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    Shlok

    Rama Raksha Stotram : संपूर्ण श्लोक अर्थ और आध्यात्मिक लाभ

    RaviBy RaviSeptember 1, 2026
    Rama Raksha Stotram

     Rama Raksha Stotram भगवान श्रीराम को समर्पित एक प्रसिद्ध संस्कृत स्तोत्र है, जिसे परंपरा में ऋषि बुध कौशिक से संबद्ध माना जाता है। इसमें भगवान श्रीराम के दिव्य स्वरूप, उनके गुणों और उनके संरक्षण का भावपूर्ण स्मरण किया गया है। स्तोत्र के विभिन्न श्लोकों में शरीर के अलग-अलग अंगों की रक्षा के लिए श्रीराम के विविध नामों का आवाहन किया जाता है। संस्कृत ग्रंथ-संग्रह में इसका मूल पाठ 38 श्लोकों के साथ उपलब्ध है।

    Page Contents

    Toggle
    • राम रक्षा स्तोत्र का परिचय
    • श्री रामरक्षा स्तोत्र संपूर्ण संस्कृत पाठ
      • विनियोग
      • ध्यानम्
      • स्तोत्रम्
    • सरल हिंदी अर्थ और भाव
    • Accurate Transliteration
    • राम रक्षा स्तोत्र का आध्यात्मिक महत्व
    • RAM Raksha Stotra कब पढ़ना चाहिए
    • रामरक्षा स्तोत्र के आध्यात्मिक लाभ
    • RAM Raksha Stotra Marathi और PDF
    • RAM Raksha Stotra का अंतिम श्लोक
    • निष्कर्ष (Conclusion)
    • ? FAQs – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
    • क्या रामरक्षा स्तोत्र भगवान श्रीराम को समर्पित है
      • रामरक्षा स्तोत्र के रचयिता कौन हैं
      • क्या रामरक्षा स्तोत्र भगवद्गीता से लिया गया है
      • इसे कितनी बार पढ़ना चाहिए
      • क्या रामरक्षा स्तोत्र सुरक्षा के लिए पढ़ा जाता है
      • क्या रामरक्षा स्तोत्र का पाठ मराठी में किया जा सकता है
        • इन मंत्रों और श्लोकों को भी पढ़ना न भूलें:

    भक्तजन इसे श्रद्धा, आत्मिक शांति और भगवान श्रीराम के प्रति समर्पण की भावना से पढ़ते हैं। RAM Raksha Stotra को केवल सुरक्षा की प्रार्थना के रूप में नहीं, बल्कि धर्म, मर्यादा, साहस, संयम और भक्ति का स्मरण कराने वाले स्तोत्र के रूप में भी समझा जा सकता है।

    राम रक्षा स्तोत्र का परिचय

    परंपरागत पाठ में ऋषि बुध कौशिक, देवता श्री सीतारामचन्द्र, छंद अनुष्टुप्, शक्ति सीता और कीलक श्री हनुमान बताए गए हैं। इसका विनियोग श्रीरामचन्द्र की प्रसन्नता के लिए किया जाता है।

    रामरक्षा का मूल भाव यह है कि भक्त अपने शरीर, मन, वाणी और जीवन को भगवान श्रीराम की शरण में समर्पित करता है। इस कारण यह स्तोत्र भक्ति और संरक्षण दोनों भावों को एक साथ अभिव्यक्त करता है।

    श्री रामरक्षा स्तोत्र संपूर्ण संस्कृत पाठ

    नीचे प्रचलित संस्कृत पाठ प्रस्तुत है। पाठ की शुद्धता के लिए संस्कृत दस्तावेजों में उपलब्ध मूल पाठ का संदर्भ लिया गया है।

    विनियोग

    ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥
    अस्य श्रीरामरक्षास्तोत्रमन्त्रस्य । बुधकौशिक ऋषिः ।
    श्रीसीतारामचन्द्रो देवता । अनुष्टुप् छन्दः ।
    सीता शक्तिः । श्रीमद् हनुमान कीलकम् ।
    श्रीरामचन्द्रप्रीत्यर्थे रामरक्षास्तोत्रजपे विनियोगः ॥

    ध्यानम्

    ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपद्मासनस्थं
    पीतं वासो वसानं नवकमलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम् ।
    वामाङ्कारूढ सीतामुखकमलमिलल्लोचनं नीरदाभं
    नानालङ्कारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डनं रामचन्द्रम् ॥

    स्तोत्रम्

    चरितं रघुनाथस्य शतकोटि प्रविस्तरम् ।
    एकैकमक्षरं पुंसां महापातकनाशनम् ॥ १॥

    ध्यात्वा नीलोत्पलश्यामं रामं राजीवलोचनम् ।
    जानकीलक्ष्मणोपेतं जटामुकुटमण्डितम् ॥ २॥

    सासितूणधनुर्बाणपाणिं नक्तञ्चरान्तकम् ।
    स्वलीलया जगत्त्रातुमाविर्भूतमजं विभुम् ॥ ३॥

    रामरक्षां पठेत्प्राज्ञः पापघ्नीं सर्वकामदाम् ।
    शिरो मे राघवः पातु भालं दशरथात्मजः ॥ ४॥

    कौसल्येयो दृशौ पातु विश्वामित्रप्रियः श्रुती ।
    घ्राणं पातु मखत्राता मुखं सौमित्रिवत्सलः ॥ ५॥

    जिह्वां विद्यानिधिः पातु कण्ठं भरतवन्दितः ।
    स्कन्धौ दिव्यायुधः पातु भुजौ भग्नेशकार्मुकः ॥ ६॥

    करौ सीतापतिः पातु हृदयं जामदग्न्यजित् ।
    मध्यं पातु खरध्वंसी नाभिं जाम्बवदाश्रयः ॥ ७॥

    सुग्रीवेशः कटी पातु सक्थिनी हनुमत्प्रभुः ।
    ऊरू रघूत्तमः पातु रक्षःकुलविनाशकृत् ॥ ८॥

    जानुनी सेतुकृत्पातु जङ्घे दशमुखान्तकः ।
    पादौ बिभीषणश्रीदः पातु रामोऽखिलं वपुः ॥ ९॥

    एतां रामबलोपेतां रक्षां यः सुकृती पठेत् ।
    स चिरायुः सुखी पुत्री विजयी विनयी भवेत् ॥ १०॥

    पातालभूतलव्योमचारिणश्छद्मचारिणः ।
    न द्रष्टुमपि शक्तास्ते रक्षितं रामनामभिः ॥ ११॥

    रामेति रामभद्रेति रामचन्द्रेति वा स्मरन् ।
    नरो न लिप्यते पापैः भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति ॥ १२॥

    जगज्जैत्रैकमन्त्रेण रामनाम्नाभिरक्षितम् ।
    यः कण्ठे धारयेत्तस्य करस्थाः सर्वसिद्धयः ॥ १३॥

    वज्रपञ्जरनामेदं यो रामकवचं स्मरेत् ।
    अव्याहताज्ञः सर्वत्र लभते जयमङ्गलम् ॥ १४॥

    आदिष्टवान् यथा स्वप्ने रामरक्षामिमां हरः ।
    तथा लिखितवान् प्रातः प्रबुद्धो बुधकौशिकः ॥ १५॥

    आरामः कल्पवृक्षाणां विरामः सकलापदाम् ।
    अभिरामस्त्रिलोकानां रामः श्रीमान् स नः प्रभुः ॥ १६॥

    तरुणौ रूपसम्पन्नौ सुकुमारौ महाबलौ ।
    पुण्डरीकविशालाक्षौ चीरकृष्णाजिनाम्बरौ ॥ १७॥

    फलमूलाशिनौ दान्तौ तापसौ ब्रह्मचारिणौ ।
    पुत्रौ दशरथस्यैतौ भ्रातरौ रामलक्ष्मणौ ॥ १८॥

    शरण्यौ सर्वसत्त्वानां श्रेष्ठौ सर्वधनुष्मताम् ।
    रक्षःकुलनिहन्तारौ त्रायेतां नो रघूत्तमौ ॥ १९॥

    आत्तसज्जधनुषाविषुस्पृशावक्षयाशुगनिषङ्गसङ्गिनौ ।
    रक्षणाय मम रामलक्ष्मणावग्रतः पथि सदैव गच्छताम् ॥ २०॥

    सन्नद्धः कवची खड्गी चापबाणधरो युवा ।
    गच्छन्मनोरथोऽस्माकं रामः पातु सलक्ष्मणः ॥ २१॥

    रामो दाशरथिः शूरो लक्ष्मणानुचरो बली ।
    काकुत्स्थः पुरुषः पूर्णः कौसल्येयो रघूत्तमः ॥ २२॥

    वेदान्तवेद्यो यज्ञेशः पुराणपुरुषोत्तमः ।
    जानकीवल्लभः श्रीमान् अप्रमेय पराक्रमः ॥ २३॥

    इत्येतानि जपन्नित्यं मद्भक्तः श्रद्धयान्वितः ।
    अश्वमेधाधिकं पुण्यं सम्प्राप्नोति न संशयः ॥ २४॥

    रामं दूर्वादलश्यामं पद्माक्षं पीतवाससम् ।
    स्तुवन्ति नामभिर्दिव्यैः न ते संसारिणो नराः ॥ २५॥

    रामं लक्ष्मणपूर्वजं रघुवरं सीतापतिं सुन्दरम् ।
    काकुत्स्थं करुणार्णवं गुणनिधिं विप्रप्रियं धार्मिकम् ।
    राजेन्द्रं सत्यसन्धं दशरथतनयं श्यामलं शान्तमूर्तिम् ।
    वन्दे लोकाभिरामं रघुकुलतिलकं राघवं रावणारिम् ॥ २६॥

    रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे ।
    रघुनाथाय नाथाय सीतायाः पतये नमः ॥ २७॥

    श्रीराम राम रघुनन्दन राम राम
    श्रीराम राम भरताग्रज राम राम ।
    श्रीराम राम रणकर्कश राम राम
    श्रीराम राम शरणं भव राम राम ॥ २८॥

    श्रीरामचन्द्रचरणौ मनसा स्मरामि
    श्रीरामचन्द्रचरणौ वचसा गृणामि ।
    श्रीरामचन्द्रचरणौ शिरसा नमामि
    श्रीरामचन्द्रचरणौ शरणं प्रपद्ये ॥ २९॥

    माता रामो मत्पिता रामचन्द्रः
    स्वामी रामो मत्सखा रामचन्द्रः ।
    सर्वस्वं मे रामचन्द्रो दयालु-
    र्नान्यं जाने नैव जाने न जाने ॥ ३०॥

    दक्षिणे लक्ष्मणो यस्य वामे तु जनकात्मजा ।
    पुरतो मारुतिर्यस्य तं वन्दे रघुनन्दनम् ॥ ३१॥

    लोकाभिरामं रणरङ्गधीरं
    राजीवनेत्रं रघुवंशनाथम् ।
    कारुण्यरूपं करुणाकरं तं
    श्रीरामचन्द्रं शरणं प्रपद्ये ॥ ३२॥

    मनोजवं मारुततुल्यवेगं
    जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम् ।
    वातात्मजं वानरयूथमुख्यं
    श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये ॥ ३३॥

    कूजन्तं रामरामेति मधुरं मधुराक्षरम् ।
    आरुह्य कविताशाखां वन्दे वाल्मीकिकोकिलम् ॥ ३४॥

    आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसम्पदाम् ।
    लोकाभिरामं श्रीरामं भूयो भूयो नमाम्यहम् ॥ ३५॥

    भर्जनं भवबीजानामर्जनं सुखसम्पदाम् ।
    तर्जनं यमदूतानां रामरामेति गर्जनम् ॥ ३६॥

    रामो राजमणिः सदा विजयते रामं रमेशं भजे
    रामेणाभिहता निशाचरचमू रामाय तस्मै नमः ।
    रामान्नास्ति परायणं परतरं रामस्य दासोऽस्म्यहं
    रामे चित्तलयः सदा भवतु मे भो राम मामुद्धर ॥ ३७॥

    रामरामेति रामेति रमे रामे मनोरमे ।
    सहस्रनामतत्तुल्यं रामनाम वरानने ॥ ३८॥

    इति श्रीबुधकौशिकविरचितं श्रीरामरक्षास्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

    यह 38 श्लोकों वाला पाठ संस्कृत दस्तावेजों में इसी क्रम में उपलब्ध है।

    सरल हिंदी अर्थ और भाव

    Rama Raksha Stotram का केंद्रीय भाव भगवान श्रीराम की शरण में जाकर अपने जीवन की रक्षा और मार्गदर्शन की प्रार्थना करना है। आरंभिक श्लोकों में श्रीराम के सुंदर, शांत और दिव्य स्वरूप का ध्यान कराया जाता है।

    इसके बाद भगवान के विभिन्न नामों के माध्यम से सिर, मस्तक, नेत्र, कान, नाक, मुख, जिह्वा, कंठ, कंधे, भुजाओं, हृदय, नाभि, कमर, जंघाओं, घुटनों और पैरों सहित पूरे शरीर की रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

    आगे के श्लोकों में श्रीराम को धर्म के रक्षक, राक्षसों के विनाशक, करुणामय प्रभु, सत्य के पालनकर्ता और भक्तों के आश्रय के रूप में स्मरण किया गया है।

    अंतिम भाग में भक्त का भाव पूर्ण समर्पण में बदल जाता है। भगवान श्रीराम को माता, पिता, स्वामी, मित्र और अपना सर्वस्व मानकर उनकी शरण ग्रहण की जाती है।

    Accurate Transliteration

    प्रमुख आरंभिक पंक्तियों का उच्चारण इस प्रकार किया जा सकता है:

    Dhyāyed ājānubāhuṃ dhṛtaśaradhanuṣaṃ baddhapadmāsanastham
    Pītaṃ vāso vasānaṃ navakamaladalaspardhinetraṃ prasannam.

    Caritaṃ Raghunāthasya śatakoṭi pravistaram
    Ekaikam akṣaraṃ puṃsāṃ mahāpātakanāśanam.

    Rāmarakṣāṃ paṭhet prājñaḥ pāpaghnīṃ sarvakāmadām
    Śiro me Rāghavaḥ pātu bhālaṃ Daśarathātmajaḥ.

    अलग-अलग पाठ परंपराओं में संधि, विराम और वर्तनी में छोटे पाठांतर मिल सकते हैं; इसलिए पाठ करते समय किसी प्रमाणित संस्कृत पाठ का अनुसरण करना उचित है। संस्कृत दस्तावेजों में उपलब्ध मूल पाठ को आधार बनाना विशेष रूप से उपयोगी है।

    राम रक्षा स्तोत्र का आध्यात्मिक महत्व

    इस स्तोत्र का सबसे सुंदर संदेश शरणागति है। भक्त यह स्वीकार करता है कि वास्तविक शक्ति केवल बाहरी साधनों में नहीं, बल्कि ईश्वर के प्रति विश्वास, धर्म और सदाचार में भी है।

    श्रीराम का चरित्र मर्यादा, सत्य, कर्तव्य, संयम और करुणा का आदर्श माना जाता है। इसलिए स्तोत्र का पाठ करते समय केवल शब्दों का उच्चारण ही नहीं, बल्कि इन गुणों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प भी महत्वपूर्ण है।

    शरीर के प्रत्येक अंग के लिए भगवान के अलग-अलग नामों का स्मरण एक गहरा आध्यात्मिक संकेत देता है। हमारी दृष्टि, वाणी, कर्म, विचार और जीवन-मार्ग सभी धर्म और सद्भाव से जुड़े रहें, यही इसकी भावभूमि है।

    RAM Raksha Stotra कब पढ़ना चाहिए

    इसका पाठ प्रातःकाल स्नान आदि के बाद शांत मन से किया जा सकता है। बहुत से भक्त इसे नियमित दैनिक साधना का हिस्सा बनाते हैं। किसी विशेष दिन को अनिवार्य बताने के बजाय श्रद्धा और नियमितता को अधिक महत्वपूर्ण माना जाना चाहिए।

    RAM Raksha Stotra Lyrics का पाठ करते समय स्वच्छ स्थान पर बैठकर श्रीराम का ध्यान करना और यथासंभव स्पष्ट उच्चारण करना अच्छा माना जाता है।

    कठिन परिस्थिति, मानसिक चिंता, यात्रा से पहले या किसी महत्वपूर्ण कार्य के लिए आध्यात्मिक संबल पाने हेतु भी भक्त इसका स्मरण कर सकते हैं। हालांकि इसे किसी चिकित्सकीय या व्यावहारिक सुरक्षा का विकल्प नहीं समझना चाहिए।

    रामरक्षा स्तोत्र के आध्यात्मिक लाभ

    श्रद्धा से पाठ करने से भक्त को कई प्रकार के आध्यात्मिक और भावनात्मक लाभ अनुभव हो सकते हैं।

    • मन में शांति और स्थिरता का भाव बढ़ सकता है।
    • भगवान श्रीराम के प्रति भक्ति और विश्वास गहरा हो सकता है।
    • भय और नकारात्मक विचारों से मन को संभालने में सहायता मिल सकती है।
    • कठिन समय में साहस और धैर्य का भाव विकसित हो सकता है।
    • नियमित पाठ से अनुशासन और आध्यात्मिक एकाग्रता बढ़ सकती है।
    • श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा मिल सकती है।

    स्तोत्र में स्वयं शरीर की रक्षा, दीर्घायु, सुख, विजय और विनय जैसे फल का वर्णन मिलता है। इन्हें श्रद्धा-परंपरा के आध्यात्मिक फल के रूप में समझना चाहिए।

    RAM Raksha Stotra Marathi और PDF

    जो भक्त मराठी में अर्थ समझकर पाठ करना चाहते हैं, उनके लिए RAM Raksha Stotra Marathi के पाठ और अर्थ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं। संस्कृत दस्तावेजों की वेबसाइट पर रामरक्षा स्तोत्र के मराठी सहित विभिन्न भाषाई संस्करणों के संदर्भ सूचीबद्ध हैं।

    इसी तरह RAM Raksha Stotra PDF की आवश्यकता होने पर प्रमाणित संस्कृत पाठ वाले स्रोत से PDF लेना बेहतर है। संस्कृत दस्तावेजों में देवनागरी PDF का विकल्प उपलब्ध है।

    RAM Raksha Stotra का अंतिम श्लोक

    अंतिम श्लोक भगवान श्रीराम के नाम की महिमा को विशेष रूप से सामने रखता है:

    रामरामेति रामेति रमे रामे मनोरमे ।
    सहस्रनामतत्तुल्यं रामनाम वरानने ॥

    सरल भाव यह है कि भगवान शिव माता पार्वती से श्रीराम के नाम की महिमा बताते हैं। इस श्लोक में रामनाम को अत्यंत प्रिय और आध्यात्मिक रूप से प्रभावशाली माना गया है।

    निष्कर्ष (Conclusion)

    Rama Raksha Stotram केवल रक्षा की प्रार्थना नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम के आदर्शों के प्रति समर्पण का सुंदर स्तोत्र है। इसके 38 श्लोक भक्त को श्रीराम के स्वरूप, शक्ति, करुणा, सत्य और धर्म का स्मरण कराते हैं। नियमित पाठ करते समय श्रद्धा के साथ शुद्ध उच्चारण, शांत मन और अच्छे आचरण पर ध्यान देना विशेष रूप से सार्थक है। जब रामनाम मन में विश्वास और मर्यादा का प्रकाश जगाता है, तब यह स्तोत्र भक्त के लिए आध्यात्मिक संबल बन जाता है।

    स्रोत संदर्भ: संस्कृत मूल पाठ के लिए SanskritDocuments का प्रमाणित पाठ और तुलना के लिए अन्य उपलब्ध संस्कृत पाठ देखे गए हैं।

    ? FAQs – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

    क्या रामरक्षा स्तोत्र भगवान श्रीराम को समर्पित है

    हाँ। यह भगवान श्रीराम और सीताराम के प्रति समर्पित संस्कृत रक्षात्मक स्तोत्र है। इसके पाठ में श्रीराम के विभिन्न नामों और स्वरूपों का स्मरण किया गया है।

    रामरक्षा स्तोत्र के रचयिता कौन हैं

    परंपरागत रूप से इसके रचयिता बुध कौशिक ऋषि माने जाते हैं। मूल पाठ के आरंभ में भी बुध कौशिक को ऋषि के रूप में उल्लेखित किया गया है।

    क्या रामरक्षा स्तोत्र भगवद्गीता से लिया गया है

    नहीं। Rama Raksha Stotram भगवद्गीता का श्लोक नहीं है। यह अलग संस्कृत स्तोत्र है, जिसे परंपरा बुध कौशिक ऋषि से जोड़ती है।

    इसे कितनी बार पढ़ना चाहिए

    इसके लिए सभी भक्तों पर लागू कोई एक अनिवार्य संख्या नहीं है। श्रद्धा और नियमितता के साथ एक बार पूर्ण पाठ करना भी साधना का हिस्सा हो सकता है। अपनी परंपरा या गुरु द्वारा बताए गए नियमों का पालन करना सर्वोत्तम है।

    क्या रामरक्षा स्तोत्र सुरक्षा के लिए पढ़ा जाता है

    हाँ। इसका मुख्य भाव ही भगवान श्रीराम की रक्षा और शरण का है। इसलिए भक्त इसे आध्यात्मिक संरक्षण, साहस और ईश्वर पर विश्वास के भाव से पढ़ते हैं।

    क्या रामरक्षा स्तोत्र का पाठ मराठी में किया जा सकता है

    हाँ, इसका अर्थ और व्याख्या मराठी में समझी जा सकती है, जबकि मूल संस्कृत पाठ का उच्चारण किया जाता है। अलग-अलग भाषाओं में इसके अर्थ और पाठ उपलब्ध हैं।

    इन मंत्रों और श्लोकों को भी पढ़ना न भूलें:

    • Jagannath Ashtakam
    • Shree Suktam Path In Hindi
    • Raghavendra Swamy Mantra
    • Navarna Mantra
    • 16 Somvar Vrat Katha
    • Aparajita Stotram
    • Maa Skandamata Mantra
    • Dwadash Jyotirling Stotra
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    📖 अगर आपको Suvichar & Shayari पसंद हैं, तो इनका पूरा संग्रह यहाँ देखें : Suvichar Sathi

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