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    Home » Shlok » Guru Paduka Stotram: संस्कृत पाठ, अर्थ, महत्व और लाभ
    Shlok

    Guru Paduka Stotram: संस्कृत पाठ, अर्थ, महत्व और लाभ

    RaviBy RaviSeptember 26, 2026
    Guru Paduka Stotram

    सनातन हिंदू परंपरा में गुरु को केवल ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि अज्ञान से ज्ञान, भ्रम से विवेक और सांसारिक बंधनों से आत्मिक स्वतंत्रता की ओर ले जाने वाला मार्गदर्शक माना गया है। इसी गुरु-तत्त्व के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने वाला एक प्रसिद्ध संस्कृत स्तोत्र Guru Paduka Stotram है। इसमें गुरु की पवित्र पादुकाओं की महिमा का वर्णन किया गया है।

    Page Contents

    Toggle
    • Guru Paduka Stotram Lyrics In Sanskrit
      • श्लोक 1
      • श्लोक 2
      • श्लोक 3
      • श्लोक 4
      • श्लोक 5
      • श्लोक 6
      • श्लोक 7
      • श्लोक 8
      • फलश्रुति — श्लोक 9
    • Guru Paduka Stotram Lyrics With Meaning का आध्यात्मिक भाव
    • Namo Namah Shri Guru Padukabhyam Lyrics का महत्व
    • Guru Paduka Stotram In Hindi कैसे समझें?
    • Guru Paduka Stotram Lyrics In Hindi और अन्य भाषाओं में
    • Guru Paduka Stotram कब पढ़ना चाहिए?
    • Guru Paduka Stotram के आध्यात्मिक लाभ
      • मन में शांति
      • गुरु के प्रति श्रद्धा
      • विवेक और वैराग्य
      • सकारात्मक आध्यात्मिक भाव
      • भक्ति और आत्मचिंतन
    • Guru Paduka Stotram PDF पढ़ते समय ध्यान रखने वाली बातें
    • क्या Guru Paduka Stotram Bhagavad Gita का हिस्सा है?
    • कितनी बार Guru Paduka Stotram का पाठ करना चाहिए?
    • Conclusion
    • ? FAQs – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
      • Guru Paduka Stotram क्या है?
      • Guru Paduka Stotram का मुख्य अर्थ क्या है?
      • Guru Paduka Stotram कब पढ़ना चाहिए?
      • क्या Guru Paduka Stotram Bhagavad Gita से है?
      • Guru Paduka Stotram कितनी बार पढ़ना चाहिए?
      • क्या Guru Paduka Stotram केवल संस्कृत में पढ़ना जरूरी है?
        • इन मंत्रों और श्लोकों को भी पढ़ना न भूलें:

    यह स्तोत्र परंपरागत रूप से आदि शंकराचार्य से संबद्ध माना जाता है और इसमें कुल आठ मुख्य श्लोकों के बाद एक फलश्रुति श्लोक आता है। प्रत्येक श्लोक के अंत में “नमो नमः श्रीगुरुपादुकाभ्याम्” के माध्यम से गुरु की पादुकाओं को बार-बार नमन किया जाता है।

    Guru Paduka Stotram Lyrics में गुरु की पादुकाओं को संसार-सागर से पार कराने वाली नौका, विवेक और वैराग्य प्रदान करने वाली शक्ति तथा अज्ञान को दूर करने वाले आध्यात्मिक प्रकाश के रूप में देखा गया है।

    नोट: विभिन्न पाठ-परंपराओं में कुछ शब्दों की वर्तनी या संधि में छोटे पाठांतर मिल सकते हैं। नीचे दिया गया पाठ उपलब्ध पारंपरिक स्रोतों से मिलान किया गया संस्करण है।

    Guru Paduka Stotram Lyrics In Sanskrit

    श्लोक 1

    अनन्तसंसारसमुद्रतार-
    नौकायिताभ्यां गुरुभक्तिदाभ्याम्।
    वैराग्यसाम्राज्यदपूजनाभ्याम्
    नमो नमः श्रीगुरुपादुकाभ्याम् ॥ १ ॥

    Transliteration:

    Ananta-saṁsāra-samudra-tāra-
    naukāyitābhyāṁ gurubhaktidābhyām |
    vairāgya-sāmrājyada-pūjanābhyām
    namo namaḥ śrīgurupādukābhyām || 1 ||

    सरल अर्थ:
    हे गुरु की पवित्र पादुकाओं! आप अनंत संसार-सागर को पार कराने वाली नौका के समान हैं और गुरु के प्रति भक्ति प्रदान करती हैं। आपकी पूजा से वैराग्य की भावना विकसित होती है। ऐसी श्री गुरु पादुकाओं को बार-बार प्रणाम है।

    श्लोक 2

    कवित्ववाराशिनिशाकराभ्यां
    दौर्भाग्यदावाम्बुदमालिकाभ्याम्।
    दूरीकृतानम्रविपत्तिताभ्यां
    नमो नमः श्रीगुरुपादुकाभ्याम् ॥ २ ॥

    Transliteration:

    Kavitva-vārāśi-niśākarābhyāṁ
    daurbhāgya-dāvāmbuda-mālikābhyām |
    dūrīkṛtānamra-vipattitābhyāṁ
    namo namaḥ śrīgurupādukābhyām || 2 ||

    सरल अर्थ:
    गुरु की पादुकाएँ ज्ञान और रचनात्मक प्रतिभा के विशाल समुद्र के लिए चंद्रमा के समान हैं। वे दुर्भाग्य की अग्नि को शांत करने वाले बादलों के समान हैं और जो श्रद्धापूर्वक उनके सामने झुकते हैं, उनकी विपत्तियों को दूर करने वाली मानी गई हैं।

    श्लोक 3

    नता ययोः श्रीपतितां समीयुः
    कदाचिदप्याशु दरिद्रवर्याः।
    मूकाश्च वाचस्पतितां हि ताभ्यां
    नमो नमः श्रीगुरुपादुकाभ्याम् ॥ ३ ॥

    Transliteration:

    Natā yayoḥ śrīpatitāṁ samīyuḥ
    kadācid-apyāśu daridra-varyāḥ |
    mūkāśca vācaspatitāṁ hi tābhyāṁ
    namo namaḥ śrīgurupādukābhyām || 3 ||

    सरल अर्थ:
    इन पादुकाओं के प्रति श्रद्धा रखने वाले निर्धन व्यक्ति भी समृद्धि प्राप्त करने की क्षमता पा सकते हैं और जो वाणी से असमर्थ हैं, वे भी ज्ञान तथा अभिव्यक्ति के योग्य बन सकते हैं—ऐसी उनकी महिमा कही गई है। गुरु पादुकाओं को बार-बार प्रणाम है।

    श्लोक 4

    नालीकनीकाशपदाहृताभ्यां
    नानाविमोहादिनिवारिकाभ्याम्।
    नमज्जनाभीष्टततिप्रदाभ्यां
    नमो नमः श्रीगुरुपादुकाभ्याम् ॥ ४ ॥

    Transliteration:

    Nālīkanīkāśa-padāhṛtābhyāṁ
    nānāvimohādi-nivārikābhyām |
    namajjanābhīṣṭa-tatipradābhyāṁ
    namo namaḥ śrīgurupādukābhyām || 4 ||

    सरल अर्थ:
    गुरु की पादुकाएँ कमल के समान सुंदर गुरुचरणों को धारण करने वाली हैं। वे विभिन्न प्रकार के मोह और भ्रम को दूर करने वाली तथा श्रद्धा से नमन करने वाले भक्तों की उचित इच्छाओं को पूर्ण करने वाली शक्ति के रूप में स्तुति की गई हैं।

    श्लोक 5

    नृपालिमौलिव्रजरत्नकान्ति-
    सरिद्विराजत् झषकन्यकाभ्याम्।
    नृपत्वदाभ्यां नतलोकपङ्क्तेः
    नमो नमः श्रीगुरुपादुकाभ्याम् ॥ ५ ॥

    Transliteration:

    Nṛpāli-mauli-vraja-ratna-kānti-
    sarid-virājat-jhaṣa-kanyakābhyām |
    nṛpatvadābhyāṁ nata-loka-paṅkteḥ
    namo namaḥ śrīgurupādukābhyām || 5 ||

    सरल अर्थ:
    यहाँ गुरु पादुकाओं की तुलना राजाओं के मुकुटों में जड़े रत्नों की चमक से की गई है। उनका नमन करने वाले व्यक्ति को उच्चता, गरिमा और आत्मिक श्रेष्ठता प्राप्त होने की भावना इस श्लोक में व्यक्त होती है।

    श्लोक 6

    पापान्धकारार्कपरम्पराभ्यां
    तापत्रयाहीन्द्रखगेश्वराभ्याम्।
    जाड्याब्धिसंशोषणवाडवाभ्यां
    नमो नमः श्रीगुरुपादुकाभ्याम् ॥ ६ ॥

    Transliteration:

    Pāpāndhakārārka-paramparābhyāṁ
    tāpatrayāhīndra-khageśvarābhyām |
    jāḍyābdhi-saṁśoṣaṇa-vāḍavābhyāṁ
    namo namaḥ śrīgurupādukābhyām || 6 ||

    सरल अर्थ:
    गुरु की पादुकाएँ पाप और अज्ञान के अंधकार को दूर करने वाले सूर्य के समान बताई गई हैं। वे संसार के तीन प्रकार के तापों से रक्षा करने वाली तथा जड़ता और अज्ञान के विशाल समुद्र को सुखाने वाली अग्नि के समान मानी गई हैं।

    श्लोक 7

    शमादिषट्कप्रदवैभवाभ्यां
    समाधिदानव्रतदीक्षिताभ्याम्।
    रमाधवाङ्घ्रिस्थिरभक्तिदाभ्यां
    नमो नमः श्रीगुरुपादुकाभ्याम् ॥ ७ ॥

    Transliteration:

    Śamādi-ṣaṭka-prada-vaibhavābhyāṁ
    samādhi-dāna-vrata-dīkṣitābhyām |
    Ramādhavāṅghri-sthira-bhakti-dābhyāṁ
    namo namaḥ śrīgurupādukābhyām || 7 ||

    सरल अर्थ:
    ये पादुकाएँ शम आदि साधना के छह गुणों की ओर ले जाने वाली, समाधि की साधना में सहायक तथा भगवान के चरणों में स्थिर भक्ति प्रदान करने वाली बताई गई हैं। यहाँ गुरु-भक्ति को आत्मिक साधना और ईश्वर-भक्ति से जोड़कर देखा गया है।

    श्लोक 8

    स्वार्चापराणामखिलेष्टदाभ्यां
    स्वाहासहायाक्षधुरन्धराभ्याम्।
    स्वान्ताच्छभावप्रदपूजनाभ्यां
    नमो नमः श्रीगुरुपादुकाभ्याम् ॥ ८ ॥

    Transliteration:

    Svārcāparāṇām-akhileṣṭadābhyāṁ
    svāhā-sahāyākṣa-dhurandharābhyām |
    svāntāccha-bhāva-prada-pūjanābhyāṁ
    namo namaḥ śrīgurupādukābhyām || 8 ||

    सरल अर्थ:
    गुरु की पादुकाओं की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से साधक के भीतर शुद्ध भाव विकसित होने की बात कही गई है। यह श्लोक बाहरी पूजा के साथ-साथ अंतःकरण की पवित्रता और आत्मिक भाव को महत्व देता है।

    फलश्रुति — श्लोक 9

    कामादिसर्पव्रजगारुडाभ्यां
    विवेकवैराग्यनिधिप्रदाभ्याम्।
    बोधप्रदाभ्यां द्रुतमोक्षदाभ्यां
    नमो नमः श्रीगुरुपादुकाभ्याम् ॥ ९ ॥

    Transliteration:

    Kāmādi-sarpa-vraja-gāruḍābhyāṁ
    viveka-vairāgya-nidhi-pradābhyām |
    bodha-pradābhyāṁ druta-mokṣadābhyāṁ
    namo namaḥ śrīgurupādukābhyām || 9 ||

    सरल अर्थ:
    गुरु की पादुकाएँ काम आदि इच्छाओं और आसक्तियों रूपी सर्पों के लिए गरुड़ के समान हैं। वे विवेक और वैराग्य का खजाना प्रदान करने वाली, आत्मबोध जगाने वाली और मोक्ष की दिशा में ले जाने वाली शक्ति के रूप में स्तुति की गई हैं।

    समापन: उपलब्ध पारंपरिक पाठ में इसके बाद इसे श्री शंकराचार्य द्वारा रचित श्री गुरु पादुका स्तोत्रम् के रूप में पूर्ण बताया गया है।

    Guru Paduka Stotram Lyrics With Meaning का आध्यात्मिक भाव

    पूरे Guru Paduka Stotram का केंद्रीय संदेश गुरु के प्रति श्रद्धा और समर्पण है। यहाँ “पादुका” केवल गुरु के जूते या चरण-पादुकाओं का भौतिक रूप नहीं हैं, बल्कि गुरु के ज्ञान, अनुशासन, साधना और आध्यात्मिक मार्ग का प्रतीक हैं।

    पहले श्लोक में संसार को एक विशाल समुद्र और गुरु की पादुकाओं को उसे पार कराने वाली नौका कहा गया है। इसका गहरा संकेत यह है कि मनुष्य अपने अहंकार, मोह और अज्ञान के कारण जीवन में उलझता रहता है। गुरु का मार्गदर्शन उसे अपने वास्तविक स्वरूप को समझने की दिशा देता है।

    अनेक श्लोकों में सूर्य, चंद्रमा, बादल, गरुड़ और अग्नि जैसे प्रतीकों का प्रयोग किया गया है। ये प्रतीक बताते हैं कि आध्यात्मिक ज्ञान अंधकार को दूर करता है और साधक को विवेक प्रदान करता है।

    इस दृष्टि से Guru Paduka Stotram Meaning In Hindi केवल बाहरी समृद्धि से संबंधित नहीं है। इसका मुख्य आध्यात्मिक केंद्र विवेक, वैराग्य, भक्ति, ज्ञान, अंतःकरण की शुद्धता और आत्मबोध है।

    Namo Namah Shri Guru Padukabhyam Lyrics का महत्व

    हर श्लोक के अंत में आने वाली पंक्ति—

    नमो नमः श्रीगुरुपादुकाभ्याम्।

    गुरु की पवित्र पादुकाओं के प्रति बार-बार नमन का भाव व्यक्त करती है। “नमो नमः” में विनम्रता, श्रद्धा और समर्पण की भावना निहित है।

    इसलिए Namo Namah Shri Guru Padukabhyam Lyrics का जाप करते समय केवल शब्दों का उच्चारण करने के बजाय उसके भाव को समझना अधिक महत्वपूर्ण माना जा सकता है।

    Namo Namah Shri Guru Padukabhyam Lyrics

    Guru Paduka Stotram In Hindi कैसे समझें?

    यदि आप Guru Paduka Stotram In Hindi पढ़ रहे हैं, तो प्रत्येक श्लोक को एक आध्यात्मिक संदेश के रूप में समझ सकते हैं:

    • संसार-सागर: जीवन की उलझनों और मोह का प्रतीक।
    • नौका: गुरु का मार्गदर्शन।
    • सूर्य: ज्ञान और अज्ञान का नाश।
    • चंद्रमा: शीतलता, ज्ञान और मानसिक शांति।
    • गरुड़: नकारात्मक इच्छाओं और आसक्तियों पर विजय का प्रतीक।
    • वैराग्य: संसार से भागना नहीं, बल्कि आसक्ति को समझना।
    • विवेक: सही और गलत, स्थायी और अस्थायी के बीच अंतर समझने की क्षमता।
    • मोक्ष: आत्मिक स्वतंत्रता की दिशा।

    Guru Paduka Stotram Lyrics In Hindi और अन्य भाषाओं में

    आज भक्त अपनी सुविधा के अनुसार Guru Paduka Stotram Lyrics In Hindi, संस्कृत, कन्नड़, तमिल और तेलुगु में पढ़ते हैं। अलग-अलग भाषाओं में लिप्यंतरण उपलब्ध होने से मंत्र का उच्चारण समझना आसान हो जाता है।

    जो लोग क्षेत्रीय भाषा में पाठ देखना चाहते हैं, वे Guru Paduka Stotram Lyrics Kannada या Guru Paduka Stotram Lyrics In Tamil जैसे संस्करण खोज सकते हैं। तेलुगु पाठकों के लिए Guru Paduka Stotram Telugu PDF भी उपयोगी हो सकता है।

    Guru Paduka Stotram Telugu PDF

    इसी प्रकार संस्कृत मूल पाठ के साथ अर्थ समझने के लिए Guru Paduka Stotram Lyrics In Sanskrit With Meaning या Guru Paduka Stotram Lyrics With Meaning वाला संस्करण अधिक उपयोगी है।

    Guru Paduka Stotram कब पढ़ना चाहिए?

    इस स्तोत्र के पाठ के लिए कोई एक अनिवार्य समय सभी साधकों पर लागू नहीं होता। श्रद्धा और नियमितता को प्राथमिकता दी जा सकती है।

    परंपरागत गुरु-उपासना के संदर्भ में इसे विशेष रूप से इन अवसरों पर पढ़ा जा सकता है:

    • गुरुवार को गुरु-भक्ति के भाव से।
    • गुरु पूर्णिमा के अवसर पर।
    • सुबह पूजा या ध्यान से पहले।
    • आध्यात्मिक अध्ययन शुरू करने से पहले।
    • गुरु या सद्गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते समय।
    • नियमित साधना के समय शांत मन से।

    पाठ करते समय स्वच्छ स्थान पर बैठकर कुछ क्षण मन को शांत करना और फिर श्रद्धापूर्वक स्तोत्र का उच्चारण करना अच्छा अभ्यास हो सकता है।

    Guru Paduka Stotram के आध्यात्मिक लाभ

    Guru Paduka Stotram के लाभों को आध्यात्मिक परंपरा के संदर्भ में समझना चाहिए। यह कोई चिकित्सीय उपचार या निश्चित भौतिक परिणाम की गारंटी नहीं है। इसके नियमित पाठ से साधक को निम्न आध्यात्मिक और भावनात्मक लाभों की अनुभूति हो सकती है:

    मन में शांति

    शांत वातावरण में स्तोत्र का उच्चारण मन को एकाग्र करने और चिंताओं से कुछ समय के लिए दूरी बनाने में सहायक हो सकता है।

    गुरु के प्रति श्रद्धा

    इसके प्रत्येक श्लोक में गुरु की महिमा का स्मरण होता है। इससे गुरु-शिष्य संबंध में श्रद्धा और कृतज्ञता का भाव मजबूत होता है।

    विवेक और वैराग्य

    अंतिम श्लोक विशेष रूप से विवेक और वैराग्य को महत्वपूर्ण आध्यात्मिक संपदा के रूप में प्रस्तुत करता है।

    सकारात्मक आध्यात्मिक भाव

    नियमित पाठ व्यक्ति को प्रार्थना, अनुशासन, विनम्रता और आत्मचिंतन की ओर प्रेरित कर सकता है।

    भक्ति और आत्मचिंतन

    स्तोत्र का मूल उद्देश्य केवल शब्दों का पाठ नहीं, बल्कि गुरु के माध्यम से ज्ञान और आत्मबोध की दिशा में आगे बढ़ने का भाव है।

    Guru Paduka Stotram PDF पढ़ते समय ध्यान रखने वाली बातें

    यदि आप Guru Paduka Stotram PDF डाउनलोड करके पाठ करते हैं, तो संस्कृत शब्दों का सही उच्चारण देखने के लिए विश्वसनीय धार्मिक या परंपरागत स्रोत का संस्करण चुनना बेहतर है। अलग-अलग वेबसाइटों पर संधि, विराम और कुछ शब्दों की वर्तनी में छोटे अंतर मिल सकते हैं।

    विशेष रूप से Guru Paduka Stotram Lyrics In Hindi पढ़ते समय हिंदी लिप्यंतरण और मूल देवनागरी संस्कृत पाठ में अंतर समझना आवश्यक है। संभव हो तो मूल संस्कृत पाठ के साथ उच्चारण भी सुनें।

    क्या Guru Paduka Stotram Bhagavad Gita का हिस्सा है?

    नहीं। Guru Paduka Stotram भगवद्गीता का श्लोक नहीं है। यह गुरु की पादुकाओं की स्तुति करने वाला स्वतंत्र संस्कृत स्तोत्र है और परंपरागत रूप से आदि शंकराचार्य से संबद्ध माना जाता है।

    कितनी बार Guru Paduka Stotram का पाठ करना चाहिए?

    इसके लिए कोई सार्वभौमिक अनिवार्य संख्या निर्धारित नहीं है। साधक अपनी परंपरा, गुरु के निर्देश और अपनी सुविधा के अनुसार पाठ कर सकता है। एक बार पूरे स्तोत्र का श्रद्धापूर्वक पाठ करना भी पर्याप्त हो सकता है। संख्या से अधिक महत्वपूर्ण श्रद्धा, सही उच्चारण, भाव और नियमितता है।

    Conclusion

    Guru Paduka Stotram गुरु-तत्त्व के प्रति गहरी श्रद्धा और समर्पण का सुंदर संस्कृत स्तोत्र है। इसके नौ श्लोकों में गुरु की पादुकाओं को संसार-सागर से पार कराने वाली नौका, अज्ञान के अंधकार को दूर करने वाला प्रकाश और विवेक-वैराग्य प्रदान करने वाली आध्यात्मिक शक्ति के रूप में वर्णित किया गया है।

    इस स्तोत्र का वास्तविक संदेश केवल किसी भौतिक इच्छा की पूर्ति तक सीमित नहीं है। इसका केंद्र मन की शुद्धता, गुरु के प्रति कृतज्ञता, आत्मचिंतन, विवेक, वैराग्य और ज्ञान की ओर बढ़ना है।

    यदि Guru Paduka Stotram Lyrics का पाठ श्रद्धा और समझ के साथ किया जाए, तो यह साधक के लिए एक शांत और एकाग्र आध्यात्मिक अभ्यास बन सकता है। गुरु की पादुकाओं को प्रणाम करने का भाव अंततः उस ज्ञान-परंपरा को प्रणाम करना है, जो मनुष्य को अज्ञान से प्रकाश की ओर ले जाती है।

    ? FAQs – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

    Guru Paduka Stotram क्या है?

    यह गुरु की पवित्र पादुकाओं की स्तुति करने वाला संस्कृत स्तोत्र है, जिसे परंपरागत रूप से आदि शंकराचार्य से संबद्ध माना जाता है।

    Guru Paduka Stotram का मुख्य अर्थ क्या है?

    इसका मुख्य भाव गुरु के प्रति श्रद्धा, भक्ति, विवेक, वैराग्य, ज्ञान और आत्मिक मुक्ति की दिशा में आगे बढ़ना है।

    Guru Paduka Stotram कब पढ़ना चाहिए?

    इसे सुबह, गुरुवार, गुरु पूर्णिमा, पूजा या ध्यान के समय श्रद्धापूर्वक पढ़ा जा सकता है। कोई एक अनिवार्य समय नहीं है।

    क्या Guru Paduka Stotram Bhagavad Gita से है?

    नहीं। यह भगवद्गीता का हिस्सा नहीं है। यह एक स्वतंत्र गुरु-स्तुति है।

    Guru Paduka Stotram कितनी बार पढ़ना चाहिए?

    कोई निश्चित सार्वभौमिक संख्या नहीं है। साधक अपनी परंपरा और गुरु के निर्देश के अनुसार इसका पाठ कर सकता है।

    क्या Guru Paduka Stotram केवल संस्कृत में पढ़ना जरूरी है?

    मूल संस्कृत पाठ का उच्चारण करना पारंपरिक रूप से श्रेष्ठ माना जाता है, लेकिन अर्थ समझने के लिए Guru Paduka Stotram Lyrics In Hindi और अन्य भाषाओं के अनुवाद या लिप्यंतरण का सहारा लिया जा सकता है।

    इन मंत्रों और श्लोकों को भी पढ़ना न भूलें:

    • Jagannath Ashtakam
    • Shree Suktam Path In Hindi
    • Raghavendra Swamy Mantra
    • Navarna Mantra
    • 16 Somvar Vrat Katha
    • Aparajita Stotram
    • Maa Skandamata Mantra
    • Dwadash Jyotirling Stotra
    • Sawan Somvar Vrat Katha
    • Hartalika Teej Vrat Katha
    • Ketu Beej Mantra
    • Prasanna Vadanam Shloka
    • Maa Chandraghanta Mantra
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    • Dhanvantri Mantra
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    • Mahishasura Mardini Stotram
    • Shiv Mahima Stotram
    • Mahamrityunjaya Mantra

     अगर आपको Suvichar & Quotes पसंद हैं, तो इनका पूरा संग्रह यहाँ देखें : Wisdomsuvichar.com

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