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    Home » Mantras » Surya Jal Arpan Mantra: सूर्य को जल अर्पण करने का सही मंत्र, विधि और लाभ
    Mantras

    Surya Jal Arpan Mantra: सूर्य को जल अर्पण करने का सही मंत्र, विधि और लाभ

    RaviBy RaviAugust 18, 2026
    Surya Jal Arpan Mantra

    हिंदू धर्म में सूर्य देव को “प्रत्यक्ष ब्रह्म” अर्थात साक्षात ईश्वर का रूप माना गया है। वे समस्त जगत को प्रकाश, ऊर्जा और जीवन प्रदान करने वाले देवता हैं। प्रतिदिन प्रातःकाल उन्हें जल अर्पित करना अर्थात अर्घ्य देना एक अत्यंत पवित्र वैदिक परंपरा है। इस परंपरा में Surya Jal Arpan Mantra का विशेष महत्व है।

    जब कोई भक्त सूर्योदय के समय तांबे के लोटे में जल भरकर सूर्य देव की ओर अर्पित करता है और साथ में इन मंत्रों का उच्चारण करता है, तो यह केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं रहती — यह एक गहरा आध्यात्मिक संवाद बन जाता है। यह मंत्र सूर्य देव के बारह दिव्य नामों पर आधारित हैं जो ऋग्वेद और अन्य वैदिक ग्रंथों में वर्णित हैं।

    Table of Contents

    Toggle
    • सूर्य जल अर्पण क्या है?
    • Surya Jal Arpan Mantra in Sanskrit (संस्कृत में मंत्र)
      • मुख्य अर्घ्य मंत्र
      • सूर्य देव के बारह नाम मंत्र
    • Surya Jal Arpan Mantra in English (Transliteration)
    • Surya Jal Arpan Mantra का आध्यात्मिक महत्व
    • मंत्र जाप का सही समय एवं विधि (When to Recite)
      • सही समय
      • विधि (Method)
    • आध्यात्मिक और स्वास्थ्य लाभ (Benefits)
      • आध्यात्मिक लाभ
      • स्वास्थ्य लाभ
      • ज्योतिष लाभ
    • किन अवसरों पर विशेष रूप से करें
    • उपसंहार (Conclusion)
    • ? FAQs – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
      • प्रश्न 1: Surya Jal Arpan Mantra क्या है?
      • प्रश्न 2: Surya Jal Arpan Mantra in Hindi में क्या अर्थ है?
      • प्रश्न 3: Surya Jal Arpan Mantra कब बोलना चाहिए?
      • प्रश्न 4: Surya Jal Arpan Mantra in Sanskrit का सही उच्चारण कैसे करें?
      • प्रश्न 5: Surya Jal Arpan Mantra कितनी बार जपना चाहिए?
      • प्रश्न 6: क्या Surya Jal Arpan Mantra महिलाएं भी बोल सकती हैं?
      • प्रश्न 7: क्या यह मंत्र भगवद्गीता से है?
      • प्रश्न 8: सूर्य का मुख्य या मूल मंत्र कौन सा है?

    इस लेख में आप जानेंगे Surya Jal Arpan Mantra in Sanskrit, उनका हिंदी में अर्थ, उच्चारण विधि, जाप का सही समय और इस पवित्र अनुष्ठान के आध्यात्मिक व स्वास्थ्य लाभ।

    सूर्य जल अर्पण क्या है?

    सूर्य को जल देने की परंपरा को “अर्घ्य देना” कहते हैं। यह क्रिया प्रतिदिन सूर्योदय के समय की जाती है। इसमें साधक स्नान के बाद तांबे के पात्र में जल, रोली, अक्षत और लाल फूल डालकर उगते हुए सूर्य की ओर मुँह करके धीरे-धीरे जल अर्पित करता है।

    इस विधि के साथ Surya Jal Arpan Mantra का उच्चारण करना अत्यंत आवश्यक बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार, बिना मंत्रोच्चार के किया गया अर्घ्य अधूरा माना जाता है।

    Surya Jal Arpan Mantra in Sanskrit (संस्कृत में मंत्र)

    मुख्य अर्घ्य मंत्र

    सूर्य देव को जल अर्पित करते समय सबसे पहले इस मुख्य Surya Arghya Mantra का उच्चारण किया जाता है। यह मंत्र स्मृति और पुराण परंपराओं में प्रचलित है और अर्घ्य देने की विधि का आरंभिक एवं सबसे महत्वपूर्ण मंत्र है। इसमें भक्त सूर्य देव को उनके दिव्य स्वरूप से पुकारकर अपना जल-अर्पण स्वीकार करने की प्रार्थना करता है।

    मूल संस्कृत मंत्र:

    ॐ एहि सूर्य सहस्रांशो तेजोराशे जगत्पते।
    अनुकम्पय मां भक्त्या गृहाणार्घ्यं दिवाकर॥

    Surya Jal Arpan Mantra in English (Transliteration):

    Om Ehi Surya Sahasrāmśo Tejorāśe Jagatpate |
    Anukampaya Māṃ Bhaktyā Gṛhāṇārghyaṃ Divākara ||

    पंक्ति-दर-पंक्ति अर्थ:

    पहली पंक्ति — ॐ एहि सूर्य सहस्रांशो तेजोराशे जगत्पते।

    इस पंक्ति में भक्त सूर्य देव को तीन विशेष नामों से बुलाता है:

    • सहस्रांशो — हे हजारों किरणों वाले! सूर्य देव की असंख्य किरणें इस जगत को प्रकाशित करती हैं।
    • तेजोराशे — हे तेज के भंडार! सूर्य समस्त ब्रह्माण्ड में तेज और ऊर्जा के सर्वोच्च स्रोत हैं।
    • जगत्पते — हे जगत के स्वामी! वे इस सम्पूर्ण सृष्टि के अधिपति हैं।

    दूसरी पंक्ति — अनुकम्पय मां भक्त्या गृहाणार्घ्यं दिवाकर।

    इस पंक्ति में भक्त विनम्रतापूर्वक दो प्रार्थनाएं करता है:

    • अनुकम्पय मां भक्त्या — हे प्रभु, मेरी भक्ति देखकर मुझ पर कृपा कीजिए।
    • गृहाणार्घ्यं दिवाकर — हे दिन बनाने वाले सूर्य देव, इस अर्घ्य (जल) को स्वीकार कीजिए।

    इस मंत्र का आध्यात्मिक महत्व:

    यह मंत्र केवल जल चढ़ाने का निमंत्रण नहीं है — यह भक्त और भगवान के बीच का एक पवित्र संवाद है। भक्त यहाँ स्वीकार करता है कि सूर्य देव सहस्रांशो हैं — उनकी शक्ति असीम है। वे तेजोराशे हैं — वे तेज के स्वामी हैं, हम नहीं। और वे जगत्पते हैं — इस जगत पर हमारा नहीं, उनका अधिकार है।

    जब भक्त “अनुकम्पय मां” कहता है तो वह अहंकार छोड़कर पूरी विनम्रता से परमात्मा की शरण में आता है। यही इस मंत्र की सबसे गहरी साधना है — समर्पण की भावना।

    सूर्य देव के बारह नाम मंत्र

    इसके साथ ही, अनेक परंपराओं में सूर्य देव के बारह नामों का जाप भी किया जाता है। ये बारह मंत्र भी Surya Jal Arpan Mantra के रूप में अत्यंत लोकप्रिय हैं। इन्हें क्रमानुसार बोला जाना चाहिए। नीचे सभी बारह मंत्र संस्कृत में दिए गए हैं:

    ॐ मित्राय नमः

    ॐ रवये नमः

    ॐ सूर्याय नमः

    ॐ भानवे नमः

    ॐ खगाय नमः

    ॐ पूषणे नमः

    ॐ हिरण्यगर्भाय नमः

    ॐ मरीचये नमः

    ॐ आदित्याय नमः

    ॐ सवित्रे नमः

    ॐ अर्काय नमः

    ॐ भास्कराय नमः

    सरल मंत्र:

    ॐ सूर्याय नमः

    बीज मंत्र:

    ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः

    ये सभी मंत्र Surya Jal Arpan Mantra in Sanskrit के अंतर्गत आते हैं और श्रद्धापूर्वक जपे जा सकते हैं।

    Surya Jal Arpan Mantra in English (Transliteration)

    नीचे Surya Jal Arpan Mantra in English transliteration दी गई है ताकि जो लोग देवनागरी लिपि से परिचित नहीं हैं, वे भी सही उच्चारण कर सकें:

    Om Mitraya Namah

    Om Ravaye Namah

    Om Suryaya Namah

    Om Bhanave Namah

    Om Khagaya Namah

    Om Pushne Namah

    Om Hiranyagarbhaya Namah

    Om Marichaye Namah

    Om Adityaya Namah

    Om Savitre Namah

    Om Arkaya Namah

    Om Bhaskaraya Namah

    Surya Jal Arpan Mantra का आध्यात्मिक महत्व

    Surya Jal Arpan Mantra केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं है — यह एक गहन आध्यात्मिक साधना है।

    सूर्य देव के ये बारह नाम उनके बारह भिन्न-भिन्न स्वरूपों का प्रतिनिधित्व करते हैं। जब हम इन्हें जल अर्पित करते हुए उच्चारण करते हैं, तो हम सूर्य की उस असीम शक्ति को नमन करते हैं जो प्रकाश, ऊर्जा, जीवन, पोषण, पवित्रता और जागृति का स्रोत है।

    इन मंत्रों की जड़ें ऋग्वेद में हैं और ये सूर्य नमस्कार की परंपरा से भी जुड़े हैं। इसीलिए Surya Jal Arpan Mantra in Sanskrit का सही उच्चारण करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    जब हम तांबे के लोटे से जल अर्पित करते हुए यह मंत्र बोलते हैं, तो सूर्य की किरणें जल से होकर हमारी आँखों और मस्तिष्क पर पड़ती हैं। इससे न केवल शारीरिक ऊर्जा मिलती है, बल्कि मानसिक अशांति भी दूर होती है। यह मंत्र हमें अहंकार छोड़कर कृतज्ञता का भाव सिखाता है — सूर्य प्रतिदिन बिना किसी अपेक्षा के प्रकाश देते हैं, उसी प्रकार हम भी निस्वार्थ भाव से जीवन जीने का संदेश ग्रहण करते हैं।

    इस अनुष्ठान का गहरा संदेश यह है कि हम उस परम शक्ति के प्रति कृतज्ञ हैं जो बिना किसी भेदभाव के प्रतिदिन सम्पूर्ण जगत पर अपना प्रकाश बरसाती है।

    मंत्र जाप का सही समय एवं विधि (When to Recite)

    सही समय

    • प्रातःकाल सूर्योदय के समय — यही सर्वोत्तम समय है।
    • सूर्योदय के बाद लगभग 45 मिनट तक का समय उत्तम माना जाता है।
    • रविवार के दिन इस अनुष्ठान का विशेष महत्व है।

    विधि (Method)

    1. प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। लाल या केसरिया रंग के वस्त्र उत्तम माने जाते हैं।
    2. तांबे के लोटे में स्वच्छ जल भरें।
    3. जल में रोली, अक्षत और लाल पुष्प डालें।
    4. पूर्व दिशा में मुँह करके सूर्य देव की ओर खड़े हों।
    5. दोनों हाथों से लोटा ऊंचाई पर पकड़ें और धीरे-धीरे जल की पतली धारा छोड़ें। जल की धार ऐसी हो कि सूर्य की किरणें जल से होकर आँखों तक पहुँचें — यही इस विधि का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक रहस्य है।
    6. जल अर्पित करते समय Surya Jal Arpan Mantra का क्रमशः उच्चारण करें।
    7. अर्पण के बाद सूर्य देव को प्रणाम करें और कुछ क्षण मौन रहें।

    ध्यान रखें: इन बारह मंत्रों को सदा क्रमानुसार ही बोलें। क्रम न बदलें।

    आध्यात्मिक और स्वास्थ्य लाभ (Benefits)

    Surya Jal Arpan Mantra के नियमित जाप और जल अर्पण से निम्न लाभ प्राप्त होते हैं:

    आध्यात्मिक लाभ

    • मानसिक शांति: प्रातःकाल मंत्रोच्चार से मन शांत और एकाग्र होता है।
    • नकारात्मकता का नाश: सूर्य की किरणें और मंत्र की शक्ति मिलकर नकारात्मक विचारों को दूर करते हैं।
    • भक्ति की वृद्धि: नियमित अनुष्ठान से ईश्वर के प्रति समर्पण की भावना गहरी होती है।
    • आत्मिक शुद्धि: सूर्य को “सवित्र” (पवित्र करने वाला) कहा गया है — इनकी पूजा से अंतरात्मा की शुद्धि होती है।
    • सकारात्मक ऊर्जा: पूरे दिन सकारात्मकता और उत्साह बना रहता है।

    स्वास्थ्य लाभ

    • सूर्योदय के समय की धूप में विटामिन D प्रचुर मात्रा में मिलती है जिससे हड्डियाँ मजबूत होती हैं।
    • आँखों की रोशनी बढ़ती है।
    • त्वचा रोगों में लाभ होता है।
    • रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है।

    ज्योतिष लाभ

    • कुण्डली में सूर्य ग्रह कमज़ोर होने पर नियमित अर्घ्य देने से उसकी स्थिति सुधरती है।
    • सरकारी कार्यों में सफलता मिलती है।
    • आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता बढ़ती है।
    • पिता और वरिष्ठ जनों से संबंध मधुर होते हैं।

    किन अवसरों पर विशेष रूप से करें

    • प्रतिदिन प्रातःकाल — यह सर्वश्रेष्ठ अभ्यास है।
    • रविवार — सूर्य देव का विशेष दिन।
    • सूर्य षष्ठी (छठ पूजा) — इस महापर्व पर सूर्य को अर्घ्य देना विशेष पुण्यदायक है।
    • मकर संक्रांति — इस दिन सूर्य देव की विशेष पूजा की परंपरा है।
    • सूर्य ग्रहण के बाद — ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करके सूर्य को जल अर्पित करें।

    उपसंहार (Conclusion)

    Surya Jal Arpan Mantra केवल एक धार्मिक मंत्र नहीं है — यह हमारी उस प्राचीन वैदिक सभ्यता की पहचान है जो सृष्टि के प्रत्येक तत्व में परमात्मा का दर्शन करती थी।

    जब हम प्रतिदिन प्रातःकाल उठकर, स्नान करके, पवित्र मन से सूर्य देव को जल अर्पित करते हैं और इन बारह मंत्रों का उच्चारण करते हैं — तो हम न केवल एक परंपरा का पालन करते हैं, बल्कि उस असीम शक्ति के प्रति अपनी कृतज्ञता भी व्यक्त करते हैं जो बिना किसी स्वार्थ के प्रतिदिन इस जगत को प्रकाशित करती है।

    Surya Jal Arpan Mantra in Sanskrit, Surya Jal Arpan Mantra in Hindi और Surya Jal Arpan Mantra in English — तीनों रूपों में ये मंत्र हमें सूर्य देव से जोड़ते हैं और हमारे जीवन में प्रकाश, ऊर्जा और शांति लेकर आते हैं।

    आइए, इस पवित्र परंपरा को अपने दैनिक जीवन में अपनाएं और सूर्य देव का आशीर्वाद प्राप्त करें।

    ॐ सूर्याय नमः 🌅

    ? FAQs – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

    प्रश्न 1: Surya Jal Arpan Mantra क्या है?

    उत्तर: Surya Jal Arpan Mantra वह मंत्र है जिसे सूर्य देव को जल अर्पित करते समय उच्चारण किया जाता है। इसमें मुख्य अर्घ्य मंत्र “ॐ एहि सूर्य सहस्रांशो…” के साथ-साथ सूर्य देव के बारह दिव्य नामों के मंत्र (ॐ मित्राय नमः से ॐ भास्कराय नमः तक) और बीज मंत्र “ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः” सम्मिलित हैं।

    प्रश्न 2: Surya Jal Arpan Mantra in Hindi में क्या अर्थ है?

    उत्तर: इन बारह मंत्रों में सूर्य देव को मित्र, प्रकाश का दाता, जगत का पालनहार, पवित्र करने वाला और जागृत करने वाला कहकर नमस्कार किया गया है। प्रत्येक मंत्र का विस्तृत अर्थ इस लेख में ऊपर दिया गया है।

    प्रश्न 3: Surya Jal Arpan Mantra कब बोलना चाहिए?

    उत्तर: इस मंत्र का उच्चारण प्रतिदिन प्रातःकाल सूर्योदय के समय सूर्य को जल अर्पित करते हुए करना चाहिए। रविवार का दिन विशेष शुभ माना जाता है। सूर्योदय के 45 मिनट के भीतर यह क्रिया पूर्ण कर लेनी चाहिए।

    प्रश्न 4: Surya Jal Arpan Mantra in Sanskrit का सही उच्चारण कैसे करें?

    उत्तर: प्रत्येक मंत्र “ॐ” से आरंभ होता है और “नमः” पर समाप्त होता है। बीच में सूर्य देव का नाम आता है। उच्चारण शांत, स्पष्ट और धीमी गति से करना चाहिए। मंत्र बोलते समय मन में सूर्य देव का ध्यान करें।

    प्रश्न 5: Surya Jal Arpan Mantra कितनी बार जपना चाहिए?

    उत्तर: जल अर्पण करते समय मंत्र को 7, 11 या 21 बार जपा जा सकता है। नियमित साधना में 108 बार भी जाप किया जा सकता है। यह साधक की श्रद्धा और समय पर निर्भर करता है।

    प्रश्न 6: क्या Surya Jal Arpan Mantra महिलाएं भी बोल सकती हैं?

    उत्तर: हाँ, बिलकुल। महिलाएं भी पूर्ण श्रद्धा और पवित्रता के साथ इस मंत्र का उच्चारण करते हुए सूर्य देव को जल अर्पित कर सकती हैं। इसमें किसी प्रकार का प्रतिबंध नहीं है।

    प्रश्न 7: क्या यह मंत्र भगवद्गीता से है?

    उत्तर: नहीं। यह पारंपरिक सूर्य अर्घ्य मंत्र है जो स्मृति और पुराण परंपराओं में प्रचलित है। बारह नाम मंत्र वैदिक परंपरा पर आधारित हैं।

    प्रश्न 8: सूर्य का मुख्य या मूल मंत्र कौन सा है?

    उत्तर: सूर्य देव का मूल मंत्र “ॐ सूर्याय नमः” है। यदि किसी को सभी बारह मंत्र याद न हों, तो केवल इस एक मंत्र का जाप करके भी सूर्य को जल अर्पित किया जा सकता है। इससे भी पूर्ण लाभ प्राप्त होता है।

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