర్దిని రమ్యకపర్దిని శైలసుతే ॥ ౧౬ ॥
శ్లోకము ౧౭
విజితసహస్రకరైక సహస్రకరైక సహస్రకరైకనుతే కృతసురతారక సంగరతారక సంగరతారక సూనుసుతే ।
సురథసమాధి సమానసమాధి సమాధిసమాధి సుజాతరతే । జయ జయ హే మహిషాసురమర్దిని రమ్యకపర్దిని శైలసుతే ॥ ౧౭ ॥
శ్లోకము ౧౮
పదకమలం కరుణానిలయే వరివస్యతి యోఽనుదినం సుశివే అయి కమలే కమలానిలయే కమలానిలయః స కథం న భవేత్ ।
తవ పదమేవ పరంపదమిత్యనుశీలయతో మన కిం న శివే జయ జయ హే మహిషాసురమర్దిని రమ్యకపర్దిని శైలసుతే ॥ ౧౮ ॥
శ్లోకము ౧౯
కనకలసత్కలసింధుజలైరనుషించతి తేగుణరంగభువమ్ భజతి స కిం న శచీకుచకుంభతటీపరిరంభసుఖానుభవమ్ ।
తవ చరణం శరణం కరవాణి నతామరవాణి నివాసి శివమ్ జయ జయ హే మహిషాసురమర్దిని రమ్యకపర్దిని శైలసుతే ॥ ౧౯ ॥
శ్లోకము ౨౦
తవ విమలేందుకులం వదనేందుమలం సకలం నను కూలయతే కిమু పురుహూతపురీందు ముఖీ సుముఖీభిరసౌ విముఖీక్రియతే ।
మమ తు మతం శివనామధనే భవతీ కృపయా కిముత క్రియతే జయ జయ హే మహిషాసురమర్దిని రమ్యకపర్దిని శైలసుతే ॥ ౨౦ ॥
శ్లోకము ౨౧
అయి మయి దీన దయాళుతయా కృపయైవ త్వయా భవితవ్యముమే అయి జగతో జననీ కృపయాసి యథాసి తథానుమితాసిరతే ।
యదుచితమత్ర భవత్యురరీకురుతాదురుతాపమపాకురుతే జయ జయ హే మహిషాసురమర్దిని రమ్యకపర్దిని శైలసుతే ॥ ౨౧ ॥
Mahishasura Mardini Stotram Telugu – महत्व और विशेषता
Mahishasura Mardini Stotram Telugu भाषा में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के भक्तों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। तेलुगु भाषा में इस स्तोत्र की लय और उच्चारण अत्यंत मधुर लगता है। K. S. चित्रा, मधुबंती बागची और अनुराधा पौडवाल जैसी प्रसिद्ध गायिकाओं ने तेलुगु और संस्कृत में इस स्तोत्र को अपनी आवाज़ दी है, जो लाखों भक्तों के हृदय को स्पर्श करती है।
दक्षिण भारत में शक्ति की उपासना की अत्यंत प्राचीन परंपरा है और Mahishasura Mardini Stotram Telugu उसी परंपरा का एक पवित्र हिस्सा है।
Mahishasura Mardini Stotram – आध्यात्मिक अर्थ
Mahishasura Mardini Stotram केवल एक स्तुति नहीं, यह शक्ति-चेतना का जागरण है। इस स्तोत्र के प्रत्येक श्लोक में माँ दुर्गा के विविध रूपों — योद्धा, जगत-माता, करुणामयी देवी और सर्वोच्च शक्ति — का वर्णन मिलता है।
इस स्तोत्र में “महिषासुर” केवल एक असुर नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर पशुता, अहंकार और अज्ञानता का प्रतीक है। माँ दुर्गा इस पशु-प्रवृत्ति का मर्दन करके आत्मा को शुद्ध करती हैं।
हर श्लोक के अंत में आने वाली “जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते” — यह ध्रुवपंक्ति मानों एक दिव्य नाद की भाँति मन में गूँजती है और भक्त को माँ के निकट ले जाती है।
Mahishasura Mardini Stotram – कब और कैसे पढ़ें?
यह स्तोत्र निम्न अवसरों पर विशेष रूप से पढ़ा जाता है:
- नवरात्रि के नौ दिनों में प्रतिदिन प्रातःकाल
- शुक्रवार को माँ दुर्गा की विशेष पूजा के समय
- दुर्गा अष्टमी और महानवमी पर
- किसी भी संकट के समय शरणागत भाव से
- प्रतिदिन ब्रह्ममुहूर्त में (सूर्योदय से पूर्व)
- घर में कोई शुभ कार्य या अनुष्ठान होने पर
पाठ विधि: स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। माँ दुर्गा की प्रतिमा या चित्र के समक्ष धूप-दीप जलाएँ। शांत मन से एक बार या तीन बार इस स्तोत्र का पाठ करें।
Mahishasura Mardini Stotram Benefits – आध्यात्मिक लाभ
Mahishasura Mardini Stotram Benefits अनेक हैं। भक्तजन सदियों से इस स्तोत्र का पाठ करके दैवीय कृपा प्राप्त करते आए हैं:
१. मन की शांति: इस स्तोत्र की लयबद्ध ध्वनि मन की चंचलता को शांत करती है और गहरी आध्यात्मिक शांति प्रदान करती है।
२. भय से मुक्ति: माँ दुर्गा के शरणागत भक्त को किसी भी प्रकार का भय नहीं रहता। स्तोत्र में “अभय दायकरे” का उल्लेख इसी सत्य को प्रकट करता है।
३. नकारात्मकता का नाश: नियमित पाठ से घर और मन में व्याप्त नकारात्मकता दूर होती है।
४. शत्रु-बाधा से रक्षा: यह स्तोत्र शत्रुओं और बाधाओं से रक्षा करने में सहायक माना जाता है।
५. आत्मशक्ति और साहस: माँ की स्तुति से भक्त में असाधारण साहस और संकल्प-शक्ति का उदय होता है।
६. आत्मिक उन्नति: इस स्तोत्र का पाठ आत्मा को शुद्ध करता है और मोक्ष-मार्ग को प्रशस्त करता है।
७. परिवार की समृद्धि: माँ दुर्गा की कृपा से परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।
Mahishasura Mardini Stotram PDF – कहाँ से प्राप्त करें?
Mahishasura Mardini Stotram PDF आज हिंदी, संस्कृत, तेलुगु और अनेक भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है। इसे डाउनलोड करके नित्य पाठ के लिए सुरक्षित रखें। PDF से पाठ करने पर देवनागरी, तेलुगु या अन्य लिपि में स्पष्ट पाठ मिलता है जो उच्चारण को शुद्ध रखने में सहायक होता है। भरोसेमंद आध्यात्मिक वेबसाइटों जैसे Blessingread.com से Mahishasura Mardini Stotram PDF डाउनलोड किया जा सकता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
Mahishasura Mardini Stotram माँ दुर्गा की सर्वश्रेष्ठ स्तुतियों में से एक है। यह केवल एक स्तोत्र नहीं, बल्कि शक्ति, भक्ति और शरणागति का दिव्य संगम है। चाहे हिंदी में हो, English transliteration में हो या Mahishasura Mardini Stotram Telugu में — इस स्तोत्र की दिव्य ध्वनि और माँ दुर्गा की शक्ति सदा एक समान हैं।
इस स्तोत्र के 21 श्लोक हमें यह स्मरण कराते हैं कि माँ दुर्गा सदा अपने भक्तों की रक्षा के लिए तत्पर हैं। जब-जब जीवन में अंधकार हो, संकट हो, भय हो — तब “अयि गिरिनन्दिनि” की ये दिव्य पंक्तियाँ आत्मा को प्रकाशित करती हैं।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते।
माँ दुर्गा की कृपा सदा आप सभी पर बनी रहे। 🙏
? FAQs – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न १: Mahishasura Mardini Stotram क्या है और इसे किसने लिखा?
यह एक प्राचीन संस्कृत स्तोत्र है जो माँ दुर्गा की महिषासुर-विजय पर आधारित है। इसे आदिशंकराचार्य की रचना माना जाता है। इसमें 21 श्लोक हैं और प्रत्येक श्लोक के अंत में “जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते” की ध्रुवपंक्ति आती है।
प्रश्न २: Mahishasura Mardini Stotram का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
इस स्तोत्र का एक बार का पाठ भी अत्यंत फलदायी होता है। नवरात्रि में प्रतिदिन एक या तीन बार पाठ करना उत्तम है। अनुष्ठान रूप में 108 बार पाठ का भी विधान है।
प्रश्न ३: Mahishasura Mardini Stotram Benefits क्या हैं?
इस स्तोत्र के नियमित पाठ से मन की शांति, भय से मुक्ति, शत्रु-बाधा से रक्षा, आत्मशक्ति का विकास और माँ दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
प्रश्न ४: क्या Mahishasura Mardini Stotram का पाठ महिलाएँ भी कर सकती हैं?
हाँ, बिल्कुल। यह स्तोत्र समस्त भक्तों के लिए है। स्त्री-पुरुष कोई भी भक्तिपूर्वक इसका पाठ कर सकते हैं।
प्रश्न ५: Mahishasura Mardini Stotram Telugu में कहाँ उपलब्ध है?
Mahishasura Mardini Stotram Telugu लिपि में इस लेख में संपूर्ण पाठ दिया गया है। इसके अतिरिक्त तेलुगु में इसे PDF रूप में भी डाउनलोड किया जा सकता है। K. S. चित्रा और अन्य गायिकाओं के तेलुगु संस्करण यूट्यूब पर भी उपलब्ध हैं।
प्रश्न ६: Mahishasura Mardini Stotram In English (transliteration) क्यों उपयोगी है?
Mahishasura Mardini Stotram In English transliteration उन भक्तों के लिए अत्यंत उपयोगी है जो देवनागरी या तेलुगु लिपि नहीं पढ़ सकते। इससे विदेशों में रहने वाले भारतीय और अन्य देशों के माँ-भक्त भी इस स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं।
🙏 इन मंत्रों और श्लोकों को भी पढ़ना न भूलें:
- Venkatesh Stotra Sanskrit
- Shree Hari Stotram
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- Shree Suktam Path In Hindi
- Raghavendra Swamy Mantra
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